Usha ↔ संध्या
उषा की लालिमा नभ में बिखरते ही संपूर्ण प्रकृति में नवचेतना का संचार हो जाता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।
अक्षर 'स' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 101–150 / कुल: 473):
Usha ↔ संध्या
उषा की लालिमा नभ में बिखरते ही संपूर्ण प्रकृति में नवचेतना का संचार हो जाता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।
Bhor ↔ सांझ
किसान भोर होते ही खेतों पर चल पड़ते हैं और सांझ ढलने पर ही घर वापस लौटते हैं।
सांझ के झुटपुटे में चरवाहे अपनी गायों को चराकर गांव की ओर हांक लाते हैं।
Suryoday ↔ सूर्यास्त
सूर्योदय के समय पूर्व दिशा स्वर्णिम और सूर्यास्त के समय पश्चिम दिशा सिंदूरी दिखती है।
सूर्यास्त के साथ ही दिनभर की आपाधापी थम जाती है और शीतल निशा का आगमन होता है।
Baadh ↔ सूखा
नदियों में बाढ़ आने से गांव डूब जाते हैं, जबकि सूखे में पीने के पानी की किल्लत हो जाती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Jaagriti ↔ सुषुप्ति
प्रभात की प्रथम किरण के साथ प्रकृति में नव जागृति की लहर दौड़ जाती है।
शीत ऋतु में अनेक वन्य जीव सुषुप्ति में चले जाते हैं और वसंत में जागृति प्राप्त करते हैं।
Samudra ↔ मरुस्थल
पृथ्वी का एक छोर अपार जलराशि वाले समुद्र से भरा है तो दूसरा शुष्क मरुस्थल से आच्छादित है।
मरुस्थल में पानी की एक-एक बूंद बहुमूल्य मानी जाती है, जहां दूर-दूर तक केवल रेत ही रेत होती है।
Udgam ↔ संगम
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
पर्वतों से निकली नदियां जब पावन संगम पर मिलती हैं तो वह तीर्थ बन जाता है।
Surya ↔ चंद्र
सूर्य के तेज के समक्ष तारे छिप जाते हैं और चंद्र की शीतल आभा में नभ दमक उठता है।
सूर्य दिन में समस्त जगत को ऊर्जा प्रदान करता है और चंद्र रात्रि में शीतलता बिखरता है।
Saur ↔ चांद्र
खगोलशास्त्र में सौर वर्ष की गणना सूर्य की गति से और चांद्र मास की गणना चंद्रमा से होती है।
चांद्र कैलेंडर और सौर कैलेंडर के दिनों के अंतर को समायोजित करने के लिए अधिक मास आता है।
Dhundh ↔ स्पष्टता
सर्दियों की सुबह छाई घनी धुंध धूप खिलने पर अद्भुत स्पष्टता में बदल गई।
सर्दियों की सुबह छाई धुंध छंटते ही वातावरण में अद्भुत स्पष्टता फैल गई।
Kuhaasa ↔ स्वच्छ आकाश
पहाड़ी मार्ग पर कुहासा छाने से दृश्यता समाप्त हो गई, जो स्वच्छ आकाश होने पर ही लौटी।
पहाड़ी घाटियों में कुहासा हटने पर नीला स्वच्छ आकाश पर्यटकों का मन मोह लेता है।
Saagar ↔ तट
उफनता सागर दूर तक जलमग्न दिखाई देता है और उसकी लहरें आकर शांत तट से टकराती हैं।
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
Sukaal ↔ अकाल
पर्याप्त मानसूनी वर्षा से देश में सुकाल का वातावरण बना और अकाल का भय समाप्त हो गया।
अकाल के दिनों में अन्न की भारी कमी हो गई थी, किंतु सुकाल आते ही कोठार भर गए।
Varsha ↔ सूखा
वर्षा ऋतु में नदियां लबालब भर जाती हैं, जबकि सूखे में उनकी तलहटी की रेत दिखने लगती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Saavan ↔ भादों
लोकगीतों में सावन के झूले और भादों की घनघोर झड़ी का बड़ा मार्मिक वर्णन मिलता है।
सावन की फुहारों के पश्चात भादों की घनघोर झड़ी नदियों को लबालब भर देती है।
Ulka ↔ स्थिर तारा
