Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य व्यंजन "च" आने पर विसर्ग तालव्य वर्ण आधे "श्" में बदल जाता है।
"हिमालय अपनी विशाल और गगनचुंबी चोटियों के साथ सदियों से निश्चल भाव से प्रहरी बनकर खड़ा है।"
When a visarga is followed by palatal unvoiced consonants 'ch', 'chh', or 'sh', it adapts into the half palatal sibilant 'sh' (श्).
यदि विसर्ग के बाद "च", "छ" या "श" आए, तो विसर्ग का तालव्य "श्" (आधा श) हो जाता है।
शब्द के बीच में संयुक्त वर्ण "श्च" या "श्छ" दिखाई दे, तो समझ लें कि वहाँ विसर्ग का श् हुआ है। विच्छेद करते समय "श्" के स्थान पर विसर्ग लगा दें। जैसे: निश्चिंत = निः + चिंत।
English Tip: Look for 'shch' (श्च) or 'shchh' (श्छ) clusters; replace 'sh' with visarga (ः) to obtain vichchhed.
विसर्ग के बाद च या छ आने पर विसर्ग आधा श (तालव्य) बन जाता है।
Visarga becomes half 'sh' before 'ch' and 'chh'.
विसर्ग के बाद श आने पर वह आधा श बन जाता है अथवा विसर्ग यथावत रहता है।
Visarga becomes half 'sh' before full 'sh'.
"निश्चिंत", "निश्छल", "हरिश्चंद्र" और "दुश्शासन" विसर्ग संधि के महत्वपूर्ण मानक प्रश्न हैं।
इस नियम को सिद्ध करने वाले प्रामाणिक संधियुक्त शब्द एवं उनके विच्छेद
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य व्यंजन "च" आने पर विसर्ग तालव्य वर्ण आधे "श्" में बदल जाता है।
"हिमालय अपनी विशाल और गगनचुंबी चोटियों के साथ सदियों से निश्चल भाव से प्रहरी बनकर खड़ा है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के उपरांत "च" वर्ण आने से विसर्ग का विकार होकर तालव्य आधा "श्" बन जाता है।
"वार्षिक परीक्षा की संपूर्ण तैयारी समय पर पूर्ण कर लेने के बाद विद्यार्थी निश्चिंत हो गया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य महाप्राण व्यंजन "छ" आने पर विसर्ग आधे "श्" में रूपांतरित हो जाता है।
"ग्रामीण जीवन की सरलता और वहाँ के लोगों का निश्छल व्यवहार मन को गहराई से छू लेता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य वर्ण "च" आने पर विसर्ग तालव्य "श्" में बदल जाता है।
"महाराजा हरिश्चंद्र ने सत्य और धर्म की रक्षा के लिए अपने समस्त राजपाट और सुख का त्याग कर दिया।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य "श" आने पर विसर्ग भी तालव्य "श्" में बदल जाता है (अथवा विसर्ग सुरक्षित भी रह सकता है: दुःशासन)।
"महाभारत के प्रसंग में द्युतसभा के भीतर दुश्शासन का आचरण अधर्म और घोर अन्याय की पराकाष्ठा था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य "च" आने पर विसर्ग आधे "श्" में परिवर्तित हो जाता है।
"प्राचीन कथाओं के आरंभ में प्रायः "कश्चित् राजा आसीत्" (कोई एक राजा था) का प्रयोग मिलता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य "च" आने पर विसर्ग तालव्य "श्" में रूपांतरित हो जाता है।
"प्राचीन ऋषियों ने हिमालय की शांत कंदराओं में दीर्घकालिक तपश्चर्या करके आत्मज्ञान प्राप्त किया।"
यदि विसर्ग के बाद "च", "छ" या "श" आए, तो विसर्ग का तालव्य "श्" (आधा श) हो जाता है।
इसका मुख्य सूत्र है: विसर्ग (ः) + च / छ / श = श् (तालव्य शकार)
शब्द के बीच में संयुक्त वर्ण "श्च" या "श्छ" दिखाई दे, तो समझ लें कि वहाँ विसर्ग का श् हुआ है। विच्छेद करते समय "श्" के स्थान पर विसर्ग लगा दें। जैसे: निश्चिंत = निः + चिंत।
When a visarga is followed by palatal unvoiced consonants 'ch', 'chh', or 'sh', it adapts into the half palatal sibilant 'sh' (श्).