CLASSICAL POETIC TREASURY

Hindi Dohe Kosh (Couplets) (हिंदी दोहे कोष)(Page 2 / पृष्ठ २)

Immortal ethical couplets of Sant Kabir, Rahim, and Goswami Tulsidas with authentic Hindi commentary, English translation, and literary context.

🪶
185
Total Couplets
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5
Classical Poets
💡
10
Categories
185 / 185 दोहे
🪶Poet / Author (रचयिता / कवि):
💡Theme / Subject (विषय / संदर्भ):
🪔संत कबीरदास🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

नैना अंतरि आव तूँ, ज्यों हौं नैन झँपेउँ।

ना हौं देखूँ और कूँ, ना तुझ देखन देऊँ॥

Naina antari aav toon, jyon haun nain jhanpeun. / Na haun dekhoon aur koon, na tujh dekhan de-oon.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जीवात्मा का परमात्मा के प्रति अनन्य, गोपनीय और प्रगाढ़ प्रेम व्यक्त करते हुए कहते हैं कि हे मेरे प्रियतम प्रभु! तुम मेरे नेत्रों के भीतर समा जाओ, और जैसे ही तुम प्रवेश करो, मैं अपनी पलकें मूँद लूँ। इसके पश्चात् न तो मैं इस संसार में किसी अन्य को देखूँ और न ही तुम्हें किसी और को देखने दूँ। यह माधुर्य भाव की अनन्य पराकाष्ठा है।

English: Step inside my eyes, beloved Lord, and the instant You enter, I shall close my eyelids shut. Thereafter, neither will I gaze upon anyone else in this world, nor shall I let anyone else behold You. Such is the supreme intimacy of divine love.

नैना अंतरि आव तूँ • अनन्य प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

कबीर देह जो धरी, तो सहना परै विकार।

जैसे भांडे कुम्हार के, सहैं अगिनि की झार॥

Kabir deh jo dhari, to sahna parai vikaar. / Jaise bhaande kumhaar ke, sahain agini ki jhaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि यदि आत्मा ने यह नश्वर भौतिक शरीर धारण किया है, तो उसे सुख-दुख, रोग और सांसारिक कष्टों की ज्वाला को सहन करना ही पड़ेगा। जिस प्रकार कुम्हार द्वारा बनाए गए कच्चे मिट्टी के बर्तनों को पकने और सुदृढ़ बनने के लिए आंवां (भट्टी) की धधकती आग की लपटों को सहना पड़ता है, उसी प्रकार जीवन के ताप से तपकर ही आत्मा कुंदन बनती है।

English: Having assumed mortal physical form, one must bear hardships, sorrow, and worldly tribulations. Just as clay pots fashioned by the potter must endure the scorching flames of the kiln to become strong, human trials purify the soul.

कबीर देह जो धरी • कष्ट सहनशीलतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल।

तोहि फूल को फूल है, वाको है तिरसूल॥

Jo toko kaanta buvai, taahi bov tu phool. / Tohi phool ko phool hai, vaako hai tirsool.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी क्षमा, अहिंसा और सदाचार का अमर संदेश देते हुए कहते हैं कि जो व्यक्ति तुम्हारे मार्ग में काँटे बिछाए (बुराई या अहित करे), तुम बदले में उसके लिए भी फूल ही बिछाओ (उसका भी भला करो)। तुम्हारे शुभ कर्मों के बदले तुम्हें फूलों जैसी सुगंध व शांति मिलेगी, जबकि काँटे बोने वाले को अंततः अपने ही कर्मों का त्रिशूल जैसा तीखा दंड भुगतना पड़ेगा।

English: For him who scatters thorns along your path, plant sweet blossoms in return. To you, your noble flowers will yield fragrance and peace; while for him, his own sown thorns will transform into piercing tridents of karmic retribution.

जो तोको काँटा बुवै • क्षमा और भलाईपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

कबीर संगति साधु की, बेगि करीजै जाय।

दुरमति दूरि गँवाइ सी, देसी सुमति बताय॥

Kabir sangati saadhu ki, begi kareejai jaay. / Durmati doori ganvaai si, desi sumati batay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी कहते हैं कि जैसे ही अवसर मिले, अविलंब जाकर सज्जनों और संतों की संगति कर लेनी चाहिए। संत पुरुषों का सान्निध्य मनुष्य के भीतर की समस्त दुर्बुद्धि, कुविचारों और दुर्गुणों को दूर भगा देता है और उसे श्रेष्ठ बुद्धि (सुमति), विवेक और सत्य मार्ग का दर्शन करा देता है। सत्संगति जीवन की दिशा बदल देती है।

English: Make haste without delay to seek the company of the wise and noble, advises Kabir. For virtuous companionship expels all wicked thoughts and ignorance from the mind, instilling righteous discernment and luminous wisdom.

संगति साधु की बेगि • सुमतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
🪔संत कबीरदास⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

कहा कियो हम आइ करि, कहा करैंगे जाइ।

इन दोहू के बीच में, अवधि गँवाई आइ॥

Kaha kiyo hum aai kari, kaha karainge jaai. / In dohoo ke beech mein, avadhi ganvaayi aai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

कबीरदास जी जीवन के व्यर्थ बीत जाने पर चेतावनी देते हुए कहते हैं कि इस संसार में जन्म लेकर हमने क्या सार्थक कर्म किया? और मृत्यु के उपरांत परलोक जाकर हम प्रभु को क्या मुँह दिखाएंगे? जन्म और मृत्यु के बीच की यह बहुमूल्य जीवन-अवधि हमने व्यर्थ की चिंताओं और सांसारिक प्रपंचों में ही गँवा दी। अतः समय रहते आत्म-कल्याण में लगो।

English: What worthy deed have we accomplished having arrived into this world, and what offering shall we present when we depart? Between birth and departure, we frittered away our allotted lifespan in trivial pursuits. Realize life’s sacred purpose before time expires.

कहा कियो हम आइ करि • जीवन का उद्देश्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय।

टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परि जाय॥

Rahiman dhaaga prem ka, mat toro chatkaay. / Toote pe phir na jure, jure gaanth pari jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि प्रेम और आपसी विश्वास का संबंध एक कोमल और नाजुक धागे के समान होता है। इसे क्रोध, अहंकार या नासमझी के झटके से कभी नहीं तोड़ना चाहिए। यदि यह प्रेम रूपी धागा एक बार टूट जाता है, तो फिर पहले जैसा नहीं जुड़ता; और यदि बहुत प्रयास करके उसे जोड़ भी लिया जाए, तो उसमें सदा के लिए एक अविश्वास और संकोच की गाँठ पड़ जाती है।

English: Rahim counsels never to snap the delicate thread of love in a sudden fit of anger or ego. Once severed, it cannot be rejoined as before; and even if re-tied, an indelible knot of distrust and distance remains forever in the relationship.

