Sattoo ↔ पकवान
गर्मियों में भुने चने का सत्तू घोलकर पीने से लू नहीं लगती।
त्योहारों पर घी और मेवे के पकवान घर-घर में बनाए जाते हैं।
अक्षर 'स' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 251–300 / कुल: 473):
Sattoo ↔ पकवान
गर्मियों में भुने चने का सत्तू घोलकर पीने से लू नहीं लगती।
त्योहारों पर घी और मेवे के पकवान घर-घर में बनाए जाते हैं।
Suswaad ↔ कुस्वाद
पके हुए आम के पने का सुस्वाद हर किसी को ताजगी से भर देता है।
सड़ी हुई दाल का कुस्वाद आते ही उसने तुरंत मुंह धोया।
Subhojan ↔ कुभोजन
हरी सब्जियों, रोटी और छाछ का सुभोजन दीर्घायु प्रदान करता है।
बासी और अस्वच्छ स्थान पर बना कुभोजन शरीर को रोगों का घर बना देता है।
Ajeerna ↔ सुजीर्ण
बिना भूख के अधिक खा लेने से पेट में अजीर्ण और खट्टी डकारें होने लगीं।
हल्का आहार लेने से भोजन का सुजीर्ण होकर शरीर को शक्ति मिलती है।
Adhpaka ↔ सुरांधा
जल्दबाजी में तवे से उतारी गई अधपकी रोटी पेट में दर्द कर सकती है।
धीमी आंच पर पकी सुरांधा खीर का स्वाद बेमिसाल था।
Soup ↔ कड़ा
सर्दियों में टमाटर का गरमागरम सूप पीना स्वास्थ्यवर्धक होता है।
दांतों से चबाने के लिए कड़ा भुना हुआ चना ही पसंद किया जाता है।
Poori ↔ सादी-रोटी
त्योहारों पर हलवे के साथ गरमागरम पूरी बनाई जाती है।
दैनिक आहार में बिना तेल की सादी-रोटी खाना ही सर्वोत्तम है।
Lapsi ↔ सूखी-रोटी
गुड़ और घी से बनी लपसी सर्दियों में शरीर को ऊर्जा देती है।
सफर में सूखी-रोटी और अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
Supakwa ↔ अपक्व
सुपक्व आम की महक से पूरा कमरा भर गया था।
अपक्व फल खाने से पेट में मरोड़ हो सकती है।
Suras ↔ नीरस
अनार का सुरस पेय शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
बासी हो जाने पर गन्ने का रस नीरस और खट्टा हो जाता है।
Sondha ↔ बदबूदार
मिट्टी के चूल्हे पर पकी रोटी का सोंधा स्वाद दिल को छू लेता है।
धूप में खराब हुई सब्जी से बदबूदार महक आने लगी थी।
Rasdaar ↔ सूखा
चावल के साथ खाने के लिए आलू-मटर की रसदार सब्जी बनाई गई।
सफर में ले जाने के लिए उसने सूखे आलू और पूरियाँ पैक कीं।
Supakwata ↔ कच्चापन
वृक्ष पर प्राकृतिक सुपक्वता पाने वाला अमरूद मीठा और मुलायम होता है।
जल्दबाजी में तोड़े गए फल का कच्चापन स्वाद को किरकिरा कर देता है।
Sakhaa ↔ बैरी
अर्जुन ने महाभारत के धर्मयुद्ध में भगवान कृष्ण को अपना सखा और सारथी बनाया।
हृदय में द्वेष पालने वाला बैरी सदा दूसरे की बर्बादी के षड्यंत्र रचता है।
Sahelee ↔ सौत
दुल्हन अपनी सहेली के साथ अपने मन की खुशियाँ और चिंताएँ साझा कर रही थी।
प्राचीन राजमहलों में सौत के आपसी षड्यंत्रों के कारण अशांति फैली रहती थी।
Sulah ↔ जंग
दोनों कबीलों के बुजुर्गों ने बातचीत करके शांतिपूर्ण सुलह कर ली।
विनाशकारी जंग में किसी भी पक्ष की वास्तविक जीत नहीं होती।
Sandhi ↔ विग्रह
दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए ऐतिहासिक संधि हुई।
नीतिशास्त्र में विग्रह अर्थात् युद्ध को अंतिम विकल्प के रूप में देखा गया है।
Saas ↔ ससुर
स्नेहशील सास ने नई बहू का स्वागत अपनी बेटी की भाँति किया।
