Sahishnu ↔ असहिष्णु
सहिष्णु व्यक्ति विपरीत विचारों का भी सम्मानपूर्वक श्रवण करता है।
असहिष्णु विचारधारा समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देती है।
अक्षर 'स' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 151–200 / कुल: 473):
Sahishnu ↔ असहिष्णु
सहिष्णु व्यक्ति विपरीत विचारों का भी सम्मानपूर्वक श्रवण करता है।
असहिष्णु विचारधारा समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देती है।
Aavesh ↔ संयम
आवेश में आकर कोई भी अप्रिय वचन नहीं बोलना चाहिए।
संयम रखने से बड़े से बड़ा विवाद भी शांतिपूर्वक हल हो जाता है।
Shanka ↔ समाधान
मन में कोई भी शंका हो तो शिक्षक से बेझिझक पूछना चाहिए।
तर्कों और प्रमाणों से सभी जटिल प्रश्नों का समाधान हो गया।
Sadpravritti ↔ दुष्प्रवृत्ति
सत्संगति से बालकों में सद्प्रवृत्ति का विकास होता है।
बुरी संगति मन में दुष्प्रवृत्ति को जन्म देती है।
Sahanubhutik ↔ संवेदनशून्य
उसका सहानुभूतिक व्यवहार संकटग्रस्त लोगों के लिए संबल बना।
दर्द से कराहते व्यक्ति के प्रति संवेदनशून्य रुख निंदनीय है।
Sadbhavi ↔ दुर्भावी
सद्भावी पड़ोसी सुख और दुख दोनों में सदैव साथ खड़े रहते हैं।
दुर्भावी शत्रु सदा दूसरे के पतन की प्रतीक्षा में रहता है।
Amarsha ↔ सहिष्णुता
अपमान का स्मरण होते ही उसके मन में अमर्ष की ज्वाला भड़क उठी।
बुद्धिमानी इसी में है कि व्यक्ति कटु बातों पर भी सहिष्णुता बरते।
Saukhya ↔ दुख
सरल जीवन और सीमित इच्छाएं ही सच्चे सौख्य का रहस्य हैं।
लोभ और ईर्ष्या मनुष्य को कभी न खत्म होने वाले दुख में धकेलते हैं।
Daah ↔ सद्भाव
दूसरों की समृद्धि देखकर मन में डाह पालना अपनी ही काया को सुखाना है।
सद्भाव रखने वाला व्यक्ति सबकी प्रगति पर प्रसन्न होता है।
Santushti ↔ असंतोष
कर्तव्य निष्ठा से पूरा करने के बाद मन को परम संतुष्टि मिलती है।
स्वार्थी मनुष्यों के मन का असंतोष कभी दूर नहीं होता।
Sanshaygrast ↔ निसंशय
संशयग्रस्त व्यक्ति किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से डरता है।
निसंशय होकर आगे बढ़ने वाला कर्मवीर ही इतिहास रचता है।
Sukhad ↔ दुखद
पुराने मित्रों से वर्षों बाद मिलना एक सुखद संयोग था।
विमान दुर्घटना का यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
Sauhardapoorna ↔ द्वेषपूर्ण
दोनों देशों के नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण वार्ता संपन्न हुई।
द्वेषपूर्ण प्रचार से समाज में कटुता और अविश्वास बढ़ता है।
Samvedansheel ↔ संवेदनहीन
सम्वेदनशील शासन जनता की छोटी-बड़ी समस्याओं को तुरंत हल करता है।
जनता की पुकार पर संवेदनहीन बने रहना किसी भी सरकार को शोभा नहीं देता।
Swasth ↔ अस्वस्थ
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
अस्वस्थ खान-पान और आलस्य से व्यक्ति का शरीर बीमारियों का घर बन जाता है।
Sudaul ↔ बेडौल
नियमित दंड-बैठक लगाने से युवक का शरीर सुडौल और आकर्षक बन गया।
दिनभर बैठे रहने और अस्वास्थ्यकर भोजन से शरीर बेडौल होकर भारी हो जाता है।
Sashakta ↔ अशक्त
सशक्त बाहों वाले मजदूर ने भारी पत्थर को क्षणभर में उठाकर किनारे रख दिया।
तीव्र ज्वर के कारण अशक्त हुआ रोगी बिना सहारे के बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था।
Angaheen ↔ सकलंग
दुर्घटना में अंगहीन हुए सैनिक ने कृत्रिम अंगों की सहायता से पुनः चलना सीखा।
