Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद में "र्" वर्ण के प्रभाव से द्वितीय पद का दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य वर्ण "ण्" में बदल जाता है।
"सच्ची लगन और ईमानदारी से किए गए श्रम का परिणाम सदैव सुखद और फलदायी होता है।"
When the dental nasal 'n' follows 'ri', 'r', or 'sh' within a word (even across intervening vowels, guttural or labial consonants), it assimilates into the retroflex nasal 'na'.
यदि किसी शब्द में ऋ, र् या ष् के बाद "न्" व्यंजन आए (चाहे बीच में स्वर, क-वर्ग, प-वर्ग, अनुस्वार या य, व, ह का व्यवधान क्यों न हो), तो "न्" का "ण्" (मूर्धन्य ण) हो जाता है।
विच्छेद करते समय अंतिम पद के "ण्" को वापस मूल दन्त्य "न्" में बदल दिया जाता है। जैसे: परिणाम = परि + नाम, प्रमाण = प्र + मान।
English Tip: When splitting, revert the final 'na' (ण) back to the original dictionary 'na' (न).
र् अथवा ऋ के बाद आने वाला न् बदलकर ण् हो जाता है।
'r' or 'ri' triggers nasal retroflexion.
मूर्धन्य ष् के बाद न् आने पर वह भी ण् में बदल जाता है।
'sh' (retroflex) retroflexes subsequent 'n'.
"रामायण", "परिणाम", "प्रमाण" और "ऋण" माध्यमिक और सिविल सेवा सामान्य हिंदी में बहुत लोकप्रिय हैं।
इस नियम को सिद्ध करने वाले प्रामाणिक संधियुक्त शब्द एवं उनके विच्छेद
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद में "र्" वर्ण के प्रभाव से द्वितीय पद का दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य वर्ण "ण्" में बदल जाता है।
"सच्ची लगन और ईमानदारी से किए गए श्रम का परिणाम सदैव सुखद और फलदायी होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): उपसर्ग "प्र" में स्थित "र्" के प्रभाव से उत्तर पद का अंतिम दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"न्यायालय में न्याय की स्थापना के लिए ठोस साक्ष्य और प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद में स्थित "र्" के प्रभाव से द्वितीय पद "अयन" का दन्त्य "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"महर्षि वाल्मीकि द्वारा विरचित रामायण भारतीय संस्कृति और मर्यादा का अमर महाकाव्य है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): धातु के अंत में मूर्धन्य वर्ण "ष्" होने पर प्रत्यय का दन्त्य "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"विद्या और शील ही मनुष्य के सबसे वास्तविक और मूल्यवान आभूषण हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व स्वर "ऋ" के बाद दन्त्य वर्ण "न" आने पर "न" का मूर्धन्य "ण्" हो जाता है।
"भारतीय परंपरा में माता-पिता और गुरु के ऋण से कभी भी उऋण नहीं हुआ जा सकता।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "शूर्प" में स्थित "र्" (रेफ) के प्रभाव से "नखा" का दन्त्य "न्" मूर्धन्य "ण्" में परिवर्तित हो जाता है।
"सूप जैसी चौड़ी नाखूनों वाली होने के कारण रावण की बहन का नाम शूर्पणखा पड़ा था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): मूल पद में मूर्धन्य "ष्" के पश्चात आने वाला दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"भौतिक सुख-सुविधाओं की अतृप्त तृष्णा ही संसार में अनेक मानसिक दुखों का मूल कारण है।"
यदि किसी शब्द में ऋ, र् या ष् के बाद "न्" व्यंजन आए (चाहे बीच में स्वर, क-वर्ग, प-वर्ग, अनुस्वार या य, व, ह का व्यवधान क्यों न हो), तो "न्" का "ण्" (मूर्धन्य ण) हो जाता है।
इसका मुख्य सूत्र है: ऋ, र्, ष् + (व्यवधान सहित/रहित) + न् = ण्
विच्छेद करते समय अंतिम पद के "ण्" को वापस मूल दन्त्य "न्" में बदल दिया जाता है। जैसे: परिणाम = परि + नाम, प्रमाण = प्र + मान।
When the dental nasal 'n' follows 'ri', 'r', or 'sh' within a word (even across intervening vowels, guttural or labial consonants), it assimilates into the retroflex nasal 'na'.