Nirbheeka ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय निर्भीक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
अक्षर 'न' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 151–179 / कुल: 179):
Nirbheeka ↔ डरपोक
संकट और विपत्ति के समय निर्भीक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डरपोक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheekataa ↔ भयभीतता
संकट और विपत्ति के समय निर्भीकता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भयभीतता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidarataa ↔ कातरता
संकट और विपत्ति के समय निडरता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कातरता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihshnka ↔ शंकित
संकट और विपत्ति के समय निःशंक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Shnkaakula ↔ निश्चिंत
संकट और विपत्ति के समय शंकाकुल का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निश्चिंत का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhayataa ↔ भीरुता
संकट और विपत्ति के समय निर्भयता का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने भीरुता का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Ojasvee ↔ निस्तेज
संकट और विपत्ति के समय ओजस्वी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निस्तेज का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirdvndva ↔ द्वंद्वग्रस्त
संकट और विपत्ति के समय निर्द्वंद्व का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने द्वंद्वग्रस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nihsnkocha ↔ संकोची
संकट और विपत्ति के समय निःसंकोच का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने संकोची का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nidara-mana ↔ शंकित-मन
संकट और विपत्ति के समय निडर-मन का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने शंकित-मन का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhaya-bhaava ↔ डर-का-भाव
संकट और विपत्ति के समय निर्भय-भाव का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने डर-का-भाव का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbheeka-svara ↔ कांपती-आवाज
संकट और विपत्ति के समय निर्भीक-स्वर का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने कांपती-आवाज का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Nirbhaya-drishti ↔ झुकी-नजरें
संकट और विपत्ति के समय निर्भय-दृष्टि का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने झुकी-नजरें का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Sashastreekarana ↔ निःशस्त्रीकरण
संकट और विपत्ति के समय सशस्त्रीकरण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने निःशस्त्रीकरण का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Saakshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Saaksharataa ↔ निरक्षरता
विद्या और बौद्धिक विकास में साक्षरता का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षरता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Akshara ↔ निरक्षर
विद्या और बौद्धिक विकास में अक्षर का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में निरक्षर की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Nirmala-aakaasha ↔ धुंधला-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में निर्मल-आकाश की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धुंधला-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghagarjana ↔ नीरवता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघगर्जन की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरवता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Nidaagha ↔ शिशिर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में निदाघ की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शिशिर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Neehaara ↔ धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में नीहार की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Namee ↔ सूखापन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में नमी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में सूखापन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Megha-garjanaa ↔ नीरव-आकाश
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघ-गर्जना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीरव-आकाश का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Meghamaalaa ↔ नीलांबर
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में मेघमाला की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में नीलांबर का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ghataatopa-andheraa ↔ निर्मल-उजाला
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में घटाटोप-अंधेरा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में निर्मल-उजाला का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Uchcha-vaayudaaba ↔ निम्न-वायुदाब
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उच्च-वायुदाब की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में निम्न-वायुदाब का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Svarg ↔ नरक
धार्मिक मान्यताओं में पवित्र आचरण और परोपकार करने वाली आत्माओं को स्वर्ग का अधिकारी बताया गया है।
पाप, क्रूरता और दुष्ट कर्मों में लिप्त रहने वाले मनुष्य को नरक की यातनाएं झेलनी पड़ती हैं।
Oopar ↔ नीचे
विमान जब बादलों के ऊपर पहुंचता है तो नीचे की धरती अत्यंत छोटी और सुरम्य दिखाई देती है।
पहाड़ से नीचे उतरते समय फिसलन भरे पत्थरों पर बहुत संभलकर कदम रखना पड़ता है।
Sakht ↔ नरम
कक्षा में अनुशासन बनाए रखने के लिए अध्यापक को कभी-कभी सख्त रुख अपनाना पड़ता है।
बच्चों की नादानियों पर क्रोधित होने के बजाय उनके साथ नरम व्यवहार करना चाहिए।