Deerghakaaleen ↔ अल्पकालीन
पर्यावरण संकट से निपटने के लिए दीर्घकालीन नीति की तत्काल आवश्यकता है।
मौसम की मार से निपटने हेतु किसानों को अल्पकालीन ऋण दिया गया।
अक्षर 'अ' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 351–400 / कुल: 457):
Deerghakaaleen ↔ अल्पकालीन
पर्यावरण संकट से निपटने के लिए दीर्घकालीन नीति की तत्काल आवश्यकता है।
मौसम की मार से निपटने हेतु किसानों को अल्पकालीन ऋण दिया गया।
Chiranjeevee ↔ अल्पायु
पौराणिक कथाओं में अश्वत्थामा और हनुमान को चिरंजीवी माना गया है।
रोग के कारण प्रतिभाशाली संगीतकार अल्पायु में ही संसार छोड़ गया।
Chirkaal ↔ अल्पकाल
तपस्वियों ने चिरकाल तक वनों में तपस्या करके ज्ञान प्राप्त किया।
अल्पकाल में ही नए व्यापार ने बाजार में अपनी मजबूत धाक जमा ली।
Kshanabhangurata ↔ अमरता
संसार के वैभव की क्षणभंगुरता को देखकर सिद्धार्थ ने संन्यास लिया।
महान बलिदानियों को राष्ट्र के इतिहास में अमरता प्राप्त होती है।
Aviraam ↔ सविराम
डॉक्टरों ने चौबीस घंटे तक अविराम काम करके सभी घायलों की जान बचाई।
कक्षा में सविराम भाषण देने से विद्यार्थियों का ध्यान भटकने से बचता है।
Amar ↔ मर्त्य
देश पर मर मिटने वाले अमर शहीदों का नाम इतिहास के पन्नों में सदा जीवित रहेगा।
मर्त्य मनुष्य को इस नश्वर संसार की क्षणभंगुरता को स्वीकार करना ही पड़ता है।
Avinaashee ↔ विनाशी
आत्मा को अविनाशी बताया गया है जिस पर समय और मृत्यु का कोई वश नहीं चलता।
मिट्टी से बना घड़ा विनाशी है जो जरा सी चोट से टूटकर नष्ट हो जाता है।
Ajar ↔ जीर्ण
देवताओं को अजर और अमर माना जाता है जिन पर वृद्धावस्था का प्रभाव नहीं होता।
सदियों पुरानी हवेली अब जीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है जिसकी दीवारें दरक रही हैं।
Anaagatkaal ↔ अतीतकाल
अनागतकाल के खतरों को भांपकर ही अंतरिक्ष वैज्ञानिक नए ग्रहों की खोज कर रहे हैं।
अतीतकाल के ऐतिहासिक अवशेष हमारी सभ्यता की समृद्ध कहानी कहते हैं।
Madhyamkaal ↔ अंतकाल
परियोजना के मध्यमकाल में वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की समीक्षा की गई।
अंतकाल निकट आने पर व्यक्ति समस्त सांसारिक मोह-माया से विरक्त हो जाता है।
Praarambhik ↔ अंतिम
प्रारंभिक चरण में नए व्यवसाय में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रतियोगिता के अंतिम चरण में केवल दो सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी ही पहुंचे।
Kaalaanukramik ↔ अक्रमिक
पुस्तकालय में ऐतिहासिक अभिलेख कालानुक्रमिक क्रम में सजाए गए हैं।
अक्रमिक रूप से रखी गई फाइलों में से महत्वपूर्ण दस्तावेज खोजना कठिन हो गया।
Chirprateekshit ↔ अकस्मात
वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत के बाद चिरप्रतीक्षित सफलता आखिरकार मिल ही गई।
अकस्मात आई आंधी ने कई कच्चे मकानों की छतें उड़ा दीं।
Ahoraatra ↔ क्षणमात्र
अस्पताल में आपातकालीन सेवा अहोरात्र उपलब्ध रहती है।
क्षणमात्र के निर्णय से खेल का पूरा पासा पलट गया।
Amaratva ↔ मर्त्यता
सत्य और परोपकार के मार्ग पर चलने वाले महापुरुष अमरत्व प्राप्त करते हैं।
मानव देह की मर्त्यता को पहचानकर व्यक्ति को अभिमान से दूर रहना चाहिए।
Nityata ↔ अनित्यता
भारतीय दर्शन में ब्रह्म की नित्यता को ही परम सत्य माना गया है।
सांसारिक सुखों की अनित्यता को समझकर व्यक्ति विरक्त हो जाता है।
Svarnayug ↔ अंधकारयुग
गुप्त काल को भारतीय कला और साहित्य का स्वर्णयुग कहा जाता है।
साम्राज्य के पतन के बाद देश कई दशकों तक अंधकारयुग में डूबा रहा।
Agrasochee ↔ अतीतगामी
अग्रसोची नेतृत्व आने वाले बीस वर्षों की चुनौतियों की पूर्व तैयारी करता है।
अतीतगामी लोग केवल पुरानी बातों का रोना रोते रहते हैं और आगे नहीं बढ़ते।
Ajarata ↔ जराग्रस्तता
योगियों की साधना उनके चेहरे पर अद्भुत तेज और अजरता बनाए रखती है।
आयु बढ़ने के साथ जराग्रस्तता से अंगों में शिथिलता आना स्वाभाविक है।
Chiranjeevita ↔ अल्पायुष्य
पौराणिक पात्र मार्कंडेय को भगवान शिव से चिरंजीविता का वरदान प्राप्त था।
अस्वस्थ खान-पान और प्रदूषण के कारण आधुनिक युग में अल्पायुष्य का खतरा बढ़ गया है।
Adiga ↔ डांवाडोल
संकट और विपत्ति के समय अडिग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डांवाडोल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aknpita ↔ थरथराता
संकट और विपत्ति के समय अकंपित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने थरथराता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Dahashata ↔ अमन
संकट और विपत्ति के समय दहशत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अमन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adamya ↔ दब्बू
