Dhaarmik ↔ अधार्मिक
धार्मिक व्यक्ति सदा नीति-सम्मत राह चुनता है जबकि अधार्मिक अनीति की ओर आकर्षित होता है।
अधार्मिक आचरण समाज की नींव को खोखला कर कलह और अशांति को जन्म देता है।
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Dhaarmik ↔ अधार्मिक
धार्मिक व्यक्ति सदा नीति-सम्मत राह चुनता है जबकि अधार्मिक अनीति की ओर आकर्षित होता है।
अधार्मिक आचरण समाज की नींव को खोखला कर कलह और अशांति को जन्म देता है।
Nyaayee ↔ अन्यायी
न्यायी न्यायाधीश पक्षपात नहीं करता, अन्यायी शासक का पतन अवश्यंभावी है।
अन्यायी शासक की सत्ता भले ही प्रचंड दिखे, किंतु अंततः उसका पतन निश्चित होता है।
Aastik ↔ नास्तिक
आस्तिक व्यक्ति ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखता है जबकि नास्तिक वैज्ञानिक तर्क मांगता है।
नास्तिक व्यक्ति ईश्वरीय सत्ता को अस्वीकार कर केवल प्रत्यक्ष प्रमाण पर विश्वास करता है।
Saadhaaran ↔ असाधारण
साधारण जीवन जीने वाले महापुरुषों के विचार असाधारण और प्रेरणादायी होते हैं।
असाधारण प्रतिभा भी कठिन परिश्रम के बिना अपना पूर्ण चमत्कार नहीं दिखा सकती।
Laukik ↔ अलौकिक
लौकिक सुख क्षणिक होते हैं जबकि पारलौकिक आनंद चिरस्थायी माना गया है।
हिमालय के धवल शिखरों पर अलौकिक शांति और दिव्य सौंदर्य की अनुभूति होती है।
Aardra ↔ शुष्क
वर्षा ऋतु में वातावरण आर्द्र हो जाता है जिससे कपड़े देर से सूखते हैं।
रेगिस्तान की शुष्क पवन शरीर की नमी को सोख लेती है और प्यास बढ़ा देती है।
Tripta ↔ अतृप्त
स्वादिष्ट भोजन से पेट तृप्त हो गया किंतु ज्ञान की पिपासा सदा अतृप्त ही रहती है।
वासनाओं की अग्नि में जितना घी डाला जाए, वह उतनी ही अतृप्त रहकर भड़कती है।
Santusht ↔ असंतुष्ट
ईमानदार व्यक्ति थोड़े में भी संतुष्ट रहता है जबकि लोभी कभी संतुष्ट नहीं होता।
असंतुष्ट मन सदा दूसरों के सुख को देखकर ईर्ष्या की आग में जलता रहता है।
Prasanna ↔ अप्रसन्न
सफलता की सूचना पाकर छात्र प्रसन्न हो गया।
छोटी-छोटी बातों पर अप्रसन्न होने की आदत व्यक्ति को चिड़चिड़ा बना देती है।
Agragaami ↔ पश्चगामी
अग्रगामी सोच राष्ट्र को प्रगति के पथ पर ले जाती है, पश्चगामी विचार पतन कराते हैं।
पश्चगामी सोच समाज को अंधविश्वास और कुरीतियों के गर्त में धकेल देती है।
Chiraayu ↔ अल्पायु
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का संदेश चिरायु है, उसका कभी अंत नहीं होगा।
अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर दिया।
Anivaarya ↔ वैकल्पिक
परीक्षा में प्रथम खंड अनिवार्य है जबकि द्वितीय खंड में वैकल्पिक प्रश्न हैं।
वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोतों को अपनाना पर्यावरण संरक्षण के लिए अनिवार्य हो चुका है।
Aichhik ↔ अनिवार्य
रक्तदान पूरी तरह ऐच्छिक सेवा है, किसी पर कोई बाध्यता नहीं।
स्वच्छता और पौष्टिक आहार अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य शर्तें हैं।
Utsaahi ↔ अनुत्साही
उत्साही युवा हर चुनौती को अवसर बना लेते हैं।
अनुत्साही सैनिक सेना के मनोबल को गिरा देता है, उत्साह ही विजय की कुंजी है।
Sachetan ↔ अचेतन
सचेतन नागरिक अपने देश के प्रति सदैव सजग रहता है।
अचेतन मन में दबी इच्छाएं और स्मृतियां मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
