Aavesh ↔ संयम
आवेश में आकर कोई भी अप्रिय वचन नहीं बोलना चाहिए।
संयम रखने से बड़े से बड़ा विवाद भी शांतिपूर्वक हल हो जाता है।
Showing entries 201–250 of 643 Hindi antonyms starting with 'S'.
Aavesh ↔ संयम
आवेश में आकर कोई भी अप्रिय वचन नहीं बोलना चाहिए।
संयम रखने से बड़े से बड़ा विवाद भी शांतिपूर्वक हल हो जाता है।
Shanka ↔ समाधान
मन में कोई भी शंका हो तो शिक्षक से बेझिझक पूछना चाहिए।
तर्कों और प्रमाणों से सभी जटिल प्रश्नों का समाधान हो गया।
Sadpravritti ↔ दुष्प्रवृत्ति
सत्संगति से बालकों में सद्प्रवृत्ति का विकास होता है।
बुरी संगति मन में दुष्प्रवृत्ति को जन्म देती है।
Sahanubhutik ↔ संवेदनशून्य
उसका सहानुभूतिक व्यवहार संकटग्रस्त लोगों के लिए संबल बना।
दर्द से कराहते व्यक्ति के प्रति संवेदनशून्य रुख निंदनीय है।
Aanandmay ↔ शोकमय
मित्रों का मिलन एक आनंदमय उत्सव बन गया।
आपदा के उपरांत बस्ती का वातावरण अत्यंत शोकमय था।
Sadbhavi ↔ दुर्भावी
सद्भावी पड़ोसी सुख और दुख दोनों में सदैव साथ खड़े रहते हैं।
दुर्भावी शत्रु सदा दूसरे के पतन की प्रतीक्षा में रहता है।
Amarsha ↔ सहिष्णुता
अपमान का स्मरण होते ही उसके मन में अमर्ष की ज्वाला भड़क उठी।
बुद्धिमानी इसी में है कि व्यक्ति कटु बातों पर भी सहिष्णुता बरते।
Saukhya ↔ दुख
सरल जीवन और सीमित इच्छाएं ही सच्चे सौख्य का रहस्य हैं।
लोभ और ईर्ष्या मनुष्य को कभी न खत्म होने वाले दुख में धकेलते हैं।
Klesh ↔ शांति
पारिवारिक क्लेश से घर का सारा आनंद नष्ट हो जाता है।
आपसी समझदारी से घर में पुनः सुख और शांति की स्थापना हुई।
Shokgrast ↔ आनंदमग्न
शोकग्रस्त परिवार को सांत्वना देने पूरा गाँव एकत्र हो गया।
उत्सव के संगीत में सब लोग आनंदमग्न होकर नाचने लगे।
Daah ↔ सद्भाव
दूसरों की समृद्धि देखकर मन में डाह पालना अपनी ही काया को सुखाना है।
सद्भाव रखने वाला व्यक्ति सबकी प्रगति पर प्रसन्न होता है।
Adheer ↔ शांत
परिणाम की प्रतीक्षा में उसका अधीर मन बार-बार घड़ी देख रहा था।
गहरे जल की तरह ज्ञानी पुरुष हर परिस्थिति में शांत रहता है।
Santushti ↔ असंतोष
कर्तव्य निष्ठा से पूरा करने के बाद मन को परम संतुष्टि मिलती है।
स्वार्थी मनुष्यों के मन का असंतोष कभी दूर नहीं होता।
Sanshaygrast ↔ निसंशय
संशयग्रस्त व्यक्ति किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से डरता है।
निसंशय होकर आगे बढ़ने वाला कर्मवीर ही इतिहास रचता है।
Sukhad ↔ दुखद
पुराने मित्रों से वर्षों बाद मिलना एक सुखद संयोग था।
विमान दुर्घटना का यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।
Sauhardapoorna ↔ द्वेषपूर्ण
दोनों देशों के नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण वार्ता संपन्न हुई।
द्वेषपूर्ण प्रचार से समाज में कटुता और अविश्वास बढ़ता है।
Shantipriya ↔ युद्धप्रिय
भारत की परंपरा सदैव से एक शांतिप्रिय और सहिष्णु राष्ट्र की रही है।
युद्धप्रिय साम्राज्यवादी शासक पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करते रहते थे।
Samvedansheel ↔ संवेदनहीन
सम्वेदनशील शासन जनता की छोटी-बड़ी समस्याओं को तुरंत हल करता है।
जनता की पुकार पर संवेदनहीन बने रहना किसी भी सरकार को शोभा नहीं देता।
Shirsh ↔ पाद
मानव शरीर में शीर्ष सबसे संवेदनशील और विचारशील अंग माना जाता है।