रहिमन धागा प्रेम का • प्रेम का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥

Rahiman paani rakhiye, bin paani sab soon. / Paani gaye na oobarai, moti, maanush, choon.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी श्लेष अलंकार का अप्रतिम प्रयोग करते हुए 'पानी' के संरक्षण का संदेश देते हैं। वे कहते हैं कि जीवन में पानी अवश्य बनाए रखना चाहिए, क्योंकि पानी के बिना सब कुछ व्यर्थ (शून्य) है। पानी (चमक/आभा) के बिना मोती मूल्यहीन है, पानी (सम्मान/प्रतिष्ठा/विनम्रता) के बिना मनुष्य का कोई अस्तित्व नहीं, और पानी (जल) के बिना चूना या आटा किसी काम का नहीं रहता।

English: Preserve water with the utmost care, for without water all creation becomes desolate, advises Rahim. When water is lost, three things lose all worth: the pearl loses its luster, human beings lose their honor and dignity, and flour or lime cannot bind into substance.

रहिमन पानी राखिए • पानी का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।

चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥

Jo rahim uttam prakriti, ka kari sakat kusang. / Chandan vish vyaapat nahin, lapte rahat bhujang.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि जिस मनुष्य का स्वभाव और चरित्र दृढ़, श्रेष्ठ तथा उत्तम होता है, बुरी संगति (कुसंग) उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। जिस प्रकार चंदन के शीतल वृक्ष पर सदैव विषैले सर्प लिपटे रहते हैं, फिर भी चंदन में विष का लेशमात्र भी प्रभाव नहीं फैलता और वह अपनी सुगंध नहीं छोड़ता; उसी प्रकार सत्पुरुष दुर्जनों के बीच रहकर भी अपने सद्गुणों को बनाए रखते हैं।

English: For a person endowed with upright character and noble disposition, evil companionship can cause no corruption. Sandalwood trees remain eternally embraced by venomous serpents, yet not a trace of poison permeates their sweet, cooling fragrance.

जो रहीम उत्तम प्रकृति • सत्संगतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।

जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि॥

Rahiman dekhi baden ko, laghu na dijiye daari. / Jahan kaam aavai sui, kaha karai tarvaari.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि किसी बड़े, धनी अथवा शक्तिशाली व्यक्ति को पाकर अपने पुराने, छोटे अथवा निर्धन मित्रों व सहायकों की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। प्रत्येक वस्तु और व्यक्ति का अपना एक विशिष्ट महत्त्व होता है। जिस स्थान पर फटे वस्त्र को सिलने के लिए छोटी सी सुई काम आती है, वहाँ विशाल और तीक्ष्ण तलवार कुछ भी नहीं कर सकती। समानता और आदर ही जीवन का सत्य है।

English: Upon encountering the wealthy or powerful, never discard or disrespect the humble and small, says Rahim. Where a tiny sewing needle is required to mend a cloth, what possible utility can a mighty battle sword have? Every entity possesses unique worth.

रहिमन देखि बड़ेन को • समानतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियहिं न पान।

कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहिं सुजान॥

Taruvar phal nahin khaat hai, sarvar piyahin na paan. / Kahi rahim par kaaj hit, sampati sanchahin sujaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी परोपकार की महिमा बताते हुए कहते हैं कि वृक्ष कभी अपने फल स्वयं नहीं खाते, और सरोवर (तालाब) कभी अपना जल स्वयं नहीं पीते। प्रकृति का यह नियम है कि वे सब दूसरों के लिए ही जीवन धारण करते हैं। ठीक इसी प्रकार, सज्जन और ज्ञानी पुरुष भी जो धन-संपत्ति संचित करते हैं, वह अपने विलास के लिए नहीं, बल्कि परोपकार, दीन-सेवा और समाज-कल्याण के लिए करते हैं।

English: Trees never partake of their own fruits, nor do lakes drink their own waters. In identical selfless fashion, noble and wise souls accumulate wealth and resources solely for the welfare, charity, and upliftment of others.

तरुवर फल नहिं खात है • परोपकारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस।

जा पर विपदा परत है, सो आवत यह देस॥

Chhitrakoot mein rami rahe, rahiman awadh-nares. / Jaa par vipda parat hai, so aawat yeh des.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी भगवान श्री रामचंद्र जी के वनवास का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि अयोध्या के चक्रवर्ती राजा श्री राम जब संकट में पड़े, तो वे चित्रकूट के शांत जंगलों में आकर रहने लगे। वास्तव में जिस मनुष्य पर कोई भारी विपत्ति या संकट आता है, वही शांति, संबल और आत्म-चिंतन के लिए ऐसे एकांत व पवित्र स्थानों की शरण में आता है। विपत्ति मनुष्य को धैर्यवान और अंतर्मुखी बनाती है।

English: Even the sovereign Emperor of Ayodhya, Lord Rama, made peaceful Chitrakoot his hermitage during his exile. Verily, whosoever is tested by overwhelming worldly tribulations seeks refuge in such sacred, tranquil retreats to find solace and spiritual strength.

चित्रकूट में रमि रहे • अवध नरेसपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।

बिपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत॥

Kahi rahim sampati sage, banat bahut bahu reeti. / Bipati kasauti je kase, teyi saanche meet.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे मित्र की पहचान बताते हुए कहते हैं कि जब हमारे पास धन-दौलत, पद और समृद्धि होती है, तब तो अनेक लोग अनेक प्रकार से बहाने बनाकर हमारे सगे-संबंधी और मित्र बनने का ढोंग करते हैं। परंतु जो व्यक्ति विपत्ति, संकट और निर्धनता के समय कसौटी पर खरा उतरे और साथ न छोड़े, वास्तव में वही सच्चा मित्र होता है। संकट ही मित्रता की सच्ची परीक्षा है।

English: When wealth and prosperity abound, countless people flock around pretending companionship in myriad ways. But those steadfast souls who endure the touchstone of adversity without fleeing are the only true friends.

कहि रहीम संपति सगे • सच्चा मित्रपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय।

सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहै कोय॥

Rahiman nij man ki bitha, man hi raakho goy. / Suni athilaihain log sab, baanti na laihai koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी लोक-व्यवहार की अत्यंत सूक्ष्म चेतावनी देते हुए कहते हैं कि अपने मन के दुख, पीड़ा और गुप्त कष्टों को अपने मन के भीतर ही छिपाकर रखना चाहिए। संसार के लोगों के सामने अपना दुखड़ा रोने से कोई लाभ नहीं होता; लोग आपके दुख को सुनकर पीठ पीछे आपकी हँसी उड़ाएंगे और आनंद लेंगे, परंतु आपके दुख को बाँटने के लिए कोई भी आगे नहीं आएगा।

English: Conceal the sorrow and torment of your heart within your own quiet soul, advises Rahim. Upon hearing of your distress, people will merely mock and derive secret amusement behind your back; none will step forward to shoulder your burden.

