Sajjanta ↔ दुर्जनता
सज्जनता का गुण यही है कि वह दुष्टों के अपशब्दों का उत्तर भी मधुरता से देता है।
दुर्जनता और कुटिलता के कारण कोई भी सज्जन उसके साथ बैठना पसंद नहीं करता।
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Sajjanta ↔ दुर्जनता
सज्जनता का गुण यही है कि वह दुष्टों के अपशब्दों का उत्तर भी मधुरता से देता है।
दुर्जनता और कुटिलता के कारण कोई भी सज्जन उसके साथ बैठना पसंद नहीं करता।
Dvipada ↔ चतुष्पद
पक्षी द्विपद प्राणी होते हैं जो दो पैरों पर चलते हैं और पंखों से उड़ते हैं।
घोड़ा और हाथी चतुष्पद जीव हैं जो चार मजबूत पैरों के सहारे भारी बोझ उठाते हैं।
Nishaachar ↔ दिवाचर
उल्लू और चमगादड़ निशाचर प्राणी हैं जो रात के अंधकार में सक्रिय होते हैं।
चिड़िया और कौआ दिवाचर पक्षी हैं जो सूर्योदय के साथ चहचहाने लगते हैं।
Danshtree ↔ अदंष्ट्री
चीता और सूअर दंष्ट्री प्राणी हैं जिनके नुकीले दांत शिकार को चीर डालते हैं।
कछुआ और पक्षी अदंष्ट्री जीव हैं जिनके मुख में दांतों के बजाय चोंच या जबड़ा होता है।
Dudhaaru ↔ सूखा
किसान के पास दो दुधारू गायें हैं जो रोज बीस लीटर दूध देती हैं।
सूखा गाय को भी किसान प्रेम से पौष्टिक चारा देकर सेवा करता है।
Dahi ↔ दूध
गर्मी के दिनों में ठंडा दही पेट को ठंडक और प्रोबायोटिक लाभ देता है।
गुनगुना मीठा दूध रात को सोने से पहले पीने से अच्छी नींद आती है।
Doodhiya ↔ पानीदार
काजू और मलाई से बनी शाही पनीर की ग्रेवी एकदम दूधिया और गाढ़ी थी।
ढाबे की दाल में पानीदार झोल अधिक था और दाल के दाने कम।
Daanedaar ↔ चिकना
शुद्ध खोए से बना दानेदार कलाकंद मुंह में घुल जाता है।
मिक्सी में पिसी हुई चिकनी चटनी समोसे के साथ बहुत अच्छी लगती है।
Dhoopit ↔ कच्चा
कोयले के धुएं से धूपित रायता एक विशेष सोंधा स्वाद देता है।
कच्चा दूध बिना उबाले पीने से पेट में जीवाणु जा सकते हैं।
Madira ↔ दूध
मदिरा का सेवन बुद्धि और स्वास्थ्य दोनों का विनाश करता है।
गाय का ताजा दूध तन और मन को पवित्रता और बल प्रदान करता है।
Daal-roti ↔ छप्पन-भोग
संतोषी व्यक्ति अपनी गाढ़ी कमाई की दाल-रोटी में ही परम सुख मानता है।
मंदिर के उत्सव में भगवान को छप्पन-भोग का भव्य प्रसाद अर्पित किया गया।
Dost ↔ दुश्मन
बचपन का सच्चा दोस्त हर सुख-दुख में बिना बुलाए साथ निभाता है।
छिपकर वार करने वाले दुश्मन से सावधान रहना ही समझदारी है।
Dosti ↔ दुश्मनी
उनकी पक्की दोस्ती कॉलेज के दिनों से लेकर आज तक अटूट बनी हुई है।
जमीन के छोटे टुकड़े के लिए भाइयों में पीढ़ियों पुरानी दुश्मनी पैदा हो गई।
Prabhu ↔ दास
भक्त हनुमान ने अपने प्रभु श्रीराम की सेवा में संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
स्वामी के प्रति निष्ठावान दास कठिन घड़ी में भी कभी पलायन नहीं करता।
Jeth ↔ देवर
पारंपरिक परिवार में जेठ का आदर ससुर के समान माना जाता है।
देवर और भाभी का रिश्ता पारिवारिक हंसी-मजाक और आत्मीयता से भरा होता है।
Bahoo ↔ दामाद
सुलक्षणा बहू ने अपनी सेवा और व्यवहार से पूरे ससुराल का दिल जीत लिया।
दामाद के घर आने पर ससुराल में विशेष सत्कार और दावत का प्रबंध किया गया।
Nanad ↔ देवर
