Parmaarth ↔ स्वार्थ
संत कबीर ने जीवन भर परमार्थ और ज्ञान के प्रचार को ही अपना कर्तव्य माना।
अंधे स्वार्थ के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने सगे-संबंधियों को भी हानि पहुँचा बैठता है।
अक्षर 'प' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 101–150 / कुल: 277):
Parmaarth ↔ स्वार्थ
संत कबीर ने जीवन भर परमार्थ और ज्ञान के प्रचार को ही अपना कर्तव्य माना।
अंधे स्वार्थ के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने सगे-संबंधियों को भी हानि पहुँचा बैठता है।
Pravritti ↔ निवृत्ति
गृहस्थ आश्रम में सामाजिक व पारिवारिक कर्तव्यों की ओर मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है।
वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम में व्यक्ति सांसारिक मोह से निवृत्ति की ओर अग्रसर होता है।
Shreya ↔ प्रेय
बुद्धिमान व्यक्ति श्रेय के मार्ग को चुनते हैं जो आत्मिक कल्याण की ओर ले जाता है।
अज्ञानी जन केवल प्रेय अर्थात् तात्कालिक सांसारिक सुखों के पीछे भागते रहते हैं।
Paavan ↔ कलुषित
गंगा के पावन जल और संतों की वाणी ने संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर दिया।
कुत्सित विचारों से कलुषित मन कभी ईश्वर की सच्ची भक्ति नहीं कर सकता।
Aparigraha ↔ परिग्रह
अपरिग्रह का पालन करने वाला साधु केवल जीवन-यापन हेतु आवश्यक वस्तुएँ ही रखता है।
धन-संपत्ति के अत्यधिक परिग्रह से समाज में आर्थिक विषमता और अशांति फैलती है।
Paarlaukik ↔ ऐहिक
धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य पारलौकिक कल्याण और सद्गति की कामना करना होता है।
ऐहिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परिश्रम करना भी आवश्यक है।
Punyavaan ↔ पापी
पुण्यवान पुरुष का जीवन सदा दूसरों के आंसू पोंछने में व्यतीत होता है।
पापी मनुष्य अपने बुरे कर्मों के कारण समाज में भय और घृणा का पात्र बनता है।
Punyaatma ↔ दुरात्मा
पुण्यात्मा साधक अपने तपोबल से संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर देते हैं।
दुरात्मा व्यक्ति दूसरों की प्रगति देखकर भीतर ही भीतर ईर्ष्या से जलता रहता है।
Samdarshi ↔ पक्षपाती
सच्चा संत सभी प्राणियों के प्रति समदर्शी दृष्टि रखकर किसी में भेदभाव नहीं करता।
पक्षपाती अधिकारी अपने संबंधियों को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास करता है।
Nishpaksh ↔ पक्षपाती
निष्पक्ष पत्रकारिता ही किसी भी स्वतंत्र लोकतंत्र का चौथा मजबूत स्तंभ होती है।
पक्षपाती मीडिया समाचारों को तोड़-मरोड़ कर जनता के सामने पेश करता है।
Paropkaari ↔ स्वार्थी
परोपकारी व्यक्ति अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा निर्धनों के कल्याण में लगा देता है।
स्वार्थी मनुष्य केवल अपने निजी लाभ के लिए दूसरों का उपयोग करता है।
Pratishtha ↔ अप्रतिष्ठा
सत्य और निष्ठा के साथ कार्य करके उसने समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त की।
झूठे वादों के कारण राजनेता को जनता के बीच अप्रतिष्ठा झेलनी पड़ी।
Poojya ↔ अपूज्य
माता-पिता और गुरुजन प्रत्येक व्यक्ति के लिए पूज्य होते हैं।
पापकर्मों में डूबा व्यक्ति अपने व्यवहार से स्वयं को अपूज्य बना लेता है।
Prashansneeya ↔ निंदनीय
आपदा के समय युवाओं का राहत कार्य अत्यंत प्रशंसनीय और प्रेरणादायक रहा।