रहिमन निज मन की बिथा • मन की व्यथापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

रूठे सुजन मनाइए, जौ रूठैं सौ बार।

रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ताहार॥

Roothe sujan manaaiye, jau roothain sau baar. / Rahiman phiri phiri poiye, toote muktahaar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सज्जनों के महत्त्व को बताते हुए कहते हैं कि यदि कोई सच्चा हितैषी अथवा सज्जन व्यक्ति किसी कारणवश आपसे रूठ जाए, तो उसे तुरंत मना लेना चाहिए, भले ही वह सौ बार रूठे। जिस प्रकार यदि मोतियों की बहुमूल्य माला टूट जाए, तो हम उन मोतियों को फेंकते नहीं बल्कि बार-बार धागे में पिरोकर सहेजते हैं; उसी प्रकार सज्जन पुरुष समाज के अनमोल मोती हैं, उन्हें खोना नहीं चाहिए।

English: Reconcile with a virtuous and wise friend even if they take offense a hundred times, counsels Rahim. Just as one repeatedly re-strings a broken necklace of genuine pearls rather than casting them aside, a noble soul is a treasure never to be lost.

रूठे सुजन मनाइए • सज्जनों का आदरपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

बड़े बड़ाई ना करैं, बड़े न बोलैं बोल।

रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल॥

Bade badai na karain, bade na bolain bol. / Rahiman heera kab kahai, laakh taka mero mol.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि जो लोग वास्तव में महान और गुणी होते हैं, वे कभी अपनी प्रशंसा स्वयं अपने मुँह से नहीं करते और न ही कभी अहंकार से भरे बड़े-बड़े बोल बोलते हैं। जिस प्रकार बहुमूल्य हीरा कभी स्वयं यह दावा नहीं करता कि मेरा मूल्य लाखों टके है; उसकी चमक और शुद्धता ही उसकी परख करा देती है। उसी प्रकार महान व्यक्तियों का कर्म ही उनकी महत्ता सिद्ध करता है।

English: Those genuinely great never boast of their own virtues, nor do they utter haughty, boastful words. When has a radiant diamond ever proclaimed loudly that its worth is millions? True brilliance speaks silently through intrinsic merit.

बड़े बड़ाई ना करैं • निरहंकारपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

एकै साधै सब सधै, सब साधे सब जाय।

रहिमन सींचै मूल को, फूलै फलै अघाय॥

Ekai saadhe sab sadhai, sab saadhe sab jaay. / Rahiman seenchai mool ko, phoolai phalai aghaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी जीवन में लक्ष्य की एकाग्रता और मूल तत्व को साधने का रहस्य समझाते हैं। वे कहते हैं कि एक मुख्य परम तत्व (ईश्वर या मूल कर्तव्य) को साध लेने से अन्य सभी कार्य स्वतः सिद्ध हो जाते हैं; किंतु यदि मनुष्य एक साथ सब कुछ पाने के फेर में भटकता है, तो उसके हाथ से सब कुछ निकल जाता है। जैसे वृक्ष की जड़ (मूल) को सींचने से तना, शाखाएं, फूल और फल सभी तृप्त होकर लहलहा उठते हैं।

English: By nurturing the single essential root, all branches flourish; by scattering effort on everything simultaneously, all is lost. When the gardener waters the primary roots of a tree, its stems, leaves, flowers, and fruits thrive in abundance.

एकै साधै सब सधै • मूल को सींचनापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन बिपतिहूँ भली, जे थोरे दिन होय।

हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय॥

Rahiman bipatihoon bhali, je thore din hoy. / Hit anhit ya jagat mein, jaani parat sab koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी संकट के सकारात्मक पक्ष को उद्घाटित करते हुए कहते हैं कि यदि विपत्ति थोड़े दिनों के लिए आए, तो वह भी एक प्रकार से भली और हितकारी ही होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उस अल्पकालिक संकट के समय में ही यह स्पष्ट रूप से प्रकट हो जाता है कि इस संसार में कौन हमारा वास्तविक हितैषी (शुभचिंतक) है और कौन हमारा अहित चाहने वाला अथवा स्वार्थी है। संकट संबंधों का सच्चा आईना है।

English: Adversity is truly a blessing in disguise if it lasts for but a brief season, proclaims Rahim. For during those trying moments alone is the veil lifted, revealing unmistakably who in this world is genuinely your well-wisher and who is merely a hollow fair-weather friend.

रहिमन बिपतिहूँ भली • विपत्ति की परखपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🗣️मधुर वाणी एवं सद्व्यवहार🎓 Class 9-10

अमृत ऐसे बचन में, रहिमन रिस की गाँस।

जैसे मिसरीहु में मिली, नीरस बाँस की फाँस॥

Amrit aise bachan mein, rahiman ris ki gaans. / Jaise misreehu mein mili, neeras baans ki faans.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी क्रोध के दुष्परिणाम को बताते हुए कहते हैं कि अत्यंत मधुर, अमृत तुल्य बातचीत के बीच में यदि क्रोध अथवा कटुता की एक भी बात आ जाए, तो वह पूरे संवाद के आनंद को नष्ट कर देती है। यह ठीक वैसा ही है जैसे स्वादिष्ट और मीठी मिश्री खाते समय यदि उसमें सूखी बाँस की फाँस आ जाए, तो वह मुँह के सारे स्वाद को बिगाड़ देती है और पीड़ा पहुँचाती है।

English: In words sweet as celestial nectar, a sudden thorn of fury ruins all beauty, cautions Rahim. It is precisely like discovering a dry, piercing splinter of bamboo lodged inside a piece of crystal candy, destroying all delight and causing pain.

अमृत ऐसे बचन में • क्रोध का त्यागपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 9-10

जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिं।

गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुख मानत नाहिं॥

Jo baden ko laghu kahain, nahin rahim ghati jaahin. / Giridhar murlidhar kahain, kachhu dukh maanat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि यदि कोई क्षुद्र बुद्धि वाला व्यक्ति किसी सचमुच महान व्यक्ति को छोटा या तुच्छ कह दे, तो इससे उस महान व्यक्ति का बड़प्पन तनिक भी कम नहीं होता। जैसे भगवान श्री कृष्ण को जिन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाया था (गिरिधर), उन्हें यदि लोग केवल बांसुरी बजाने वाला (मुरलीधर) कहकर पुकारते हैं, तो वे तनिक भी बुरा नहीं मानते। सच्चा बड़प्पन निंदा से अप्रभावित रहता है।

English: If envious or small-minded people belittle those who are truly great, their stature does not diminish by a fraction. Lord Krishna lifted the Govardhan mountain (Giridhar), yet when people address Him simply as the flute-player (Murlidhar), He takes no offense whatsoever.

