Aagney ↔ वायव्य
आग्नेय कोण अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वायव्य कोण वायु तत्व से संबंधित है।
वायव्य दिशा से आने वाली शीतल पछुआ हवाओं ने आग्नेय कोण की गर्माहट को कम कर दिया।
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Aagney ↔ वायव्य
आग्नेय कोण अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वायव्य कोण वायु तत्व से संबंधित है।
वायव्य दिशा से आने वाली शीतल पछुआ हवाओं ने आग्नेय कोण की गर्माहट को कम कर दिया।
Sam Jalvayu ↔ विषम जलवायु
मुंबई जैसे समुद्री शहरों में सालभर सम जलवायु रहती है, जबकि दिल्ली में विषम जलवायु पाई जाती है।
रेगिस्तानी इलाकों की विषम जलवायु में दिन में भीषण गर्मी और रात में तीखी ठंड पड़ती है।
Vaashp ↔ हिम
जल गर्म होकर वाष्प बनकर गगन में उड़ता है और अत्यधिक ठंड में हिम बनकर गिरता है।
सूर्य के प्रचंड ताप से हिमालय का पिघलता हिम पावन सदानीरा नदियों को जन्म देता है।
Harsh ↔ विषाद
उत्सव के अवसर पर चारों ओर हर्ष और आनंद की लहर दौड़ गई।
विपदा के क्षणों में मन को विषाद से उबारना आवश्यक होता है।
Anurag ↔ विराग
मातृभूमि के प्रति सच्चा अनुराग हर नागरिक के हृदय में होना चाहिए।
साधु पुरुषों का सांसारिक सुखों के प्रति विराग स्वाभाविक होता है।
Ahankar ↔ विनम्रता
रावण का मिथ्या अहंकार ही उसके समूल विनाश का कारण बना था।
विद्वान व्यक्तियों का सबसे बड़ा गुण उनकी सहज विनम्रता होती है।
Moh ↔ विरक्ति
संतान के प्रति अंधा मोह कभी-कभी उचित और अनुचित का भेद भुला देता है।
संसार की नश्वरता को समझकर साधक के मन में विरक्ति उत्पन्न हो गई।
Vyatha ↔ सुख
दीन-दुखियों की मूक व्यथा देखकर परोपकारी व्यक्ति का हृदय द्रवित हो उठा।
संतुष्ट जीवन जीने वाले व्यक्ति को आत्मिक सुख का अनुभव होता है।
Sanshay ↔ विश्वास
संशय में पड़ा हुआ मनुष्य कभी कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाता।
सच्चे मित्रों के बीच अटूट विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति होता है।
Vyakulta ↔ स्थिरता
संकट के समय मन की व्याकुलता समस्याओं को और जटिल बना देती है।
मानसिक स्थिरता बनाए रखने से कठिन से कठिन परिस्थिति भी नियंत्रित हो जाती है।
Vatsalya ↔ उपेक्षा
माता-पिता का निस्वार्थ वात्सल्य संतान के सम्पूर्ण विकास का आधार है।
शिशुओं की उपेक्षा करने से उनका शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होता है।
Nishtha ↔ विश्वासघात
सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा में अपनी अटूट निष्ठा का प्रमाण दिया।
मित्र के साथ विश्वासघात करना सबसे घृणित अपराध माना जाता है।
Bhakti ↔ विरक्ति
ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति हृदय को समस्त चिंताओं से मुक्त कर देती है।
धार्मिक आडंबरों को देखकर बुद्धिजीवियों में उनसे विरक्ति हो गई।
Vishwas ↔ अविश्वास
व्यापार और साझेदारी की सफलता आपसी विश्वास पर ही टिकी होती है।
झूठ बोलने से साथियों के मन में अविश्वास पैदा हो जाता है।
Vardan ↔ अभिशाप
विज्ञान मानवता के लिए तब तक वरदान है जब तक उसका सदुपयोग हो।
यदि विनाशकारी अस्त्रों का प्रयोग हुआ तो विज्ञान एक अभिशाप बन जाएगा।
Ullasit ↔ विषण्ण
होली के पावन पर्व पर सारा गाँव उल्लसित रंगों में रंग गया।
पराजय के उपरांत राजा विषण्ण भाव से महल के कोने में बैठा रहा।