ननद ने अपनी नई भाभी का गृह-प्रवेश में आरती उतारकर स्वागत किया।
देवर अपनी भाभी के घरेलू कामों में हमेशा हाथ बंटाता था।
Daada ↔ दादी
दादा जी शाम को पोते-पोतियों को नैतिक मूल्यों की रोचक कहानियाँ सुनाते हैं।
दादी जी परिवार की कुशल क्षेम के लिए नित्य पूजा-अर्चना करती हैं।
Darshak ↔ अभिनेता
नाटक के मार्मिक दृश्य को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध और भावुक हो गए।
कुशल अभिनेता ने अपने जीवंत अभिनय से मंच पर पात्र को साकार कर दिया।
Saahukaar ↔ देनदार
प्राचीन समय में साहूकार ग्रामीणों को फसल की बुवाई के लिए ऋण देते थे।
ईमानदार देनदार ने फसल कटते ही साहूकार का संपूर्ण हिसाब चुकता कर दिया।
Doolha ↔ दुल्हन
घोड़ी पर सवार दूल्हा बारात के साथ विवाह मंडप की ओर अग्रसर हुआ।
लाल जोड़े में सजी दुल्हन का स्वागत मंगल गीतों और आरती से किया गया।
Jethaani ↔ देवरानी
जेठानी ने घर की बड़ी बहू के रूप में रसोई और पूजा का प्रबंध संभाला।
देवरानी अपनी जेठानी का आदर बड़ी बहन की तरह करती थी।
Vaibhav ↔ दैन्य
राजमहल का अद्वितीय वैभव देखकर सभी विदेशी राजदूत चकित रह गए।
भीषण अकाल के कारण संपूर्ण जनपद में दैन्य और लाचारी छा गई।
Aishvarya ↔ दारिद्र्य
अहंकारी मनुष्य अत्यधिक ऐश्वर्य पाकर भी मानसिक शांति नहीं पाता।
कठोर श्रम और निरंतर निष्ठा से परिवार ने दारिद्र्य पर विजय प्राप्त की।
Sampannata ↔ दरिद्रता
हरित क्रांति के फलस्वरूप गांव में आर्थिक संपन्नता लौट आई।
उचित रोजगार के अभाव में समाज के कई वर्ग दरिद्रता में जीवन बिता रहे हैं।
Dhanaadhya ↔ कंगाल
धनाढ्य सेठ ने नगर में विशाल चिकित्सालय का निर्माण करवाया।
जुआ खेलने की लत ने अमीर व्यापारी को एक ही वर्ष में कंगाल बना दिया।
Kuber ↔ दरिद्र
व्यापार में अप्रत्याशित सफलता से वह रातों-रात कुबेर बन बैठा।
सच्चे संत दरिद्र की झोपड़ी में भी प्रेम से भोजन ग्रहण करते हैं।
Daulatmand ↔ मुफ़लिस
दौलतमंद लोग समाज के वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए धन दान करते हैं।
अचानक आई मंदी ने कई संपन्न परिवारों को मुफ़लिस कर दिया।
Dhaneemaani ↔ दीनहीन
शहर के सभी धनीमानी लोग दान उत्सव में सम्मिलित हुए।
कड़ाके की ठंड में दीनहीन लोगों को गर्म कंबल बांटे गए।
Dhanaagaman ↔ धनहानि
त्योहारों के मौसम में दुकानों में बिक्री बढ़ते ही धनागमन बढ़ जाता है।
गलत निवेश योजनाओं में पूंजी लगाने से व्यापारियों को भयंकर धनहानि हुई।
Divaaliya ↔ समर्थ
सट्टे में भारी नुकसान उठाने के बाद व्यापारी दिवालिया घोषित हो गया।
वित्तीय रूप से समर्थ कंपनी ने घाटे में चल रहे कारखाने को खरीद लिया।
Rinashodhan ↔ दिवालियापन
नियमित किस्तों द्वारा ऋणशोधन करने से ग्राहक का क्रेडिट स्कोर सुधरता है।
भारी कर्ज न चुका पाने पर न्यायालय ने कंपनी के दिवालियापन पर मुहर लगाई।
Dendaari ↔ लेनदारी
व्यापार में देनदारी बढ़ते ही संस्था की साख प्रभावित होने लगती है।
बाजार से अपनी पुरानी लेनदारी वसूल करने के लिए कंपनी ने कड़े कदम उठाए।
Parisampatti ↔ देनदारी
भूमि और भवन किसी भी औद्योगिक घराने की सबसे ठोस परिसंपत्ति होते हैं।
अनियंत्रित ऋणों के कारण कंपनी की देनदारी उसकी कुल संपत्ति से अधिक हो गई।