जो बड़ेन को लघु कहें • गिरधर मुरलीधरपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 6-8

रहिमन चुप ह्वै बैठिए, देखि दिनन को फेर।

जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहै देर॥

Rahiman chup hvai baithiye, dekhi dinan ko pher. / Jab neeke din aaihain, banat na lagihai der.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी प्रतिकूल समय में धैर्य रखने की प्रेरणा देते हुए कहते हैं कि जब समय विपरीत और परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों, तो व्यर्थ का विवाद या अशांति करने के बजाय मौन और शांत होकर समय के चक्र को देखना चाहिए। जब शुभ और अनुकूल दिन आएंगे, तब बिगड़े हुए कार्यों को बनते और सफलता प्राप्त होते तनिक भी देर नहीं लगेगी। धैर्य ही विपत्ति का सबसे बड़ा संबल है।

English: Remain calm and composed in quiet endurance during adverse times, observes Rahim. When favorable and auspicious days return, your endeavors will materialize without any delay. Patience through hardship guarantees victory.

रहिमन चुप ह्वै बैठिए • धैर्यपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।

रहिमन दाबे ना दबें, जानत सकल जहान॥

Khair, khoon, khaansi, khusi, bair, preeti, madpaan. / Rahiman daabe na dabain, jaanat sakal jahaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी मानव मनोविज्ञान का अकाट्य सत्य प्रकट करते हुए कहते हैं कि सात चीजें छिपाने से कभी नहीं छिपतीं: खैर (कुशल-क्षेम या कत्था), खून (हत्या या रक्तपात), खाँसी, खुशी (हार्दिक प्रसन्नता), बैर (शत्रुता), प्रीति (सच्चा प्रेम) और मदपान (शराब का नशा)। लाख प्रयास करने पर भी ये बातें संसार के सामने प्रकट होकर ही रहती हैं। अंतःकरण की सच्चाई छिप नहीं सकती।

English: Seven realities can never be concealed despite all efforts, declares Rahim: well-being, bloodshed, coughing, joy, enmity, genuine love, and intoxication. The entire world knows that these truths inevitably reveal themselves.

खैर खून खाँसी • सत्य का उद्घाटनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 9-10

जे रहीम दीपक दसा, कुल कपूत गति सोय।

बारे उजियारो करै, बढ़े अँधेरो होय॥

Je rahim deepak dasa, kul kapoot gati soy. / Baare ujiyaaro karai, badhe andhero hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी श्लेष अलंकार के माध्यम से दीपक और कुपुत्र (कुल-कलंक) की समानता दिखाते हैं। दीपक को जब जलाते हैं (बारे) तो वह प्रकाश करता है, और जब वह बुझ जाता है (बढ़े) तो अंधकार छा जाता है। इसी प्रकार, जब कुल में कुपुत्र का जन्म होता है (बचपन/बारे) तो परिवार में खुशी का उजियारा होता है, किंतु जब वह बड़ा होता है (बढ़े) और कुकर्म करता है, तो पूरे कुल में बदनामी का घोर अंधकार फैल जाता है।

English: The fate of an unworthy son closely mirrors the condition of an oil lamp, explains Rahim. When kindled (or born in childhood), it brings bright illumination; but as it goes out (or as he grows up into wicked deeds), complete darkness engulfs the lineage.

जे रहीम दीपक दसा • कपूतपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

रहिमन ओछे नरन सौं, बैर भलो न प्रीत।

काटे चाटे श्वान के, दोऊ भाँति विपरीत॥

Rahiman oochhe naran saun, bair bhalo na preet. / Kaate chaate shwaan ke, do-u bhaanti vipreet.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी दुष्ट और नीच प्रकृति के लोगों से दूरी बनाए रखने की चेतावनी देते हुए कहते हैं कि ओछे (तुच्छ मानसिकता वाले) मनुष्यों से न तो मित्रता अच्छी होती है और न ही शत्रुता। यह ठीक कुत्ते (श्वान) के समान है; यदि वह काटे तो विषैला घाव करता है, और यदि वह चाटे तो अशुद्ध और लज्जित करता है। दोनों ही स्थितियों में हानि ही होती है, अतः उनसे निष्पक्ष दूरी ही श्रेयस्कर है।

English: Neither friendship nor enmity with vile, ignoble people is advisable, cautions Rahim. It resembles a rabid dog: if it bites, it poisons; if it licks, it defiles. Both extremes yield grief and dishonor.

रहिमन ओछे नरन सौं • दुष्ट संगतिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन अँसुवा नयन ढरि, जिय दुख प्रगट करेइ।

जाहि निकारौ गेह तें, कस न भेद कहि देइ॥

Rahiman ansuwa nayan dhari, jiya dukh pragat kareyi. / Jaahi nikaaro geh tain, kas na bhed kahi deyi.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी घर के भेदी के मनोवैज्ञानिक सत्य को समझाते हुए कहते हैं कि आँखों से बहने वाले आँसू हृदय के भीतर के सारे गोपनीय दुख और वेदना को संसार के सामने प्रकट कर देते हैं। इसमें आश्चर्य कैसा? जिसे भी घर (आँखों रूपी घर) से बाहर निकाल दिया जाएगा, वह घर का सारा भेद बाहर वालों को क्यों नहीं बताएगा? आंतरिक बातों को बाहर प्रकट होने से रोकना चाहिए।

English: Tears streaming from the eyes unveil to the world all the sorrow hidden within the heart, observes Rahim. And why should they not? Whosoever is expelled from the house will naturally disclose every confidential secret to outsiders.

रहिमन अँसुवा नयन ढरि • घर का भेदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

दीन सबन को लखत है, दीनहिं लखै न कोय।

जो रहीम दीनहिं लखै, दीनबंधु सम होय॥

Deen saban ko lakhat hai, deenahin lakhai na koy. / Jo rahim deenahin lakhai, deenbandhu sam hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी करुणा और सेवा का अमर संदेश देते हुए कहते हैं कि निर्धन और असहाय व्यक्ति सहायता की आशा से सबकी ओर देखता है, परंतु उस दीन-हीन की ओर कोई सहानुभूति से नहीं देखता। रहीम कहते हैं कि जो सहृदय व्यक्ति उस पीड़ित और असहाय की ओर करुणा से देखता है और उसकी सहायता करता है, वह साक्षात् ईश्वर (दीनबंधु) के समान पूज्य और महान हो जाता है।

English: The poor and destitute gaze yearningly upon everyone for aid, yet none looks kindly upon them. But he who gazes with heartfelt compassion and extends help to the downtrodden becomes akin to God, the true Friend of the Poor (Deenbandhu).