संकट के समय दवाओं की कालाबाजारी करना एक अत्यंत निंदनीय और घृणित कृत्य है।
Punyakarm ↔ पापकर्म
भूखों को अन्न खिलाना और प्यासों को जल पिलाना सबसे बड़ा पुण्यकर्म है।
मासूम जीवों की हत्या करना घोर पापकर्म है जिसकी भरपाई संभव नहीं।
Paardarshi ↔ संदेहास्पद
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाकर ही युवाओं में विश्वास बहाल किया जा सकता है।
संदेहास्पद सौदों के उजागर होने पर पूरी चयन समिति को भंग कर दिया गया।
Parhit ↔ स्वहित
परहित सरिस धरम नहिं भाई अर्थात् दूसरों का भला करने से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
जो मनुष्य केवल स्वहित में लीन रहता है वह कभी सच्चे मित्र नहीं बना पाता।
Sahridaya ↔ पाषाणहृदय
सहृदय डॉक्टर ने गरीब मरीज की लाचारी देखकर उसकी पूरी फीस माफ कर दी।
पाषाणहृदय साहूकार ने अनाथ बच्चों की गिड़गिड़ाहट पर भी कोई दया नहीं दिखाई।
Praamaanikata ↔ अप्रामाणिकता
इतिहासकार ने प्राचीन शिलालेखों के आधार पर घटना की प्रामाणिकता सिद्ध की।
दस्तावेजों में अप्रामाणिकता पाए जाने पर पुलिस ने फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया।
Pratishthaavaan ↔ कलंकित
प्रतिष्ठावान उद्योगपति ने शहर में निःशुल्क अस्पताल का निर्माण करवा कर ख्याति पाई।
घूसखोरी के आरोप सिद्ध होने पर पूर्व मंत्री का नाम सदा के लिए कलंकित हो गया।
Paropkaarita ↔ स्वार्थपरता
भारतीय संस्कृति में परोपकारिता को सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
समाज में बढ़ती स्वार्थपरता कमजोर वर्गों की उपेक्षा का कारण बन रही है।
Paaltu ↔ जंगली
कुत्ता और गाय मनुष्य के सबसे वफादार और उपयोगी पालतू पशु हैं।
जंगली जानवरों का शिकार करना वन्यजीव संरक्षण कानून के अंतर्गत दंडनीय है।
Paalya ↔ अपाल्य
भेड़ और बकरी स्वभाव से पाल्य पशु हैं जिन्हें मनुष्य सरलता से पाल लेता है।
तेंदुआ और लकड़बग्घा अपाल्य जीव हैं जिनका स्वभाव स्वतंत्र और हिंसक रहता है।
Keet ↔ पतंग
मिट्टी में रहने वाला कीट पत्तियों को कुतर कर पोषण पाता है।
पतंग रात के समय जलती हुई लौ के चारों ओर मंडराता है।
Pakwa ↔ अपक्व
पक्व फल पेड़ से अपने आप टूटकर नीचे गिर जाते हैं।
अपक्व भोजन का सेवन करने से पाचन क्रिया बिगड़ सकती है।
Paachak ↔ अपाचक
भोजन के उपरांत भुने जीरे और हींग का चूर्ण पाचक औषधि का काम करता है।
अत्यधिक शीतल पेय भोजन के पाचन रस को धीमा करके अपाचक प्रभाव छोड़ता है।
Pyaas ↔ तृप्ति
धूप में दौड़ने के बाद कंठ सूख गया और असहनीय प्यास लगने लगी।
मटके का शीतल जल पीते ही तन-मन को अपार तृप्ति मिल गई।
Sadaabhojan ↔ पकवान
दाल, चावल और रोटी का सदाभोजन नित्य प्रति स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है।
विवाह समारोह में बने घी और मावे के पकवान अधिक खाने से पेट भारी हो जाता है।
Poshak ↔ अपोषक
अंकुरित अनाज और बादाम शरीर के लिए अत्यंत पोषक आहार सिद्ध होते हैं।
मैदे से बने तले हुए स्नैक्स अपोषक होते हैं और केवल पेट भरते हैं।
Poushtik ↔ हानिकारक
बढ़ते बच्चों के लिए दूध, घी और फल पौष्टिक भोजन के प्रमुख घटक हैं।
सड़े तेल में तले फास्ट फूड का नियमित सेवन लिवर के लिए हानिकारक है।
Peya ↔ अपेय
नारियल पानी और नीबू शिकंजी गर्मियों में स्वास्थ्यवर्धक पेय माने जाते हैं।