Ekagra ↔ विक्षिप्त
एकाग्र मन से अध्ययन करने पर जटिल विषय भी आसानी से समझ आ जाता है।
शोरगुल के वातावरण में मन विक्षिप्त होकर भटकने लगता है।
Vatsal ↔ निष्ठुर
वत्सल पिता ने अपने दोनों बालकों को गले से लगा लिया।
निष्ठुर डाकुओं ने निरीह यात्रियों पर कोई दया नहीं दिखाई।
Vinay ↔ अविनय
विद्या ददाति विनयं—सच्ची शिक्षा मनुष्य को विनय और शील सिखाती है।
अविनय और अशिष्टता से बात करने वाला व्यक्ति कभी आदर नहीं पाता।
Vishaktata ↔ अमृतत्व
कटु वचनों की विषाक्तता आपसी प्रेम को नष्ट कर देती है।
सत्य और प्रेम के वचनों में अमृतत्व का वास होता है।
Vyakul ↔ अविचलित
पुत्र के देर से लौटने पर माँ का मन व्याकुल होने लगा।
विशाल पर्वत के समान धीर पुरुष हर संकट में अविचलित रहता है।
Vichalit ↔ अविचलित
विपत्ति की आंधी भी सच्चे साधक को अपने संकल्प से विचलित नहीं कर सकती।
सत्यवादी हर प्रलोभन के सामने अविचलित और दृढ़ खड़ा रहता है।
Dakshin ↔ वाम
हृदय शरीर के वाम भाग में और यकृत दक्षिण भाग में स्थित होता है।
वाम हाथ की अपेक्षा अधिकांश लोग दैनिक कार्यों में दक्षिण हाथ का प्रयोग करते हैं।
Tarun ↔ वृद्ध
तरुण अवस्था में शरीर में असीम ऊर्जा और नई उमंग का संचार रहता है।
वृद्ध अवस्था में शरीर की त्वचा झुर्रियों से भर जाती है और चाल धीमी हो जाती है।
Deh ↔ विदेह
पंचतत्वों से निर्मित यह भौतिक देह नश्वर है और समय के साथ ढल जाती है।
राजा जनक देह में रहते हुए भी आसक्तियों से परे होकर विदेह कहलाते थे।
Vaksha ↔ पीठ
प्राणायाम के गहन अभ्यास से वक्ष का फैलाव बढ़ता है और फेफड़े पूर्ण क्षमता से कार्य करते हैं।
दैनिक योगासनों से पीठ की कशेरुकाएं लचीली रहती हैं और रीढ़ की हड्डी सुदृढ़ बनी रहती है।
Vivek ↔ अविवेक
संकट की घड़ी में विवेक और धैर्य से काम लेने वाला व्यक्ति हर विपत्ति पार कर लेता है।
क्रोध की अवस्था में अविवेक के वशीभूत होकर लिए गए निर्णय केवल पश्चाताप देते हैं।
Vairaagya ↔ अनुराग
संसार की नश्वरता को देखकर राजकुमार सिद्धार्थ के मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया।
अपने देश और संस्कृति के प्रति गहरा अनुराग रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
Brahmacharya ↔ व्यभिचार
विद्यार्थी जीवन में ब्रह्मचर्य और एकाग्रता बनाए रखने से मेधा शक्ति तीव्र होती है।
व्यभिचार और असंयम में लिप्त होने से मनुष्य का शारीरिक व नैतिक पतन हो जाता है।
Vidhipoorn ↔ विधिहीन
संपत्ति का क्रय-विक्रय पूरी तरह विधिपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर संपन्न हुआ।
विधिहीन और अराजक व्यवस्था में दुर्बल लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं हो पाती।
Vishwasneeya ↔ अविश्वसनीय
विश्वसनीय साथी जीवन के कठिन दौर में भी कभी साथ नहीं छोड़ता।
अविश्वसनीय व्यक्ति से गोपनीय बातें साझा करना खतरे से खाली नहीं होता।
Vishwaaspaatra ↔ दगाबाज
राजा ने अपने सबसे विश्वासपात्र मंत्री को राज्य का खजाना सौंपा।
दगाबाज शत्रु से भी अधिक घातक होता है क्योंकि वह पीठ पीछे वार करता है।
Vandneeya ↔ तिरस्करणीय
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिक समस्त देशवासियों के लिए वंदनीय हैं।
राष्ट्रद्रोह और गद्दारी में लिप्त व्यक्ति का आचरण सदा तिरस्करणीय होता है।