दीन सबन को लखत है • दीनबंधुपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पिअत अघाय।

उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसो जाय॥

Dhani rahim jal pank ko, laghu jiya piat aghaay. / Udadhi badai kaun hai, jagat piaaso jaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी उपयोगिता और परोपकार को बड़प्पन का सच्चा पैमाना बताते हुए कहते हैं कि कीचड़ से भरा वह छोटा सा गंदा जल भी धन्य है, जिसे पीकर छोटे-छोटे जीव-जंतु अपनी प्यास बुझा लेते हैं और तृप्त होते हैं। उस विशाल समुद्र की ऐसी बड़ाई किस काम की, जिसके पास अथाह जल होने पर भी उसका जल खारा होने के कारण सारा संसार उसके तट से प्यासा ही लौट जाता है? परोपकार विहीन विशालता व्यर्थ है।

English: Blessed indeed is the muddy puddle of water, for tiny creatures drink from it and are satisfied. What is the glory of the colossal ocean if the entire world must return thirsty from its shores because its waters are salty and useless? Greatness lies in utility.

धनि रहीम जल पंक को • उदधि बड़ाईपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

रहिमन प्रीति सराहिए, मिले होत रंग दून।

ज्यों जरदी हरदी तजै, तजै सफेदी चून॥

Rahiman preeti sarahiye, mile hot rang doon. / Jyon jardi hardi tajai, tajai safedi choon.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे, समर्पित प्रेम की सराहना करते हुए कहते हैं कि सच्चा प्रेम वही है जिसमें दोनों पक्ष मिलकर एक हो जाएँ और दोनों का प्रेम दुगुना हो जाए। इसका सुंदर उदाहरण हल्दी और चूना हैं: जब पीली हल्दी और सफेद चूना परस्पर मिलते हैं, तो हल्दी अपना पीलापन छोड़ देती है और चूना अपनी सफेदी त्याग देता है, और दोनों मिलकर एक नवीन लाल (सिंदूरी) रंग रच देते हैं। सच्चा प्रेम अहंकार का विसर्जन है।

English: Praise that authentic love where two souls merge and their brilliance doubles, says Rahim. Consider turmeric and lime: turmeric surrenders its yellow hue and lime sheds its stark white, and in selfless union, they create a vibrant, beautiful crimson.

रहिमन प्रीति सराहिए • सच्चा प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुन तीन।

जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन॥

Kadali, seep, bhujang-mukh, swati ek gun teen. / Jaisi sangati baithiye, taiso hi phal deen.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी संगति के निर्णायक प्रभाव को दर्शाते हुए कहते हैं कि स्वाति नक्षत्र की जल की बूँद तो एक ही होती है, किंतु अलग-अलग संगति के कारण उसके तीन भिन्न-भिन्न परिणाम होते हैं। केले (कदली) में पड़ने पर वह कपूर बन जाती है, सीप में पड़ने पर अनमोल मोती बन जाती है, और साँप (भुजंग) के मुख में पड़ने पर भयंकर विष बन जाती है। मनुष्य जिस प्रकार की संगति करता है, वैसा ही उसका स्वभाव और फल बन जाता है।

English: The celestial Swati raindrop is identical in essence, yet it manifests three completely different outcomes depending on where it falls: in the banana tree it turns to camphor, in the oyster to a pearl, and in the snake’s fangs to lethal venom. So does association shape fate.

कदली सीप भुजंग मुख • स्वाति बूँदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 6-8

समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जाय।

सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछिताय॥

Samay paay phal hot hai, samay paay jhari jaay. / Sada rahe nahin ek si, ka rahim pachhitaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी काल के अटल नियम को समझाते हुए कहते हैं कि समय आने पर ही वृक्षों पर फल लगते हैं और समय पूरा होने पर वे स्वतः पककर गिर जाते हैं। संसार में कोई भी अवस्था, सुख या दुख सदैव एक जैसी नहीं रहती। जब परिवर्तन प्रकृति का नियम है, तो मनुष्य को समय के उतार-चढ़ाव पर व्यर्थ पछतावा या शोक क्यों करना चाहिए? समभाव से हर परिस्थिति को स्वीकार करना चाहिए।

English: Trees bear fruit when their appointed season arrives, and shed them when the time has run its course. No condition in this mortal realm remains permanent. When change is the immutable law of nature, why lament over the turning tides of fortune?

समय पाय फल होत है • काल चक्रपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोय।

रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय॥

Bigri baat banai nahin, laakh karau kin koy. / Rahiman phaate doodh ko, mathe na maakhan hoy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सामाजिक व व्यक्तिगत संबंधों में सावधानी बरतने का उपदेश देते हुए कहते हैं कि एक बार जब कोई बात या संबंध बिगड़ जाता है, तो चाहे लाखों उपाय कर लिए जाएँ, वह पुनः पहले जैसा सुदृढ़ नहीं बन पाता। जिस प्रकार एक बार दूध फट जाए, तो उसे कितना भी मथा जाए, उससे कभी मक्खन नहीं निकाला जा सकता। अतः बोलने और व्यवहार करने से पूर्व सोच-विचार आवश्यक है।

English: Once a relationship or situation is ruptured through thoughtlessness, no amount of contrivance can fully restore it, warns Rahim. Just as spoiled, curdled milk, no matter how vigorously churned, can never yield sweet butter, fractured bonds can never be wholly mended.

बिगरी बात बनै नहीं • फाटे दूधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

छमा बड़न को चाहिये, छोटन को उतपात।

कह रहीम हरि का घट्यौ, जो भृगु मारी लात॥

Chhama badon ko chaahiye, chhotan ko utpaat. / Kah rahim hari ka ghatyau, jo bhrigu maari laat.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी क्षमाशीलता को श्रेष्ठ पुरुषों का स्वाभाविक गुण बताते हुए कहते हैं कि बड़ों को क्षमा करना शोभा देता है, और छोटों की चंचलता या उत्पात को सहन करना चाहिए। उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि महर्षि भृगु ने जब भगवान विष्णु की छाती पर क्रोधवश लात मारी थी, तब भी भगवान विष्णु ने क्षमा करते हुए उनका आदर किया; इससे प्रभु का क्या घट गया? क्षमा से मनुष्य की महिमा बढ़ती है, घटती नहीं।

English: Magnanimous forgiveness befits the great, while erratic agitation often characterizes the small. When sage Bhrigu insolently kicked Lord Vishnu upon His chest, what was diminished of the Lord’s glory by His gentle forgiveness? Forgiveness exalts nobility.

