Kutil ↔ सरल
कुटिल राजनीतिज्ञ अपनी बातों में फंसाते हैं जबकि सरल व्यक्ति सच्चाई बोलता है।
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
अक्षर 'स' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 51–100 / कुल: 473):
Kutil ↔ सरल
कुटिल राजनीतिज्ञ अपनी बातों में फंसाते हैं जबकि सरल व्यक्ति सच्चाई बोलता है।
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
Udaaramana ↔ संकीर्णमना
उदारमना व्यक्ति सभी धर्मों का आदर करता है, संकीर्णमना द्वेष पालता है।
संकीर्णमना व्यक्ति कभी विशाल समाज का नेतृत्व नहीं कर सकता, उदारता ही सम्मान दिलाती है।
Supraapya ↔ दुष्प्राप्य
आजकल इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान सुप्राप्य हो गया है।
घने जंगलों में पाई जाने वाली संजीवनी बूटी अत्यंत दुष्प्राप्य मानी जाती है।
Sachest ↔ निश्चेष्ट
दवा लगते ही मरीज सचेष्ट हो उठा, पहले वह निश्चेष्ट पड़ा था।
संकट के समय निश्चेष्ट बैठने के बजाय सक्रिय होकर समाधान खोजना चाहिए।
Sukrit ↔ दुष्कृत
सुकृत कर्म करने से आत्मा को शांति मिलती है, दुष्कृत सदा पश्चाताप देता है।
दुष्कृत करने वाला भले ही कानून से बच जाए, अंतरात्मा के दंड से नहीं बच सकता।
Sachetan ↔ अचेतन
सचेतन नागरिक अपने देश के प्रति सदैव सजग रहता है।
अचेतन मन में दबी इच्छाएं और स्मृतियां मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
Sugandhit ↔ दुर्गंधयुक्त
गुलाब का सुगंधित इत्र मन को मोह लेता है।
दुर्गंधयुक्त नाले संक्रामक रोगों का केंद्र बन जाते हैं जिन्हें ढकना आवश्यक है।
Suruchipoorna ↔ अरुचिकर
गृह-सज्जा सुरुचिपूर्ण ढंग से की गई थी।
अरुचिकर भोजन भी भूख लगने पर स्वादिष्ट और तृप्तिकारी प्रतीत होने लगता है।
Sulakshan ↔ कुलक्षण
सुलक्षण बालक परिवार का मान बढ़ाता है।
बचपन के कुलक्षण यदि समय रहते न सुधारे जाएं तो आगे चलकर विनाशकारी बनते हैं।
Saubhaagyashaali ↔ दुर्भाग्यशाली
वे सौभाग्यशाली हैं जिन्हें गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
दुर्भाग्यशाली मनुष्य भी यदि सतत परिश्रम करे तो अपने भाग्य की रेखाएं बदल सकता है।
Sarvagya ↔ अल्पज्ञ
संसार में केवल ईश्वर ही सर्वज्ञ है, मनुष्य तो अल्पज्ञ ही रहता है।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Sanyog ↔ वियोग
श्रृंगार रस के दो पक्ष होते हैं — संयोग और वियोग।
प्रियजनों का वियोग हृदय को भारी पीड़ा पहुंचाता है।
Apmaan ↔ सम्मान
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
Sammaan ↔ तिरस्कार
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Stuti ↔ निंदा
भक्त प्रभु की स्तुति करते हैं और अहंकार की निंदा करते हैं।
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय — कबीरदास जी के अनुसार निंदा करने वाला व्यक्ति सुधारक होता है।
Swami ↔ सेवक
दयालु स्वामी अपने सेवक को परिवार के सदस्य की भांति स्नेह देता है।
हनुमान जी भगवान श्रीराम के अनन्य सेवक और भक्त थे।
Grihastha ↔ संन्यासी
गृहस्थ धर्म निभाते हुए भी मनुष्य संन्यासी जैसी पवित्रता बनाए रख सकता है।
संन्यासी ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर सत्य की खोज शुरू की।
Swadesh ↔ परदेश
स्वदेश की मिट्टी की खुशबू परदेश में रहने वाले प्रवासी को सदा अपनी ओर खींचती है।
परदेश में कितना भी धन मिले, स्वदेश जैसी आत्मीयता कहीं नहीं मिलती।
Videsh ↔ स्वदेश
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
