Mangal ↔ अमंगल
नववर्ष के अवसर पर सभी ने एक-दूसरे के मंगल की कामना की।
समारोह के बीच अशुभ समाचार सुनकर सबने अमंगल की आशंका जताई।
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Mangal ↔ अमंगल
नववर्ष के अवसर पर सभी ने एक-दूसरे के मंगल की कामना की।
समारोह के बीच अशुभ समाचार सुनकर सबने अमंगल की आशंका जताई।
Shubh ↔ अशुभ
गृह प्रवेश का यह मुहूर्त अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
अशुभ संकेत देखकर यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया।
Kalyan ↔ अकल्याण
राजा का मुख्य कर्तव्य अपनी प्रजा के सर्वांगीण कल्याण की चिंता करना है।
दुष्टों की संगति अंततः मनुष्य के अकल्याण का कारण बनती है।
Dheer ↔ अधीर
विपत्तियों के आने पर धीर पुरुष कभी अपना संतुलन नहीं खोते।
ट्रेन के आने में देरी देखकर यात्री अधीर होने लगे।
Aanandit ↔ शोकाकुल
विवाह के शुभ अवसर पर सारा परिवार आनंदित था।
प्रियजन के अचानक निधन से सभी परिजन शोकाकुल हो उठे।
Aashwast ↔ सशंक
चिकित्सक के सांत्वना भरे शब्दों से रोगी पूरी तरह आश्वस्त हो गया।
अपरिचित व्यक्ति के संदिग्ध व्यवहार से सब सशंक हो गए।
Samyami ↔ असंयमी
संयमी व्यक्ति अपनी वाणी और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
असंयमी खान-पान से व्यक्ति का स्वास्थ्य शीघ्र बिगड़ जाता है।
Sachet ↔ अचेत
सचेत नागरिक देश की सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहता है।
गंभीर दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति सड़क पर अचेत पड़ा था।
Satark ↔ असावधान
सीमा पर सतर्क सैनिक शत्रु की हर हलचल पर पैनी नजर रखते हैं।
असावधान चालक के कारण सड़क पर भारी दुर्घटना घट गई।
Pramatta ↔ अमत्त
धन और सत्ता के नशे में प्रमत्त व्यक्ति किसी के अधिकार का सम्मान नहीं करता।
अमत्त और संयमी मनुष्य हर विषम परिस्थिति में संतुलित रहता है।
Namrata ↔ अकड़
नम्रता वह सद्गुण है जो कठोर हृदय को भी पिघला देता है।
मिथ्या अकड़ मनुष्य को अपनों से ही दूर कर देती है।
Vinay ↔ अविनय
विद्या ददाति विनयं—सच्ची शिक्षा मनुष्य को विनय और शील सिखाती है।
अविनय और अशिष्टता से बात करने वाला व्यक्ति कभी आदर नहीं पाता।
Sahansheelta ↔ असहिष्णुता
सहनशीलता विविधतापूर्ण समाज को एक सूत्र में पिरोए रखती है।
धार्मिक असहिष्णुता शांतिपूर्ण परिवेश में विष घोल देती है।
Sahishnu ↔ असहिष्णु
सहिष्णु व्यक्ति विपरीत विचारों का भी सम्मानपूर्वक श्रवण करता है।
असहिष्णु विचारधारा समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देती है।
Adheerta ↔ धैर्य
अधीरता में लिया गया कदम अक्सर नुकसान का कारण बनता है।
गंभीर संकट में भी धैर्य बनाए रखना महापुरुषों का लक्षण है।
Aavesh ↔ संयम
आवेश में आकर कोई भी अप्रिय वचन नहीं बोलना चाहिए।
संयम रखने से बड़े से बड़ा विवाद भी शांतिपूर्वक हल हो जाता है।
Vishaktata ↔ अमृतत्व
कटु वचनों की विषाक्तता आपसी प्रेम को नष्ट कर देती है।
सत्य और प्रेम के वचनों में अमृतत्व का वास होता है।
Aanandmay ↔ शोकमय
मित्रों का मिलन एक आनंदमय उत्सव बन गया।