सकलंग शरीर पाकर भी जो परिश्रम नहीं करता वह अपने सामर्थ्य का अपमान करता है।
Andha ↔ सुजाखा
अंधा राहगीर सफेद छड़ी की मदद से सड़क पार करने का प्रयास कर रहा था।
सुजाखा व्यक्ति दूर से ही आने वाले वाहन को देखकर सावधानी बरत लेता है।
Murchhit ↔ सजग
धूप की तपन न सह पाने के कारण छात्रा मैदान में मूर्च्छित होकर गिर पड़ी।
सजग चिकित्सक ने तुरंत प्राथमिक उपचार देकर उसके शरीर में चेतना लौटाई।
Spryshya ↔ अस्पृश्य
हाथ से छुआ जा सकने वाला भौतिक पदार्थ स्पृश्य संसार का अंग है।
प्रकाश और वायु जैसी सूक्ष्म तरंगें त्वचा से अस्पृश्य अथवा अमूर्त प्रतीत होती हैं।
Sashastra ↔ निहत्था
सीमा पर सशस्त्र प्रहरी हाथों में बंदूक लिए देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
युद्ध के नियमों के अनुसार किसी निहत्थे व्यक्ति पर वार करना वर्जित है।
Sthoolakaaya ↔ कृशकाय
अत्यधिक वसायुक्त भोजन और निष्क्रिय दिनचर्या से व्यक्ति स्थूलकाय हो जाता है, जिससे गतिशीलता घटती है।
लंबी तपस्या और उपवास के कारण संन्यासी का शरीर अत्यंत कृशकाय परंतु तेजस्वी हो गया था।
Khalvaata ↔ सकेश
उम्र ढलने के साथ सिर के बाल झड़ने से कई व्यक्तियों का मस्तक खल्वाट हो जाता है।
आयुर्वेदिक तेलों और उचित पोषण से सिर का भाग घने बालों से युक्त और सकेश बना रहता है।
Sumukha ↔ दुर्मुख
सदा प्रसन्न रहने वाले बालक का सुमुख देखकर हर किसी का मन आनंदित हो उठता है।
सदा क्रोध और कटुता में डूबे रहने वाले व्यक्ति का चेहरा दुर्मुख और विकृत प्रतीत होता है।
Kaanaa ↔ सनेत्र
दुर्घटना में एक आंख की रोशनी खो देने से वह व्यक्ति काणा हो गया था।
स्वस्थ खानपान और नेत्र व्यायाम से दोनों आंखों की दृष्टि सनेत्र और स्पष्ट बनी रहती है।
Sachchaai ↔ झूठ
सच्चाई के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को आरंभ में कठिनाइयाँ आती हैं किंतु अंत में विजय उसी की होती है।
झूठ का सहारा लेकर खड़ा किया गया व्यापार या संबंध अधिक समय तक टिक नहीं पाता।
Sadaachaar ↔ दुराचार
विद्यालय में विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ सदाचार और अनुशासन की भी शिक्षा दी जाती है।
दुराचार और कुसंगति में लिप्त व्यक्ति अपने कुल और समाज की प्रतिष्ठा को कलंकित करता है।
Sadgun ↔ दुर्गुण
विनम्रता, सत्यवादिता और परोपकार जैसे सद्गुण व्यक्ति को महान बनाते हैं।
अहंकार, ईर्ष्या और लोभ जैसे दुर्गुण मनुष्य के समस्त पुण्यों को भस्म कर देते हैं।
Satkarm ↔ दुष्कर्म
जीवन में किए गए सत्कर्म ही मृत्यु के उपरांत व्यक्ति का नाम अमर रखते हैं।
दुष्कर्म करने वाला मनुष्य कानून की नजर से बच भी जाए, तो अंतरात्मा की अदालत से नहीं बच सकता।
Satyavaadi ↔ मिथ्यावादी
राजा हरिश्चंद्र को भारतीय इतिहास में सबसे महान सत्यवादी के रूप में स्मरण किया जाता है।
मिथ्यावादी व्यक्ति की बातों पर कोई भी समझदार इंसान कभी भरोसा नहीं करता।
Satsang ↔ कुसंग
ज्ञानी संतों का सत्संग मनुष्य के विकारों को दूर कर जीवन को आलोकित करता है।
कुसंग में पड़कर अच्छे संस्कारों वाला युवक भी धीरे-धीरे नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आ गया।
Sadaachaari ↔ दुराचारी
सदाचारी व्यक्ति समाज में जहाँ भी जाता है, अपने आचरण से सबका सम्मान पाता है।
दुराचारी व्यक्ति अपने नीच कर्मों के कारण अपनों के बीच भी तिरस्कृत रहता है।
Sanyam ↔ असंयम
वाणी और इंद्रियों पर संयम रखने से मनुष्य अनेक व्यर्थ के विवादों से बच जाता है।