स्वदेश की मिट्टी की खुशबू परदेश में रहने वाले प्रवासी को सदा अपनी ओर खींचती है।
Sangathan ↔ विघटन
मजबूत संगठन से कठिन लक्ष्य भी पा लिए जाते हैं, आंतरिक कलह से विघटन तय है।
राष्ट्रविरोधी ताकतें देश के विघटन का षड्यंत्र रचती हैं, जिसे सजग नागरिक विफल कर देते हैं।
Swaagat ↔ तिरस्कार
अतिथि का द्वार पर आत्मीय स्वागत किया गया।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Samraat ↔ सामंत
सम्राट का आदेश पूरे साम्राज्य के सामंतों और जनता के लिए सर्वोपरि था।
सामंत अपने क्षेत्र में कर वसूलते थे और सम्राट को खिराज भेजते थे।
Purush ↔ स्त्री
संविधान की दृष्टि में पुरुष और स्त्री दोनों को समान अधिकार व अवसर प्राप्त हैं।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः — जहां स्त्री का सम्मान होता है वहां देवों का वास होता है।
Swatantrata ↔ परतंत्रता
स्वतंत्रता सेनानियों के असीम बलिदान से देश को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्ति मिली।
परतंत्रता मनुष्य के आत्मसम्मान और संस्कृति को नष्ट कर देती है।
Gopneeya ↔ सार्वजनिक
सुरक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाते।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक देशवासी का पावन नागरिक कर्तव्य है।
Vyasthi ↔ समष्टि
व्यष्टि और समष्टि के बीच संतुलन ही स्वस्थ समाज की पहचान है।
समष्टि के कल्याण में ही व्यष्टि का हित समाहित रहता है।
Snvidhaana ↔ अराजकता
संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और शासन को मर्यादा में बांधता है।
कानून व्यवस्था के ध्वस्त होते ही समाज में अराजकता फैल जाती है और निर्बल वर्ग असुरक्षित हो जाता है।
Sattaaroodh ↔ विपक्षी
सत्तारूढ़ दल पर जनकल्याणकारी योजनाओं को निष्पक्ष रूप से धरातल पर उतारने की जवाबदेही होती है।
संसद में विपक्षी दल नीतियों की निष्पक्ष समीक्षा कर शासन की कमियों को उजागर करता है।
Sarvasammati ↔ मतभेद
ग्राम सुधार योजना का प्रस्ताव पंचायत में सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से पारित हो गया।
बजट के आवंटन को लेकर समिति के सदस्यों के बीच गहरा मतभेद उभर कर सामने आया।
Sahabhaagitaa ↔ तटस्थता
स्वच्छ भारत अभियान की वास्तविक सफलता जन-सहभागिता पर ही पूरी तरह निर्भर करती है।
समाज की समस्याओं के प्रति जागरूक न होकर तटस्थता बरतना नागरिक दायित्वों की उपेक्षा है।
Svaichchhika ↔ बाध्यकारी
रक्तदान शिविर में युवाओं ने स्वैच्छिक रूप से आगे आकर बड़ी संख्या में रक्तदान किया।
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक के लिए बाध्यकारी होता है, न कि ऐच्छिक।
Satyanishthaa ↔ भ्रष्टाचार
अधिकारी ने पूरी सत्यनिष्ठा के साथ सरकारी धन का सदुपयोग करते हुए निर्माण कार्य पूरा कराया।
भ्रष्टाचार के कारण समाज में योग्य व्यक्तियों का हक मारा जाता है और व्यवस्था कमजोर होती है।
Snskriti ↔ विकृति
हमारे देश की प्राचीन संस्कृति विविधता में एकता और पारस्परिक सद्भाव का संदेश देती है।
नशाखोरी और अभद्रता समाज के ताने-बाने में पैदा होने वाली गंभीर विकृति के लक्षण हैं।
Saamaajika ↔ असामाजिक
सामूहिक विवाह और उत्सव सामाजिक मेलजोल व भाईचारे को सुदृढ़ करने के उत्तम माध्यम हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों पर पुलिस कड़ी नजर रखती है।
Saamudaayika ↔ व्यक्तिगत
गांव के विकास के लिए सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया जहाँ सभी एकत्र हो सकें।