Aasti ↔ दायित्व
तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) में हर कंपनी की आस्ति का स्पष्ट ब्यौरा होता है।
बैंक ऋण समय पर न लौटाने से यह कानूनी दायित्व बन जाता है।
Dhanaadesh ↔ नकदी
बड़ी व्यावसायिक खरीद का भुगतान धनादेश द्वारा करना अधिक सुरक्षित रहता है।
सब्जी मंडी में छोटे विक्रेताओं को तुरंत नकदी में भुगतान करना पड़ता है।
Dalaali ↔ मजदूरी
जमीन के सौदे में बिचौलिए ने दोनों पक्षों से भारी दलाली वसूल की।
दिन भर धूप में ईंटें ढोने के बाद श्रमिक को उसकी पसीने की मजदूरी मिली।
Vaibhavshaalee ↔ दीन
वैभवशाली महलों में रहने वाले राजा को प्रजा की कठिनाइयों का आभास होना चाहिए।
दीन और असहाय वृद्धों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।
Dhanvaan ↔ कंगाल
धनवान व्यक्ति यदि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे तो कई बुराइयां मिट सकती हैं।
व्यापार में धोखाधड़ी का शिकार होकर वह देखते ही देखते कंगाल हो गया।
Dhanaarjan ↔ धनक्षय
नैतिक मार्ग पर चलकर किया गया धनार्जन ही परिवार में स्थायी सुख लाता है।
जुआ और नशा धनक्षय के सबसे बड़े और विनाशकारी कारण माने गए हैं।
Dhankuber ↔ कंगाल
विशाल बहुराष्ट्रीय कंपनियों का स्वामी नगर का सबसे बड़ा धनकुबेर माना जाता है।
सट्टेबाजी के दलदल में फंसकर वह धनकुबेर से कंगाल बन गया।
Tatpar ↔ ढीला
सैनिक देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने को सदा तत्पर रहते हैं।
ढीला और सुस्त कर्मचारी समय पर आदेशों का पालन करने में असफल रहता है।
Rachanaatmak ↔ ध्वंसात्मक
युवाओं की असीम ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाना राष्ट्रहित में है।
अराजक तत्वों की ध्वंसात्मक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
Daayitva ↔ गैरजिम्मेदारी
एक जागरूक नागरिक होने के नाते मतदान करना हमारा परम दायित्व है।
कार्यस्थल पर गैरजिम्मेदारी बरतने से पूरी टीम की साख पर धब्बा लग सकता है।
Dhyeyanishth ↔ लक्ष्यहीन
ध्येयनिष्ठ युवा हर बाधा को पार करते हुए सफलता के शिखर पर पहुंचते हैं।
स्पष्ट योजना न होने से लक्ष्यहीन जीवन जीने वाले लोग बीच में ही भटक जाते हैं।
Lakshyavedhee ↔ दिशाहीन
अर्जुन की लक्ष्यवेधी दृष्टि केवल चिड़िया की आंख पर केंद्रित थी।
दिशाहीन प्रयासों से बहुमूल्य समय और ऊर्जा व्यर्थ ही नष्ट होती है।
Dridhasankalp ↔ अनिर्णय
दृढ़संकल्प के बल पर पर्वतारोही ने माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह की।
लगातार अनिर्णय की स्थिति में बने रहने से अच्छे अवसर हाथ से निकल जाते हैं।
Jeevikopaarjan ↔ दानवृत्ति
ईमानदारी से किया गया जीविकोपार्जन व्यक्ति को गौरव और संतोष प्रदान करता है।
सक्षम होते हुए भी दानवृत्ति पर निर्भर रहना मनुष्य के आत्मसम्मान को गिराता है।
Susaadhya ↔ दुःसाध्य
पारस्परिक सहयोग और तालमेल से जटिल कार्य भी सुसाध्य बन जाता है।
दुर्गम बर्फीले पहाड़ों पर चढ़ना अकेले किसी के लिए भी दुःसाध्य कार्य है।
Kaaryatatpar ↔ ढीला-ढाला
कार्यतत्पर सिपाही ने संकेत मिलते ही त्वरित कार्यवाही की।
ढीला-ढाला रवैया अपनाने वाले कर्मचारियों को कार्यालय से चेतावनी पत्र दिया गया।