Sabhyata ↔ बर्बरता
प्राचीन भारतीय सभ्यता ने विश्व को शांति, ज्ञान और सह-अस्तित्व का संदेश दिया।
युद्ध के दौरान निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करना बर्बरता की पराकाष्ठा है।
अक्षर 'स' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 201–250 / कुल: 473):
Sabhyata ↔ बर्बरता
प्राचीन भारतीय सभ्यता ने विश्व को शांति, ज्ञान और सह-अस्तित्व का संदेश दिया।
युद्ध के दौरान निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करना बर्बरता की पराकाष्ठा है।
Sukarmi ↔ कुकर्मी
सुकर्मी व्यक्ति अपने शुभ कर्मों से समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है।
कुकर्मी अपराधी को अंततः न्यायालय द्वारा कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
Supaatri ↔ अपात्री
मेधावी और परिश्रमी छात्रा को छात्रवृत्ति के लिए सुपात्री माना गया।
अनुचित साधनों का सहारा लेने वाली अपात्री छात्रा को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
Samdarshi ↔ पक्षपाती
सच्चा संत सभी प्राणियों के प्रति समदर्शी दृष्टि रखकर किसी में भेदभाव नहीं करता।
पक्षपाती अधिकारी अपने संबंधियों को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास करता है।
Niswaarthata ↔ स्वार्थपरता
माँ का प्रेम अपनी संतान के प्रति निःस्वार्थता की पराकाष्ठा है।
आज के युग में स्वार्थपरता के कारण पारस्परिक संबंधों में दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं।
Paropkaari ↔ स्वार्थी
परोपकारी व्यक्ति अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा निर्धनों के कल्याण में लगा देता है।
स्वार्थी मनुष्य केवल अपने निजी लाभ के लिए दूसरों का उपयोग करता है।
Sachcha ↔ झूठा
सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय ढाल बनकर साथ खड़ा रहे।
झूठा इंसान अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से कुछ समय के लिए ही भ्रमित कर सकता है।
Suyash ↔ अपयश
वैज्ञानिक ने अपने अविष्कार से पूरे विश्व में देश का सुयश फैलाया।
भ्रष्टाचार के आरोपों से अधिकारी को समाज में भारी अपयश का सामना करना पड़ा।
Sukeerti ↔ अपकीर्ति
त्याग और बलिदान से अर्जित की गई सुकीर्ति सदियों तक जीवित रहती है।
कायरता का प्रदर्शन करने से योद्धा की जीवन भर की कमाई अपकीर्ति में बदल गई।
Satkaar ↔ निरादर
गृहस्थ ने अपने घर आए अतिथियों का बड़े प्रेम और सत्कार के साथ स्वागत किया।
विद्वान सभा में किसी योग्य व्यक्ति का निरादर करना अत्यंत अशोभनीय है।
Stutya ↔ निंद्य
पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए उनके प्रयास सर्वथा स्तुत्य हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाना कानून और समाज दोनों की नजर में निंद्य है।
Satyasandh ↔ वचनभंगी
सत्यसंध राजा दशरथ ने अपने वचनों की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी।
वचनभंगी व्यक्ति पर कोई भी बुद्धिमान राजा या व्यापारी पुनः विश्वास नहीं करता।
Saatvik ↔ तामसिक
सात्विक भोजन और शांत विचार मनुष्य के मन को निर्मल और तनावमुक्त रखते हैं।
तामसिक भोजन और आलस्य से शरीर में जड़ता और प्रमाद की वृद्धि होती है।
Paardarshi ↔ संदेहास्पद
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाकर ही युवाओं में विश्वास बहाल किया जा सकता है।
संदेहास्पद सौदों के उजागर होने पर पूरी चयन समिति को भंग कर दिया गया।
