Paropkaar ↔ अपकार
वृक्ष और नदियाँ परोपकार के लिए ही फल और जल प्रदान करते हैं।
सज्जन व्यक्ति कभी किसी के साथ अपकार या अहित करने का विचार मन में नहीं लाते।
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Paropkaar ↔ अपकार
वृक्ष और नदियाँ परोपकार के लिए ही फल और जल प्रदान करते हैं।
सज्जन व्यक्ति कभी किसी के साथ अपकार या अहित करने का विचार मन में नहीं लाते।
Sanyam ↔ असंयम
वाणी और इंद्रियों पर संयम रखने से मनुष्य अनेक व्यर्थ के विवादों से बच जाता है।
खान-पान में असंयम बरतने से शरीर रोगों का घर बन जाता है।
Gyaan ↔ अज्ञान
सच्चा ज्ञान मनुष्य के अहंकार को मिटाकर उसे विनम्र और सहिष्णु बनाता है।
अज्ञान के अंधकार में भटकने वाला व्यक्ति अंधविश्वासों का शिकार बन जाता है।
Sahishnuta ↔ असहिष्णुता
धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सौहार्द ही भारत की विविधता की वास्तविक पहचान है।
कट्टरता और असहिष्णुता समाज में वैमनस्य और हिंसा को जन्म देती है।
Maryaada ↔ अमर्यादा
भगवान राम ने जीवन के हर मोड़ पर मर्यादा और नैतिक मूल्यों की रक्षा की।
सभा में अमर्यादा पूर्ण आचरण करने वाले सदस्य को सदन से निष्कासित कर दिया गया।
Shuchita ↔ अशुचिता
सार्वजनिक जीवन में धन और विचारों की शुचिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
मन में छिपी अशुचिता बाहरी पूजा-पाठ से कभी दूर नहीं की जा सकती।
Naitik ↔ अनैतिक
व्यापार में लाभ कमाने के लिए नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए।
अनैतिक साधनों से प्राप्त की गई सफलता क्षणिक और आत्मग्लानि से भरी होती है।
Vairaagya ↔ अनुराग
संसार की नश्वरता को देखकर राजकुमार सिद्धार्थ के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया।
अपने देश और संस्कृति के प्रति गहरा अनुराग रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
Ishwar ↔ अनीश्वर
सच्चे भक्त के लिए समस्त चराचर जगत में ईश्वर की सत्ता का वास है।
अनीश्वर वादी विचारधारा केवल भौतिक जगत को ही सत्य मानती है।
Karm ↔ अकर्म
गीता में श्रीकृष्ण ने फल की चिंता किए बिना केवल निष्काम कर्म करने का संदेश दिया है।
कर्तव्य से विमुख होकर अकर्म की स्थिति में बैठना कायरता और पतन का लक्षण है।
Nyaayochit ↔ अनुचित
मजदूरों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक देना पूरी तरह न्यायोचित है।
बिना किसी प्रमाण के किसी पर झूठा आरोप लगाना अत्यंत अनुचित और निंदनीय है।
Hit ↔ अहित
सच्चे माता-पिता सदैव अपनी संतानों के सर्वांगीण हित की कामना करते हैं।
किसी निर्दोष व्यक्ति का अहित सोचना भी पाप की श्रेणी में आता है।
Ahinsa ↔ हिंसा
महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को स्वतंत्रता संग्राम का सबसे अचूक अस्त्र बनाया।
हिंसा से कभी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता।
Asteya ↔ स्तेय
योग के यम नियमों में अस्तेय अर्थात् चोरी न करने के व्रत का बड़ा महत्व है।
स्तेय अर्थात् दूसरों की वस्तु पर अनाधिकृत अधिकार जमाना नैतिक दृष्टि से जघन्य अपराध है।
Aparigraha ↔ परिग्रह
अपरिग्रह का पालन करने वाला साधु केवल जीवन-यापन हेतु आवश्यक वस्तुएँ ही रखता है।
धन-संपत्ति के अत्यधिक परिग्रह से समाज में आर्थिक विषमता और अशांति फैलती है।
Shaaleen ↔ अशिष्ट
शालीन व्यवहार करने वाले व्यक्ति की समाज में सभी लोग सराहना करते हैं।
