Sanvatsar ↔ माह
भारतीय कालगणना में प्रत्येक संवत्सर का अपना विशिष्ट नाम और महत्व होता है।
कठोर मेहनत के बाद एक ही माह में उसने अपना काम पूरा कर दिखाया।
अक्षर 'म' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 151–200 / कुल: 208):
Sanvatsar ↔ माह
भारतीय कालगणना में प्रत्येक संवत्सर का अपना विशिष्ट नाम और महत्व होता है।
कठोर मेहनत के बाद एक ही माह में उसने अपना काम पूरा कर दिखाया।
Madhyamkaal ↔ अंतकाल
परियोजना के मध्यमकाल में वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की समीक्षा की गई।
अंतकाल निकट आने पर व्यक्ति समस्त सांसारिक मोह-माया से विरक्त हो जाता है।
Nisheeth ↔ मध्याह्न
निशीथ की नीरवता में घड़ी की टिक-टिक भी साफ सुनाई दे रही थी।
मध्याह्न की कड़ी धूप में पशु भी पेड़ों की छाया में शरण लेते हैं।
Kshiprata ↔ मंथरता
तीरंदाज ने अद्भुत क्षिप्रता से प्रत्यंचा खींचकर बाण छोड़ दिया।
कछुए की मंथरता के बावजूद उसकी निरंतरता ने उसे विजयी बनाया।
Drutagati ↔ मंदगति
द्रुतगति से चलने वाले वाहनों के लिए नए एक्सप्रेसवे का निर्माण किया गया।
कोहरे के कारण रेलगाड़ियां मंदगति से आगे बढ़ रही थीं।
Amaratva ↔ मर्त्यता
सत्य और परोपकार के मार्ग पर चलने वाले महापुरुष अमरत्व प्राप्त करते हैं।
मानव देह की मर्त्यता को पहचानकर व्यक्ति को अभिमान से दूर रहना चाहिए।
Sheeghragaamita ↔ मंदगामिता
एक्सप्रेस ट्रेनों की शीघ्रगामिता से यात्रियों के यात्रा समय में बड़ी बचत हुई।
जाम में फंसे वाहनों की मंदगामिता से शहर में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
Himmata ↔ मायूसी
संकट और विपत्ति के समय हिम्मत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने मायूसी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Mahaaveera ↔ कातर
संकट और विपत्ति के समय महावीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Mukaabalaa ↔ पलायन
संकट और विपत्ति के समय मुकाबला का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पलायन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Muktidaataa ↔ बंधककर्ता
संकट और विपत्ति के समय मुक्तिदाता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने बंधककर्ता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaanaka ↔ मनोहर
संकट और विपत्ति के समय भयानक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने मनोहर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vidushee ↔ मूर्खा
विद्या और बौद्धिक विकास में विदुषी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paanditya ↔ मूर्खता
विद्या और बौद्धिक विकास में पांडित्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Maneeshee ↔ मंदबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में मनीषी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prajnyaavaana ↔ मूढ़
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रज्ञावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaavee ↔ जड़बुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधावी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में जड़बुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kushaagrabuddhi ↔ मंदबुद्धि
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रबुद्धि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदबुद्धि की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatvajnyaanee ↔ मूढ़मति
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्वज्ञानी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़मति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Marmajnya ↔ अनभिज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में मर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनभिज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Teekaa ↔ मूलपाठ
विद्या और बौद्धिक विकास में टीका का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूलपाठ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Buddhimattaa ↔ मूर्खता
विद्या और बौद्धिक विकास में बुद्धिमत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Prashnottaree ↔ मौन
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रश्नोत्तरी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मौन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Medhaavee-chhaatra ↔ पिछड़ा-छात्र
विद्या और बौद्धिक विकास में मेधावी-छात्र का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में पिछड़ा-छात्र की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastravettaa ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रवेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvata-sabhaa ↔ मूर्ख-मंडली
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत-सभा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख-मंडली की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanachakshu ↔ मोहांध
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानचक्षु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मोहांध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaavaana ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvatajana ↔ मूर्खजन
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वतजन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खजन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaapoorna ↔ मूर्खतापूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्तापूर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खतापूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shodhaparaka ↔ मनगढ़ंत
विद्या और बौद्धिक विकास में शोधपरक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मनगढ़ंत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Moolyaankana ↔ उपेक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में मूल्यांकन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उपेक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kushaagrataa ↔ मंदता
विद्या और बौद्धिक विकास में कुशाग्रता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मंदता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Maneeshaa ↔ मूढ़ता
विद्या और बौद्धिक विकास में मनीषा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूढ़ता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Manana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में मनन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Meghaachchhanna ↔ मेघरहित
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघाच्छन्न की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघरहित का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jhnjhaavaata ↔ मंद-समीर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में झंझावात की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मंद-समीर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghagarjana ↔ नीरवता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघगर्जन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरवता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Moosalaadhaara-varshaa ↔ फुहार
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मूसलाधार-वर्षा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में फुहार का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalavaayu ↔ मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलवायु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anaavrita ↔ मेघावृत्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनावृत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघावृत्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Soorya-prakaasha ↔ मेघ-छाया
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सूर्य-प्रकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघ-छाया का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalamagna ↔ मरुस्थलीय
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलमग्न की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थलीय का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Svachchha-aakaasha ↔ मेघाच्छन्नता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में स्वच्छ-आकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघाच्छन्नता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Pahaadee-havaa ↔ मैदानी-लू
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में पहाड़ी-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मैदानी-लू का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Samudree-sameera ↔ मरुस्थली-हवा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में समुद्री-समीर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मरुस्थली-हवा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Megha-garjanaa ↔ नीरव-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघ-गर्जना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरव-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghayukta ↔ मेघरहित
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघयुक्त की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघरहित का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।