छमा बड़न को चाहिये • क्षमाशीलतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🗣️मधुर वाणी एवं सद्व्यवहार🎓 Class 6-8

रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।

आप तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल॥

Rahiman jihwa baawari, kahi gayi sarag pataal. / Aap to kahi bheetar rahi, jooti khaat kapaal.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी वाणी के असंयम पर हास्य और व्यंग्य के साथ गंभीर चेतावनी देते हुए कहते हैं कि यह जीभ (जिह्वा) तो पगली है, जो बिना सोचे-समझे स्वर्ग और पाताल की अनर्गल बातें कह डालती है। वह तो बोलकर तुरंत मुँह के भीतर सुरक्षित छिप जाती है, किंतु उसके द्वारा कहे गए अनुचित शब्दों का दंड बेचारे सिर (कपाल) को जूतियों की मार सहकर भुगतना पड़ता है। जीभ पर नियंत्रण रखें।

English: The tongue is utterly reckless: it blurts out wild, unrestrained words reaching from heaven to the underworld. Having spoken, it slips safely back behind the teeth, while the poor head is left to suffer the blows and shoes of retribution. Guard the tongue.

रहिमन जिह्वा बावरी • वाणी संयमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

रहिमन वे नर मर चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।

उनते पहिले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं॥

Rahiman ve nar mar chuke, je kahun maangan jaahin. / Unte pahile ve muye, jin mukh niksat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी स्वाभिमान और दानशीलता दोनों का उपदेश देते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य किसी के आगे हाथ फैलाने या याचना करने जाते हैं, वे तो आत्मसम्मान की दृष्टि से जीते जी मरे हुए के समान हैं। परंतु उनसे भी पहले वे लोग मृतप्राय हैं, जिनके द्वार पर याचक के आने पर उनके मुख से 'नाहीं' (इनकार) निकल जाता है और वे सामर्थ्य होते हुए भी दान नहीं देते।

English: Those people are already dead in self-respect who must go begging at another’s threshold, declares Rahim. But even before them perished those miserly souls from whose lips comes forth a refusal to help when they possess the means to give.

रहिमन वे नर मर चुके • दानशीलतापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन मोहि न सुहाय, अमिय पिआवै मान बिनु।

बरु विष देइ बुलाय, मान सहित मरिबो भलो॥

Rahiman mohi na suhaay, amiy piaavai maan binu. / Baru vish deyi bulaay, maan sahit maribo bhalo.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी अपने स्वाभिमान की अडिग भावना व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यदि कोई अनादर और अपमान के साथ मुझे अमर करने वाला अमृत भी पिलाए, तो मुझे वह तनिक भी स्वीकार नहीं है। इसके विपरीत, यदि कोई पूरे सम्मान और आदर के साथ बुलाकर मुझे विष भी दे दे, तो स्वाभिमान की रक्षा करते हुए उस विष को पीकर मर जाना कहीं अधिक श्रेष्ठ और गौरवशाली है।

English: It pleases me not in the least if someone offers nectar stripped of respect, proclaims Rahim. Far better would it be if someone summons me with profound honor and offers poison; dying with self-respect is immeasurably more glorious than surviving in humiliation.

रहिमन मोहि न सुहाय • स्वाभिमानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 6-8

जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।

रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़ति छोह॥

Jaal pare jal jaat bahi, taji meenan ko moh. / Rahiman machhri neer ko, tau na chhaandati chhoh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे और एकतरफा प्रेम का अद्भुत उदाहरण मछली और जल के माध्यम से देते हैं। जब नदी में मछुआरा जाल फेंकता है, तो जल मछली का साथ छोड़कर तुरंत जाल से बाहर बह जाता है। परंतु मछली अपने प्रिय जल के प्रति इतना सच्चा और अनन्य प्रेम रखती है कि जल से अलग होते ही अपने प्राण त्याग देती है, किंतु जल के प्रति अपना मोह और प्रेम कभी नहीं छोड़ती।

English: When the fisherman casts his net into the river, the water swiftly flows away, abandoning its affection for the trapped fish. Yet the faithful fish loves the water so unconditionally that it surrenders its very life the moment it is parted from the stream.

जाल परे जल जात बहि • मछली और जलपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 9-10

मथत मथत माखन रहे, दही मही बिलगाय।

रहिमन सोई मीत है, भीर परे ठहराय॥

Mathat mathat maakhan rahe, dahi mahi bilgaay. / Rahiman soyi meet hai, bheer pare thahraay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी सच्चे मित्र की तुलना मक्खन से करते हुए कहते हैं कि जब दही को मथा जाता है, तो छाछ (मही) अलग हो जाती है, किंतु मक्खन मथने की प्रक्रिया के बाद भी अपने सार रूप में टिका रहता है और ऊपर उभर आता है। इसी प्रकार, जो व्यक्ति संकट, विपत्ति और परीक्षा की घड़ी में विचलित हुए बिना मित्र के साथ अडिग खड़ा रहे, वही वास्तव में सच्चा मित्र होता है।

English: Through relentless churning, the whey separates and flows away, but the wholesome butter remains steadfast and rises to the top. Rahim declares that he alone is a true friend who stays steadfastly beside you when adversity falls.

मथत मथत माखन रहे • मित्रता की परीक्षापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

पावस देखि रहीम मन, कोइल साधे मौन।

अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछत कौन॥

Paawas dekhi rahim man, koyil saadhe maun. / Ab daadur vakta bhaye, hamko poochhat kaun.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि वर्षा ऋतु (पावस) का आगमन देखकर कोयल ने मौन धारण कर लिया है। कोयल सोचती है कि अब तो मेंढक (दादुर) चारों ओर टर्र-टर्र की कर्कश ध्वनि करके मुख्य वक्ता बन बैठे हैं, ऐसे कोलाहल और मूर्खों की सभा में मेरी मधुर वाणी की कद्र करने वाला कौन है? जहाँ अज्ञानी और ढोंगी बोल रहे हों, वहाँ बुद्धिमानों को चुप रहना ही श्रेयस्कर है।

English: Witnessing the arrival of the monsoon downpours, the melodious cuckoo adopts silence, reflects Rahim. For now the croaking frogs have become the vocal orators; who in this cacophony will value sweet eloquence? Silence is wisdom where fools hold sway.

पावस देखि रहीम मन • कोयल और दादुरपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

रहिमन विद्या बुद्धि नहिं, धरम न ध्यान विवेक।

मानुष तन भुवि भार है, पशु बिनु पूँछ परेख॥

Rahiman vidya buddhi nahin, dharam na dhyan vivek. / Maanush tan bhuvi bhaar hai, pashu binu poonch parekh.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी ज्ञान और विवेक के अभाव में मानव जीवन की निरर्थकता बताते हुए कहते हैं कि जिस मनुष्य के पास न तो विद्या है, न सद्बुद्धि, न धर्म का आचरण है और न ही आत्म-चिंतन व विवेक है; ऐसा मनुष्य इस धरती पर केवल भार रूप है। वह केवल आकृति से मनुष्य दिखता है, परंतु वास्तव में वह बिना पूँछ और सींग वाले पशु के समान ही है। ज्ञान ही मनुष्य को पशुता से ऊपर उठाता है।

English: He who possesses neither learning nor intellect, neither righteousness nor contemplative discernment, is merely a heavy burden upon the earth. Though clothed in human form, he is in truth nothing more than a beast lacking a tail.

