Utphull ↔ म्लान
सुखद वातावरण में बच्चों के चेहरे उत्फुल्ल कमल जैसे खिल उठे।
दुख की मार से पीड़ित व्यक्ति का मुखड़ा म्लान पड़ गया था।
अक्षर 'म' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 51–100 / कुल: 208):
Utphull ↔ म्लान
सुखद वातावरण में बच्चों के चेहरे उत्फुल्ल कमल जैसे खिल उठे।
दुख की मार से पीड़ित व्यक्ति का मुखड़ा म्लान पड़ गया था।
Prafullata ↔ म्लानता
प्रातःकालीन सैर से चेहरे पर अनूठी प्रफुल्लता आ जाती है।
बीमारी और चिंता के कारण चेहरे की म्लानता स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
Mamtamayi ↔ निष्ठुरा
माँ की ममतामयी गोद में बच्चा सारे दुख भूल जाता है।
निष्ठुरा विमाता ने बालक के अधिकारों का हनन किया।
Umangit ↔ मायूस
खेल के मैदान में खिलाड़ी उमंगित होकर भाग रहे थे।
मैच हारने के बाद टीम के सदस्य मायूस होकर बैठ गए।
Mridubhashi ↔ कटुभाषी
मृदुभाषी व्यक्ति अपने मधुर वचनों से पराए को भी अपना बना लेता है।
कटुभाषी व्यक्ति से लोग बातचीत करने से कतराते हैं।
Madhurbhashi ↔ कर्कशभाषी
मधुरभाषी वक्ता के भाषण को सभा के सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
कर्कशभाषी नेता के चिल्लाने से सभा में असहजता फैल गई।
Milansar ↔ एकांतप्रिय
उसका मिलनसार स्वभाव नए शहर में भी तुरंत दोस्त बना लेता है।
एकांतप्रिय लेखक भीड़-भाड़ से दूर एकांत में लिखना पसंद करता है।
Mukh ↔ पृष्ठ
मुख पर खिली सहज मुस्कान व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को दर्शाती है।
पृष्ठ अर्थात पीठ के व्यायाम से रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत बनी रहती है।
Shaaririk ↔ मानसिक
कठिन दौड़ और तैराकी से शारीरिक सहनशक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
ध्यान और स्वाध्याय से मानसिक एकाग्रता और आंतरिक स्थिरता प्राप्त होती है।
Murchhit ↔ सजग
धूप की तपन न सह पाने के कारण छात्रा मैदान में मूर्च्छित होकर गिर पड़ी।
सजग चिकित्सक ने तुरंत प्राथमिक उपचार देकर उसके शरीर में चेतना लौटाई।
Maansala ↔ अस्थिशेष
कठोर शारीरिक श्रम और नियमित कसरत से युवक की भुजाएं अत्यंत मांसल और मजबूत हो गईं।
अकाल और भुखमरी की विभीषिका में बच्चों के शरीर केवल अस्थिशेष अर्थात हड्डियों का ढांचा रह गए थे।
Satyavaadi ↔ मिथ्यावादी
राजा हरिश्चंद्र को भारतीय इतिहास में सबसे महान सत्यवादी के रूप में स्मरण किया जाता है।
मिथ्यावादी व्यक्ति की बातों पर कोई भी समझदार इंसान कभी भरोसा नहीं करता।
Maryaada ↔ अमर्यादा
भगवान राम ने जीवन के हर मोड़ पर मर्यादा और नैतिक मूल्यों की रक्षा की।
सभा में अमर्यादा पूर्ण आचरण करने वाले सदस्य को सदन से निष्कासित कर दिया गया।
Moksh ↔ बंधन
भारतीय दर्शन में जीवन का अंतिम परम पुरुषार्थ मोक्ष की प्राप्ति माना गया है।
माया और तृष्णा के बंधन में जकड़ा मनुष्य कभी आंतरिक शांति का अनुभव नहीं कर पाता।
Satyapriya ↔ मिथ्याप्रिय
सत्यप्रिय व्यक्ति कटु यथार्थ को भी धैर्य और साहस के साथ स्वीकार कर लेता है।
