Udaarta ↔ संकीर्णता
राजा ने अपनी उदारता का परिचय देते हुए पराजित शत्रु को भी क्षमादान दे दिया।
विचारों की संकीर्णता मनुष्य को नए दृष्टिकोण और प्रगति को स्वीकार करने से रोकती है।
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Udaarta ↔ संकीर्णता
राजा ने अपनी उदारता का परिचय देते हुए पराजित शत्रु को भी क्षमादान दे दिया।
विचारों की संकीर्णता मनुष्य को नए दृष्टिकोण और प्रगति को स्वीकार करने से रोकती है।
Shuchita ↔ अशुचिता
सार्वजनिक जीवन में धन और विचारों की शुचिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
मन में छिपी अशुचिता बाहरी पूजा-पाठ से कभी दूर नहीं की जा सकती।
Satyanishth ↔ भ्रष्ट
सत्यनिष्ठ न्यायाधीश ने किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जन-कल्याण की योजनाएँ अधूरी रह गईं।
Supaatra ↔ कुपात्र
सुपात्र व्यक्ति को दिया गया दान विद्या और समाज-कल्याण के काम आता है।
कुपात्र को धन या अधिकार सौंपने से समाज में अराजकता और अव्यवस्था फैलती है।
Suyog ↔ कुयोग
विद्वानों के सान्निध्य में ज्ञान प्राप्त करने का सुयोग बड़े भाग्य से मिलता है।
यात्रा के समय कुयोग बनने से उनका सारा कार्यक्रम अस्त-व्यस्त हो गया।
Sushasan ↔ कुशासन
सुशासन की स्थापना तभी संभव है जब शासन में पारदर्शिता और जन-सुनवाई हो।
कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर जनता ने अत्याचारी शासक को सत्ता से हटा दिया।
Sadgati ↔ दुर्गति
पवित्र कर्मों और निर्मल मन से जीवन जीने वाले को सद्गति प्राप्त होती है।
जुआ और मद्यपान की लत के कारण उस धनाढ्य परिवार की घोर दुर्गति हो गई।
Sadvichaar ↔ दुर्विचार
सद्विचार मनुष्य के अंतःकरण को शांति और आनंद से भर देते हैं।
ईर्ष्या और द्वेष से उपजे दुर्विचार मनुष्य की मानसिक शांति को छीन लेते हैं।
Shreya ↔ प्रेय
बुद्धिमान व्यक्ति श्रेय के मार्ग को चुनते हैं जो आत्मिक कल्याण की ओर ले जाता है।
अज्ञानी जन केवल प्रेय अर्थात् तात्कालिक सांसारिक सुखों के पीछे भागते रहते हैं।
Satyapriya ↔ मिथ्याप्रिय
सत्यप्रिय व्यक्ति कटु यथार्थ को भी धैर्य और साहस के साथ स्वीकार कर लेता है।
मिथ्याप्रिय चापलूस झूठी प्रशंसा करके अपने स्वामी को भ्रम में रखते हैं।
Sadmaarg ↔ कुमार्ग
गुरुजनों का मार्गदर्शन सदैव युवाओं को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कुमार्ग पर चलकर कमाया गया नाम और शोहरत बहुत शीघ्र धूल में मिल जाती है।
Sumaarg ↔ उन्मार्ग
सत्संग और स्वाध्याय मनुष्य के मन को सदा सुमार्ग की ओर प्रेरित करते हैं।
उन्मार्ग पर भटकने वाला व्यक्ति अपने भविष्य और परिवार दोनों को संकट में डालता है।
Suneeti ↔ कुनीति
चाणक्य की सुनीति के आधार पर मौर्य साम्राज्य ने अद्वितीय वैभव प्राप्त किया।
कुनीति और षड्यंत्र के बल पर सत्ता हथियाने वाले शासक अधिक समय तक नहीं टिक पाते।
Asteya ↔ स्तेय
योग के यम नियमों में अस्तेय अर्थात् चोरी न करने के व्रत का बड़ा महत्व है।
स्तेय अर्थात् दूसरों की वस्तु पर अनाधिकृत अधिकार जमाना नैतिक दृष्टि से जघन्य अपराध है।
Shaaleen ↔ अशिष्ट
शालीन व्यवहार करने वाले व्यक्ति की समाज में सभी लोग सराहना करते हैं।
अशिष्ट स्वभाव का व्यक्ति अपनी कड़वी बातों से दूसरों के मन को ठेस पहुँचाता है।
Shishtaachaar ↔ अशिष्टता
अतिथियों का सत्कार करते समय शिष्टाचार और सौम्यता का परिचय देना हमारी परंपरा है।
बड़ों के सामने अशिष्टता दिखाना सुसंस्कृत होने का लक्षण नहीं है।
Sabhyata ↔ बर्बरता
