Praacheenata ↔ नवीनता
काशी नगरी अपनी अद्वितीय प्राचीनता और धार्मिक विरासत के लिए विश्वविख्यात है।
कला में नवीनता लाने के लिए युवा चित्रकार नए रंगों और तकनीकों का प्रयोग करते हैं।
अक्षर 'प' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 201–250 / कुल: 277):
Praacheenata ↔ नवीनता
काशी नगरी अपनी अद्वितीय प्राचीनता और धार्मिक विरासत के लिए विश्वविख्यात है।
कला में नवीनता लाने के लिए युवा चित्रकार नए रंगों और तकनीकों का प्रयोग करते हैं।
Puraatanata ↔ आधुनिकता
ऐतिहासिक खंडहर अपनी पुरातनता से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को नहीं भूलना चाहिए।
Praatah ↔ सायं
प्रातः काल का भ्रमण स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए वरदान माना गया है।
सायं के समय मंदिर में शंख और घंटों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
Poorvaahn ↔ अपराह्न
कार्यालय की महत्वपूर्ण बैठक पूर्वाह्न दस बजे आयोजित की गई है।
अपराह्न के समय धूप ढलने पर बच्चे मैदान में खेलने के लिए निकलते हैं।
Paurvaahnik ↔ अपराह्निक
वैदिक अनुष्ठानों में पौर्वाह्निक कृत्यों का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
अपराह्निक सभा में दिन भर के निर्णयों की समीक्षा की गई।
Pratyush ↔ प्रदोष
प्रत्यूष वेला में पूर्व दिशा में उगते सूर्य की स्वर्णिम किरणें अद्भुत लगती हैं।
प्रदोष काल में शिव मंदिर में विशेष दीप प्रज्वलित किए जाते हैं।
Praatahkaal ↔ सायंकाल
प्रातःकाल की स्वच्छ वायु में योग करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
सायंकाल की आरती में सम्मिलित होने के लिए मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी।
Poorvasandhya ↔ उषावेला
स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रपति ने राष्ट्र को संबोधित किया।
उषावेला में सूर्योदय होते ही नए दिन का हर्षोल्लास शुरू हुआ।
Praarambh ↔ समापन
शुभ कार्य का प्रारंभ सदैव ईश्वर वंदना के साथ किया जाता है।
वार्षिक खेल महोत्सव का समापन राष्ट्रगान और पुरस्कार वितरण के साथ हुआ।
Pratham ↔ अंतिम
दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम आने वाले धावक को स्वर्ण पदक मिला।
अभियान के अंतिम चरण में सभी सैनिकों ने पूरी शक्ति झोंक दी।
Poorvavartee ↔ परवर्ती
पूर्ववर्ती सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों को नए मंत्रिमंडल ने भी जारी रखा।
परवर्ती शासकों की अकर्मण्यता के कारण विशाल साम्राज्य का पतन हो गया।
Poorvagaamee ↔ पश्चगामी
वैज्ञानिक सोच मानव समाज को पूर्वगामी दिशा में आगे ले जाती है।
अंधविश्वास और कुरीतियां समाज को पश्चगामी बनाती हैं।
Poorvaardh ↔ उत्तरार्ध
बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में भारत में स्वाधीनता संग्राम अपने चरम पर था।
सदी के उत्तरार्ध में सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान में क्रांति आई।
Haaliya ↔ पुरातन
हालिया सर्वेक्षण के अनुसार युवाओं में तकनीकी शिक्षा के प्रति रुझान बढ़ा है।
पुरातन परंपराओं में प्रकृति संरक्षण के कई सुंदर नियम निहित हैं।
Pal ↔ सदी
हवाई दुर्घटना में एक ही पल में सैकड़ों जिंदगियां काल के गाल में समा गईं।
गुलामी की बेड़ियों को काटने में देश को लगभग एक पूरी सदी लग गई।
Kishoraavastha ↔ प्रौढ़ावस्था
किशोरावस्था में शारीरिक और मानसिक बदलावों के कारण उचित मार्गदर्शन आवश्यक है।
प्रौढ़ावस्था में मनुष्य अपने अनुभवों से गंभीर और परिपक्व निर्णय लेता है।
Vasant ↔ पतझड़
वसन्त ऋतु में उपवन में रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं और प्रकृति मुस्काती है।
पतझड़ के आते ही पेड़ों के सूखे पत्ते टूटकर धरती पर बिखर जाते हैं।
Praacheenakaal ↔ आधुनिककाल
प्राचीनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय विश्व भर के विद्वानों का प्रमुख केंद्र था।
आधुनिककाल में ऑनलाइन शिक्षा ने ज्ञान को घर-घर तक सुलभ बना दिया है।
Prabhaatavela ↔ सांध्यवेला
प्रभातवेला में पक्षियों का चहचहाना और बहती शीतल बयार मन मोह लेती है।
सांध्यवेला में सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देखने लोग समुद्र तट पर एकत्र होते हैं।
Praarambhik ↔ अंतिम
प्रारंभिक चरण में नए व्यवसाय में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रतियोगिता के अंतिम चरण में केवल दो सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी ही पहुंचे।
Praakkaaleen ↔ उत्तरकालीन
प्राक्कालीन सभ्यताओं के अवशेष सिंधु घाटी में आज भी दिखाई देते हैं।
उत्तरकालीन स्थापत्य कला में आधुनिक तकनीकों का गहरा प्रभाव झलकता है।
Navayug ↔ पुरातन-युग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन के साथ तकनीकी नवयुग की शुरुआत हुई है।