मिथ्याप्रिय चापलूस झूठी प्रशंसा करके अपने स्वामी को भ्रम में रखते हैं।
Nirmal ↔ मलिन
छोटे बच्चों का निर्मल हृदय छल-कपट और दुर्भावना से सर्वथा मुक्त होता है।
लोभ और वासनाओं से मलिन हुआ अंतःकरण सत्य को देखने की क्षमता खो देता है।
Mahaatma ↔ दुरात्मा
महात्मा बुद्ध ने दया और करुणा का उपदेश देकर मानवता का मार्गदर्शन किया।
दुरात्मा शासक ने अपने अहंकार की तुष्टि के लिए प्रजा पर भारी अत्याचार किए।
Maanya ↔ अमान्य
संविधान के अंतर्गत बनाए गए नियम सभी नागरिकों के लिए मान्य होते हैं।
गलत दस्तावेजों के आधार पर किया गया आवेदन चयन समिति द्वारा अमान्य कर दिया गया।
Maansahaari ↔ शाकाहारी
शेर और चीता विशुद्ध मांसाहारी जीव हैं जो शिकार पर निर्भर रहते हैं।
हाथी और हिरण जैसे शाकाहारी जीव घास और पत्तियों को खाकर जीवन यापन करते हैं।
Trinabhakshi ↔ मांसभक्षी
जंगल में तृणभक्षी हिरणों का बड़ा झुंड हरी घास चर रहा था।
मांसभक्षी बाघ अपनी भूख मिटाने के लिए शिकार की ताक में छिपा रहता है।
Mayoor ↔ मयूरी
वर्षा ऋतु में मयूर अपने सतरंगी पंख फैलाकर मनमोहक नृत्य करता है।
मयूरी बिना चमकीले पंखों के चुपचाप झाड़ियों में अंडे सेती है।
Mrig ↔ मृगी
सींगों वाला सुंदर मृग कुलांचें भरता हुआ वन में दौड़ रहा था।
मृगी अपने नन्हें छौने को स्तनपान कराती हुई चौकन्नी खड़ी थी।
Mendhak ↔ मेंढकी
बरसात में नर मेंढक जोर-जोर से टर्र-टर्र की आवाज निकालता है।
मेंढकी तालाब के किनारे पानी में तैरते हुए सैकड़ों अंडे देती है।
Murga ↔ मुर्गी
भोर होते ही मुर्गा बाँग देकर गाँव वालों को जगा देता है।
मुर्गी अपने अंडों को सेती है और नन्हें चूजों को दाना चुगना सिखाती है।
Narpashu ↔ मादापशु
जंगली झुंड में नरपशु अपने इलाके की सीमाओं की रक्षा करता है।
मादापशु नवजात शावकों को आहार और सुरक्षा प्रदान करती है।
Khatta ↔ मधुर
कच्चे आम का स्वाद खट्टा होता है जो चटनी बनाने के काम आता है।
पके हुए पपीते का स्वाद अत्यंत मधुर और रुचिकर होता है।
Masaaledaar ↔ सादा
ढाबे की मसालेदार पनीर की सब्जी तीखी होने पर भी बहुत लोकप्रिय थी।
वृद्धजनों के लिए बिना मिर्च-मसालों का सादा उबला खाना ही उत्तम रहता है।
Shaakaahaar ↔ मांसाहार
अनाज, दलहन और ताजी हरी सब्जियों से युक्त शाकाहार शरीर को निरोगी रखता है।
अत्यधिक मांसाहार करने से कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी विकार बढ़ सकते हैं।
Kadwa ↔ मधुर
नीम की पत्तियों और करेले का रस स्वाद में कड़वा किंतु रक्त-शोधक होता है।
गुलाब जामुन की चाशनी का स्वाद मधुर और मन को तृप्त करने वाला होता है।
Kasaila ↔ मधुर
कच्चे आंवले और हरड़ को चबाने पर पहला स्वाद कसैला महसूस होता है।
गन्ने के ताजे रस का स्वाद अत्यंत मधुर और शीतलता प्रदान करने वाला होता है।
Charpara ↔ मधुर
चाट में डाली गई सोंठ और हरी मिर्च से स्वाद चरपरा बन गया था।
खीर में घुली हुई मिश्री का स्वाद मधुर और शीतल अनुभव कराता है।
Khaara ↔ मधुर
समुद्र का पानी अत्यधिक खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं होता।