रहिमन विद्या बुद्धि नहिं • विवेक का महत्वपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

दीर्घ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।

ज्यों रहीम नट कुंडली, सिमटि कूदि चढ़ि जाहिं॥

Deergh doha arath ke, aakhar thore aahin. / Jyon rahim nat kundali, simti koodi chadhi jaahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी दोहा छंद के महात्म्य और गागर में सागर भरने की कला का वर्णन करते हुए कहते हैं कि दोहे में यद्यपि अक्षर (शब्द) थोड़े ही होते हैं, किंतु उनका अर्थ अत्यंत गूढ़, गंभीर और दीर्घ (विशाल) होता है। यह ठीक उस कुशल बाज़ीगर (नट) की तरह है, जो अपने विशाल शरीर को सिकोड़कर एक छोटे से लोहे के छल्ले (कुंडली) के भीतर से सहजतापूर्वक कूदकर बाहर निकल जाता है।

English: A classical doha contains few and concise letters, yet its embedded philosophical meaning is immensely vast and profound. It resembles a skilled acrobat who curls his entire frame tightly to leap effortlessly through a tiny circular hoop.

दीर्घ दोहा अरथ के • दोहा छंदपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🌱विनम्रता एवं निरहंकार🎓 Class 6-8

रहिमन रिस को मारिबो, सब प्रकार सुख होय।

रिस ते कबहूँ नहिं भलो, समुझि लेहु सब कोय॥

Rahiman ris ko maaribo, sab prakaar sukh hoy. / Ris te kabahun nahin bhalo, samujhi lehu sab koy.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि अपने भीतर उठने वाले क्रोध (रिस) का दमन करना और उसे शांत कर देना ही हर प्रकार से सुख और शांति प्रदान करने वाला है। क्रोध से कभी किसी का कोई भला नहीं हुआ है, यह बात सभी को भलीभाँति समझ लेनी चाहिए। क्रोध विवेक को हर लेता है और संबंधों को भस्म कर देता है, अतः क्रोध पर विजय पाना ही सच्ची विजय है।

English: Subduing and conquering one’s inner anger yields unalloyed peace and well-being in every possible way, advises Rahim. Anger has never accomplished any good for anyone anywhere; let everyone realize this timeless truth.

रहिमन रिस को मारिबो • क्रोध निवारणपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

रहिमन बात अगम्य की, कहन सुनन की नाहिं।

जे जानत ते कहत नहिं, कहत ते जानत नाहिं॥

Rahiman baat agamy ki, kahan sunan ki naahin. / Je jaanat te kahat nahin, kahat te jaanat naahin.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी गूढ़ आत्मज्ञान और ईश्वरीय अनुभूति के रहस्य को प्रकट करते हुए कहते हैं कि उस अगम्य और असीम परमात्मा की बात केवल कहने और सुनने का विषय नहीं है। जो तत्ववेत्ता वास्तव में उस परमसत्य को जान लेते हैं, वे मौन हो जाते हैं और व्यर्थ नहीं बोलते; और जो केवल बड़ी-बड़ी बातें बनाते फिरते हैं, वे वास्तव में उस सत्य से सर्वथा अनभिज्ञ होते हैं।

English: The transcendental mystery of the Supreme Reality is beyond mere speaking and listening, observes Rahim. Those enlightened souls who truly realize it fall silent; while those who chatter endlessly about it remain utterly ignorant of its truth.

रहिमन बात अगम्य की • गूढ़ ज्ञानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🤝सत्संगति एवं मित्रता🎓 Class 6-8

जे गरीब पर हित करैं, ते रहीम बड़ लोग।

कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥

Je gareeb par hit karain, te rahim bad log. / Kahan sudaama baapuro, krishna mitaayi jog.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि जो सामर्थ्यवान लोग निर्धनों और असहायों का भला करते हैं और उन्हें गले लगाते हैं, वास्तव में वे ही संसार में सबसे बड़े और महान लोग हैं। उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि कहाँ परम निर्धन और दीन सुदामा, और कहाँ द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण! सांसारिक दृष्टि से सुदामा कृष्ण की मित्रता के योग्य नहीं थे, किंतु कृष्ण ने अपने असीम प्रेम और उदारता से उन्हें गले लगाकर मित्र का मान दिया।

English: Those who extend benevolent grace to the impoverished are the truly noble souls of this world. Where stood poor destitute Sudama in comparison to Lord Krishna, sovereign of Dwarka? Yet Krishna’s supreme magnanimity embraced him as His dearest friend.

जे गरीब पर हित करैं • कृष्ण सुदामापूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⏳समय एवं नश्वरता🎓 Class 9-10

सदा न काहू की रही, रहिमन यह गति जानि।

घटत बढ़त ज्यों चंदमा, त्यों सुख-दुख पहिचानि॥

Sada na kaahu ki rahi, rahiman yeh gati jaani. / Ghatat badhat jyon chandama, tyon sukh-dukh pahichaani.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि यह संसार का अटल नियम जान लो कि किसी की भी स्थिति सदैव एक जैसी नहीं रहती। जिस प्रकार चंद्रमा कभी घटता है (कृष्ण पक्ष) और कभी बढ़ता है (शुक्ल पक्ष), उसी प्रकार जीवन में सुख और दुख का चक्र भी निरंतर घटता और बढ़ता रहता है। सुख में अहंकारी नहीं होना चाहिए और दुख में निराश नहीं होना चाहिए।

English: Understand this inexorable rhythm of life: the circumstances of no human remain constant forever. Just as the moon waxes in illumination and wanes in shadow, recognize that joy and sorrow continually alternate in human existence.

सदा न काहू की रही • सुख दुख का चक्रपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 9-10

मन मोती अरु दूध रस, इनकी सहज सुभाय।

फट जाए तो ना मिले, कोटिन करो उपाय॥

Man moti aru doodh ras, inki sahaj subhaay. / Phat jaaye to na mile, kotin karo upaay.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कहते हैं कि मनुष्य का मन, मोती और दूध का रस—इन तीनों का स्वाभाविक गुण अत्यंत नाजुक होता है। यदि मोती में एक बार दरार पड़ जाए, दूध एक बार फट जाए, अथवा मन में एक बार अविश्वास या कटुता आ जाए, तो करोड़ों उपाय करने पर भी वे अपनी पूर्व स्थिति में कभी वापस नहीं लौट सकते। अतः मन की पवित्रता और संबंधों की शुद्धि को सहेज कर रखें।

English: Human affection, radiant pearls, and pure milk share a delicate, fragile nature. Once cracked, spoiled, or fractured, no millions of remedies can ever restore them to their pristine integrity. Safeguard the purity of relationships.

