Seenaajoree ↔ विनम्रता
संकट और विपत्ति के समय सीनाजोरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने विनम्रता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
अक्षर 'स' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 401–450 / कुल: 473):
Seenaajoree ↔ विनम्रता
संकट और विपत्ति के समय सीनाजोरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने विनम्रता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ladaakaa ↔ सुलहपसंद
संकट और विपत्ति के समय लड़ाका का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुलहपसंद का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sinha-garjanaa ↔ गीदड़-भभकी
संकट और विपत्ति के समय सिंह-गर्जना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने गीदड़-भभकी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sashastreekarana ↔ निःशस्त्रीकरण
संकट और विपत्ति के समय सशस्त्रीकरण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निःशस्त्रीकरण का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sainyabala ↔ अहिंसाबल
संकट और विपत्ति के समय सैन्यबल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अहिंसाबल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saakshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saaksharataa ↔ निरक्षरता
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षरता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षरता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvijnya ↔ अल्पज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अल्पज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Svaadhyaaya ↔ अनाभ्यास
विद्या और बौद्धिक विकास में स्वाध्याय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाभ्यास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Supaathya ↔ दुर्पाठ्य
विद्या और बौद्धिक विकास में सुपाठ्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दुर्पाठ्य की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhakartaa ↔ साधारण-छात्र
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधकर्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में साधारण-छात्र की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saiddhaantika ↔ व्यावहारिक
विद्या और बौद्धिक विकास में सैद्धांतिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में व्यावहारिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sutarka ↔ कुतर्क
विद्या और बौद्धिक विकास में सुतर्क का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुतर्क की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snvaada ↔ विवाद
विद्या और बौद्धिक विकास में संवाद का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विवाद की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saralaartha ↔ गूढ़ार्थ
विद्या और बौद्धिक विकास में सरलार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में गूढ़ार्थ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shabdaadnbara ↔ सरल-भाषा
विद्या और बौद्धिक विकास में शब्दाडंबर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सरल-भाषा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smarana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smriti ↔ विस्मृति
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मृति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smaranashakti ↔ भूलक्कड़पन
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरणशक्ति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भूलक्कड़पन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Teekshnabuddhi ↔ स्थूलबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में तीक्ष्णबुद्धि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में स्थूलबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sookshmadarshee ↔ अदूरदर्शी
विद्या और बौद्धिक विकास में सूक्ष्मदर्शी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अदूरदर्शी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaadhyayana ↔ समय-बर्बादी
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्याध्ययन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में समय-बर्बादी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadvidyaa ↔ कुविद्या
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्विद्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविद्या की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakhyaa ↔ संक्षेप
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याख्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षेप की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bhaashya ↔ संक्षिप्त-टिप्पणी
विद्या और बौद्धिक विकास में भाष्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षिप्त-टिप्पणी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Siddhaanta ↔ अटकल
विद्या और बौद्धिक विकास में सिद्धांत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अटकल की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sushikshaa ↔ कुशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में सुशिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snskaara ↔ कुसंस्कार
विद्या और बौद्धिक विकास में संस्कार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसंस्कार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paathyakrama ↔ सह-पाठ्यक्रम
विद्या और बौद्धिक विकास में पाठ्यक्रम का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सह-पाठ्यक्रम की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kakshaa-shikshana ↔ स्व-अध्ययन
विद्या और बौद्धिक विकास में कक्षा-शिक्षण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में स्व-अध्ययन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodha-patra ↔ सामान्य-लेख
विद्या और बौद्धिक विकास में शोध-पत्र का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सामान्य-लेख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadgrntha ↔ कुसाहित्य
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्ग्रंथ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसाहित्य की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvichaara ↔ कुविचार
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविचार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविचार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaana-pipaasaa ↔ संतुष्टि
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञान-पिपासा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संतुष्टि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saahityika ↔ असाहित्यिक
विद्या और बौद्धिक विकास में साहित्यिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में असाहित्यिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Subodhataa ↔ दुर्बोधता
विद्या और बौद्धिक विकास में सुबोधता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में दुर्बोधता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Spashtataa ↔ अस्पष्टता
विद्या और बौद्धिक विकास में स्पष्टता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अस्पष्टता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Samaalochanaa ↔ अंधी-प्रशंसा
विद्या और बौद्धिक विकास में समालोचना का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधी-प्रशंसा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvrishti ↔ अकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ghane-baadala ↔ साफ-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में घने-बादल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में साफ-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sameera ↔ झंझा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समीर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में झंझा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Olaavrishti ↔ सामान्य-वर्षा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ओलावृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सामान्य-वर्षा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasa ↔ सुहावना-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमस की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सुहावना-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Garamee ↔ सरदी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गरमी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सरदी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Suhaavanaa ↔ कष्टप्रद
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुहावना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में कष्टप्रद का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Samasheetoshna ↔ चरम-जलवायु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समशीतोष्ण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में चरम-जलवायु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Rituparivartana ↔ स्थिर-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ऋतुपरिवर्तन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में स्थिर-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vaashpeekarana ↔ संघनन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वाष्पीकरण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में संघनन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Namee ↔ सूखापन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में नमी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखापन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Geelaapana ↔ सूखापन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में गीलापन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखापन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।