ससुर ने दामाद को पारिवारिक व्यापार में पूरा सहयोग और आशीर्वाद दिया।
Jeeja ↔ साला
जीजा जी के आगमन पर ससुराल में सभी छोटे-बड़े प्रसन्न हो उठे।
साला अपनी बहन की ससुराल में कुशलता का समाचार लेने पहुँचा।
Saahukaar ↔ देनदार
प्राचीन समय में साहूकार ग्रामीणों को फसल की बुवाई के लिए ऋण देते थे।
ईमानदार देनदार ने फसल कटते ही साहूकार का संपूर्ण हिसाब चुकता कर दिया।
Saajhedaar ↔ प्रतिद्वंद्वी
दोनों साझेदार मिलकर नई कंपनी को उन्नति के शिखर पर ले गए।
बाजार में प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने ग्राहकों को लुभाने के लिए छूट की घोषणा की।
Sahayogi ↔ विरोधी
परियोजना को समय पर पूरा करने में प्रत्येक सहयोगी का योगदान महत्वपूर्ण था।
चुनाव में विरोधी पक्ष ने सत्ताधारी दल की नीतियों की कड़ी आलोचना की।
Samarthak ↔ विरोधी
रैली में हजारों समर्थक झंडे लहराते हुए अपने उम्मीदवार का उत्साह बढ़ा रहे थे।
विरोधी दल ने जनता को जागरूक करने के लिए पर्चे बांटे।
Sagotra ↔ परगोत्र
प्राचीन परंपराओं में सगोत्र बंधुओं के बीच पारस्परिक सहयोग अनिवार्य माना जाता था।
विवाह संबंध स्थापित करने के लिए परगोत्र के परिवारों का चयन किया जाता है।
Sagotreeya ↔ विजातीय
त्योहार पर सभी सगोत्रीय संबंधी एक साथ पैतृक घर में एकत्र हुए।
विजातीय लोगों के बीच भी सौहार्द और मित्रता स्थापित की जा सकती है।
Swadeshee ↔ विदेशी
स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना और साथी देशवासियों का सहयोग करना देशभक्ति है।
विदेशी पर्यटकों का आतिथ्य सत्कार करना भारतीय संस्कृति की परंपरा है।
Swajan ↔ परजन
संकट के समय स्वजन ही सबसे पहले सहायता के लिए हाथ बढ़ाते हैं।
सच्चा साधु किसी को परजन न मानकर संपूर्ण संसार को अपना कुटुंब मानता है।
Sambaddha ↔ असंबद्ध
महाविद्यालय विश्वविद्यालय से विधिवत संबद्ध होकर शिक्षा प्रदान करता है।
विवाद से पूरी तरह असंबद्ध लोगों को मुकदमे में घसीटना अनुचित है।
Saamanjasya ↔ टकराव
पारिवारिक सामंजस्य और आपसी समझ से घर में शांति का वातावरण रहता है।
अहंकार के टकराव के कारण वर्षों पुराने व्यावसायिक साझेदार अलग हो गए।
Saujanya ↔ कटुता
पड़ोसियों के बीच का सौजन्य त्योहारों की खुशियों को कई गुना बढ़ा देता है।
आपसी कटुता को त्याग कर ही समाज में शांति और सहयोग का निर्माण हो सकता है।
Samarpan ↔ विद्रोह
सैनिकों का देश के प्रति अटूट समर्पण सीमाओं की सुरक्षा का आधार है।
अत्याचारी शासक के विरुद्ध जनता ने एकजुट होकर खुला विद्रोह कर दिया।
Sahchar ↔ एकाकी
यात्रा के दौरान एक समझदार सहचर मिलने से लंबा मार्ग भी सहज कट जाता है।
एकाकी जीवन जीने वाला व्यक्ति अपने सुख-दुख साझा करने के लिए तरसता है।
Sahpaathee ↔ प्रतिद्वंद्वी
सहपाठी मिलकर कठिन विषयों पर चर्चा करते हैं और एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
परीक्षा में प्रतिद्वंद्वी छात्र एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए कड़ा परिश्रम करते हैं।
Samvayask ↔ वृद्ध
समवयस्क मित्रों के समूह में युवक खुलकर अपने विचार और सपने व्यक्त करते हैं।
वृद्ध परिजनों के अनुभवों से सीख लेकर युवा जीवन की गलतियों से बच सकते हैं।