अशिष्ट स्वभाव का व्यक्ति अपनी कड़वी बातों से दूसरों के मन को ठेस पहुँचाता है।
Shishtaachaar ↔ अशिष्टता
अतिथियों का सत्कार करते समय शिष्टाचार और सौम्यता का परिचय देना हमारी परंपरा है।
बड़ों के सामने अशिष्टता दिखाना सुसंस्कृत होने का लक्षण नहीं है।
Titiksha ↔ असहनशीलता
सुख-दुख और शीत-उष्ण के द्वंद्वों को बिना शिकायत सहना ही तितिक्षा कहलाता है।
असहनशीलता के कारण छोटी-सी असुविधा भी व्यक्ति को विचलित कर देती है।
Nyaaypoorn ↔ अन्यायपूर्ण
पंचों का निर्णय पूरी तरह न्यायपूर्ण और निष्पक्ष था जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हुए।
कमजोर पक्ष पर अन्यायपूर्ण शर्तें थोपना नैतिक दृष्टि से सर्वथा अनुचित है।
Aadhyaatmik ↔ भौतिक
आध्यात्मिक चिंतन से आत्मा को शांति और जीवन को वास्तविक उद्देश्य मिलता है।
केवल भौतिक सुख-साधनों के संचय से मन की तृष्णा कभी शांत नहीं होती।
Paarlaukik ↔ ऐहिक
धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य पारलौकिक कल्याण और सद्गति की कामना करना होता है।
ऐहिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परिश्रम करना भी आवश्यक है।
Supaatri ↔ अपात्री
मेधावी और परिश्रमी छात्रा को छात्रवृत्ति के लिए सुपात्री माना गया।
अनुचित साधनों का सहारा लेने वाली अपात्री छात्रा को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
Avichal ↔ डांवाडोल
सत्य के प्रति उसकी निष्ठा कठिन से कठिन प्रलोभन के सामने भी अविचल रही।
कमजोर मनोबल वाले व्यक्ति का निर्णय थोड़ी-सी कठिनाई आते ही डांवाडोल हो जाता है।
Vishwasneeya ↔ अविश्वसनीय
विश्वसनीय साथी जीवन के कठिन दौर में भी कभी साथ नहीं छोड़ता।
अविश्वसनीय व्यक्ति से गोपनीय बातें साझा करना खतरे से खाली नहीं होता।
Suyash ↔ अपयश
वैज्ञानिक ने अपने अविष्कार से पूरे विश्व में देश का सुयश फैलाया।
भ्रष्टाचार के आरोपों से अधिकारी को समाज में भारी अपयश का सामना करना पड़ा।
Sukeerti ↔ अपकीर्ति
त्याग और बलिदान से अर्जित की गई सुकीर्ति सदियों तक जीवित रहती है।
कायरता का प्रदर्शन करने से योद्धा की जीवन भर की कमाई अपकीर्ति में बदल गई।
Pratishtha ↔ अप्रतिष्ठा
सत्य और निष्ठा के साथ कार्य करके उसने समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त की।
झूठे वादों के कारण राजनेता को जनता के बीच अप्रतिष्ठा झेलनी पड़ी।
Shraddheya ↔ अश्रद्धेय
श्रद्धेय गुरुजी के चरणों में बैठकर शिष्यों ने जीवन का गूढ़ ज्ञान प्राप्त किया।
चरित्रहीन आचरण के कारण वह व्यक्ति समाज की दृष्टि में अश्रद्धेय हो गया।
Poojya ↔ अपूज्य
माता-पिता और गुरुजन प्रत्येक व्यक्ति के लिए पूज्य होते हैं।
पापकर्मों में डूबा व्यक्ति अपने व्यवहार से स्वयं को अपूज्य बना लेता है।
Maanya ↔ अमान्य
संविधान के अंतर्गत बनाए गए नियम सभी नागरिकों के लिए मान्य होते हैं।
गलत दस्तावेजों के आधार पर किया गया आवेदन चयन समिति द्वारा अमान्य कर दिया गया।
Neetigya ↔ अनीतिज्ञ
नीतिज्ञ मंत्री ने राजा को युद्ध के संकट से बचाकर शांति का मार्ग सुझाया।
अनीतिज्ञ सलाहकारों की संगति में रहकर राजा ने विनाशकारी निर्णय ले लिए।
Aadarshvaadi ↔ अवसरवादी
आदर्शवादी नेता ने अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए सत्ता का मोह त्याग दिया।
अवसरवादी राजनीतिज्ञ निजी लाभ देखकर पल भर में अपना पाला बदल लेते हैं।
Karmathata ↔ अकर्मण्यता