शारीरिक संतुलन बनाए रखने में पाद अर्थात पैरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
Swasth ↔ अस्वस्थ
स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
अस्वस्थ खान-पान और आलस्य से व्यक्ति का शरीर बीमारियों का घर बन जाता है।
Badhir ↔ श्रवणक्षम
बधिर छात्र संकेत भाषा की सहायता से संवाद स्थापित करने में निपुण था।
श्रवणक्षम व्यक्तियों को भी शोर-शराबे वाले वातावरण में कानों की रक्षा करनी चाहिए।
Sudaul ↔ बेडौल
नियमित दंड-बैठक लगाने से युवक का शरीर सुडौल और आकर्षक बन गया।
दिनभर बैठे रहने और अस्वास्थ्यकर भोजन से शरीर बेडौल होकर भारी हो जाता है।
Gaur ↔ श्याम
पहाड़ी अंचल में रहने वाले लोगों का शारीरिक वर्ण प्रायः गौर होता है।
भगवान कृष्ण के आकर्षक श्याम वर्ण की उपमा सजल मेघों से दी जाती है।
Sashakta ↔ अशक्त
सशक्त बाहों वाले मजदूर ने भारी पत्थर को क्षणभर में उठाकर किनारे रख दिया।
तीव्र ज्वर के कारण अशक्त हुआ रोगी बिना सहारे के बिस्तर से उठ नहीं पा रहा था।
Shaaririk ↔ मानसिक
कठिन दौड़ और तैराकी से शारीरिक सहनशक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
ध्यान और स्वाध्याय से मानसिक एकाग्रता और आंतरिक स्थिरता प्राप्त होती है।
Angaheen ↔ सकलंग
दुर्घटना में अंगहीन हुए सैनिक ने कृत्रिम अंगों की सहायता से पुनः चलना सीखा।
सकलंग शरीर पाकर भी जो परिश्रम नहीं करता वह अपने सामर्थ्य का अपमान करता है।
Andha ↔ सुजाखा
अंधा राहगीर सफेद छड़ी की मदद से सड़क पार करने का प्रयास कर रहा था।
सुजाखा व्यक्ति दूर से ही आने वाले वाहन को देखकर सावधानी बरत लेता है।
Murchhit ↔ सजग
धूप की तपन न सह पाने के कारण छात्रा मैदान में मूर्च्छित होकर गिर पड़ी।
सजग चिकित्सक ने तुरंत प्राथमिक उपचार देकर उसके शरीर में चेतना लौटाई।
Spryshya ↔ अस्पृश्य
हाथ से छुआ जा सकने वाला भौतिक पदार्थ स्पृश्य संसार का अंग है।
प्रकाश और वायु जैसी सूक्ष्म तरंगें त्वचा से अस्पृश्य अथवा अमूर्त प्रतीत होती हैं।
Sashastra ↔ निहत्था
सीमा पर सशस्त्र प्रहरी हाथों में बंदूक लिए देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
युद्ध के नियमों के अनुसार किसी निहत्थे व्यक्ति पर वार करना वर्जित है।
Nakha ↔ शिख
योग और आयुर्वेद में नख अर्थात पैर के नाखूनों की स्वच्छता और रंग से शारीरिक स्वास्थ्य परखा जाता है।
प्राचीन काव्य परंपरा में सौंदर्य का संपूर्ण वर्णन नख से शिख अर्थात पैर के अंगूठे से सिर की चोटी तक किया जाता था।
Shirobhaaga ↔ पादभाग
शारीरिक संरचना के अध्ययन में शिरोभाग मस्तिष्क और प्रमुख ज्ञानेंद्रियों का आवास माना गया है।
मानव शरीर का पादभाग पूरे शरीर का भार वहन करने तथा गतिशीलता प्रदान करने का आधार है।
Sthoolakaaya ↔ कृशकाय
अत्यधिक वसायुक्त भोजन और निष्क्रिय दिनचर्या से व्यक्ति स्थूलकाय हो जाता है, जिससे गतिशीलता घटती है।
लंबी तपस्या और उपवास के कारण संन्यासी का शरीर अत्यंत कृशकाय परंतु तेजस्वी हो गया था।
Khalvaata ↔ सकेश
उम्र ढलने के साथ सिर के बाल झड़ने से कई व्यक्तियों का मस्तक खल्वाट हो जाता है।
आयुर्वेदिक तेलों और उचित पोषण से सिर का भाग घने बालों से युक्त और सकेश बना रहता है।
Shvaasa ↔ प्रश्वास
प्राणायाम की क्रिया में गहरी श्वास भीतर खींचकर फेफड़ों को प्राणवायु से भरा जाता है।
मन को शांत करने के लिए प्रश्वास के माध्यम से शरीर से धीरे-धीरे वायु बाहर छोड़ी जाती है।
