Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): उपसर्ग "प्र" में स्थित "र्" के प्रभाव से उत्तर पद का अंतिम दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"न्यायालय में न्याय की स्थापना के लिए ठोस साक्ष्य और प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।"
दो मूल सार्थक पद
Parinam (Pari + Naam)
प्रथम पद में "र्" वर्ण के प्रभाव से द्वितीय पद का दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य वर्ण "ण्" में बदल जाता है।
The presence of "r" in the first element triggers the retroflexion of dental "n" into "na".
"सच्ची लगन और ईमानदारी से किए गए श्रम का परिणाम सदैव सुखद और फलदायी होता है।"
"The outcome (Parinam) of labor performed with genuine sincerity is always gratifying and fruitful."
"परिणाम" का शुद्ध एवं प्रामाणिक संधि विच्छेद "परि + नाम" है।
"परिणाम" में मुख्य रूप से "व्यंजन संधि" (विशिष्ट उपभेद: 'न्' का 'ण्' में परिवर्तन नियम (णत्व विधान)) है।
प्रथम पद में "र्" वर्ण के प्रभाव से द्वितीय पद का दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य वर्ण "ण्" में बदल जाता है। (ध्वनि सूत्र: र् + न = ण्)
English Translation: "The outcome (Parinam) of labor performed with genuine sincerity is always gratifying and fruitful." | Sentence in Hindi: "सच्ची लगन और ईमानदारी से किए गए श्रम का परिणाम सदैव सुखद और फलदायी होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): उपसर्ग "प्र" में स्थित "र्" के प्रभाव से उत्तर पद का अंतिम दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"न्यायालय में न्याय की स्थापना के लिए ठोस साक्ष्य और प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद में स्थित "र्" के प्रभाव से द्वितीय पद "अयन" का दन्त्य "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"महर्षि वाल्मीकि द्वारा विरचित रामायण भारतीय संस्कृति और मर्यादा का अमर महाकाव्य है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): धातु के अंत में मूर्धन्य वर्ण "ष्" होने पर प्रत्यय का दन्त्य "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"विद्या और शील ही मनुष्य के सबसे वास्तविक और मूल्यवान आभूषण हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व स्वर "ऋ" के बाद दन्त्य वर्ण "न" आने पर "न" का मूर्धन्य "ण्" हो जाता है।
"भारतीय परंपरा में माता-पिता और गुरु के ऋण से कभी भी उऋण नहीं हुआ जा सकता।"