प्राचीन भारतीय सभ्यता ने विश्व को शांति, ज्ञान और सह-अस्तित्व का संदेश दिया।
युद्ध के दौरान निर्दोष नागरिकों पर अत्याचार करना बर्बरता की पराकाष्ठा है।
Sukarmi ↔ कुकर्मी
सुकर्मी व्यक्ति अपने शुभ कर्मों से समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है।
कुकर्मी अपराधी को अंततः न्यायालय द्वारा कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
Supaatri ↔ अपात्री
मेधावी और परिश्रमी छात्रा को छात्रवृत्ति के लिए सुपात्री माना गया।
अनुचित साधनों का सहारा लेने वाली अपात्री छात्रा को चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
Samdarshi ↔ पक्षपाती
सच्चा संत सभी प्राणियों के प्रति समदर्शी दृष्टि रखकर किसी में भेदभाव नहीं करता।
पक्षपाती अधिकारी अपने संबंधियों को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास करता है।
Niswaarthata ↔ स्वार्थपरता
माँ का प्रेम अपनी संतान के प्रति निःस्वार्थता की पराकाष्ठा है।
आज के युग में स्वार्थपरता के कारण पारस्परिक संबंधों में दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं।
Paropkaari ↔ स्वार्थी
परोपकारी व्यक्ति अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा निर्धनों के कल्याण में लगा देता है।
स्वार्थी मनुष्य केवल अपने निजी लाभ के लिए दूसरों का उपयोग करता है।
Sachcha ↔ झूठा
सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय ढाल बनकर साथ खड़ा रहे।
झूठा इंसान अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से कुछ समय के लिए ही भ्रमित कर सकता है।
Suyash ↔ अपयश
वैज्ञानिक ने अपने अविष्कार से पूरे विश्व में देश का सुयश फैलाया।
भ्रष्टाचार के आरोपों से अधिकारी को समाज में भारी अपयश का सामना करना पड़ा।
Sukeerti ↔ अपकीर्ति
त्याग और बलिदान से अर्जित की गई सुकीर्ति सदियों तक जीवित रहती है।
कायरता का प्रदर्शन करने से योद्धा की जीवन भर की कमाई अपकीर्ति में बदल गई।
Satkaar ↔ निरादर
गृहस्थ ने अपने घर आए अतिथियों का बड़े प्रेम और सत्कार के साथ स्वागत किया।
विद्वान सभा में किसी योग्य व्यक्ति का निरादर करना अत्यंत अशोभनीय है।
Shraddheya ↔ अश्रद्धेय
श्रद्धेय गुरुजी के चरणों में बैठकर शिष्यों ने जीवन का गूढ़ ज्ञान प्राप्त किया।
चरित्रहीन आचरण के कारण वह व्यक्ति समाज की दृष्टि में अश्रद्धेय हो गया।
Shlaaghya ↔ गर्ह्य
शत्रु के समक्ष भी धर्म और शौर्य का पालन करना श्लाघ्य आचरण माना जाता है।
निहत्थे बंदियों पर अत्याचार करना युद्ध के नियमों में गर्ह्य अपराध है।
Stutya ↔ निंद्य
पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए उनके प्रयास सर्वथा स्तुत्य हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाना कानून और समाज दोनों की नजर में निंद्य है।
Satyasandh ↔ वचनभंगी
सत्यसंध राजा दशरथ ने अपने वचनों की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी।
वचनभंगी व्यक्ति पर कोई भी बुद्धिमान राजा या व्यापारी पुनः विश्वास नहीं करता।
Saatvik ↔ तामसिक
सात्विक भोजन और शांत विचार मनुष्य के मन को निर्मल और तनावमुक्त रखते हैं।
तामसिक भोजन और आलस्य से शरीर में जड़ता और प्रमाद की वृद्धि होती है।
Paardarshi ↔ संदेहास्पद
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाकर ही युवाओं में विश्वास बहाल किया जा सकता है।
संदेहास्पद सौदों के उजागर होने पर पूरी चयन समिति को भंग कर दिया गया।
Sadprayaas ↔ दुष्प्रयास
समाज सुधारकों के सद्प्रयास से बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लग सकी।
