Rag ↔ द्वेष
सांसारिक वस्तुओं के प्रति अंधा राग ही दुखों का मूल कारण बनता है।
दूसरों की उन्नति देखकर मन में द्वेष की भावना नहीं लानी चाहिए।
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Rag ↔ द्वेष
सांसारिक वस्तुओं के प्रति अंधा राग ही दुखों का मूल कारण बनता है।
दूसरों की उन्नति देखकर मन में द्वेष की भावना नहीं लानी चाहिए।
Dhairya ↔ अधैर्य
कठिनाइयों के बीच धैर्य रखना ही सफल मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान है।
जल्दबाजी में अधैर्य दिखाना बनते हुए काम को बिगाड़ देता है।
Daya ↔ निर्दयता
दीन-दुखियों पर दया करना मानव धर्म का सबसे प्रमुख अंग है।
लाचार पशुओं पर लाठी बरसाना मनुष्य की निर्दयता दर्शाता है।
Kshama ↔ दंड
क्षमा बलवानों का आभूषण है जो शत्रु को भी मित्र बना देती है।
न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड सुनाया।
Preeti ↔ द्वेष
परस्पर प्रीति और सौहार्द से ही परिवार का वातावरण सुखद रहता है।
हृदय में द्वेष रखने वाला मनुष्य कभी किसी का भला नहीं सोच सकता।
Subuddhi ↔ दुर्बुद्धि
ईश्वर से प्रार्थना है कि वह सबको सुबुद्धि और सद्विचार प्रदान करे।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों का अधिकार छीनने का प्रयास किया।
Sadbhavna ↔ दुर्भावना
विभिन्न समुदायों के बीच सद्भावना राष्ट्र की अखंडता का आधार है।
मन में दुर्भावना रखकर किया गया कोई भी कार्य सफल नहीं होता।
Dheer ↔ अधीर
विपत्तियों के आने पर धीर पुरुष कभी अपना संतुलन नहीं खोते।
ट्रेन के आने में देरी देखकर यात्री अधीर होने लगे।
Sahasi ↔ डरपोक
साहसी नाविकों ने उफनते समुद्र की विशाल लहरों को पार कर लिया।
डरपोक व्यक्ति छोटी सी परेशानी देखकर ही मैदान छोड़ देता है।
Harshit ↔ दुखी
अच्छे अंक प्राप्त करके छात्र का मन अत्यंत हर्षित था।
बीमारी के कारण असहाय रोगी दुखी और व्याकुल दिखाई दिया।
Sadashay ↔ दुराशय
सदाशय महापुरुष सदैव दूसरों के उत्थान का विचार करते हैं।
दुराशय व्यक्ति के मन में सदैव दूसरों को नीचा दिखाने का कुचक्र चलता रहता है।
Adheerta ↔ धैर्य
अधीरता में लिया गया कदम अक्सर नुकसान का कारण बनता है।
गंभीर संकट में भी धैर्य बनाए रखना महापुरुषों का लक्षण है।
Sadpravritti ↔ दुष्प्रवृत्ति
सत्संगति से बालकों में सद्प्रवृत्ति का विकास होता है।
बुरी संगति मन में दुष्प्रवृत्ति को जन्म देती है।
Sadbhavi ↔ दुर्भावी
सद्भावी पड़ोसी सुख और दुख दोनों में सदैव साथ खड़े रहते हैं।
दुर्भावी शत्रु सदा दूसरे के पतन की प्रतीक्षा में रहता है।
Saukhya ↔ दुख
सरल जीवन और सीमित इच्छाएं ही सच्चे सौख्य का रहस्य हैं।
लोभ और ईर्ष्या मनुष्य को कभी न खत्म होने वाले दुख में धकेलते हैं।
Daah ↔ सद्भाव
दूसरों की समृद्धि देखकर मन में डाह पालना अपनी ही काया को सुखाना है।
सद्भाव रखने वाला व्यक्ति सबकी प्रगति पर प्रसन्न होता है।
Sukhad ↔ दुखद
पुराने मित्रों से वर्षों बाद मिलना एक सुखद संयोग था।
विमान दुर्घटना का यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
Sauhardapoorna ↔ द्वेषपूर्ण
दोनों देशों के नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण वार्ता संपन्न हुई।
द्वेषपूर्ण प्रचार से समाज में कटुता और अविश्वास बढ़ता है।
Dayavan ↔ निर्दयी