Paripakwa ↔ अपरिपक्व
परिपक्व बुद्धि अनुभव से विकसित होती है, अपरिपक्व सोच जल्दबाजी में निर्णय लेती है।
अपरिपक्व निर्णय से भविष्य में गंभीर हानियों का सामना करना पड़ सकता है।
Praudh ↔ अल्पवयस्क
प्रौढ़ व्यक्ति जीवन की जटिलताओं को धैर्यपूर्वक संभालते हैं।
अल्पवयस्क बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध और उनके अधिकारों का हनन है।
Suruchipoorna ↔ अरुचिकर
गृह-सज्जा सुरुचिपूर्ण ढंग से की गई थी।
अरुचिकर भोजन भी भूख लगने पर स्वादिष्ट और तृप्तिकारी प्रतीत होने लगता है।
Sarvagya ↔ अल्पज्ञ
संसार में केवल ईश्वर ही सर्वज्ञ है, मनुष्य तो अल्पज्ञ ही रहता है।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Bahugya ↔ अल्पज्ञ
बहुज्ञ विद्वान हर विषय पर सारगर्भित विचार व्यक्त कर सकते हैं।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Aarambh ↔ अंत
किसी भी शुभ कार्य का आरंभ उत्साह से और अंत संतोष के साथ होना चाहिए।
अंत भला तो सब भला — कठिन शुरुआत के बाद भी सुखद अंत मन को शांति देता है।
Aadi ↔ अंत
संसार में जिसका आदि है उसका अंत भी सुनिश्चित है।
अंत भला तो सब भला — कठिन शुरुआत के बाद भी सुखद अंत मन को शांति देता है।
Iti ↔ अथ
ग्रंथ के आरंभ में अथ और समापन पर इति लिखा जाता है।
अथ योगानुशासनम् — महर्षि पतंजलि ने योग सूत्र का श्रीगणेश अथ शब्द से किया।
Uday ↔ अस्त
सूर्य का पूर्व में उदय और पश्चिम में अस्त होना प्रकृति का अटल नियम है।
शाम को सूर्य अस्त होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं।
Unnati ↔ अवनति
शिक्षा और विज्ञान में उन्नति करने वाला देश कभी अवनति के गर्त में नहीं गिरता।
आलस्य और कुप्रबंधन व्यापार को अवनति की ओर धकेल देते हैं।
Maan ↔ अपमान
सज्जन व्यक्ति मान मिलने पर अभिमानी नहीं होते और अपमान होने पर संयम नहीं खोते।
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
Apmaan ↔ सम्मान
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
Yash ↔ अपयश
परोपकार से यश की प्राप्ति होती है, स्वार्थ केवल अपयश देता है।
गलत संगति में पड़ने से व्यक्ति को बिना कारण भी अपयश झेलना पड़ता है।
Keerti ↔ अपकीर्ति
दानवीर कर्ण की कीर्ति अमर है, दुर्योधन के कुकृत्यों ने उसे अपकीर्ति दी।
कुकर्मों से अर्जित अपकीर्ति कुल की पीढ़ियों तक बदनामी का कारण बन जाती है।
Aayaat ↔ निर्यात
देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आयात कम और निर्यात अधिक करना चाहिए।
भारतीय मसालों का विदेशों में बड़े पैमाने पर निर्यात होता है।
Aay ↔ व्यय
बुद्धिमान गृहस्थ अपनी आय के अनुसार ही व्यय करता है ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।
अनावश्यक व्यय से बचकर बचत करना वित्तीय स्थिरता की नींव है।
Ekta ↔ अनेकता
अनेकता में एकता ही भारतीय राष्ट्र की सबसे अनूठी विशेषता है।
भाषा और वेशभूषा की अनेकता के बावजूद हम सब एक हैं।
Niyam ↔ अनियम
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
दैनिक जीवन में अनियम और अनियमितता स्वास्थ्य तथा कार्य दोनों को बिगाड़ देती है।
Vaidh ↔ अवैध
व्यापार केवल वैध साधनों से करना चाहिए, अवैध धन कभी सुख नहीं देता।
प्रशासन ने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया।
Aagya ↔ अवज्ञा