मदिरा और दूषित नाले का पानी मानव स्वास्थ्य के लिए सर्वथा अपेय है।
Alpaahaar ↔ पूर्णाहार
यात्रा के दौरान उसने केवल फल और चाय का अल्पाहार लिया।
दोपहर के समय दाल-चावल, रोटी और सब्जी का पूर्णाहार ग्रहण करना चाहिए।
Mitaahaari ↔ पेटू
मिताहारी व्यक्ति सदा स्वस्थ रहता है और कभी अपच का शिकार नहीं होता।
पेटू मनुष्य स्वाद के चक्कर में आवश्यकता से अधिक ठूंस-ठूंस कर खा लेता है।
Upvaas ↔ पारण
एकादशी के दिन श्रद्धालु निर्जल उपवास रखकर आत्मशुद्धि करते हैं।
अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पूजा करके पारण किया जाता है।
Pipaasa ↔ तृप्ति
रेगिस्तान की तपती रेत में मुसाफिर की पिपासा बढ़ती ही जा रही थी।
शीतल जल का घूंट भरते ही उसकी पिपासा शांत हो गई और तृप्ति मिली।
Pakwata ↔ अपक्वता
केले में पक्वता आते ही छिलका पीला और गूदा मीठा हो जाता है।
अंगूर में अपक्वता रहने पर उसका स्वाद कसैला और खट्टा लगता है।
Doodhiya ↔ पानीदार
काजू और मलाई से बनी शाही पनीर की ग्रेवी एकदम दूधिया और गाढ़ी थी।
ढाबे की दाल में पानीदार झोल अधिक था और दाल के दाने कम।
Sattoo ↔ पकवान
गर्मियों में भुने चने का सत्तू घोलकर पीने से लू नहीं लगती।
त्योहारों पर घी और मेवे के पकवान घर-घर में बनाए जाते हैं।
Paachakata ↔ अपाचकता
हींग और अजवाइन मिलाने से दाल की पाचकता कई गुना बढ़ जाती है।
कच्चे मैदे की अपाचकता आंतों में रुकावट पैदा कर सकती है।
Praataraash ↔ रात्रिभोज
स्वस्थ दिनचर्या के लिए पौष्टिक प्रातराश लेना अत्यंत आवश्यक है।
सोने से कम से कम दो घंटे पहले हल्का रात्रिभोज कर लेना चाहिए।
Pishta ↔ अपिष्ट
चक्की में पिष्ट गेहूं के आटे से कोमल रोटियाँ बनती हैं।
अपिष्ट साबुत गेहूं को उबालकर दलिया बनाया जाता है।
Poori ↔ सादी-रोटी
त्योहारों पर हलवे के साथ गरमागरम पूरी बनाई जाती है।
दैनिक आहार में बिना तेल की सादी-रोटी खाना ही सर्वोत्तम है।
Chaashni ↔ पानी
रसगुल्लों को मीठी चाशनी में डुबोकर रखा जाता है।
प्यास बुझाने के लिए सादा पानी ही सबसे उत्तम पेय है।
Gaadhaapan ↔ पतलापन
मलाई और काजू के पेस्ट से खीर में गाढ़ापन आ गया।
अधिक पानी डाल देने से कढ़ी का पतलापन बढ़ गया।
Prabhu ↔ दास
भक्त हनुमान ने अपने प्रभु श्रीराम की सेवा में संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
स्वामी के प्रति निष्ठावान दास कठिन घड़ी में भी कभी पलायन नहीं करता।
Maargdarshak ↔ पथिक
पहाड़ों के दुर्गम रास्तों पर अनुभवी मार्गदर्शक की सहायता अनिवार्य होती है।
थका हुआ पथिक विश्राम करने के लिए घने बरगद की छाया में बैठ गया।
Putra ↔ पुत्री
श्रवण कुमार एक आदर्श पुत्र थे जिन्होंने माता-पिता को तीर्थयात्रा कराई।
पुत्री दोनों कुलों को अपनी योग्यता और संस्कारों से गौरवान्वित करती है।
Pota ↔ पोती
पोता अपने दादा जी की उंगली पकड़कर प्रतिदिन पार्क में टहलता है।
पोती ने दादी जी की चश्मे की खोज करके उन्हें आदरपूर्वक थमाया।
Paahuna ↔ यजमान
गाँव में दामाद का पाहुना के रूप में भव्य और भावुक स्वागत किया गया।
यजमान ने धार्मिक अनुष्ठान के बाद पुरोहितों और आगंतुकों को दक्षिणा दी।
Saajhedaar ↔ प्रतिद्वंद्वी
दोनों साझेदार मिलकर नई कंपनी को उन्नति के शिखर पर ले गए।
बाजार में प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने ग्राहकों को लुभाने के लिए छूट की घोषणा की।