क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का की तुलना नभ के स्थिर तारा से कभी नहीं की जा सकती।
आकाश में क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का स्थिर तारा की शाश्वत दीप्ति की बराबरी नहीं कर सकती।
Salil ↔ पावक
कवि ने प्रकृति के संतुलन को दर्शाते हुए शीतल सलिल और प्रज्वलित पावक का वर्णन किया है।
पावक सब कुछ भस्म कर पवित्र कर देती है, और सलिल उस तपन को शांत कर तृप्ति देता है।
Nirjhar ↔ स्थिर जल
चट्टानों को चीरकर बहता कलकल निर्झर गति का प्रतीक है, जबकि शांत सरोवर विश्राम का।
पहाड़ों का चंचल निर्झर बहकर अंततः घाटी के शांत स्थिर जल में विश्राम पाता है।
Sthal ↔ जल
स्थल मंडल पर मानव सभ्यताएं विकसित हुईं, जबकि जल मंडल संपूर्ण जीवमंडल को जीवन देता है।
सृष्टि के संतुलन हेतु शीतल जल और प्रज्वलित अग्नि दोनों तत्व अनिवार्य हैं।
Sakriya Jwalamukhi ↔ सुप्त ज्वालामुखी
सक्रिय ज्वालामुखी के आसपास बस्तियां बसाना जोखिम भरा होता है।
सुप्त ज्वालामुखी सदियों तक शांत रहता है, जबकि सक्रिय ज्वालामुखी से निरंतर धुआं और लावा निकलता है।
Sam Jalvayu ↔ विषम जलवायु
मुंबई जैसे समुद्री शहरों में सालभर सम जलवायु रहती है, जबकि दिल्ली में विषम जलवायु पाई जाती है।
रेगिस्तानी इलाकों की विषम जलवायु में दिन में भीषण गर्मी और रात में तीखी ठंड पड़ती है।
Sadabahaar Van ↔ पर्णपाती वन
पश्चिमी घाट के सदाबहार वन जैव विविधता के विपुल भंडार हैं जो कभी पत्ते विहीन नहीं होते।
पर्णपाती वन शुष्क मौसम में पत्ते गिरा देते हैं, जबकि सदाबहार वन सालभर घने हरे-भरे रहते हैं।
Bhooskhalan ↔ स्थिर भूमि
भारी बारिश के कारण पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, जहां स्थिर भूमि भी दरकने लगती है।
भूस्खलन के खतरे वाले ढलानों पर बस्तियां बसाने के बजाय स्थिर भूमि पर निर्माण सुरक्षित है।
Garmi ↔ सर्दी
मई की भीषण गर्मी के पश्चात दिसंबर की कपकपाती सर्दी प्रकृति के ऋतुचक्र को पूर्ण करती है।
सर्दी के दिनों में गर्म चाय और धूप अत्यंत प्रिय लगती है, जो गर्मी में असह्य होती है।
Bhay ↔ साहस
मन में यदि अज्ञात का भय हो तो व्यक्ति आगे बढ़ने से हिचकिचाता है।
सच्चा साहस वही है जो विपत्ति के सामने निडर खड़ा रहे।
Santosh ↔ असंतोष
जीवन में सच्चा संतोष ही सबसे बड़ा धन माना गया है।
अकारण असंतोष मनुष्य को कभी सुखी नहीं रहने देता।
Irshya ↔ सद्भाव
दूसरों की प्रतिष्ठा देखकर मन में ईर्ष्या पालना अपने ही सुख का नाश करना है।
सभी पड़ोसियों के प्रति सद्भाव रखने से समाज में शांति बनी रहती है।
Swabhiman ↔ हीनता
स्वाभिमान से जीना ही एक स्वतंत्र मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है।
गरीबी के कारण मन में कभी हीनता की भावना नहीं आने देनी चाहिए।
Matsarya ↔ सौहार्द
मन में मात्सर्य और डाह रखने से मनुष्य अपनी ही शांति खो बैठता है।
पड़ोसियों के बीच आपसी सौहार्द से ही सुखमय जीवन संभव होता है।
Santap ↔ शीतलता
प्रियजन के वियोग का संताप हृदय को अंदर ही अंदर जलाता रहता है।
संतों के वचनों से तप्त मन को शीतलता और धैर्य प्राप्त होता है।
Vyatha ↔ सुख
दीन-दुखियों की मूक व्यथा देखकर परोपकारी व्यक्ति का हृदय द्रवित हो उठा।
संतुष्ट जीवन जीने वाले व्यक्ति को आत्मिक सुख का अनुभव होता है।
Sanshay ↔ विश्वास