दयावान डॉक्टर ने गरीब मरीजों का निःशुल्क उपचार किया।
निर्दयी बंधुआ मालिक मजदूरों से रात-दिन बिना वेतन काम कराता था।
Deerghkaay ↔ लघुकाय
दीर्घकाय रक्षक द्वार पर प्रहरी की भाँति दृढ़ता से खड़ा था।
लघुकाय बालक ने अपनी फुर्ती से बड़े-बड़े खिलाड़ियों को चकित कर दिया।
Netraheen ↔ दृष्टिवान
नेत्रहीन व्यक्तियों में स्पर्श और श्रवण की अद्भुत संवेदनशीलता पाई जाती है।
दृष्टिवान लोगों को अपनी आँखों की सुरक्षा और उचित देखभाल के प्रति सचेत रहना चाहिए।
Dakshin ↔ वाम
हृदय शरीर के वाम भाग में और यकृत दक्षिण भाग में स्थित होता है।
वाम हाथ की अपेक्षा अधिकांश लोग दैनिक कार्यों में दक्षिण हाथ का प्रयोग करते हैं।
Deh ↔ विदेह
पंचतत्वों से निर्मित यह भौतिक देह नश्वर है और समय के साथ ढल जाती है।
राजा जनक देह में रहते हुए भी आसक्तियों से परे होकर विदेह कहलाते थे।
Drishtiheen ↔ दृष्टिमान
दृष्टिहीन संगीतकार ने अपनी कर्ण-संवेदना के सहारे सुरों का अनूठा संसार रच दिया।
दृष्टिमान दर्शक प्रकृति के सतरंगी दृश्यों का आनंद अपनी आँखों से लेते हैं।
Daayaan ↔ बायाँ
लेखन और प्रमुख कार्यों के लिए अधिकांश लोग दायाँ हाथ प्राथमिकता से प्रयोग करते हैं।
कुछ लोग जन्मजात रूप से बायाँ हाथ अधिक कुशलता और गति से उपयोग करने में दक्ष होते हैं।
Sumukha ↔ दुर्मुख
सदा प्रसन्न रहने वाले बालक का सुमुख देखकर हर किसी का मन आनंदित हो उठता है।
सदा क्रोध और कटुता में डूबे रहने वाले व्यक्ति का चेहरा दुर्मुख और विकृत प्रतीत होता है।
Dntaheena ↔ दंतयुक्त
चार माह के शिशु का मुख दंतहीन होता है, इसलिए वह केवल तरल आहार ही ग्रहण करता है।
वयस्क होने पर मनुष्य का मुख बत्तीस दांतों से युक्त और सुदृढ़ दंतयुक्त हो जाता है।
Dharm ↔ अधर्म
सत्य, अहिंसा और परोपकार का आचरण करना ही मानव का सच्चा धर्म है।
अधर्म का मार्ग अपनाने वाले दुष्टों का विनाश अंततः निश्चित होता है।
Sadaachaar ↔ दुराचार
विद्यालय में विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ सदाचार और अनुशासन की भी शिक्षा दी जाती है।
दुराचार और कुसंगति में लिप्त व्यक्ति अपने कुल और समाज की प्रतिष्ठा को कलंकित करता है।
Sadgun ↔ दुर्गुण
विनम्रता, सत्यवादिता और परोपकार जैसे सद्गुण व्यक्ति को महान बनाते हैं।
अहंकार, ईर्ष्या और लोभ जैसे दुर्गुण मनुष्य के समस्त पुण्यों को भस्म कर देते हैं।
Satkarm ↔ दुष्कर्म
जीवन में किए गए सत्कर्म ही मृत्यु के उपरांत व्यक्ति का नाम अमर रखते हैं।
दुष्कर्म करने वाला मनुष्य कानून की नजर से बच भी जाए, तो अंतरात्मा की अदालत से नहीं बच सकता।
Dharmaatma ↔ पापात्मा
धर्मात्मा पुरुष सदैव दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनकी सेवा करते हैं।
पापात्मा मनुष्य दूसरों का धन हड़पने और निर्दोषों को सताने में ही सुख खोजता है।
Sadaachaari ↔ दुराचारी
सदाचारी व्यक्ति समाज में जहाँ भी जाता है, अपने आचरण से सबका सम्मान पाता है।
दुराचारी व्यक्ति अपने नीच कर्मों के कारण अपनों के बीच भी तिरस्कृत रहता है।
Sadbuddhi ↔ दुर्बुद्धि
भगवान से प्रार्थना है कि वे सभी को सद्विचार और सद्बुद्धि प्रदान करें।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों के साथ संधि का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
Sadgati ↔ दुर्गति
