Udyogaparaayan ↔ सुस्त
उद्योगपरायण समाज निरंतर नवाचार करके विश्व स्तर पर अग्रणी बन जाता है।
सुस्त मानसिकता वाले लोग हमेशा बदलाव और नए काम से घबराते हैं।
अक्षर 'स' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 351–400 / कुल: 473):
Udyogaparaayan ↔ सुस्त
उद्योगपरायण समाज निरंतर नवाचार करके विश्व स्तर पर अग्रणी बन जाता है।
सुस्त मानसिकता वाले लोग हमेशा बदलाव और नए काम से घबराते हैं।
Sanaatan ↔ सामयिक
सत्य और अहिंसा के नैतिक मूल्य सनातन हैं जो हर युग में प्रासंगिक रहते हैं।
फैशन और रुझान केवल सामयिक होते हैं जो कुछ ही महीनों में बदल जाते हैं।
Samakaaleen ↔ असमकालीन
तुलसीदास और अकबर एक ही कालखंड के प्रसिद्ध समकालीन व्यक्तित्व थे।
कालिदास और कबीर सर्वथा असमकालीन कवि थे जिनके जीवनकाल में सदियों का अंतर था।
Ushaakaal ↔ संध्याकाल
उषाकाल में आकाश में फैली लालिमा मन को असीम शांति प्रदान करती है।
संध्याकाल होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर चहचहाते हुए लौटने लगते हैं।
Praatah ↔ सायं
प्रातः काल का भ्रमण स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए वरदान माना गया है।
सायं के समय मंदिर में शंख और घंटों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
Savera ↔ शाम
जब जागो तभी सवेरा — इस लोकोक्ति का अर्थ है कि सुधार कभी भी संभव है।
काम समाप्त करके सभी मजदूर थके कदमों से शाम को घर लौटते हैं।
Praatahkaal ↔ सायंकाल
प्रातःकाल की स्वच्छ वायु में योग करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
सायंकाल की आरती में सम्मिलित होने के लिए मंदिर में भारी भीड़ उमड़ी।
Satvar ↔ मंथन
सेनापति ने परिस्थिति का आकलन करके सत्वर निर्णय लिया।
नीतियों पर गहरा विचार-मंथन करने में महीनों का समय लग गया।
Avilamb ↔ सविंलब
आदेश प्राप्त होते ही पुलिस दल अविलंब घटनास्थल के लिए रवाना हो गया।
तकनीकी बाधाओं के कारण परियोजना की रिपोर्ट सविंलब प्रस्तुत की जा सकी।
Saamayik ↔ असामयिक
किसानों को समय पर खाद-बीज का वितरण एक अत्यंत सामयिक कदम था।
युवा खिलाड़ी के असामयिक निधन से संपूर्ण खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
Samayochit ↔ असामयिक
अग्निशामकों की समयोचित सहायता से विशाल मॉल को जलने से बचा लिया गया।
फसल कटाई के समय असामयिक ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
Kusamay ↔ सुसमय
कुसमय में धैर्य खोना अपनी ही परेशानियों को और बढ़ाने जैसा है।
सुसमय आने पर मनुष्य के सोए हुए भाग्य के द्वार भी खुल जाते हैं।
Kuvela ↔ सुवेला
आधी रात को किसी के घर कुवेला दस्तक देना शिष्टाचार के विरुद्ध है।
प्रातः काल की सुवेला में किए गए शुभ संकल्प अवश्य पूर्ण होते हैं।
Samayabaddh ↔ अनियत
मेट्रो रेल परियोजना को समयबद्ध तरीके से तीन वर्षों में पूर्ण कर लिया गया।
अनियत कार्यप्रणाली के कारण कई अदालतें मुकदमों के बोझ तले दबी रहती हैं।
Samayapaalak ↔ देर-लतीफ
समयपालक कर्मचारी सदा कार्यालय में समय से दस मिनट पहले उपस्थित होता है।
देर-लतीफ अधिकारियों के कारण कई महत्वपूर्ण बैठकें समय पर शुरू नहीं हो पातीं।
Samayanishtha ↔ अनियमितता
जर्मनी और जापान में नागरिकों की समयनिष्ठा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
दफ्तरों में उपस्थिति की अनियमितता को रोकने के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी लगाई गई।
Samay-poorv ↔ समय-पश्चात
अस्पताल में समय-पूर्व जन्मे शिशुओं को विशेष इनक्यूबेटर में रखा जाता है।
नियत समय-पश्चात जमा किए गए परीक्षा फॉर्म अस्वीकार कर दिए गए।
Praarambh ↔ समापन
शुभ कार्य का प्रारंभ सदैव ईश्वर वंदना के साथ किया जाता है।
वार्षिक खेल महोत्सव का समापन राष्ट्रगान और पुरस्कार वितरण के साथ हुआ।
Sada ↔ कभी-नहीं
सत्यवादी मनुष्य सदा सत्य के मार्ग पर ही अडिग रहता है।
ईमानदार व्यक्ति कभी-नहीं बेईमानी का धन अपने घर में लाने की सोचता।
Sarvada ↔ कदाचित
ईश्वर की कृपा समस्त प्राणियों पर सर्वदा समान रूप से बरसती है।
कदाचित ही ऐसा होता है जब मरुस्थल में मूसलाधार वर्षा देखने को मिले।
Anaadi ↔ सांत
सृष्टि का प्रवाह अनादि काल से निरंतर चला आ रहा है।
भौतिक संसार की हर वस्तु सांत और सीमित सीमाओं में बंधी है।
Kshanikata ↔ स्थायित्व
साधु-संत भौतिक सुखों की क्षणिकता को समझाकर विरक्ति का उपदेश देते हैं।
सत्य और न्याय पर आधारित समाज में ही वास्तविक स्थायित्व आ सकता है।
Satat ↔ खंडित
सतत विकास का लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
बार-बार बिजली जाने से उत्पादन का चक्र खंडित हो गया।
Aviraam ↔ सविराम
डॉक्टरों ने चौबीस घंटे तक अविराम काम करके सभी घायलों की जान बचाई।