सार्वजनिक निर्णय लेते समय व्यक्तिगत लाभ और स्वार्थ को पीछे रखना पड़ता है।
Samarasataa ↔ विषमता
समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने से ही राष्ट्र में वास्तविक समरसता स्थापित होती है।
आर्थिक और सामाजिक विषमता को दूर किए बिना एक सशक्त समाज का निर्माण संभव नहीं है।
Samaanataa ↔ असमानता
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना समानता की गारंटी है।
अवसरों की असमानता से वंचित वर्गों के युवाओं का आत्मविश्वास डगमगा जाता है।
Bhedabhaava ↔ सद्भाव
विद्यालय में सभी छात्रों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए शांति समिति की बैठक आयोजित हुई।
Bahishkaara ↔ समावेशन
स्वाधीनता आंदोलन के समय विदेशी वस्तुओं का पूर्ण बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया गया।
दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाने के लिए नीतिगत समावेशन और विशेष सुविधाएं आवश्यक हैं।
Sveekriti ↔ अस्वीकृति
आधुनिक प्रगतिशील विचारों को समाज की स्वीकृति मिलने में कुछ समय अवश्य लगता है।
कुप्रथाओं और अंधविश्वासों की सार्वभौमिक अस्वीकृति से ही समाज उन्नत बन सकता है।
Kureeti ↔ सुरीति
दहेज प्रथा जैसी अमानवीय कुरीति के विरुद्ध समाज के सभी प्रबुद्ध लोगों को आवाज उठानी चाहिए।
अतिथि सत्कार और बड़ों का आदर करना समाज की प्राचीन व कल्याणकारी सुरीति है।
Ekaakee ↔ सकुटुंब
अकेले फ्लैट में रहने वाला वृद्ध व्यक्ति एकाकी जीवन की तन्हाई से जूझ रहा था।
विवाह समारोह में पधारे सभी अतिथियों का सकुटुंब अर्थात परिवार सहित हार्दिक स्वागत किया गया।
Vidhura ↔ सपत्नीक
पत्नी के देहांत के पश्चात वह वृद्ध व्यक्ति विधुर जीवन बिताते हुए एकांत में रहने लगा।
धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ में यजमान को सपत्नीक अर्थात पत्नी सहित बैठने का शास्त्रीय विधान है।
Svachchhataa ↔ गंदगी
आसपास स्वच्छता बनाए रखने से संक्रामक रोगों का फैलाव रुकता है और पर्यावरण सुंदर बनता है।
सड़क किनारे फैली गंदगी से दुर्गंध उठ रही थी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा था।
Svaasthyakara ↔ अस्वास्थ्यकर
हरी सब्जियां, ताजे फल और स्वच्छ पेयजल स्वास्थ्यकर जीवनशैली की आधारशिला हैं।
खुले में बिकने वाला दूषित भोजन और बासी खाद्य पदार्थ अस्वास्थ्यकर सिद्ध होते हैं।
Savaaree ↔ पैदल
दफ्तर जाने के लिए उन्होंने मेट्रो ट्रेन की सवारी को सबसे तेज और सुविधाजनक विकल्प माना।
स्वास्थ्य और फिटनेस बनाए रखने के लिए प्रातःकाल पैदल चलना एक उत्तम व्यायाम है।
Suvyavasthaa ↔ कुव्यवस्था
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत शहर की यातायात और जल सुव्यवस्था की सर्वत्र सराहना हुई।
अस्पताल में दवाओं की कमी और गंदगी प्रशासन की घोर कुव्यवस्था का जीता-जागता प्रमाण थी।
Sauhaarda ↔ कटुता
ईद और दीवाली पर एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देने से समाज में आपसी सौहार्द प्रगाढ़ होता है।
अफवाहों और भड़काऊ भाषणों के कारण दोनों पक्षों के मध्य अविश्वास और कटुता उत्पन्न हो गई।
Vaimanasya ↔ सौमनस्य
पुरानी रंजिश और वैमनस्य को भुलाकर दोनों परिवारों ने आपस में हाथ मिला लिए।
पड़ोसियों के बीच प्रेम और सौमनस्य का वातावरण रहने से जीवन सुखमय बन जाता है।
Prabhat ↔ संध्या
प्रभात की ताजी किरणें उमंग लाती हैं और संध्या का शांत वातावरण विश्राम का संदेश देता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।