Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "क" वर्ण आने पर विसर्ग मूर्धन्य वर्ण आधे "ष्" में बदल जाता है।
"बच्चों का निष्कपट और निश्छल स्वभाव प्रत्येक व्यक्ति के मन में आनंद का संचार कर देता है।"
दो मूल सार्थक पद
Nishphal (Nih + Phal)
विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "फ" आने पर विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
Visarga preceded by "i" turns to retroflex "sh" before labial aspirate "ph".
"बिना सही दिशा और सुनियोजित रणनीति के किया गया अंधाधुंध प्रयास अंततः निष्फल ही सिद्ध होता है।"
"Random effort undertaken without proper guidance and strategy ultimately proves fruitless (Nishphal)."
"निष्फल" का शुद्ध एवं प्रामाणिक संधि विच्छेद "निः + फल" है।
"निष्फल" में मुख्य रूप से "विसर्ग संधि" (विशिष्ट उपभेद: विसर्ग का मूर्धन्य 'ष्' में परिवर्तन) है।
विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "फ" आने पर विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है। (ध्वनि सूत्र: इः + फ = ष्फ)
English Translation: "Random effort undertaken without proper guidance and strategy ultimately proves fruitless (Nishphal)." | Sentence in Hindi: "बिना सही दिशा और सुनियोजित रणनीति के किया गया अंधाधुंध प्रयास अंततः निष्फल ही सिद्ध होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "क" वर्ण आने पर विसर्ग मूर्धन्य वर्ण आधे "ष्" में बदल जाता है।
"बच्चों का निष्कपट और निश्छल स्वभाव प्रत्येक व्यक्ति के मन में आनंद का संचार कर देता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "ट" वर्ण आने से विसर्ग मूर्धन्य "ष्" बन जाता है।
"रणभूमि में श्रीराम के धनुष की भयानक धनुष्टंकार सुनते ही राक्षसी सेना में भगदड़ मच गई।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "क" आने पर विसर्ग मूर्धन्य "ष्" में बदल जाता है।
"मनुष्य को सदैव बुरे कर्मों से बचना चाहिए क्योंकि किसी भी दुष्कर्म का परिणाम कभी सुखद नहीं होता।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" होने तथा बाद में "प" वर्ण आने पर विसर्ग मूर्धन्य वर्ण आधे "ष्" में बदल जाता है।
"शिशु का हृदय सर्वथा निष्पाप और राग-द्वेष की दूषित भावनाओं से मुक्त होता है।"