संशय में पड़ा हुआ मनुष्य कभी कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाता।
सच्चे मित्रों के बीच अटूट विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति होता है।
Sandeh ↔ निश्चय
अकारण संदेह करने से प्रेमपूर्ण रिश्तों में भी दरार आ जाती है।
दृढ़ निश्चय के साथ काम करने पर कोई भी बाधा मार्ग नहीं रोक सकती।
Vyakulta ↔ स्थिरता
संकट के समय मन की व्याकुलता समस्याओं को और जटिल बना देती है।
मानसिक स्थिरता बनाए रखने से कठिन से कठिन परिस्थिति भी नियंत्रित हो जाती है।
Sneh ↔ उपेक्षा
गुरुजनों का सच्चा स्नेह विद्यार्थियों के जीवन को प्रकाशमय बना देता है।
बुजुर्गों की उपेक्षा करना किसी भी सभ्य समाज के लिए अनुचित है।
Sahanubhuti ↔ बेरुखी
विपदा के समय व्यक्त की गई सच्ची सहानुभूति पीड़ित को संबल देती है।
जरूरतमंदों के प्रति ऐसी बेरुखी दिखाना मानवीय मूल्यों के विपरीत है।
Samvedna ↔ संवेदनहीनता
कवि की गहरी संवेदना ही उसकी रचनाओं में अमर रस घोलती है।
सड़क दुर्घटना में पीड़ितों की मदद न करना घोर संवेदनहीनता का प्रमाण है।
Sumati ↔ कुमति
जहाँ सुमति तहाँ संपति नाना, यह नीतिवचन जीवन का सत्य है।
कुमति के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने ही हितैषियों का अपमान कर बैठता है।
Subuddhi ↔ दुर्बुद्धि
ईश्वर से प्रार्थना है कि वह सबको सुबुद्धि और सद्विचार प्रदान करे।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों का अधिकार छीनने का प्रयास किया।
Sadbhavna ↔ दुर्भावना
विभिन्न समुदायों के बीच सद्भावना राष्ट्र की अखंडता का आधार है।
मन में दुर्भावना रखकर किया गया कोई भी कार्य सफल नहीं होता।
Sahasi ↔ डरपोक
साहसी नाविकों ने उफनते समुद्र की विशाल लहरों को पार कर लिया।
डरपोक व्यक्ति छोटी सी परेशानी देखकर ही मैदान छोड़ देता है।
Pulkit ↔ संतप्त
प्रियतम के आगमन का समाचार पाकर उसका रोम-रोम पुलकित हो गया।
कठोर विरह की ज्वाला में संतप्त हृदय को कहीं चैन नहीं था।
Aashwast ↔ सशंक
चिकित्सक के सांत्वना भरे शब्दों से रोगी पूरी तरह आश्वस्त हो गया।
अपरिचित व्यक्ति के संदिग्ध व्यवहार से सब सशंक हो गए।
Samyami ↔ असंयमी
संयमी व्यक्ति अपनी वाणी और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
असंयमी खान-पान से व्यक्ति का स्वास्थ्य शीघ्र बिगड़ जाता है।
Sachet ↔ अचेत
सचेत नागरिक देश की सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहता है।
गंभीर दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति सड़क पर अचेत पड़ा था।
Satark ↔ असावधान
सीमा पर सतर्क सैनिक शत्रु की हर हलचल पर पैनी नजर रखते हैं।
असावधान चालक के कारण सड़क पर भारी दुर्घटना घट गई।
Sajag ↔ सुप्त
सजग पहरेदार ने रात में चोरों के षड्यंत्र को विफल कर दिया।
सर्दियों में अनेक जीव सुप्त अवस्था में चले जाते हैं।
Sadashay ↔ दुराशय
सदाशय महापुरुष सदैव दूसरों के उत्थान का विचार करते हैं।
दुराशय व्यक्ति के मन में सदैव दूसरों को नीचा दिखाने का कुचक्र चलता रहता है।
Saday ↔ निर्दय
सदय न्यायाधीश ने अपराधी के पश्चाताप को देखकर सजा में नरमी बरती।
निर्दय शिकारी ने असहाय हिरण पर तीर चला दिया।
Sahansheelta ↔ असहिष्णुता
सहनशीलता विविधतापूर्ण समाज को एक सूत्र में पिरोए रखती है।
धार्मिक असहिष्णुता शांतिपूर्ण परिवेश में विष घोल देती है।