मन मोती अरु दूध रस • नाजुक संबंधपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)💡नीति एवं सदाचार🎓 Class 6-8

आदर घटे तो नैन घटे, घटत सनेह गंभीर।

रहिमन तहाँ न जाइए, जहँ न मिलै सनमान॥

Aadar ghate to nain ghate, ghatat saneh gambheer. / Rahiman tahaan na jaaiye, jahan na milai sanmaan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी स्वाभिमान और सम्मान का पाठ पढ़ाते हुए कहते हैं कि जहाँ जाने से आँखों में आदर कम दिखाई दे, और जहाँ का प्रेम व स्नेह घटता हुआ प्रतीत हो, वहाँ कभी नहीं जाना चाहिए। जिस स्थान या व्यक्ति के यहाँ आपका उचित मान-सम्मान न हो, वहाँ जाकर बैठना अपने आत्मसम्मान को नष्ट करना है। स्वाभिमान से बड़ा कोई आभूषण नहीं है।

English: Where welcome diminishes in the host’s eyes and genuine affection withers into coldness, go not to that abode, urges Rahim. Where sincere honor and dignity are withheld, a self-respecting person must never linger.

आदर घटे तो नैन घटे • आत्मसम्मानपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 9-10

कमल पत्र पर जल रहे, रहिमन ताकी चाल।

जल में रहे जल ते अलग, संत जनन के हाल॥

Kamal patra par jal rahe, rahiman taaki chaal. / Jal mein rahe jal te alag, sant janan ke haal.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी कमल के पत्ते (पुरइनि पात) का रूपक प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि कमल का पत्ता जल में ही रहता है, उस पर पानी की बूँदें गिरती भी हैं, किंतु वह पानी को अपने ऊपर चिपकने नहीं देता और पानी में रहकर भी उससे अलिप्त (अलग) रहता है। ठीक इसी प्रकार, सच्चे संत और ज्ञानी पुरुष भी सांसारिक मोह-माया के बीच रहते हुए भी उससे अनासक्त और निर्लिप्त रहते हैं।

English: Observe the lotus leaf: it lives immersed in the water, yet water droplets roll off without leaving a trace of wetness upon it. In identical manner, the enlightened saint dwells in the midst of worldly affairs completely unattached and spiritually free.

कमल पत्र पर जल रहे • अनासक्तिपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 11-12

बलिहारी वा प्रेम की, जो मन बसै निरंतर।

कहि रहीम सोई भलो, मिटै जन्म को अंतर॥

Balihari wa prem ki, jo man basai nirantar. / Kahi rahim soyi bhalo, mitai janam ko antar.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी अनन्य ईश्वरीय प्रेम की वंदना करते हुए कहते हैं कि मैं उस परम प्रेम पर न्योछावर जाता हूँ, जो मन में निरंतर अखंड रूप से बसा रहता है। केवल वही प्रेम सच्चा और कल्याणकारी है, जो जीव और ईश्वर के बीच के जन्म-जन्मांतर के अंतर और अज्ञान के पर्दे को मिटाकर आत्मा का परमात्मा से मिलन करा देता है।

English: I offer my deepest homage to that divine love which abides uninterrupted within the purified heart, declares Rahim. That alone is supreme devotion which dissolves the ancient chasm between the soul and God, granting liberation.

बलिहारी वा प्रेम की • ईश्वर प्रेमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚖️सत्य एवं धर्म🎓 Class 9-10

रहिमन भेष बनाय के, कीजै नाहिं बड़ाई।

जैसे काच न कनक सम, चमकत है अधिकाई॥

Rahiman bhesh banaay ke, keejai naahin badai. / Jaise kaach na kanak sam, chamkat hai adhikai.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी बाह्य आडंबर और दिखावे का खंडन करते हुए कहते हैं कि केवल साधु या महात्मा का भेष बनाकर अपनी झूठी बड़ाई या प्रशंसा नहीं करानी चाहिए। जिस प्रकार चमकता हुआ काँच कभी शुद्ध सोने (कनक) के समान मूल्यवान नहीं हो सकता, भले ही वह धूप में सोने से भी अधिक चमकता हुआ दिखाई दे; उसी प्रकार बाह्य वेशभूषा से कोई महान नहीं बनता, आंतरिक गुण ही सच्चे आभूषण हैं।

English: Never seek unearned praise and status by donning the mere outward guise of holiness, warns Rahim. Just as glittering glass can never equal precious gold even if it sparkles brilliantly in sunlight, outer appearance can never substitute for authentic virtue.

रहिमन भेष बनाय के • आडंबर का खंडनपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)⚙️कर्म एवं पुरुषार्थ🎓 Class 6-8

विद्या धन उद्यम बिना, कहो जु पावै कौन।

बिना डुलाए ना मिलै, ज्यों पंखा की पौन॥

Vidya dhan udyam bina, kaho ju paavai kaun. / Bina dulaaye na milai, jyon pankha ki paun.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी परिश्रम और पुरुषार्थ की महत्ता समझाते हुए कहते हैं कि भला बिना कठिन परिश्रम (उद्यम) और अभ्यास के विद्या रूपी अनमोल धन को कौन प्राप्त कर सकता है? यह ठीक हाथ के पंखे के समान है; जब तक हाथ से पंखा न डुलाया जाए, तब तक उसकी शीतल पवन (हवा) भी प्राप्त नहीं होती। विद्या और सफलता केवल निरंतर परिश्रम से ही अर्जित की जा सकती है।

English: Who has ever acquired the priceless treasure of knowledge without diligent labor and earnest effort? Even the cooling breeze of a hand-fan cannot be obtained unless you exert effort to move it. Dedicated industry is the sole key to wisdom.

विद्या धन उद्यम बिना • परिश्रमपूरी व्याख्या व संदर्भ→
📜रहीम (अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ाना)🪔भक्ति एवं आध्यात्म🎓 Class 6-8

चिंता कहुँ न कीजिए, भजहु राम भगवान।

जाहि दियो है चोंच सो, दैहै चुग्गा आन॥

Chinta kahun na keejiye, bhajahu ram bhagwaan. / Jaahi diyo hai chonch so, daihai chugga aan.

Meaning & Commentary (भावार्थ एवं व्याख्या):

रहीम जी ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का उपदेश देते हुए कहते हैं कि मनुष्य को आजीविका और भविष्य की व्यर्थ चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि प्रभु श्री राम का भजन व स्मरण करना चाहिए। जिस विधाता ने पक्षी को चोंच दी है, उसने उसके लिए दाना (चुग्गा) भी निश्चित कर रखा है। परमात्मा सभी का पालनहार है, अतः चिंता छोड़कर निष्काम कर्म करो।

English: Harbor no anxious worries about survival; meditate instead upon the Supreme Lord. The compassionate Creator who gave the bird a beak has surely provided the grain to sustain it. Trust in divine providence.

चिंता कहुँ न कीजिए • ईश्वर पर विश्वासपूरी व्याख्या व संदर्भ→