पुरातन-युग में संदेश भेजने के लिए कबूतरों और दूतों का उपयोग किया जाता था।
Paakshik ↔ वार्षिक
साहित्यिक पत्रिका पाक्षिक रूप से हर पंद्रह दिन में प्रकाशित होती है।
विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह एक प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव है।
Paraakrama ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय पराक्रम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paraakramee ↔ कायर
संकट और विपत्ति के समय पराक्रमी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yoddhaa ↔ पलायनवादी
संकट और विपत्ति के समय योद्धा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायनवादी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aparaajeya ↔ पराजेय
संकट और विपत्ति के समय अपराजेय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayadaana ↔ प्राणदंड
संकट और विपत्ति के समय अभयदान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्राणदंड का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Prataapee ↔ तेजहीन
संकट और विपत्ति के समय प्रतापी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने तेजहीन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Purushaartha ↔ क्लीवता
संकट और विपत्ति के समय पुरुषार्थ का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने क्लीवता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paurusha ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय पौरुष का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Mukaabalaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय मुकाबला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saamanaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय सामना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aakramana ↔ प्रतिरक्षा
संकट और विपत्ति के समय आक्रमण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aaghaata ↔ प्रत्याघात
संकट और विपत्ति के समय आघात का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रत्याघात का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Prahaara ↔ रोक
संकट और विपत्ति के समय प्रहार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vaara ↔ प्रतिवार
संकट और विपत्ति के समय वार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिवार का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeyataa ↔ पराजेयता
संकट और विपत्ति के समय अजेयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेयता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saahasa-pradarshana ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय साहस-प्रदर्शन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Praknpana ↔ स्थिरता
संकट और विपत्ति के समय प्रकंपन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने स्थिरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adiga-kadama ↔ पीछे-हटना
संकट और विपत्ति के समय अडिग-कदम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पीछे-हटना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeya-durga ↔ पतनशील-किला
संकट और विपत्ति के समय अजेय-दुर्ग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पतनशील-किला का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Paanditya ↔ मूर्खता
विद्या और बौद्धिक विकास में पांडित्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaavaana ↔ मूढ़
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paarngata ↔ अनाड़ी
विद्या और बौद्धिक विकास में पारंगत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाड़ी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pathaneeya ↔ अपठनीय
विद्या और बौद्धिक विकास में पठनीय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अपठनीय की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Grnthakaara ↔ पाठक
विद्या और बौद्धिक विकास में ग्रंथकार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में पाठक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pravaktaa ↔ श्रोता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रवक्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में श्रोता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pareekshaka ↔ परीक्षार्थी
विद्या और बौद्धिक विकास में परीक्षक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में परीक्षार्थी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।