Kripa ↔ अवकृपा
गुरुजनों की कृपा से उसने परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।
अधिकारी की अवकृपा के कारण योग्य कर्मचारी को पदोन्नति नहीं मिली।
अक्षर 'क' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 51–100 / कुल: 259):
Kripa ↔ अवकृपा
गुरुजनों की कृपा से उसने परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।
अधिकारी की अवकृपा के कारण योग्य कर्मचारी को पदोन्नति नहीं मिली।
Kalyan ↔ अकल्याण
राजा का मुख्य कर्तव्य अपनी प्रजा के सर्वांगीण कल्याण की चिंता करना है।
दुष्टों की संगति अंततः मनुष्य के अकल्याण का कारण बनती है।
Sumati ↔ कुमति
जहाँ सुमति तहाँ संपति नाना, यह नीतिवचन जीवन का सत्य है।
कुमति के वशीभूत होकर व्यक्ति अपने ही हितैषियों का अपमान कर बैठता है।
Nidar ↔ कातर
वह निडर बालक अंधकार में भी बिना किसी संकोच के आगे बढ़ता गया।
संकट की घड़ी में कातर दृष्टि से देखना कमजोरी की निशानी है।
Bhavuk ↔ कठोरहृदय
दीन-दुखियों की कथा सुनकर भावुक मनुष्य के आँसू निकल आते हैं।
कठोरहृदय व्यक्ति दूसरों के क्रंदन से भी अप्रभावित रहता है।
Kripalu ↔ क्रूर
कृपालु राजा ने गरीब प्रजा के सारे ऋण माफ कर दिए।
क्रूर शासक ने जनता पर भारी कर और यातनाएं लाद दीं।
Klesh ↔ शांति
पारिवारिक क्लेश से घर का सारा आनंद नष्ट हो जाता है।
आपसी समझदारी से घर में पुनः सुख और शांति की स्थापना हुई।
Aananddayak ↔ कष्टप्रद
पहाड़ों की ताजी हवा में सैर करना अत्यंत आनंददायक अनुभव है।
भीषण गर्मी में लंबी पैदल यात्रा करना बहुत कष्टप्रद सिद्ध हुआ।
Mridubhashi ↔ कटुभाषी
मृदुभाषी व्यक्ति अपने मधुर वचनों से पराए को भी अपना बना लेता है।
कटुभाषी व्यक्ति से लोग बातचीत करने से कतराते हैं।
Madhurbhashi ↔ कर्कशभाषी
मधुरभाषी वक्ता के भाषण को सभा के सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे।
कर्कशभाषी नेता के चिल्लाने से सभा में असहजता फैल गई।
Krish ↔ पुष्ट
लंबी बीमारी के कारण उसका शरीर कृश और दुर्बल दिखाई देने लगा था।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से पहलवान का शरीर गठीला और पुष्ट बन गया।
Ksheenkaay ↔ हृष्टपुष्ट
कुपोषण के शिकार बच्चे क्षीणकाय होकर चलने-फिरने में भी कठिनाई महसूस करते हैं।
हृष्टपुष्ट शरीर वाले युवाओं ने मिट्टी के अखाड़े में कुश्ती का शानदार प्रदर्शन किया।
Karnapriya ↔ कर्णकटु
बांसुरी की कर्णप्रिय धुन सुनकर कानों को अपार शांति का अनुभव हुआ।
वाहनों के हॉर्न का कर्णकटु शोर कानों के पर्दे को नुकसान पहुँचा सकता है।
Karatala ↔ पादतल
उत्साहवर्धन और शास्त्रीय ताल वादन में करतल ध्वनि अर्थात तालियों की गूंज सुनाई देती है।
प्राकृतिक एक्यूप्रेशर चिकित्सा में पादतल के विशेष बिंदुओं पर दबाव डालकर उपचार किया जाता है।
Pushtaanga ↔ कृशांग
नियमित व्यायाम और पौष्टिक आहार के सेवन से पहलवान का शरीर पुष्टांग और गठीला बन गया।
दीर्घकालिक कुपोषण और बीमारी के कारण रोगी अत्यंत कृशांग और अशक्त दिखाई देने लगा।
Sthoolakaaya ↔ कृशकाय
अत्यधिक वसायुक्त भोजन और निष्क्रिय दिनचर्या से व्यक्ति स्थूलकाय हो जाता है, जिससे गतिशीलता घटती है।
लंबी तपस्या और उपवास के कारण संन्यासी का शरीर अत्यंत कृशकाय परंतु तेजस्वी हो गया था।
