Umangit ↔ मायूस
खेल के मैदान में खिलाड़ी उमंगित होकर भाग रहे थे।
मैच हारने के बाद टीम के सदस्य मायूस होकर बैठ गए।
अक्षर 'उ' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 51–100 / कुल: 121):
Umangit ↔ मायूस
खेल के मैदान में खिलाड़ी उमंगित होकर भाग रहे थे।
मैच हारने के बाद टीम के सदस्य मायूस होकर बैठ गए।
Uttaan ↔ अवतान
योगाभ्यास में शवासन के दौरान साधक उत्तान अवस्था में पीठ के बल विश्राम करता है।
मक्रासन करते समय साधक अवतान मुद्रा में पेट के बल लेटकर श्वास नियंत्रित करता है।
Udara ↔ पृष्ठ
संतुलित और सुपाच्य आहार लेने से उदर की पाचन क्रिया सुचारू और रोगमुक्त बनी रहती है।
लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने से पृष्ठ और कटि प्रदेश में पीड़ा होने लगती है।
Urobhaaga ↔ पृष्ठभाग
तैराकी करते समय उरोभाग की मांसपेशियां जल के प्रतिरोध को चीरते हुए आगे बढ़ती हैं।
शरीर को सीधा और संतुलित रखने के लिए पृष्ठभाग की रीढ़ की मांसपेशियां निरंतर सक्रिय रहती हैं।
Unmeelana ↔ निमीलन
प्रातःकाल सूर्य की प्रथम किरण पड़ते ही नेत्रों का उन्मीलन होता है और चेतनता लौट आती है।
गहरी ध्यानस्थ अवस्था में साधक के नेत्रों का स्वाभाविक निमीलन हो जाता है।
Uchchhvaasa ↔ निःश्वास
कठिन शारीरिक श्रम के उपरांत खिलाड़ी का उच्छ्वास तेज गति से भीतर वायु खींचता है।
विश्राम की स्थिति में लंबा निःश्वास छोड़कर शरीर की संपूर्ण थकान दूर की जाती है।
Udaarta ↔ संकीर्णता
राजा ने अपनी उदारता का परिचय देते हुए पराजित शत्रु को भी क्षमादान दे दिया।
विचारों की संकीर्णता मनुष्य को नए दृष्टिकोण और प्रगति को स्वीकार करने से रोकती है।
Sumaarg ↔ उन्मार्ग
सत्संग और स्वाध्याय मनुष्य के मन को सदा सुमार्ग की ओर प्रेरित करते हैं।
उन्मार्ग पर भटकने वाला व्यक्ति अपने भविष्य और परिवार दोनों को संकट में डालता है।
Ubla ↔ तला
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग उबला हुआ चना और मूंग नाश्ते में लेते हैं।
कड़ाही में अधिक तला हुआ भोजन वजन बढ़ाने और गैस का कारण बनता है।
Upvaas ↔ पारण
एकादशी के दिन श्रद्धालु निर्जल उपवास रखकर आत्मशुद्धि करते हैं।
अगले दिन सूर्योदय के पश्चात पूजा करके पारण किया जाता है।
Ubaala ↔ जमाया
चाय बनाने के लिए उसने दूध और पानी को पतीले में अच्छी तरह उबाला।
हलवाई ने मटके में जामन डालकर गाढ़ा मीठा दही जमाया।
Atibhojan ↔ उपवास
दावत में अतिभोजन करने के कारण उसे रात भर पेट दर्द से जूझना पड़ा।
हफ्ते में एक दिन का उपवास पाचन तंत्र को विश्राम और ताजगी देता है।
Ubkaai ↔ तृप्ति
सड़े हुए तेल की गंध सूंघते ही उसे उबकाई आने लगी।
शुद्ध घी की गरम खिचड़ी खाकर पेट को परम तृप्ति मिली।
Jalpaan ↔ उपवास
सुबह की सैर से लौटने के बाद उसने फल और दूध का जलपान किया।
व्रत के दिन संध्या तक किसी भी प्रकार का जलपान न करके उपवास रखा जाता है।
Aagyaakaari ↔ उद्दंड
आज्ञाकारी बालक अपने गुरुजनों और बड़ों के वचनों का कभी उल्लंघन नहीं करता।
उद्दंड छात्र अनुशासन की अवहेलना कर कक्षा में बाधा उत्पन्न करता है।
Udyogpati ↔ श्रमिक
उद्योगपति ने नई स्वचालित इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया।
श्रमिक के निरंतर पसीने से ही विशाल कल-कारखाने सुचारू चलते हैं।
Udhaari ↔ नकद-भुगतान
उधारी पर माल बेचने से दुकानदार की कार्यशील पूंजी फंस जाती है।
नकद-भुगतान करने पर व्यापारी ग्राहकों को पांच प्रतिशत की विशेष छूट देते हैं।
Nakadee ↔ उधारी
आपातकालीन जरूरतों के लिए घर में कुछ नकदी रखना सदैव बुद्धिमानी है।
उधारी के बोझ तले दबा व्यापारी चैन की नींद नहीं सो पाता।
Kaalaabaajaari ↔ उचित-दर
संकट के समय दवाओं की कालाबजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सहकारी समिति उचित-दर पर नागरिकों को अनिवार्य सामग्री उपलब्ध कराती है।
Uchhaal ↔ गिरावट
उत्पाद की मांग बढ़ते ही कंपनी के शेयरों में जबर्दस्त उछाल आया।
कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से परिवहन उद्योग को राहत मिली।
Upbhokta ↔ उत्पादक
जागरूक उपभोक्ता सदैव वस्तुओं की गुणवत्ता और एक्सपायरी डेट देखकर खरीदारी करता है।
उत्पादक नई तकनीक का इस्तेमाल करके लागत कम करने का प्रयास करता है।
Udyamee ↔ अकर्मण्य
