Khataranaaka ↔ हानिरहित
संकट और विपत्ति के समय खतरनाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने हानिरहित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
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Khataranaaka ↔ हानिरहित
संकट और विपत्ति के समय खतरनाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने हानिरहित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Khauphanaaka ↔ सुहावना
संकट और विपत्ति के समय खौफनाक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने सुहावना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaanpanaa ↔ अडिग-रहना
संकट और विपत्ति के समय कांपना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अडिग-रहना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yoddhaa-bhaava ↔ कातर-भाव
संकट और विपत्ति के समय योद्धा-भाव का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर-भाव का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheeka-svara ↔ कांपती-आवाज
संकट और विपत्ति के समय निर्भीक-स्वर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कांपती-आवाज का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veera-sapoota ↔ कायर-पुत्र
संकट और विपत्ति के समय वीर-सपूत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर-पुत्र का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shaurya-gaathaa ↔ कायरता-का-दाग
संकट और विपत्ति के समय शौर्य-गाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता-का-दाग का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kushaagrabuddhi ↔ मंदबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रबुद्धि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tathyapoorna ↔ काल्पनिक
विद्या और बौद्धिक विकास में तथ्यपूर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में काल्पनिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Taarkika ↔ कुतार्किक
विद्या और बौद्धिक विकास में तार्किक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुतार्किक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sutarka ↔ कुतर्क
विद्या और बौद्धिक विकास में सुतर्क का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुतर्क की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bodhagamya ↔ क्लिष्ट
विद्या और बौद्धिक विकास में बोधगम्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में क्लिष्ट की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastha ↔ विस्मृत
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadvidyaa ↔ कुविद्या
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्विद्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविद्या की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kaavyamarmajnya ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में काव्यमर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sushikshaa ↔ कुशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में सुशिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snskaara ↔ कुसंस्कार
विद्या और बौद्धिक विकास में संस्कार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसंस्कार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kakshaa-shikshana ↔ स्व-अध्ययन
विद्या और बौद्धिक विकास में कक्षा-शिक्षण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में स्व-अध्ययन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastheekarana ↔ रटना-छोड़ना
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थीकरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में रटना-छोड़ना की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paathyapustaka ↔ कहानी-किताब
विद्या और बौद्धिक विकास में पाठ्यपुस्तक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कहानी-किताब की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sadgrntha ↔ कुसाहित्य
विद्या और बौद्धिक विकास में सद्ग्रंथ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुसाहित्य की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvichaara ↔ कुविचार
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविचार का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कुविचार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kushaagrataa ↔ मंदता
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatva-meemaansaa ↔ कोरी-कल्पना
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्व-मीमांसा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में कोरी-कल्पना की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kadaake-kee-thnda ↔ भीषण-गर्मी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कड़ाके-की-ठंड की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में भीषण-गर्मी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Umasadaara ↔ खुशनुमा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उमसदार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खुशनुमा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Suhaavanaa ↔ कष्टप्रद
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुहावना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में कष्टप्रद का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhadee ↔ खुला-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झड़ी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खुला-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kaalee-ghataa ↔ उजली-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में काली-घटा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उजली-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Barphaanee-toophaana ↔ खिला-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बर्फानी-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खिला-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sheeta-bindu ↔ क्वथनांक
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीत-बिंदु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में क्वथनांक का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kuhaase-daara ↔ धूप-खिला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कुहासे-दार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप-खिला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aandhee-paanee ↔ खिला-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-पानी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खिला-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kaale-megha ↔ श्वेत-मेघ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में काले-मेघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में श्वेत-मेघ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Kuharaa-yukta ↔ धूप-खिला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में कुहरा-युक्त की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप-खिला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Khareedna ↔ बेचना
किसान अपनी मेहनत की कमाई से नई फसल के लिए उन्नत बीज और खाद खरीदना चाहता था।
मंडी में अच्छी कीमत मिलते ही व्यापारी ने अपना सारा अनाज बेचना उचित समझा।
Khushboo ↔ बदबू
बगीचे में खिले चमेली और गुलाब के फूलों की खुशबू पूरे वातावरण को महका देती है।
कूड़े-कचरे के ढेर से उठती बदबू के कारण रास्ते से गुजरना दूभर हो जाता है।
Khula ↔ बंद
ताजी हवा के आवागमन के लिए प्रातःकाल खिड़कियां खुला रखना उत्तम रहता है।
रात के समय सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य द्वार को बंद रखना अनिवार्य है।
Majboot ↔ कमजोर
मजबूत नींव पर बना भवन बड़े से बड़े भूकंप और तूफान को भी आसानी से झेल लेता है।
कुपोषण के कारण बालक शारीरिक रूप से कमजोर और रोगग्रस्त हो गया था।
Khona ↔ पाना
लापरवाही के कारण अपने बहुमूल्य दस्तावेज खोना भविष्य के लिए भारी पड़ सकता है।
सच्ची निष्ठा से कर्म करने पर मनवांछित फल पाना कोई असंभव बात नहीं है।
Kehna ↔ सुनना
बिना सोचे-समझे किसी को कटु वचन कहना बाद में पश्चाताप का कारण बनता है।
संवाद में केवल अपनी बात थोपने के बजाय दूसरों के विचारों को भी ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए।
Kholna ↔ बाँधना
पार्सल की जटिल गांठ को कैंची से काटने के बजाय धीरे-धीरे खोलना चाहिए।
सामान को सुरक्षित रखने के लिए उसे मजबूत रस्सी से कसकर बाँधना जरूरी होता है।
Bona ↔ काटना
बरसात की शुरुआत होते ही किसान खेतों में अन्न के नए बीज बोना शुरू करते हैं।
कहावत प्रसिद्ध है कि जैसा बीज बोओगे, वैसा ही फल भविष्य में काटना पड़ेगा।
Khilna ↔ मुरझाना
वसंत ऋतु के आते ही उपवन में रंग-बिरंगी कलियों का खिलना मन मोह लेता है।
तीखी धूप और पानी के अभाव में कोमल पौधों का मुरझाना स्वाभाविक है।
Khada ↔ बैठा
बुजुर्गों और गुरुजनों के सम्मान में कक्षा के सभी विद्यार्थी आदरपूर्वक खड़े हो गए।
लंबी यात्रा की थकान के बाद पेड़ की शीतल छाया में बैठा यात्री सुखद विश्राम पा सका।