पवित्र कर्मों और निर्मल मन से जीवन जीने वाले को सद्गति प्राप्त होती है।
जुआ और मद्यपान की लत के कारण उस धनाढ्य परिवार की घोर दुर्गति हो गई।
Sadvichaar ↔ दुर्विचार
सद्विचार मनुष्य के अंतःकरण को शांति और आनंद से भर देते हैं।
ईर्ष्या और द्वेष से उपजे दुर्विचार मनुष्य की मानसिक शांति को छीन लेते हैं।
Dharmnishth ↔ धर्मविमुख
धर्मनिष्ठ नागरिक नियमों और नैतिक मर्यादाओं का निष्ठापूर्वक पालन करता है।
कर्तव्य से धर्मविमुख होकर भागने वाला व्यक्ति समाज में विश्वसनीयता खो देता है।
Daan ↔ याचना
सच्चा दान वही है जो बिना किसी दिखावे और स्वार्थ के सुपात्र को दिया जाए।
स्वाभिमानी व्यक्ति कभी किसी के सामने सहायता के लिए याचना नहीं करता।
Dharmsammat ↔ धर्मविरुद्ध
शास्त्रों के अनुसार दीन-दुखियों की रक्षा करना ही धर्मसम्मत कर्म है।
किसी को धोखा देकर संपत्ति हड़पना धर्मविरुद्ध और दंडनीय आचरण है।
Punyaatma ↔ दुरात्मा
पुण्यात्मा साधक अपने तपोबल से संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर देते हैं।
दुरात्मा व्यक्ति दूसरों की प्रगति देखकर भीतर ही भीतर ईर्ष्या से जलता रहता है।
Mahaatma ↔ दुरात्मा
महात्मा बुद्ध ने दया और करुणा का उपदेश देकर मानवता का मार्गदर्शन किया।
दुरात्मा शासक ने अपने अहंकार की तुष्टि के लिए प्रजा पर भारी अत्याचार किए।
Avichal ↔ डांवाडोल
सत्य के प्रति उसकी निष्ठा कठिन से कठिन प्रलोभन के सामने भी अविचल रही।
कमजोर मनोबल वाले व्यक्ति का निर्णय थोड़ी-सी कठिनाई आते ही डांवाडोल हो जाता है।
Vishwaaspaatra ↔ दगाबाज
राजा ने अपने सबसे विश्वासपात्र मंत्री को राज्य का खजाना सौंपा।
दगाबाज शत्रु से भी अधिक घातक होता है क्योंकि वह पीठ पीछे वार करता है।
Hitaishi ↔ द्वेषी
सच्चा हितैषी वही है जो आपकी गलतियों पर पर्दा डालने के बजाय सही रास्ता दिखाए।
द्वेषी व्यक्ति दूसरों की उन्नति देखकर जलता है और षड्यंत्र रचता है।
Dharmparaayan ↔ धर्मभ्रष्ट
धर्मपरायण राजा के राज्य में प्रजा भय और अभाव से मुक्त होकर सुखपूर्वक रहती थी।
धर्मभ्रष्ट शासक ने प्रजा की संपदा को लूटकर अपने विलास पर व्यय कर दिया।
Sadprayaas ↔ दुष्प्रयास
समाज सुधारकों के सद्प्रयास से बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लग सकी।
शत्रु के दुष्प्रयास को सुरक्षा बलों ने अपनी सतर्कता से विफल कर दिया।
Sadvyavahaar ↔ दुर्व्यवहार
ग्राहकों के साथ सद्व्यवहार करने से व्यापार की साख और लोकप्रियता बढ़ती है।
बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले युवक को पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ा।
Sucharitra ↔ दुश्चरित्र
सुचरित्र मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी कभी असत्य और अधर्म का मार्ग नहीं चुनता।
दुश्चरित्र व्यक्ति अपने घृणित आचरण के कारण परिवार का विनाश कर देता है।
Dharmaacharan ↔ अधर्माचरण
दैनिक जीवन में धर्माचरण का पालन करने से मनुष्य का आत्मबल और तेज बढ़ता है।
अधर्माचरण और छल-प्रपंच से अर्जित धन कभी सुख और शांति नहीं दे सकता।
Sadbhaav ↔ दुर्भाव
त्योहारों का मूल संदेश समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सद्भाव और प्रेम बढ़ाना है।
पड़ोसियों के प्रति मन में दुर्भाव पालने से घर का वातावरण अशांत हो जाता है।