आपदा के उपरांत बस्ती का वातावरण अत्यंत शोकमय था।
Abhay ↔ भय
ईश्वर की शरण में जाने पर साधक को अभय का वरदान मिलता है।
शत्रु के भय से कांपते हुए सैनिक पीछे हटने लगे।
Amarsha ↔ सहिष्णुता
अपमान का स्मरण होते ही उसके मन में अमर्ष की ज्वाला भड़क उठी।
बुद्धिमानी इसी में है कि व्यक्ति कटु बातों पर भी सहिष्णुता बरते।
Shokgrast ↔ आनंदमग्न
शोकग्रस्त परिवार को सांत्वना देने पूरा गाँव एकत्र हो गया।
उत्सव के संगीत में सब लोग आनंदमग्न होकर नाचने लगे।
Nirash ↔ आशावान
एक बार की असफलता से निराश होकर बैठना कायरता है।
कर्मठ मनुष्य हर संकट में भी आशावान बना रहता है।
Adheer ↔ शांत
परिणाम की प्रतीक्षा में उसका अधीर मन बार-बार घड़ी देख रहा था।
गहरे जल की तरह ज्ञानी पुरुष हर परिस्थिति में शांत रहता है।
Vyakul ↔ अविचलित
पुत्र के देर से लौटने पर माँ का मन व्याकुल होने लगा।
विशाल पर्वत के समान धीर पुरुष हर संकट में अविचलित रहता है।
Vichalit ↔ अविचलित
विपत्ति की आंधी भी सच्चे साधक को अपने संकल्प से विचलित नहीं कर सकती।
सत्यवादी हर प्रलोभन के सामने अविचलित और दृढ़ खड़ा रहता है।
Santushti ↔ असंतोष
कर्तव्य निष्ठा से पूरा करने के बाद मन को परम संतुष्टि मिलती है।
स्वार्थी मनुष्यों के मन का असंतोष कभी दूर नहीं होता।
Aatmasantosh ↔ आत्मग्लानि
सच्चाई के मार्ग पर चलने से जो आत्मसंतोष मिलता है, वह अनमोल है।
झूठ बोलकर लाभ उठाने के बाद भी मन में आत्मग्लानि बनी रहती है।
Aatmavishwas ↔ आत्मसंदेह
कठिन परीक्षा में सफलता का सबसे बड़ा साधन दृढ़ आत्मविश्वास है।
आत्मसंदेह मनुष्य की आंतरिक क्षमताओं को नष्ट कर देता है।
Aananddayak ↔ कष्टप्रद
पहाड़ों की ताजी हवा में सैर करना अत्यंत आनंददायक अनुभव है।
भीषण गर्मी में लंबी पैदल यात्रा करना बहुत कष्टप्रद सिद्ध हुआ।
Priyavadi ↔ अप्रियवादी
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्—सत्य बोलो और प्रियवादी बनो।
अप्रियवादी व्यक्ति सच को भी इतने कड़वे ढंग से कहता है कि वह सबको चुभता है।
Agra ↔ पश्च
मस्तिष्क का अग्र भाग तार्किक निर्णय लेने और चिंतन का केंद्र होता है।
कशेरुक दंड का पश्च भाग पूरे शरीर को सीधा और सुदृढ़ आधार प्रदान करता है।
Ang ↔ अनंग
मानव शरीर का प्रत्येक अंग एक-दूसरे के सहयोग से सुचारू रूप से कार्य करता है।
अनंग रूप में कामदेव भौतिक शरीर से रहित होकर केवल भाव रूप में विद्यमान माने जाते हैं।
Swasth ↔ अस्वस्थ
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
अस्वस्थ खान-पान और आलस्य से व्यक्ति का शरीर बीमारियों का घर बन जाता है।
Uttaan ↔ अवतान
योगाभ्यास में शवासन के दौरान साधक उत्तान अवस्था में पीठ के बल विश्राम करता है।
मक्रासन करते समय साधक अवतान मुद्रा में पेट के बल लेटकर श्वास नियंत्रित करता है।
Sashakta ↔ अशक्त
सशक्त बाहों वाले मजदूर ने भारी पत्थर को क्षणभर में उठाकर किनारे रख दिया।
तीव्र ज्वर के कारण अशक्त हुआ रोगी बिना सहारे के बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था।
Aindrik ↔ अतींद्रिय
रूप, रस, गंध और स्पर्श ऐंद्रिक प्रत्यक्ष के माध्यम से अनुभव किए जाते हैं।