किसान की कर्मठता के कारण ही बंजर धरती पर भी लहलहाती फसलें तैयार हो गईं।
अकर्मण्यता और आलस्य के कारण वह समृद्ध विरासत को भी सहेज नहीं सका।
Karmnishth ↔ अकर्मण्य
कर्मनिष्ठ कार्यकर्ता ने बिना किसी शिकायत के दिन-रात समाजसेवा का कार्य किया।
अकर्मण्य व्यक्ति केवल भाग्य को कोसता रहता है और स्वयं कोई प्रयास नहीं करता।
Praamaanikata ↔ अप्रामाणिकता
इतिहासकार ने प्राचीन शिलालेखों के आधार पर घटना की प्रामाणिकता सिद्ध की।
दस्तावेजों में अप्रामाणिकता पाए जाने पर पुलिस ने फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया।
Dharmaacharan ↔ अधर्माचरण
दैनिक जीवन में धर्माचरण का पालन करने से मनुष्य का आत्मबल और तेज बढ़ता है।
अधर्माचरण और छल-प्रपंच से अर्जित धन कभी सुख और शांति नहीं दे सकता।
Saadhuta ↔ असाधुता
उनकी वाणी और व्यवहार में झलकती साधुता ने क्रूर डाकू का भी हृदय परिवर्तन कर दिया।
शत्रु की असाधुता और विश्वासघात के कारण शांति वार्ता बीच में ही टूट गई।
Hinsak ↔ अहिंसक
जंगल में हिंसक भेड़ियों का झुंड देख कर यात्री भयभीत हो गए।
खरगोश अत्यंत अहिंसक और सीधा प्राणी है जो किसी को कष्ट नहीं पहुँचाता।
Andaj ↔ जरायुज
पक्षी, सर्प और छिपकली अंडज प्राणी हैं जिनकी संतानों का जन्म अंडों से होता है।
मनुष्य, गाय और हिरण जरायुज प्राणी हैं जो सीधे बच्चों को जन्म देते हैं।
Paalya ↔ अपाल्य
भेड़ और बकरी स्वभाव से पाल्य पशु हैं जिन्हें मनुष्य सरलता से पाल लेता है।
तेंदुआ और लकड़बग्घा अपाल्य जीव हैं जिनका स्वभाव स्वतंत्र और हिंसक रहता है।
Danshtree ↔ अदंष्ट्री
चीता और सूअर दंष्ट्री प्राणी हैं जिनके नुकीले दांत शिकार को चीर डालते हैं।
कछुआ और पक्षी अदंष्ट्री जीव हैं जिनके मुख में दांतों के बजाय चोंच या जबड़ा होता है।
Sapaksh ↔ अपक्ष
सपक्ष पक्षी आकाश की ऊंचाइयों में बिना किसी सहारे के तैरते हैं।
सांप और केंचुआ अपक्ष जीव हैं जो जमीन पर रेंगकर आगे बढ़ते हैं।
Ashwa ↔ घोड़ी
तेज रफ्तार अश्व युद्धभूमि में अपने सवार को सुरक्षित निकाल लाया।
घोड़ी अपने नन्हें बछेड़े की देखभाल में लगी हुई थी।
Pakwa ↔ अपक्व
पक्व फल पेड़ से अपने आप टूटकर नीचे गिर जाते हैं।
अपक्व भोजन का सेवन करने से पाचन क्रिया बिगड़ सकती है।
Namkeen ↔ अलौना
शाम की चाय के साथ कुरकुरा नमकीन नाश्ता सबको बहुत पसंद आया।
उच्च रक्तचाप के मरीज को चिकित्सक ने अलौना भोजन करने का निर्देश दिया।
Paachak ↔ अपाचक
भोजन के उपरांत भुने जीरे और हींग का चूर्ण पाचक औषधि का काम करता है।
अत्यधिक शीतल पेय भोजन के पाचन रस को धीमा करके अपाचक प्रभाव छोड़ता है।
Suswaadu ↔ अस्वादु
उत्सव में बने सुस्वादु पकवानों की सभी अतिथियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
गलत अनुपात में मसाले डालने से पूरा सूप अस्वादु और पीने में अरुचिकर हो गया।
Poshak ↔ अपोषक
अंकुरित अनाज और बादाम शरीर के लिए अत्यंत पोषक आहार सिद्ध होते हैं।
मैदे से बने तले हुए स्नैक्स अपोषक होते हैं और केवल पेट भरते हैं।
Bhojya ↔ अभोज्य
गेहूं, चावल और दालें मनुष्य के मुख्य भोज्य पदार्थों में गिने जाते हैं।
फफूंद लगी हुई ब्रेड अभोज्य हो जाती है और उसे फेंक देना ही उचित है।
Khaadya ↔ अखाद्य
खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने छापे मारे।
प्लास्टिक और रासायनिक रंग अखाद्य वस्तुएं हैं जिन्हें भोजन में नहीं मिलाना चाहिए।