Sadprayaas ↔ दुष्प्रयास
समाज सुधारकों के सद्प्रयास से बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लग सकी।
शत्रु के दुष्प्रयास को सुरक्षा बलों ने अपनी सतर्कता से विफल कर दिया।
Parhit ↔ स्वहित
परहित सरिस धरम नहिं भाई अर्थात् दूसरों का भला करने से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
जो मनुष्य केवल स्वहित में लीन रहता है वह कभी सच्चे मित्र नहीं बना पाता।
Samanvay ↔ वैमनस्य
विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के बीच समन्वय स्थापित करना ही शांति का मार्ग है।
सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
Sahridaya ↔ पाषाणहृदय
सहृदय डॉक्टर ने गरीब मरीज की लाचारी देखकर उसकी पूरी फीस माफ कर दी।
पाषाणहृदय साहूकार ने अनाथ बच्चों की गिड़गिड़ाहट पर भी कोई दया नहीं दिखाई।
Sadvyavahaar ↔ दुर्व्यवहार
ग्राहकों के साथ सद्व्यवहार करने से व्यापार की साख और लोकप्रियता बढ़ती है।
बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले युवक को पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ा।
Samvedansheelata ↔ संवेदनहीनता
कवि की संवेदनशीलता ने प्रकृति और समाज के छिपे दर्दों को शब्दों में ढाल दिया।
दुर्घटना पीड़ितों को देखकर मदद न करना मानवीय संवेदनहीनता का दुखद उदाहरण है।
Sucharitra ↔ दुश्चरित्र
सुचरित्र मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी कभी असत्य और अधर्म का मार्ग नहीं चुनता।
दुश्चरित्र व्यक्ति अपने घृणित आचरण के कारण परिवार का विनाश कर देता है।
Sadbhaav ↔ दुर्भाव
त्योहारों का मूल संदेश समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सद्भाव और प्रेम बढ़ाना है।
पड़ोसियों के प्रति मन में दुर्भाव पालने से घर का वातावरण अशांत हो जाता है।
Saadhuta ↔ असाधुता
उनकी वाणी और व्यवहार में झलकती साधुता ने क्रूर डाकू का भी हृदय परिवर्तन कर दिया।
शत्रु की असाधुता और विश्वासघात के कारण शांति वार्ता बीच में ही टूट गई।
Sajjanta ↔ दुर्जनता
सज्जनता का गुण यही है कि वह दुष्टों के अपशब्दों का उत्तर भी मधुरता से देता है।
दुर्जनता और कुटिलता के कारण कोई भी सज्जन उसके साथ बैठना पसंद नहीं करता।
Paropkaarita ↔ स्वार्थपरता
भारतीय संस्कृति में परोपकारिता को सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
समाज में बढ़ती स्वार्थपरता कमजोर वर्गों की उपेक्षा का कारण बन रही है।
Sapaksh ↔ अपक्ष
सपक्ष पक्षी आकाश की ऊंचाइयों में बिना किसी सहारे के तैरते हैं।
सांप और केंचुआ अपक्ष जीव हैं जो जमीन पर रेंगकर आगे बढ़ते हैं।
Bhaarvaahi ↔ सवारी-पशु
गधा और खच्चर भारवाही पशु हैं जो पहाड़ी मार्गों पर माल ढोते हैं।
सफेद अरबी घोड़ा सवारी-पशु के रूप में अपनी गति और शान के लिए प्रसिद्ध है।
Dudhaaru ↔ सूखा
किसान के पास दो दुधारू गायें हैं जो रोज बीस लीटर दूध देती हैं।
सूखा गाय को भी किसान प्रेम से पौष्टिक चारा देकर सेवा करता है।
Sinh ↔ सिंहनी
सिंह अपनी घनी अयाल हिलाते हुए चट्टान पर शान से बैठा था।
सिंहनी अपने शावकों के भरण-पोषण के लिए शिकार की तलाश करती है।
Sarp ↔ सर्पिणी
फन फैलाए विशाल सर्प बांबी के मुहाने पर बैठा था।
पौराणिक कथाओं में इच्छाधारी सर्पिणी का रोचक वर्णन मिलता है।
Swaadisht ↔ बेस्वाद
दादी माँ के हाथ से बना हलवा अत्यंत स्वादिष्ट और सुगंधित था।