संकट और विपत्ति के समय अदम्य का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दब्बू का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aparaajeya ↔ पराजेय
संकट और विपत्ति के समय अपराजेय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeya ↔ जेय
संकट और विपत्ति के समय अजेय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने जेय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaatara ↔ अकातर
संकट और विपत्ति के समय कातर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अकातर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayadaana ↔ प्राणदंड
संकट और विपत्ति के समय अभयदान का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्राणदंड का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adigataa ↔ कातरता
संकट और विपत्ति के समय अडिगता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Apaharanakartaa ↔ रक्षक
संकट और विपत्ति के समय अपहरणकर्ता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshaa ↔ असुरक्षा
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Surakshita ↔ असुरक्षित
संकट और विपत्ति के समय सुरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असुरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Snrakshita ↔ असंरक्षित
संकट और विपत्ति के समय संरक्षित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने असंरक्षित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Abhayamudraa ↔ भयभीत-मुद्रा
संकट और विपत्ति के समय अभयमुद्रा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीत-मुद्रा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Bhayaprada ↔ अभयकारी
संकट और विपत्ति के समय भयप्रद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अभयकारी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Kaanpanaa ↔ अडिग-रहना
संकट और विपत्ति के समय कांपना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अडिग-रहना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeyataa ↔ पराजेयता
संकट और विपत्ति के समय अजेयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पराजेयता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakaushala ↔ अनाड़ीपन
संकट और विपत्ति के समय रणकौशल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अनाड़ीपन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veeragaathaa ↔ अपमानकथा
संकट और विपत्ति के समय वीरगाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अपमानकथा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Atala-iraadaa ↔ डांवाडोल-मन
संकट और विपत्ति के समय अटल-इरादा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डांवाडोल-मन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Adiga-kadama ↔ पीछे-हटना
संकट और विपत्ति के समय अडिग-कदम का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पीछे-हटना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ajeya-durga ↔ पतनशील-किला
संकट और विपत्ति के समय अजेय-दुर्ग का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने पतनशील-किला का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sainyabala ↔ अहिंसाबल
संकट और विपत्ति के समय सैन्यबल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अहिंसाबल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shikshaa ↔ अशिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyetaa ↔ अनपढ़
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्येता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनपढ़ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vijnya ↔ अविज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में विज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Suvijnya ↔ अल्पज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में सुविज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अल्पज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Paarngata ↔ अनाड़ी
विद्या और बौद्धिक विकास में पारंगत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाड़ी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Adhyayanasheela ↔ लापरवाह
विद्या और बौद्धिक विकास में अध्ययनशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में लापरवाह की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Svaadhyaaya ↔ अनाभ्यास
विद्या और बौद्धिक विकास में स्वाध्याय का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनाभ्यास की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।