परम समाधि की अनुभूति अतींद्रिय होती है जो चर्मचक्षुओं से नहीं जानी जा सकती।
Angaheen ↔ सकलंग
दुर्घटना में अंगहीन हुए सैनिक ने कृत्रिम अंगों की सहायता से पुनः चलना सीखा।
सकलंग शरीर पाकर भी जो परिश्रम नहीं करता वह अपने सामर्थ्य का अपमान करता है।
Andha ↔ सुजाखा
अंधा राहगीर सफेद छड़ी की मदद से सड़क पार करने का प्रयास कर रहा था।
सुजाखा व्यक्ति दूर से ही आने वाले वाहन को देखकर सावधानी बरत लेता है।
Spryshya ↔ अस्पृश्य
हाथ से छुआ जा सकने वाला भौतिक पदार्थ स्पृश्य संसार का अंग है।
प्रकाश और वायु जैसी सूक्ष्म तरंगें त्वचा से अस्पृश्य अथवा अमूर्त प्रतीत होती हैं।
Agrakaaya ↔ पश्चकाय
शरीर रचना विज्ञान में अग्रकाय के अंतर्गत वक्ष, उदर और प्रमुख सम्मुख अंग सम्मिलित होते हैं।
रीढ़ की हड्डी और नितंब पश्चकाय के मुख्य संरचनात्मक आधार बिंदु होते हैं।
Oordhvaanga ↔ अधोअंग
कसरत करते समय ऊर्ध्वांग अर्थात भुजाओं और कंधों को सुदृढ़ बनाने के लिए डंबल उठाए जाते हैं।
दौड़ने और कूदने से अधोअंग अर्थात जांघों और पैरों की मांसपेशियों में सशक्तिकरण आता है।
Maansala ↔ अस्थिशेष
कठोर शारीरिक श्रम और नियमित कसरत से युवक की भुजाएं अत्यंत मांसल और मजबूत हो गईं।
अकाल और भुखमरी की विभीषिका में बच्चों के शरीर केवल अस्थिशेष अर्थात हड्डियों का ढांचा रह गए थे।
Romila ↔ अरोम
शीत प्रधान प्रदेशों में रहने वाले प्राणियों की त्वचा रोमिल और घने रोओं से ढकी होती है।
छोटे नवजात शिशु की कोमल त्वचा प्रायः अरोम और चिकनी प्रतीत होती है।
Chaakshusha ↔ अचाक्षुष
इंद्रधनुष के सतरंगी दृश्य का अनुभव पूर्णतः चाक्षुष अर्थात आंखों से देखने योग्य होता है।
हवा की गति और गंध का प्रत्यक्ष बोध अचाक्षुष होता है, जिसे त्वचा और नासिका से महसूस किया जाता है।
Shravya ↔ अश्रव्य
मानव कर्ण केवल 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज तक की श्रव्य ध्वनि तरंगों को सुन सकते हैं।
पराश्रव्य और अपश्रव्य तरंगें सामान्य मानव कान के लिए अश्रव्य होती हैं।
Adhomukha ↔ ऊर्ध्वमुख
लज्जा या निराशा के कारण व्यक्ति अधोमुख होकर भूमि की ओर देखने लगता है।
विजय और आत्मविश्वास के क्षणों में मनुष्य ऊर्ध्वमुख होकर आकाश की ओर निहारता है।
Nyaay ↔ अन्याय
अदालत का प्रमुख कर्तव्य निष्पक्ष होकर प्रत्येक नागरिक को न्याय दिलाना है।
समाज में निर्बलों पर होने वाले अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना प्रत्येक जागरूक नागरिक का धर्म है।
Dharm ↔ अधर्म
सत्य, अहिंसा और परोपकार का आचरण करना ही मानव का सच्चा धर्म है।
अधर्म का मार्ग अपनाने वाले दुष्टों का विनाश अंततः निश्चित होता है।
Vivek ↔ अविवेक
संकट की घड़ी में विवेक और धैर्य से काम लेने वाला व्यक्ति हर विपत्ति पार कर लेता है।
क्रोध की अवस्था में अविवेक के वशीभूत होकर लिए गए निर्णय केवल पश्चाताप देते हैं।
Neeti ↔ अनीति
महात्मा विदुर ने शासक को सदा नीति और प्रजा-कल्याण के सिद्धांतों पर चलने का उपदेश दिया।
अनीति और स्वार्थ के बल पर स्थापित किया गया साम्राज्य कभी चिरस्थायी नहीं हो सकता।