Kubadaa ↔ ऋजुकाय
अत्यधिक भार ढोने और रीढ़ की हड्डी के विकार से वह वृद्ध व्यक्ति कुबड़ा होकर चलने लगा।
योगासनों के नियमित अभ्यास से साधक का शरीर बुढ़ापे में भी सीधा और ऋजुकाय बना रहता है।
Kaanaa ↔ सनेत्र
दुर्घटना में एक आंख की रोशनी खो देने से वह व्यक्ति काणा हो गया था।
स्वस्थ खानपान और नेत्र व्यायाम से दोनों आंखों की दृष्टि सनेत्र और स्पष्ट बनी रहती है।
Satsang ↔ कुसंग
ज्ञानी संतों का सत्संग मनुष्य के विकारों को दूर कर जीवन को आलोकित करता है।
कुसंग में पड़कर अच्छे संस्कारों वाला युवक भी धीरे-धीरे नशीले पदार्थों की गिरफ्त में आ गया।
Karm ↔ अकर्म
गीता में श्रीकृष्ण ने फल की चिंता किए बिना केवल निष्काम कर्म करने का संदेश दिया है।
कर्तव्य से विमुख होकर अकर्म की स्थिति में बैठना कायरता और पतन का लक्षण है।
Kartavyanishth ↔ कर्तव्यच्युत
कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी ने भीषण बर्फबारी में भी अपनी चौकी नहीं छोड़ी।
कर्तव्यच्युत कर्मचारियों के कारण कार्यालय में जनता के आवश्यक कार्य लटकते रहे।
Supaatra ↔ कुपात्र
सुपात्र व्यक्ति को दिया गया दान विद्या और समाज-कल्याण के काम आता है।
कुपात्र को धन या अधिकार सौंपने से समाज में अराजकता और अव्यवस्था फैलती है।
Suyog ↔ कुयोग
विद्वानों के सान्निध्य में ज्ञान प्राप्त करने का सुयोग बड़े भाग्य से मिलता है।
यात्रा के समय कुयोग बनने से उनका सारा कार्यक्रम अस्त-व्यस्त हो गया।
Sushasan ↔ कुशासन
सुशासन की स्थापना तभी संभव है जब शासन में पारदर्शिता और जन-सुनवाई हो।
कुशासन और भ्रष्टाचार से त्रस्त होकर जनता ने अत्याचारी शासक को सत्ता से हटा दिया।
Sadmaarg ↔ कुमार्ग
गुरुजनों का मार्गदर्शन सदैव युवाओं को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कुमार्ग पर चलकर कमाया गया नाम और शोहरत बहुत शीघ्र धूल में मिल जाती है।
Suneeti ↔ कुनीति
चाणक्य की सुनीति के आधार पर मौर्य साम्राज्य ने अद्वितीय वैभव प्राप्त किया।
कुनीति और षड्यंत्र के बल पर सत्ता हथियाने वाले शासक अधिक समय तक नहीं टिक पाते।
Paavan ↔ कलुषित
गंगा के पावन जल और संतों की वाणी ने संपूर्ण वातावरण को पवित्र कर दिया।
कुत्सित विचारों से कलुषित मन कभी ईश्वर की सच्ची भक्ति नहीं कर सकता।
Sukarmi ↔ कुकर्मी
सुकर्मी व्यक्ति अपने शुभ कर्मों से समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है।
कुकर्मी अपराधी को अंततः न्यायालय द्वारा कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
Nishkapat ↔ कपटी
निष्कपट व्यक्ति के मन में जो बात होती है, वही उसकी वाणी पर भी होती है।
कपटी व्यक्ति मीठी बातें बोलकर दूसरों को अपने जाल में फंसा लेता है।
Kartavyaparaayan ↔ कामचोर
कर्तव्यपरायण शिक्षक ने अवकाश के दिनों में भी विद्यार्थियों को अतिरिक्त पाठ पढ़ाया।
कामचोर कर्मचारी सदा काम से बचने के बहाने खोजता रहता है।
Karmathata ↔ अकर्मण्यता
किसान की कर्मठता के कारण ही बंजर धरती पर भी लहलहाती फसलें तैयार हो गईं।
अकर्मण्यता और आलस्य के कारण वह समृद्ध विरासत को भी सहेज नहीं सका।
Karmnishth ↔ अकर्मण्य