सैनिक सेनापति की आज्ञा का अक्षरशः पालन करते हैं, अवज्ञा करने पर कोर्ट मार्शल होता है।
माता-पिता की अवज्ञा करने वाली संतान कभी सच्चे मन से सुखी नहीं रह सकती।
Kartavya ↔ अकर्तव्य
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
कर्तव्य और अकर्तव्य का भेद समझकर ही धर्मसम्मत जीवन जिया जा सकता है।
Adhikaar ↔ कर्तव्य
अधिकारों की मांग के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी समान रूप से जरूरी है।
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
Aagman ↔ प्रस्थान
वसंत के आगमन से प्रकृति खिल उठती है, जबकि पतझड़ का प्रस्थान शीत का अंत करता है।
ट्रेन के प्रस्थान का समय घोषित होते ही यात्री प्लेटफॉर्म पर एकत्र हो गए।
Aaroh ↔ अवरोह
संगीत में स्वरों के आरोह और अवरोह का सही संतुलन ही राग की सुंदरता बढ़ाता है।
पर्वतारोही के लिए जितना कठिन आरोह होता है, उतना ही सावधानीपूर्वक अवरोह करना पड़ता है।
Aadar ↔ अनादर
बड़ों का आदर करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है।
किसी के अतिथि का अनादर करना भारतीय परंपरा के विपरीत है।
Adhyaapak ↔ विद्यार्थी
एक समर्पित अध्यापक समाज के भविष्य का सच्चा निर्माता होता है।
विद्यार्थी जीवन कठिन तपस्या का काल होता है जिसमें चरित्र का निर्माण होता है।
Vidya ↔ अविद्या
विद्या अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाती है, अविद्या मनुष्य को भटकाती है।
अविद्या के आवरण को हटाए बिना आत्मज्ञान की प्राप्ति असंभव है।
Snvidhaana ↔ अराजकता
संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और शासन को मर्यादा में बांधता है।
कानून व्यवस्था के ध्वस्त होते ही समाज में अराजकता फैल जाती है और निर्बल वर्ग असुरक्षित हो जाता है।
Aatithya ↔ अनातिथ्य
भारतीय संस्कृति में आतिथ्य सत्कार को ईश्वर सेवा के समान आदरणीय माना गया है।
द्वार पर आए भूखे आगंतुक के साथ अनातिथ्य का व्यवहार करना सामाजिक मर्यादा के विपरीत है।
Saamaajika ↔ असामाजिक
सामूहिक विवाह और उत्सव सामाजिक मेलजोल व भाईचारे को सुदृढ़ करने के उत्तम माध्यम हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों पर पुलिस कड़ी नजर रखती है।
Samaanataa ↔ असमानता
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना समानता की गारंटी है।
अवसरों की असमानता से वंचित वर्गों के युवाओं का आत्मविश्वास डगमगा जाता है।
Sveekriti ↔ अस्वीकृति
आधुनिक प्रगतिशील विचारों को समाज की स्वीकृति मिलने में कुछ समय अवश्य लगता है।
कुप्रथाओं और अंधविश्वासों की सार्वभौमिक अस्वीकृति से ही समाज उन्नत बन सकता है।
Parnparaa ↔ आधुनिकता
भारतीय विवाह समारोहों में सदियों पुरानी समृद्ध परंपरा का दर्शन सहज ही होता है।
डिजिटल तकनीक और आधुनिकता ने जीवनशैली को सुगम व त्वरित बना दिया है।
Kuleena ↔ अकुलीन
प्राचीन काल में कुलीन परिवारों के आचार-विचार को समाज में आदर्श माना जाता था।
लोकतंत्र में व्यक्ति की योग्यता मायने रखती है, चाहे वह किसी भी अकुलीन परिवार से क्यों न हो।
Aabhijaatya ↔ जनसाधारण
राजदरबार का वैभवशाली आभिजात्य वर्ग सुख-सुविधाओं और ठाठ-बाट में जीवन व्यतीत करता था।
सच्चे लोकतंत्र का मुख्य उद्देश्य जनसाधारण के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और उन्हें अधिकार देना है।