बिना नमक और मसालों की उबली सब्जी पूरी तरह बेस्वाद लग रही थी।
Garisht ↔ सुपाच्य
रात के समय अत्यधिक गरिष्ठ भोजन करने से नींद में खलल पड़ता है।
मूंग की दाल की खिचड़ी सुपाच्य और पौष्टिक भोजन मानी जाती है।
Supaachya-alt ↔ कुपाच्य
उबले हुए सेब और छाछ पेट के लिए सुपाच्य आहार हैं।
सड़क किनारे बिकने वाला तला-भुना जंक फूड कुपाच्य होकर पाचन तंत्र बिगाड़ता है।
Suswaadu ↔ अस्वादु
उत्सव में बने सुस्वादु पकवानों की सभी अतिथियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
गलत अनुपात में मसाले डालने से पूरा सूप अस्वादु और पीने में अरुचिकर हो गया।
Snigdha ↔ रूखा
देसी घी से चुपड़ी स्निग्ध रोटियाँ शरीर में ओज और चिकनाई लाती हैं।
बिना घी-तेल की रूखी रोटी खाने में गले से मुश्किल से नीचे उतरती है।
Masaaledaar ↔ सादा
ढाबे की मसालेदार पनीर की सब्जी तीखी होने पर भी बहुत लोकप्रिय थी।
वृद्धजनों के लिए बिना मिर्च-मसालों का सादा उबला खाना ही उत्तम रहता है।
Sadaabhojan ↔ पकवान
दाल, चावल और रोटी का सदाभोजन नित्य प्रति स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है।
विवाह समारोह में बने घी और मावे के पकवान अधिक खाने से पेट भारी हो जाता है।
Sada ↔ ताज़ा
टोकरी में रखे एक सड़े टमाटर ने बाकी सब्जियों को भी दूषित कर दिया।
बगीचे से लाई गई ताज़ा ककड़ी खाने में कुरकुरी और रसीली थी।
Supeya ↔ कुपेय
हर्बल काढ़ा और छाछ शरीर को तरोताजा रखने वाले सुपेय हैं।
केमिकल युक्त कृत्रिम रंगीन शरबत कुपेय हैं जो बच्चों के गले को खराब करते हैं।
Raseela ↔ सूखा
दशहरी आम अत्यंत रसीला और मिठास से भरा फल होता है।
काजू और बादाम जैसे सूखे मेवे लंबे समय तक खराब नहीं होते।
Kurkura ↔ सीला
गरमागरम समोसे का ऊपरी आवरण एकदम कुरकुरा और खस्ता था।
बरसात की नमी के कारण डिब्बे में रखा बिस्कुट सीला और बेमजा हो गया।
Sika ↔ अधपका
तंदूर में अच्छी तरह सिका हुआ नान खस्ता और सुगंधित था।
हड़बड़ी में निकाला गया अधपका पराठा खाने पर पेट में भारीपन हो गया।
Suvaasit ↔ बासी
केसर और इलायची से सुवासित खीर की महक पूरे घर में फैल गई।
तीन दिन पुराना बासी खाना खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है।
Swaad ↔ बेस्वाद
ताजी पकी बासमती चावल की खीर का स्वाद ही निराला था।
अधिक पानी डाल देने से पूरी दाल बेस्वाद और पतली हो गई।
Swaadu ↔ अस्वादु
घी और मेवों से युक्त लड्डू अत्यंत स्वादु और मनभावन थे।
धूप में रखा रहने के कारण दूध फट गया और अस्वादु हो गया।
Salona ↔ फीका
मठरी और चकली का सलोना स्वाद चाय के साथ खूब जमता है।
उबले आलू बिना नमक-मिर्च के खाने में एकदम फीके लगते हैं।
Sugandhee ↔ गंधहीन
दालचीनी और लौंग रसोई के प्रसिद्ध सुगंधी मसाले हैं।
मैदा और कॉर्नफ्लोर गंधहीन घटक हैं जो केवल गाढ़ापन लाते हैं।
Tadka ↔ सादा
लहसुन और हींग के तड़के से कढ़ी का स्वाद चौगुना हो गया।
पेट खराब होने पर बिना तड़के की सादा खिचड़ी ही खानी चाहिए।
Kuposhan ↔ सुपोषण
गरीबी और अभाव के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार होकर दुर्बल हो जाते हैं।
आंगनवाड़ी में दिए जा रहे पौष्टिक आहार से बच्चों में सुपोषण का स्तर बढ़ा है।
Niraamish ↔ सामिष
मंदिर के भंडारे में केवल शुद्ध निरामिष भोजन ही परोसा जाता है।
तटीय इलाकों में मछली से बना सामिष भोजन मुख्य आहार के रूप में खाया जाता है।