Maata-pita ↔ संतान
माता-पिता अपनी संतान के सुख और प्रगति के लिए सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं।
संतान का धर्म है कि वह बड़े होकर अपने वृद्ध अभिभावकों का आदर और संबल बने।
Suhaagin ↔ विधवा
करवा चौथ पर सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु के लिए निर्जल व्रत रखती हैं।
पति के निधन के बाद विधवा महिला ने साहसपूर्वक अपने बच्चों का पालन-पोषण किया।
Sadhwa ↔ विधवा
मंगल उत्सव में सधवा स्त्रियों द्वारा मंगल कलश की स्थापना की जाती है।
कठिन परिस्थितियों में भी उस विधवा माँ ने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया।
Vidur ↔ सधुर
पत्नी के देहांत के पश्चात विदुर पुरुष एकाकी जीवन बिताने लगा।
सधुर गृहस्थ अपनी पत्नी के सहयोग से गृहस्थी के समस्त दायित्व निभाता है।
Sakutumb ↔ अकेला
निमंत्रण पत्र पर आदरपूर्वक लिखा था कि आप समारोह में सकुशल व सकुटुंब पधारें।
अजनबी शहर में अकेला रहने पर व्यक्ति को परिजनों की कमी बहुत खलती है।
Sagotree ↔ परदेशी
तीर्थयात्रा पर अपने सगोत्री बंधु से मिलने पर उसे अत्यधिक आनंद हुआ।
परदेशी मुसाफिर का सहारा बनकर उसकी मदद करना मानवता का नियम है।
Sadmitra ↔ कुमित्र
सद्मित्र विपत्ति के समय ढाल बनकर रक्षा करता है और सही सलाह देता है।
कुमित्र केवल मौज-मस्ती के समय साथ रहता है और संकट आते ही किनारा कर लेता है।
Suhrid ↔ शत्रु
सच्चा सुहृद आपके अवगुणों को अकेले में समझाता है और गुणों की प्रशंसा करता है।
शत्रु सदा आपकी दुर्बलताओं का लाभ उठाकर आघात करने की ताक में रहता है।
Sagotraj ↔ अगोत्रज
सगोत्रज भाइयों ने पैतृक संपत्ति के विभाजन का मामला आपस में सुलझा लिया।
अगोत्रज व्यापारी के साथ पारदर्शी समझौते के आधार पर अनुबंध किया गया।
Sahkarmee ↔ प्रतिस्पर्धी
कार्यालय में सहकर्मी की सहायता से जटिल परियोजना समय पर पूरी हो गई।
पदोन्नति की दौड़ में दोनों प्रतिस्पर्धी अधिकारी अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे थे।
Sahyoddha ↔ शत्रुयोद्धा
युद्धभूमि में घायल सहयोद्धा को बचाने के लिए सैनिक ने अपनी जान जोखिम में डाली।
शत्रुयोद्धा के पराजित होने पर भी उसके साथ युद्ध-नियमों के अनुसार सम्मान का व्यवहार किया गया।
Sadbhaavpoorn ↔ वैरभावपूर्ण
दोनों संप्रदायों के बीच सद्भावपूर्ण वातावरण से शहर में अमन-चैन बना रहा।
वैरभावपूर्ण टिप्पणियों से समाज का ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो सकता है।
Sahodar ↔ अन्योधर
सहोदर भाइयों के बीच का प्रेम बचपन की स्मृतियों से सींचा हुआ होता है।
अन्योधर भाई होने पर भी दोनों ने पैतृक संपत्ति के मामले को शांति से सुलझाया।
Maayka ↔ ससुराल
त्योहार पर मायका आकर बेटी अपने बचपन की सहेलियों से मिलकर भावुक हो गई।
ससुराल में उसने अपने मधुर व्यवहार से सभी परिजनों को अपना बना लिया।
Peehar ↔ ससुराल
सावन के महीने में नवविवाहिता अपने पीहर जाकर झूले झूलती है।
ससुराल के दायित्वों को समझदारी से निभाना एक सुसंस्कृत बहू का गुण है।
Saga ↔ सौतेला
सगा भाई हर सुख-दुख में बिना किसी स्वार्थ के दीवार की तरह खड़ा रहता है।
सौतेला व्यवहार छोड़कर उसने सभी बच्चों को एक समान वात्सल्य दिया।