शत्रु के दुष्प्रयास को सुरक्षा बलों ने अपनी सतर्कता से विफल कर दिया।
Parhit ↔ स्वहित
परहित सरिस धरम नहिं भाई अर्थात् दूसरों का भला करने से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
जो मनुष्य केवल स्वहित में लीन रहता है वह कभी सच्चे मित्र नहीं बना पाता।
Samanvay ↔ वैमनस्य
विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के बीच समन्वय स्थापित करना ही शांति का मार्ग है।
सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
Sahridaya ↔ पाषाणहृदय
सहृदय डॉक्टर ने गरीब मरीज की लाचारी देखकर उसकी पूरी फीस माफ कर दी।
पाषाणहृदय साहूकार ने अनाथ बच्चों की गिड़गिड़ाहट पर भी कोई दया नहीं दिखाई।
Sadvyavahaar ↔ दुर्व्यवहार
ग्राहकों के साथ सद्व्यवहार करने से व्यापार की साख और लोकप्रियता बढ़ती है।
बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले युवक को पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ा।
Samvedansheelata ↔ संवेदनहीनता
कवि की संवेदनशीलता ने प्रकृति और समाज के छिपे दर्दों को शब्दों में ढाल दिया।
दुर्घटना पीड़ितों को देखकर मदद न करना मानवीय संवेदनहीनता का दुखद उदाहरण है।
Sucharitra ↔ दुश्चरित्र
सुचरित्र मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी कभी असत्य और अधर्म का मार्ग नहीं चुनता।
दुश्चरित्र व्यक्ति अपने घृणित आचरण के कारण परिवार का विनाश कर देता है।
Sadbhaav ↔ दुर्भाव
त्योहारों का मूल संदेश समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सद्भाव और प्रेम बढ़ाना है।
पड़ोसियों के प्रति मन में दुर्भाव पालने से घर का वातावरण अशांत हो जाता है।
Saadhuta ↔ असाधुता
उनकी वाणी और व्यवहार में झलकती साधुता ने क्रूर डाकू का भी हृदय परिवर्तन कर दिया।
शत्रु की असाधुता और विश्वासघात के कारण शांति वार्ता बीच में ही टूट गई।
Sajjanta ↔ दुर्जनता
सज्जनता का गुण यही है कि वह दुष्टों के अपशब्दों का उत्तर भी मधुरता से देता है।
दुर्जनता और कुटिलता के कारण कोई भी सज्जन उसके साथ बैठना पसंद नहीं करता।
Paropkaarita ↔ स्वार्थपरता
भारतीय संस्कृति में परोपकारिता को सर्वोच्च मानवीय मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।
समाज में बढ़ती स्वार्थपरता कमजोर वर्गों की उपेक्षा का कारण बन रही है।
Maansahaari ↔ शाकाहारी
शेर और चीता विशुद्ध मांसाहारी जीव हैं जो शिकार पर निर्भर रहते हैं।
हाथी और हिरण जैसे शाकाहारी जीव घास और पत्तियों को खाकर जीवन यापन करते हैं।
Shikaari ↔ शिकार
तेज नजरों वाला शिकारी बाज पलक झपकते ही झपट्टा मारता है।
कमजोर हिरण शिकारी शेर का शिकार बनने से बचने के लिए तेज दौड़ा।
Sapaksh ↔ अपक्ष
सपक्ष पक्षी आकाश की ऊंचाइयों में बिना किसी सहारे के तैरते हैं।
सांप और केंचुआ अपक्ष जीव हैं जो जमीन पर रेंगकर आगे बढ़ते हैं।
Bhaarvaahi ↔ सवारी-पशु
गधा और खच्चर भारवाही पशु हैं जो पहाड़ी मार्गों पर माल ढोते हैं।
सफेद अरबी घोड़ा सवारी-पशु के रूप में अपनी गति और शान के लिए प्रसिद्ध है।
Dudhaaru ↔ सूखा
किसान के पास दो दुधारू गायें हैं जो रोज बीस लीटर दूध देती हैं।
सूखा गाय को भी किसान प्रेम से पौष्टिक चारा देकर सेवा करता है।
Sinh ↔ सिंहनी
सिंह अपनी घनी अयाल हिलाते हुए चट्टान पर शान से बैठा था।
सिंहनी अपने शावकों के भरण-पोषण के लिए शिकार की तलाश करती है।
Sher ↔ शेरनी
शेर की दहाड़ सुनकर जंगल के सभी छोटे जीव छिपने लगे।
शेरनी अपनी संतान की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा देती है।