Pathaneeya ↔ अपठनीय
विद्या और बौद्धिक विकास में पठनीय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अपठनीय की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
अक्षर 'अ' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 401–450 / कुल: 457):
Pathaneeya ↔ अपठनीय
विद्या और बौद्धिक विकास में पठनीय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अपठनीय की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Anusndhaana ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में अनुसंधान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Utteerna ↔ अनुत्तीर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में उत्तीर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनुत्तीर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bauddhika ↔ अबौद्धिक
विद्या और बौद्धिक विकास में बौद्धिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अबौद्धिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pramaanita ↔ अप्रमाणित
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रमाणित का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अप्रमाणित की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tarkasngata ↔ असंगत
विद्या और बौद्धिक विकास में तर्कसंगत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में असंगत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranasammata ↔ अशुद्ध
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणसम्मत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddha-vartanee ↔ अशुद्ध-वर्तनी
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्ध-वर्तनी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध-वर्तनी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shuddhochchaarana ↔ अशुद्धोच्चारण
विद्या और बौद्धिक विकास में शुद्धोच्चारण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्धोच्चारण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sookshmadarshee ↔ अदूरदर्शी
विद्या और बौद्धिक विकास में सूक्ष्मदर्शी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अदूरदर्शी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jijnyaasu ↔ अजिज्ञासु
विद्या और बौद्धिक विकास में जिज्ञासु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अजिज्ञासु की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tatvavettaa ↔ अज्ञानी
विद्या और बौद्धिक विकास में तत्ववेत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Aksharajnyaana ↔ अंगूठाछाप
विद्या और बौद्धिक विकास में अक्षरज्ञान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंगूठाछाप की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Kaavyamarmajnya ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में काव्यमर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Rasika ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में रसिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Marmajnya ↔ अनभिज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में मर्मज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनभिज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Siddhaanta ↔ अटकल
विद्या और बौद्धिक विकास में सिद्धांत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अटकल की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Avadhaaranaa ↔ भ्रांति
विद्या और बौद्धिक विकास में अवधारणा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में भ्रांति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vivekasheela ↔ अविवेकपूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विवेकशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविवेकपूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Chhaatravritti ↔ अर्थदंड
विद्या और बौद्धिक विकास में छात्रवृत्ति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अर्थदंड की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Praaveenya ↔ अयोग्यता
विद्या और बौद्धिक विकास में प्रावीण्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अयोग्यता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaikshanika ↔ अशैक्षणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में शैक्षणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशैक्षणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanaarjana ↔ अज्ञानता
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानार्जन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanadeepaka ↔ अज्ञान-अंधकार
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानदीपक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान-अंधकार की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Tarkasheela ↔ अंधविश्वासी
विद्या और बौद्धिक विकास में तर्कशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधविश्वासी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bodha ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में बोध का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanodaya ↔ अंधविश्वास
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानोदय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधविश्वास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shikshaanuraagee ↔ अध्ययन-विमुख
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षानुरागी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अध्ययन-विमुख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaa ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Akshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में अक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyayana ↔ अनाभ्यास
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्ययन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाभ्यास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaana-prakaasha ↔ अज्ञान-तिमिर
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञान-प्रकाश का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान-तिमिर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanagngaa ↔ अविद्या-गर्त
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानगंगा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविद्या-गर्त की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Bauddhikataa ↔ अज्ञानता
विद्या और बौद्धिक विकास में बौद्धिकता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञानता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saahityika ↔ असाहित्यिक
विद्या और बौद्धिक विकास में साहित्यिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में असाहित्यिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranika ↔ अव्याकरणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अव्याकरणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vaijnyaanika ↔ अवैज्ञानिक
विद्या और बौद्धिक विकास में वैज्ञानिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अवैज्ञानिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Daarshanika ↔ अदार्शनिक
विद्या और बौद्धिक विकास में दार्शनिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अदार्शनिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Aachaarya ↔ अंतेवासी
विद्या और बौद्धिक विकास में आचार्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंतेवासी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Spashtataa ↔ अस्पष्टता
विद्या और बौद्धिक विकास में स्पष्टता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अस्पष्टता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyaapana ↔ अध्ययन
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्यापन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अध्ययन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Samaalochanaa ↔ अंधी-प्रशंसा
विद्या और बौद्धिक विकास में समालोचना का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंधी-प्रशंसा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Chintanasheela ↔ अविवेकशील
विद्या और बौद्धिक विकास में चिंतनशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविवेकशील की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvrishti ↔ अकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सुवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalaplaavana ↔ अनावृष्टि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलप्लावन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अनावृष्टि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anukoola-mausama ↔ प्रतिकूल-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनुकूल-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में प्रतिकूल-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Jalavrishti ↔ अनावृष्टि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में जलवृष्टि की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अनावृष्टि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Anaavrita ↔ मेघावृत्त
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में अनावृत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में मेघावृत्त का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Tuhina ↔ अग्नि
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में तुहिन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अग्नि का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Sailaaba ↔ अकाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में सैलाब की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में अकाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।