Shramasheel ↔ अनुद्यमी
श्रमशील समुदाय अपनी कड़ी मेहनत से बंजर धरती पर भी फसलें उगा लेता है।
अनुद्यमी लोग संसाधनों से संपन्न होकर भी कोई नया कार्य आरंभ नहीं कर पाते।
अक्षर 'श' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 101–150 / कुल: 180):
Shramasheel ↔ अनुद्यमी
श्रमशील समुदाय अपनी कड़ी मेहनत से बंजर धरती पर भी फसलें उगा लेता है।
अनुद्यमी लोग संसाधनों से संपन्न होकर भी कोई नया कार्य आरंभ नहीं कर पाते।
Shramapriya ↔ आरामपसंद
श्रमप्रिय किसान अपने हाथों से कुदाल चलाकर पसीना बहाने में गर्व अनुभव करता है।
आरामपसंद व्यक्ति वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलने में भी कतराता है।
Shramamoolya ↔ मुफ्तखोरी
सभ्य समाज में हर मजदूर को उसके श्रममूल्य का उचित सम्मान मिलना चाहिए।
मुफ्तखोरी की आदत व्यक्ति को अकर्मण्य और समाज पर बोझ बना देती है।
Shramasaadhana ↔ आरामपरस्ती
श्रमसाधना से ही मनुष्य इतिहास रचता है और समाज को नई दिशा देता है।
आरामपरस्ती के कारण कई सभ्यताओं का वैभव धूल में मिल गया।
Shilp ↔ विनाश
प्राचीन मंदिरों का बेजोड़ शिल्प आज भी स्थापत्य कला का शिखर माना जाता है।
भूकंप के विनाश ने कई ऐतिहासिक स्मारकों को मलबे में तब्दील कर दिया।
Shram-sammaan ↔ श्रम-अवमानना
सभ्य समाज में झाड़ू लगाने वाले से लेकर वैज्ञानिक तक सभी के श्रम-सम्मान की भावना होनी चाहिए।
शारीरिक कार्य करने वालों की श्रम-अवमानना करना सामंती मानसिकता का परिचायक है।
Shramasaadhak ↔ आरामतलब
श्रमसाधक युवक ने अपनी बाहों के बल पर परिवार की तकदीर बदल दी।
आरामतलब पुत्र पैतृक संपत्ति के सहारे जीवन बिताने का सपना देखता रहा।
Shramanishtha ↔ आलस्य
सच्ची श्रमनिष्ठा ही किसी भी साधारण श्रमिक को असाधारण व्यक्तित्व बनाती है।
आलस्य में डूबा मनुष्य अपने भीतर छिपी प्रतिभा को भी कभी पहचान नहीं पाता।
Savera ↔ शाम
जब जागो तभी सवेरा — इस लोकोक्ति का अर्थ है कि सुधार कभी भी संभव है।
काम समाप्त करके सभी मजदूर थके कदमों से शाम को घर लौटते हैं।
Sheeghra ↔ विलंब
सूचना मिलते ही एम्बुलेंस शीघ्र घटनास्थल पर पहुंच गई।
यातायात जाम के कारण बैठक में पहुंचने में आधा घंटा विलंब हो गया।
Sheeghrata ↔ धीमापन
डॉक्टरों की सूझबूझ और शीघ्रता से जहर का असर फैलने से पहले रोक लिया गया।
दफ्तर के कामकाज में धीमापन नागरिकों की परेशानी का कारण बनता है।
Shaishav ↔ वार्धक्य
शैशव काल में बच्चे की मानसिक और शारीरिक देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वार्धक्य में शरीर शिथिल हो जाने पर अपनों के स्नेह और सहारे की आवश्यकता होती है।
Varshaaritu ↔ शुष्क-ऋतु
वर्षाऋतु के आगमन से धरती की प्यास बुझती है और हरियाली छा जाती है।
शुष्क-ऋतु में तेज धूप और जल स्रोतों के सूखने से जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है।
Shaashvatata ↔ क्षणभंगुरता
नैतिक मूल्यों की शाश्वतता समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है।
संसार के भौतिक सुखों की क्षणभंगुरता को देखकर संतों ने वैराग्य अपनाया।
Sheeghragaamita ↔ मंदगामिता
एक्सप्रेस ट्रेनों की शीघ्रगामिता से यात्रियों के यात्रा समय में बड़ी बचत हुई।
जाम में फंसे वाहनों की मंदगामिता से शहर में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
Sharadritu ↔ ग्रीष्मऋतु
शरदऋतु में आकाश स्वच्छ और रातें सुहावनी तथा शीतल होने लगती हैं।
ग्रीष्मऋतु की चिलचिलाती धूप और लू से जनजीवन व्याकुल हो उठता है।
Shoorataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय शूरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihshnka ↔ शंकित
संकट और विपत्ति के समय निःशंक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkaakula ↔ निश्चिंत
संकट और विपत्ति के समय शंकाकुल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निश्चिंत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय शौर्य का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shauryavaana ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय शौर्यवान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shooraveera ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय शूरवीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ladaakoo ↔ शांतिप्रिय
संकट और विपत्ति के समय लड़ाकू का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिप्रिय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rakshaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय रक्षार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sharanaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय शरणार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkhanaada ↔ शांति
संकट और विपत्ति के समय शंखनाद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yuddhonmaada ↔ शांतिवार्ता
संकट और विपत्ति के समय युद्धोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिवार्ता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ghabaraahata ↔ शांति
संकट और विपत्ति के समय घबराहट का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakshetra ↔ शांतिस्थल
संकट और विपत्ति के समय रणक्षेत्र का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिस्थल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidara-mana ↔ शंकित-मन
संकट और विपत्ति के समय निडर-मन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित-मन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranonmaada ↔ शांति-चेतना
संकट और विपत्ति के समय रणोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति-चेतना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya-gaathaa ↔ कायरता-का-दाग
संकट और विपत्ति के समय शौर्य-गाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता-का-दाग का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shikshaa ↔ अशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pravaktaa ↔ श्रोता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रवक्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में श्रोता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhakartaa ↔ साधारण-छात्र
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधकर्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में साधारण-छात्र की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastraartha ↔ वितंडा
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में वितंडा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shabdaadnbara ↔ सरल-भाषा
विद्या और बौद्धिक विकास में शब्दाडंबर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सरल-भाषा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddha-vartanee ↔ अशुद्ध-वर्तनी
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्ध-वर्तनी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध-वर्तनी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddhochchaarana ↔ अशुद्धोच्चारण
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्धोच्चारण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्धोच्चारण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastrajnya ↔ शास्त्रविहीन
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शास्त्रविहीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaikshanika ↔ अशैक्षणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में शैक्षणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशैक्षणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastrasammata ↔ शास्त्रविरुद्ध
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रसम्मत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शास्त्रविरुद्ध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shikshaanuraagee ↔ अध्ययन-विमुख
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षानुरागी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अध्ययन-विमुख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastravettaa ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रवेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodha-patra ↔ सामान्य-लेख
विद्या और बौद्धिक विकास में शोध-पत्र का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में सामान्य-लेख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastra-pramaana ↔ लोक-भ्रांति
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्र-प्रमाण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में लोक-भ्रांति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhaparaka ↔ मनगढ़ंत
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मनगढ़ंत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Praadhyaapaka ↔ शिक्षार्थी
विद्या और बौद्धिक विकास में प्राध्यापक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में शिक्षार्थी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sheetalataa ↔ उष्णता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतलता की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्णता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bavndara ↔ शांत-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बवंडर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।