पहाड़ी झरने का मधुर और शीतल जल थके यात्रियों की प्यास बुझाता है।
Malaidaar ↔ मलाईरहित
गाढ़े मलाईदार दूध से बनी कुल्फी का स्वाद बेमिसाल होता है।
हृदयरोगियों को मलाईरहित टोंड दूध पीने का परामर्श दिया जाता है।
Meethaapan ↔ तीखापन
गाजर के हलवे में मावे और चीनी का मीठापन बहुत संतुलित था।
हरी मिर्च के तीखापन से उसकी आँखों से पानी निकलने लगा।
Khataas ↔ मिठास
नींबू के रस की तीखी खटास ने शिकंजी को ताजगी भरा बना दिया।
पके हुए आम की स्वाभाविक मिठास सबको आकर्षित करती है।
Kadwaahat ↔ मिठास
काली कॉफी की कड़वाहट कम करने के लिए उसने उसमें थोड़ा दूध मिलाया।
शहद की प्राकृतिक मिठास गले की खराश को शांत कर देती है।
Mitaahaari ↔ पेटू
मिताहारी व्यक्ति सदा स्वस्थ रहता है और कभी अपच का शिकार नहीं होता।
पेटू मनुष्य स्वाद के चक्कर में आवश्यकता से अधिक ठूंस-ठूंस कर खा लेता है।
Maadhurya ↔ कटुता
दूध की रबड़ी में केसर का माधुर्य घुलमिल गया था।
सड़े हुए तेल के कारण पूरियों में अजीब कटुता आ गई थी।
Tikta ↔ मधुर
चिरायता और गिलोय का स्वाद तिक्त होता है जो बुखार उतारता है।
मुनक्का और अंजीर का स्वाद मधुर तथा बलवर्धक होता है।
Kashaaya ↔ मधुर
त्रिफला चूर्ण का स्वाद कषाय होता है जो आंतों को साफ करता है।
मिश्री का स्वाद मधुर होता है जो पित्त को शांत करता है।
Mattha ↔ मक्खन
भुने जीरे वाला मट्ठा दोपहर के भोजन के बाद पीने से भारीपन दूर होता है।
ताजा निकला सफेद मक्खन गरमागरम पराठों पर पिघलकर स्वाद बढ़ाता है।
Masaaladaar ↔ गंधरहित
गरम मसालों से युक्त मसालादार छोले भटूरों के साथ बहुत लोकप्रिय हैं।
बिना किसी तड़के का उबला पानी और सादा मांड गंधरहित होता है।
Mandaagni ↔ तीक्ष्णाग्नि
मंदाग्नि के रोगी को भारी गरिष्ठ भोजन से परहेज करना चाहिए।
तीक्ष्णाग्नि वाले युवा भारी भोजन को भी बहुत जल्दी पचा लेते हैं।
Madhurima ↔ तिक्तता
पके हुए गन्ने के रस की मधुरिमा मन को मोह लेती है।
अधिक उबल जाने से चाय में अप्रिय तिक्तता आ गई थी।
Kasailapan ↔ मिठास
कच्चे जामुन खाने पर मुंह में हल्का कसैलापन महसूस होता है।
पके हुए खरबूजे की मिठास गर्मी में सबको भाती है।
Chokaryukt ↔ मैदा
चोकरयुक्त आटा खाने से पाचन सुगम रहता है और कब्ज नहीं होती।
बारीक छना मैदा आंतों में चिपकता है और स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
Madira ↔ दूध
मदिरा का सेवन बुद्धि और स्वास्थ्य दोनों का विनाश करता है।
गाय का ताजा दूध तन और मन को पवित्रता और बल प्रदान करता है।
Madya ↔ अमृत
मद्य पान करने वाले मनुष्य की समाज में प्रतिष्ठा समाप्त हो जाती है।
संतों की वाणी कानों के लिए अमृत तुल्य मधुर होती है।
Masaaleyukt ↔ मसालेहीन
उत्सव के अवसर पर मसालेयुक्त पुलाव ने सभी का मन मोह लिया।
पेट की खराबी में डॉक्टर ने केवल मसालेहीन दलिया खाने की अनुमति दी।
Madhur-ras ↔ कटुरस
आयुर्वेद के अनुसार मधुररस शरीर को पोषण और बल प्रदान करता है।
नीम और कुटकी में पाया जाने वाला कटुरस खून को साफ करता है।