Varshaaritu ↔ शुष्क-ऋतु
वर्षाऋतु के आगमन से धरती की प्यास बुझती है और हरियाली छा जाती है।
शुष्क-ऋतु में तेज धूप और जल स्रोतों के सूखने से जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है।
अक्षर 'व' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 151–199 / कुल: 199):
Varshaaritu ↔ शुष्क-ऋतु
वर्षाऋतु के आगमन से धरती की प्यास बुझती है और हरियाली छा जाती है।
शुष्क-ऋतु में तेज धूप और जल स्रोतों के सूखने से जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है।
Vartamaanakaal ↔ भूतकाल
वर्तमानकाल में उठाया गया ठोस कदम ही हमारे उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है।
भूतकाल की यादों में ही खोए रहने से वर्तमान के कर्तव्य प्रभावित होते हैं।
Avinaashee ↔ विनाशी
आत्मा को अविनाशी बताया गया है जिस पर समय और मृत्यु का कोई वश नहीं चलता।
मिट्टी से बना घड़ा विनाशी है जो जरा सी चोट से टूटकर नष्ट हो जाता है।
Kaalakram ↔ व्यतिक्रम
इतिहासकार ने राजाओं के शासनकाल को सही कालक्रम में दर्ज किया।
घटनाओं के व्यतिक्रम से पाठक भ्रमित हो गए और सही समय समझ न सके।
Paakshik ↔ वार्षिक
साहित्यिक पत्रिका पाक्षिक रूप से हर पंद्रह दिन में प्रकाशित होती है।
विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह एक प्रतिष्ठित वार्षिक उत्सव है।
Traimaasik ↔ वार्षिक
कंपनी हर तीन महीने बाद अपने त्रैमासिक वित्तीय परिणाम घोषित करती है।
वार्षिक बजट में पूरे साल की आय और व्यय का विस्तृत ब्यौरा होता है।
Tatkaalata ↔ विलंबन
साइबर सुरक्षा में तत्कालता ही हैकिंग हमलों से सिस्टम को बचा सकती है।
कागजी प्रक्रियाओं के विलंबन से पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है।
Veerataa ↔ कायरता
संकट और विपत्ति के समय वीरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veera ↔ कायर
संकट और विपत्ति के समय वीर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vijetaa ↔ विजित
संकट और विपत्ति के समय विजेता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने विजित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vidroha ↔ दमन
संकट और विपत्ति के समय विद्रोह का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने दमन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vaara ↔ प्रतिवार
संकट और विपत्ति के समय वार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिवार का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veerarasa ↔ भयानक-रस
संकट और विपत्ति के समय वीररस का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयानक-रस का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veeragaathaa ↔ अपमानकथा
संकट और विपत्ति के समय वीरगाथा का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अपमानकथा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Seenaajoree ↔ विनम्रता
संकट और विपत्ति के समय सीनाजोरी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने विनम्रता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Veera-sapoota ↔ कायर-पुत्र
संकट और विपत्ति के समय वीर-सपूत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कायर-पुत्र का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Vidushee ↔ मूर्खा
विद्या और बौद्धिक विकास में विदुषी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vijnya ↔ अविज्ञ
विद्या और बौद्धिक विकास में विज्ञ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविज्ञ की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saiddhaantika ↔ व्यावहारिक
विद्या और बौद्धिक विकास में सैद्धांतिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में व्यावहारिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Shaastraartha ↔ वितंडा
विद्या और बौद्धिक विकास में शास्त्रार्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में वितंडा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Snvaada ↔ विवाद
विद्या और बौद्धिक विकास में संवाद का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विवाद की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranasammata ↔ अशुद्ध
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणसम्मत का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अशुद्ध की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastha ↔ विस्मृत
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थ का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृत की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smarana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Smriti ↔ विस्मृति
विद्या और बौद्धिक विकास में स्मृति का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मृति की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaadhyayana ↔ समय-बर्बादी
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्याध्ययन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में समय-बर्बादी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaarthee ↔ विद्याविमुख
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यार्थी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विद्याविमुख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakhyaa ↔ संक्षेप
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याख्या का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में संक्षेप की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vivekasheela ↔ अविवेकपूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विवेकशील का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अविवेकपूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaadaana ↔ विद्यावंचन
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यादान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विद्यावंचन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaanuraagee ↔ विद्याद्वेषी
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यानुरागी का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विद्याद्वेषी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Pustakeeya-jnyaana ↔ व्यावहारिक-अनुभव
विद्या और बौद्धिक विकास में पुस्तकीय-ज्ञान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में व्यावहारिक-अनुभव की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaa ↔ अज्ञान
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्ता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अज्ञान की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvata-sabhaa ↔ मूर्ख-मंडली
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत-सभा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख-मंडली की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidyaavaana ↔ मूर्ख
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्यावान का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्ख की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvatajana ↔ मूर्खजन
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वतजन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खजन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vidvattaapoorna ↔ मूर्खतापूर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में विद्वत्तापूर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में मूर्खतापूर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vyaakaranika ↔ अव्याकरणिक
विद्या और बौद्धिक विकास में व्याकरणिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अव्याकरणिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Vaijnyaanika ↔ अवैज्ञानिक
विद्या और बौद्धिक विकास में वैज्ञानिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अवैज्ञानिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Manana ↔ विस्मरण
विद्या और बौद्धिक विकास में मनन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में विस्मरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Varshaakaala ↔ शुष्ककाल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षाकाल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्ककाल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vaashpeekarana ↔ संघनन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वाष्पीकरण की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में संघनन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vasnta-ritu ↔ शिशिर-ऋतु
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वसंत-ऋतु की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर-ऋतु का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-boonden ↔ रेत-कण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-बूंदें की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में रेत-कण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-maapee ↔ शुष्कता-मापी
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-मापी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्कता-मापी का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-prachura ↔ वर्षा-विहीन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-प्रचुर की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में वर्षा-विहीन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Dhruveeya-sheeta ↔ विषुवतीय-ताप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में ध्रुवीय-शीत की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में विषुवतीय-ताप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Vasnta-bahaara ↔ पतझड़-का-सन्नाटा
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वसंत-बहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में पतझड़-का-सन्नाटा का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Yahan ↔ वहाँ
यहाँ पुस्तकालय में पूर्ण शांति और अध्ययन के लिए आदर्श वातावरण बना हुआ है।
वहाँ चौराहे पर अत्यधिक शोरगुल और वाहनों की भारी भीड़ लगी रहती है।