कर्मनिष्ठ कार्यकर्ता ने बिना किसी शिकायत के दिन-रात समाजसेवा का कार्य किया।
अकर्मण्य व्यक्ति केवल भाग्य को कोसता रहता है और स्वयं कोई प्रयास नहीं करता।
Kartavyaparaayanata ↔ कर्तव्यहीनता
सैनिकों की कर्तव्यपरायणता देश की संप्रभुता और सीमाओं की सबसे बड़ी रक्षक है।
प्रशासनिक कर्तव्यहीनता के कारण बाढ़ पीड़ितों तक समय पर राहत सामग्री नहीं पहुँच सकी।
Pratishthaavaan ↔ कलंकित
प्रतिष्ठावान उद्योगपति ने शहर में निःशुल्क अस्पताल का निर्माण करवा कर ख्याति पाई।
घूसखोरी के आरोप सिद्ध होने पर पूर्व मंत्री का नाम सदा के लिए कलंकित हो गया।
Kutta ↔ कुतिया
पालतू कुत्ता रात भर जागकर घर की रखवाली करता है।
कुतिया अपने पिल्लों को सर्दी से बचाने के लिए पुआल में समेटे बैठी थी।
Cheel ↔ कबूतर
आकाश में मंडराती चील किसी भी छोटे जीव पर झपट सकती है।
कबूतर शांति का प्रतीक बनकर छतों पर दाना चुगता है।
Keet ↔ पतंग
मिट्टी में रहने वाला कीट पत्तियों को कुतर कर पोषण पाता है।
पतंग रात के समय जलती हुई लौ के चारों ओर मंडराता है।
Supaachya-alt ↔ कुपाच्य
उबले हुए सेब और छाछ पेट के लिए सुपाच्य आहार हैं।
सड़क किनारे बिकने वाला तला-भुना जंक फूड कुपाच्य होकर पाचन तंत्र बिगाड़ता है।
Kadwa ↔ मधुर
नीम की पत्तियों और करेले का रस स्वाद में कड़वा किंतु रक्त-शोधक होता है।
गुलाब जामुन की चाशनी का स्वाद मधुर और मन को तृप्त करने वाला होता है।
Kasaila ↔ मधुर
कच्चे आंवले और हरड़ को चबाने पर पहला स्वाद कसैला महसूस होता है।
गन्ने के ताजे रस का स्वाद अत्यंत मधुर और शीतलता प्रदान करने वाला होता है।
Supeya ↔ कुपेय
हर्बल काढ़ा और छाछ शरीर को तरोताजा रखने वाले सुपेय हैं।
केमिकल युक्त कृत्रिम रंगीन शरबत कुपेय हैं जो बच्चों के गले को खराब करते हैं।
Kurkura ↔ सीला
गरमागरम समोसे का ऊपरी आवरण एकदम कुरकुरा और खस्ता था।
बरसात की नमी के कारण डिब्बे में रखा बिस्कुट सीला और बेमजा हो गया।
Khasta ↔ कड़ा
कारीगर ने हलवाई की दुकान पर खस्ता कचौड़ियाँ तैयार कीं।
अधिक सेंकने के कारण तवे की रोटी कड़ा होकर चबाने में मुश्किल हो गई।
Bhuna ↔ कच्चा
अलाव की राख में भुना हुआ भुट्टा गरमागरम खाने में बड़ा स्वादिष्ट लगता है।
कच्चा भुट्टा कड़ा होता है और बिना पकाए नहीं खाया जाता।
Kadwaahat ↔ मिठास
काली कॉफी की कड़वाहट कम करने के लिए उसने उसमें थोड़ा दूध मिलाया।
शहद की प्राकृतिक मिठास गले की खराश को शांत कर देती है।
Kshudha ↔ तृप्ति
कठोर श्रम के बाद क्षुधा शांत करने के लिए उसने गरम रोटियाँ खाईं।
संतुष्ट होकर थाली हटाने पर चेहरे पर पूर्ण तृप्ति के भाव झलक रहे थे।
Maadhurya ↔ कटुता
दूध की रबड़ी में केसर का माधुर्य घुलमिल गया था।
सड़े हुए तेल के कारण पूरियों में अजीब कटुता आ गई थी।
Kashaaya ↔ मधुर
त्रिफला चूर्ण का स्वाद कषाय होता है जो आंतों को साफ करता है।
मिश्री का स्वाद मधुर होता है जो पित्त को शांत करता है।
Amla ↔ क्षार
सिरके और नीबू में प्राकृतिक अम्ल पाया जाता है जो खट्टापन देता है।
बेकिंग सोडा में क्षार होता है जो ढोकले को फूलाता है।
Aamleeya ↔ क्षारीय
अधिक कोला और सोड़ा पीने से पेट में अम्लीय प्रभाव बढ़ जाता है।
खीरे का रस और नारियल पानी पेट को क्षारीय आधार देकर एसिडिटी घटाते हैं।