कक्षा में सविराम भाषण देने से विद्यार्थियों का ध्यान भटकने से बचता है।
Sadaabahaar ↔ मौसमी
उष्णकटिबंधीय वनों के सदाबहार वृक्ष वर्ष भर हरे-भरे रहते हैं।
मौसमी फल केवल वर्ष के विशेष महीनों में ही बाजार में उपलब्ध होते हैं।
Pal ↔ सदी
हवाई दुर्घटना में एक ही पल में सैकड़ों जिंदगियां काल के गाल में समा गईं।
गुलामी की बेड़ियों को काटने में देश को लगभग एक पूरी सदी लग गई।
Sadyah ↔ चिर
सद्यः घटित घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत रवाना हुई।
चिर संचित ज्ञान ही वृद्धावस्था में मनुष्य का सच्चा मार्गदर्शक बनता है।
Sadyojaat ↔ वृद्ध
सद्योजात शिशु की कोमल मुस्कान हर किसी का दिल मोह लेती है।
परिवार के वयोवृद्ध बुजुर्गों का आशीर्वाद घर में शांति और समृद्धि लाता है।
Sanvatsar ↔ माह
भारतीय कालगणना में प्रत्येक संवत्सर का अपना विशिष्ट नाम और महत्व होता है।
कठोर मेहनत के बाद एक ही माह में उसने अपना काम पूरा कर दिखाया।
Prabhaatavela ↔ सांध्यवेला
प्रभातवेला में पक्षियों का चहचहाना और बहती शीतल बयार मन मोह लेती है।
सांध्यवेला में सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देखने लोग समुद्र तट पर एकत्र होते हैं।
Svarnayug ↔ अंधकारयुग
गुप्त काल को भारतीय कला और साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है।
साम्राज्य के पतन के बाद देश कई दशकों तक अंधकारयुग में डूबा रहा।
Satyug ↔ कलियुग
सतयुग में सत्य और धर्म का चारों चरणों में पालन होता था।
कलियुग में स्वार्थ और लोभ के बढ़ने से नैतिक मूल्यों में गिरावट आई है।
Saahasa ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय साहस का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khaupha ↔ सुकून
संकट और विपत्ति के समय खौफ का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुकून का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saahasika ↔ कायरतापूर्ण
संकट और विपत्ति के समय साहसिक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरतापूर्ण का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saamanaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय सामना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihsnkocha ↔ संकोची
संकट और विपत्ति के समय निःसंकोच का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संकोची का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traanadaataa ↔ संहारक
संकट और विपत्ति के समय त्राणदाता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संहारक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshaa ↔ असुरक्षा
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshita ↔ असुरक्षित
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Snrakshita ↔ असंरक्षित
संकट और विपत्ति के समय संरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असंरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Jokhima ↔ सुरक्षा
संकट और विपत्ति के समय जोखिम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sakushala ↔ संकटग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय सकुशल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संकटग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khauphanaaka ↔ सुहावना
संकट और विपत्ति के समय खौफनाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुहावना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaavaha ↔ सुखद
संकट और विपत्ति के समय भयावह का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुखद का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Traasada ↔ सुखांत
संकट और विपत्ति के समय त्रासद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुखांत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Tharatharaanaa ↔ स्थिर-रहना
संकट और विपत्ति के समय थरथराना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने स्थिर-रहना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sanasaneekheja ↔ सामान्य
संकट और विपत्ति के समय सनसनीखेज का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सामान्य का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saahasa-pradarshana ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय साहस-प्रदर्शन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Praknpana ↔ स्थिरता
संकट और विपत्ति के समय प्रकंपन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने स्थिरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।