Satyasandh ↔ वचनभंगी
सत्यसंध राजा दशरथ ने अपने वचनों की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी।
वचनभंगी व्यक्ति पर कोई भी बुद्धिमान राजा या व्यापारी पुनः विश्वास नहीं करता।
Samanvay ↔ वैमनस्य
विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के बीच समन्वय स्थापित करना ही शांति का मार्ग है।
सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
Vyshaila ↔ विषहीन
कोबरा एक अत्यंत विषैला सर्प है जिसके डंक से तुरंत मृत्यु हो सकती है।
धामन सांप पूरी तरह विषहीन होता है और चूहों को खाकर किसानों की मदद करता है।
Vanya ↔ ग्राम्य
राष्ट्रीय उद्यान में अनेक दुर्लभ वन्य जीवों को प्राकृतिक आवास दिया गया है।
ग्राम्य पशु जैसे गाय और बकरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार हैं।
Vaanar ↔ वानरी
वानर पेड़ की डालियों पर एक सिरे से दूसरे सिरे तक छलांग लगा रहा था।
वानरी अपने नन्हे बच्चे को छाती से चिपकाए हुए फल खा रही थी।
Shuddhghee ↔ वनस्पति
शुद्धघी में बने बेसन के लड्डू अपनी महक और स्वाद के लिए जाने जाते हैं।
वनस्पति घी का अत्यधिक उपयोग धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है।
Vrat ↔ भोजन
शिवरात्रि के पावन पर्व पर उसने दिनभर फलाहार का व्रत रखा।
संध्या वंदना के बाद परिवार के सभी सदस्यों ने बैठकर भोजन किया।
Vyanjan ↔ कच्चा-अन्न
दावत में छप्पन प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन परोसे गए थे।
गोदाम में रखा कच्चा-अन्न पकाने के बाद ही खाने योग्य बनता है।
Amritmay ↔ विषैला
भूखे यात्री के लिए कुएं का मीठा पानी अमृतमय प्रतीत हुआ।
सड़े हुए मशरूम से बना सूप विषैला और जानलेवा साबित हो सकता है।
Gholak ↔ विलेय
खीर बनाते समय उबलता हुआ दूध मुख्य घोलक का कार्य करता है।
दूध में घुलने वाली चीनी और केसर विलेय के रूप में मिठास घोलते हैं।
Sandhi ↔ विग्रह
दो पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए ऐतिहासिक संधि हुई।
नीतिशास्त्र में विग्रह अर्थात् युद्ध को अंतिम विकल्प के रूप में देखा गया है।
Mitrabhaav ↔ वैरभाव
पड़ोसियों के साथ मित्रभाव रखने से रोजमर्रा की समस्याएं सरलता से सुलझ जाती हैं।
मन में अकारण वैरभाव पालने से व्यक्ति का अपना मानसिक स्वास्थ्य नष्ट होता है।
Graahak ↔ विक्रेता
ग्राहक ने सामान खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और मूल्य की जांच की।
ईमानदार विक्रेता ग्राहकों को उचित दाम पर सही वस्तु उपलब्ध कराता है।
Kreta ↔ विक्रेता
भूमि रजिस्ट्री के समय क्रेता ने समस्त राशि का भुगतान चेक द्वारा किया।
विक्रेता ने आवश्यक कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करके मालिकाना हक सौंपा।
Sahayogi ↔ विरोधी
परियोजना को समय पर पूरा करने में प्रत्येक सहयोगी का योगदान महत्वपूर्ण था।
चुनाव में विरोधी पक्ष ने सत्ताधारी दल की नीतियों की कड़ी आलोचना की।
Paksh ↔ विपक्ष
सदन में पक्ष के सांसदों ने नए विधेयक का पुरजोर समर्थन किया।
विपक्ष ने विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए संशोधन की मांग की।
Pakshdhar ↔ विरोधी
वह पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा के प्रबल पक्षधर हैं।
योजना के विरोधी लोगों ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने की याचिका दायर की।