Shravya ↔ अश्रव्य
मानव कर्ण केवल 20 हर्ट्ज से 20000 हर्ट्ज तक की श्रव्य ध्वनि तरंगों को सुन सकते हैं।
पराश्रव्य और अपश्रव्य तरंगें सामान्य मानव कान के लिए अश्रव्य होती हैं।
Sumukha ↔ दुर्मुख
सदा प्रसन्न रहने वाले बालक का सुमुख देखकर हर किसी का मन आनंदित हो उठता है।
सदा क्रोध और कटुता में डूबे रहने वाले व्यक्ति का चेहरा दुर्मुख और विकृत प्रतीत होता है।
Kaanaa ↔ सनेत्र
दुर्घटना में एक आंख की रोशनी खो देने से वह व्यक्ति काणा हो गया था।
स्वस्थ खानपान और नेत्र व्यायाम से दोनों आंखों की दृष्टि सनेत्र और स्पष्ट बनी रहती है।
Sachchaai ↔ झूठ
सच्चाई के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को आरंभ में कठिनाइयाँ आती हैं किंतु अंत में विजय उसी की होती है।
झूठ का सहारा लेकर खड़ा किया गया व्यापार या संबंध अधिक समय तक टिक नहीं पाता।
Sadaachaar ↔ दुराचार
विद्यालय में विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ सदाचार और अनुशासन की भी शिक्षा दी जाती है।
दुराचार और कुसंगति में लिप्त व्यक्ति अपने कुल और समाज की प्रतिष्ठा को कलंकित करता है।
Sadgun ↔ दुर्गुण
विनम्रता, सत्यवादिता और परोपकार जैसे सद्गुण व्यक्ति को महान बनाते हैं।
अहंकार, ईर्ष्या और लोभ जैसे दुर्गुण मनुष्य के समस्त पुण्यों को भस्म कर देते हैं।
Satkarm ↔ दुष्कर्म
जीवन में किए गए सत्कर्म ही मृत्यु के उपरांत व्यक्ति का नाम अमर रखते हैं।
दुष्कर्म करने वाला मनुष्य कानून की नजर से बच भी जाए, तो अंतरात्मा की अदालत से नहीं बच सकता।
Satyavaadi ↔ मिथ्यावादी
राजा हरिश्चंद्र को भारतीय इतिहास में सबसे महान सत्यवादी के रूप में स्मरण किया जाता है।
मिथ्यावादी व्यक्ति की बातों पर कोई भी समझदार इंसान कभी भरोसा नहीं करता।
Satsang ↔ कुसंग
ज्ञानी संतों का सत्संग मनुष्य के विकारों को दूर कर जीवन को आलोकित करता है।
कुसंग में पड़कर अच्छे संस्कारों वाला युवक भी धीरे-धीरे नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आ गया।
Sadaachaari ↔ दुराचारी
सदाचारी व्यक्ति समाज में जहाँ भी जाता है, अपने आचरण से सबका सम्मान पाता है।
दुराचारी व्यक्ति अपने नीच कर्मों के कारण अपनों के बीच भी तिरस्कृत रहता है।
Sanyam ↔ असंयम
वाणी और इंद्रियों पर संयम रखने से मनुष्य अनेक व्यर्थ के विवादों से बच जाता है।
खान-पान में असंयम बरतने से शरीर रोगों का घर बन जाता है।
Niswarth ↔ स्वार्थी
निःस्वार्थ भाव से की गई समाजसेवा ही ईश्वर की सच्ची उपासना कहलाती है।
स्वार्थी मित्र केवल अपने काम के समय याद करता है और संकट में साथ छोड़ देता है।
Parmaarth ↔ स्वार्थ
संत कबीर ने जीवन भर परमार्थ और ज्ञान के प्रचार को ही अपना कर्तव्य माना।
अंधे स्वार्थ के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने सगे-संबंधियों को भी हानि पहुँचा बैठता है।
Sadbuddhi ↔ दुर्बुद्धि
भगवान से प्रार्थना है कि वे सभी को सद्विचार और सद्बुद्धि प्रदान करें।
दुर्बुद्धि के प्रभाव में आकर दुर्योधन ने पांडवों के साथ संधि का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
Sahishnuta ↔ असहिष्णुता
धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सौहार्द ही भारत की विविधता की वास्तविक पहचान है।
कट्टरता और असहिष्णुता समाज में वैमनस्य और हिंसा को जन्म देती है।