खान-पान में असंयम बरतने से शरीर रोगों का घर बन जाता है।
Niswarth ↔ स्वार्थी
निःस्वार्थ भाव से की गई समाजसेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना कहलाती है।
स्वार्थी मित्र केवल अपने काम के समय याद करता है और संकट में साथ छोड़ देता है।
Parmaarth ↔ स्वार्थ
संत कबीर ने जीवन भर परमार्थ और ज्ञान के प्रचार को ही अपना कर्तव्य माना।
अंधे स्वार्थ के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने सगे-संबंधियों को भी हानि पहुँचा बैठता है।
Sadbuddhi ↔ दुर्बुद्धि
भगवान से प्रार्थना है कि वे सभी को सद्विचार और सद्बुद्धि प्रदान करें।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों के साथ संधि का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
Sahishnuta ↔ असहिष्णुता
धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सौहार्द ही भारत की विविधता की वास्तविक पहचान है।
कट्टरता और असहिष्णुता समाज में वैमनस्य और हिंसा को जन्म देती है।
Udaarta ↔ संकीर्णता
राजा ने अपनी उदारता का परिचय देते हुए पराजित शत्रु को भी क्षमादान दे दिया।
विचारों की संकीर्णता मनुष्य को नए दृष्टिकोण और प्रगति को स्वीकार करने से रोकती है।
Satyanishth ↔ भ्रष्ट
सत्यनिष्ठ न्यायाधीश ने किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जन-कल्याण की योजनाएँ अधूरी रह गईं।
Supaatra ↔ कुपात्र
सुपात्र व्यक्ति को दिया गया दान विद्या और समाज-कल्याण के काम आता है।
कुपात्र को धन या अधिकार सौंपने से समाज में अराजकता और अव्यवस्था फैलती है।
Suyog ↔ कुयोग
विद्वानों के सान्निध्य में ज्ञान प्राप्त करने का सुयोग बड़े भाग्य से मिलता है।
यात्रा के समय कुयोग बनने से उनका सारा कार्यक्रम अस्त-व्यस्त हो गया।
Sushasan ↔ कुशासन
सुशासन की स्थापना तभी संभव है जब शासन में पारदर्शिता और जन-सुनवाई हो।
कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर जनता ने अत्याचारी शासक को सत्ता से हटा दिया।
Sadgati ↔ दुर्गति
पवित्र कर्मों और निर्मल मन से जीवन जीने वाले को सद्गति प्राप्त होती है।
जुआ और मद्यपान की लत के कारण उस धनाढ्य परिवार की घोर दुर्गति हो गई।
Sadvichaar ↔ दुर्विचार
सद्विचार मनुष्य के अंतःकरण को शांति और आनंद से भर देते हैं।
ईर्ष्या और द्वेष से उपजे दुर्विचार मनुष्य की मानसिक शांति को छीन लेते हैं।
Satyapriya ↔ मिथ्याप्रिय
सत्यप्रिय व्यक्ति कटु यथार्थ को भी धैर्य और साहस के साथ स्वीकार कर लेता है।
मिथ्याप्रिय चापलूस झूठी प्रशंसा करके अपने स्वामी को भ्रम में रखते हैं।
Sadmaarg ↔ कुमार्ग
गुरुजनों का मार्गदर्शन सदैव युवाओं को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कुमार्ग पर चलकर कमाया गया नाम और शोहरत बहुत शीघ्र धूल में मिल जाती है।
Sumaarg ↔ उन्मार्ग
सत्संग और स्वाध्याय मनुष्य के मन को सदा सुमार्ग की ओर प्रेरित करते हैं।
उन्मार्ग पर भटकने वाला व्यक्ति अपने भविष्य और परिवार दोनों को संकट में डालता है।
Suneeti ↔ कुनीति
चाणक्य की सुनीति के आधार पर मौर्य साम्राज्य ने अद्वितीय वैभव प्राप्त किया।
कुनीति और षड्यंत्र के बल पर सत्ता हथियाने वाले शासक अधिक समय तक नहीं टिक पाते।
Asteya ↔ स्तेय
योग के यम नियमों में अस्तेय अर्थात् चोरी न करने के व्रत का बड़ा महत्व है।
स्तेय अर्थात् दूसरों की वस्तु पर अनाधिकृत अधिकार जमाना नैतिक दृष्टि से जघन्य अपराध है।