Aakraamaka ↔ रक्षात्मक
संकट और विपत्ति के समय आक्रामक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षात्मक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
अक्षर 'र' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 51–67 / कुल: 67):
Aakraamaka ↔ रक्षात्मक
संकट और विपत्ति के समय आक्रामक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षात्मक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Prahaara ↔ रोक
संकट और विपत्ति के समय प्रहार का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rakshaarthee ↔ शरणदाता
संकट और विपत्ति के समय रक्षार्थी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शरणदाता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Apaharanakartaa ↔ रक्षक
संकट और विपत्ति के समय अपहरणकर्ता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rananaada ↔ युद्धविराम
संकट और विपत्ति के समय रणनाद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने युद्धविराम का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakshetra ↔ शांतिस्थल
संकट और विपत्ति के समय रणक्षेत्र का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांतिस्थल का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranakaushala ↔ अनाड़ीपन
संकट और विपत्ति के समय रणकौशल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने अनाड़ीपन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranonmaada ↔ शांति-चेतना
संकट और विपत्ति के समय रणोन्माद का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शांति-चेतना का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranavijaya ↔ रणपराजय
संकट और विपत्ति के समय रणविजय का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रणपराजय का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ranabhoomi ↔ तपोभूमि
संकट और विपत्ति के समय रणभूमि का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने तपोभूमि का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Rasika ↔ अरसिक
विद्या और बौद्धिक विकास में रसिक का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अरसिक की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Knthastheekarana ↔ रटना-छोड़ना
विद्या और बौद्धिक विकास में कंठस्थीकरण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में रटना-छोड़ना की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Reta-kaa-toophaana ↔ शांत-रेगिस्तान
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में रेत-का-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-रेगिस्तान का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Varshaa-boonden ↔ रेत-कण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में वर्षा-बूंदें की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में रेत-कण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Hansna ↔ रोना
मित्रों के साथ खुलकर हंसना हर प्रकार के मानसिक तनाव और चिंता को दूर भगा देता है।
प्रियजन के अचानक बिछुड़ने पर किसी का भी रोना अत्यंत स्वाभाविक और मार्मिक होता है।
Roothna ↔ मनाना
छोटी-छोटी बातों पर अपनों से रूठना केवल संबंधों में अनावश्यक दूरी बढ़ाता है।
नाराज मित्र को प्यार और आत्मीयता से मनाना सच्ची मित्रता की निशानी है।
Chalna ↔ रुकना
जीवन निरंतर आगे चलने का नाम है, इसलिए मुश्किलों में भी कदम आगे बढ़ाते रहना चाहिए।
थक जाने पर थोड़ी देर रुकना उचित है, किंतु हिम्मत हारकर बैठ जाना अनुचित है।