उद्यमी मनुष्य कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नए अवसर तलाश लेता है।
अकर्मण्य लोग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहकर केवल भाग्य को दोष देते रहते हैं।
Udyam ↔ आलस्य
उद्यम ही सफलता की एकमात्र और वास्तविक कुंजी माना गया है।
आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला उसका सबसे बड़ा शत्रु है।
Udyogee ↔ निरुद्योगी
उद्योगी व्यक्ति कभी किसी के आगे हाथ फैलाने की नौबत नहीं आने देता।
निरुद्योगी स्वभाव के कारण वह पैतृक व्यापार को भी संभाल नहीं सका।
Udyamasheelta ↔ निष्क्रियता
युवाओं की उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए नए ऋण कार्यक्रम आरंभ किए गए।
प्रशासन की निष्क्रियता के कारण जन-समस्याएं दिनों-दिन गंभीर रूप लेती गईं।
Utpaadak ↔ अनुत्पादक
उद्योगों में उत्पादक श्रम को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष बोनस दिया जाता है।
अनुत्पादक व्यय पर रोक लगाकर बजट को घाटे से बाहर निकाला जा सकता है।
Utpaadakata ↔ अनुत्पादकता
आधुनिक कृषि उपकरणों ने प्रति हेक्टेयर उत्पादकता को दोगुना कर दिया।
कारखाने में बार-बार बिजली गुल होने से भारी अनुत्पादकता की स्थिति पैदा हो गई।
Utsaahpoorvak ↔ बेमन-से
विद्यार्थियों ने विज्ञान प्रदर्शनी की तैयारी में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बिना रुचि के बेमन-से किया गया कार्य कभी भी प्रभावशाली परिणाम नहीं देता।
Udyog ↔ विश्राम
कठोर उद्योग करने से ही राष्ट्र की संपन्नता और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
लंबे समय तक काम करने के बाद मन और शरीर दोनों को उचित विश्राम चाहिए।
Udyamavaan ↔ अकर्मण्य
उद्यमवान पुरुष अपने बाहुबल से बंजर भूमि को भी उपजाऊ बना देता है।
अकर्मण्य व्यक्ति उत्तम अवसर मिलने पर भी कोई कदम नहीं उठाता।
Kaaryavaahee ↔ उदासीनता
शिकायत मिलते ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोषी फैक्ट्री पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की।
प्रशासन की उदासीनता के कारण सड़क के गड्ढे महीनों तक नहीं भरे गए।
Utpaadan ↔ उपभोग
नए कारखाने के चालू होने से सीमेंट का उत्पादन दोगुना हो गया।
गर्मियों के मौसम में बिजली और पानी का उपभोग अत्यधिक बढ़ जाता है।
Karmaleen ↔ उदासीन
कर्मलीन वैज्ञानिक चौबीसों घंटे शोध प्रयोगशाला में अनुसंधान में जुटे रहे।
कंपनी के संकट के प्रति उदासीन कर्मचारियों को चेतावनी जारी की गई।
Udyogaparaayan ↔ सुस्त
उद्योगपरायण समाज निरंतर नवाचार करके विश्व स्तर पर अग्रणी बन जाता है।
सुस्त मानसिकता वाले लोग हमेशा बदलाव और नए काम से घबराते हैं।
Poorvakaal ↔ उत्तरकाल
पूर्वकाल में गुरुकुलों में छात्रों को समस्त विधाओं की शिक्षा दी जाती थी।
मुगल साम्राज्य के उत्तरकाल में क्षेत्रीय शक्तियों का तेजी से उदय हुआ।
Ushaakaal ↔ संध्याकाल
उषाकाल में आकाश में फैली लालिमा मन को असीम शांति प्रदान करती है।
संध्याकाल होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर चहचहाते हुए लौटने लगते हैं।
Poorvasandhya ↔ उषावेला
स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रपति ने राष्ट्र को संबोधित किया।
उषावेला में सूर्योदय होते ही नए दिन का हर्षोल्लास शुरू हुआ।
Uttaraayan ↔ दक्षिणायन
मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है।
दक्षिणायन की अवधि में रातें लंबी और दिन छोटे होने लगते हैं।
Utaavalee ↔ ठहराव
बिना सोचे-समझे निर्णय लेने में उतावली दिखाना भविष्य में भारी पड़ सकता है।
अनुभवी नेता के भाषण में अद्भुत ठहराव और गंभीरता दिखाई देती है।
Udbhav ↔ अवसान
हिमालय की चोटियों से पवित्र गंगा नदी का उद्भव होता है।
दिन ढलते ही सूर्य के अवसान के साथ ही चारों ओर गोधूलि बेला छा गई।
Poorvaardh ↔ उत्तरार्ध
बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में भारत में स्वाधीनता संग्राम अपने चरम पर था।
सदी के उत्तरार्ध में सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विज्ञान में क्रांति आई।
Praakkaaleen ↔ उत्तरकालीन
प्राक्कालीन सभ्यताओं के अवशेष सिंधु घाटी में आज भी दिखाई देते हैं।
उत्तरकालीन स्थापत्य कला में आधुनिक तकनीकों का गहरा प्रभाव झलकता है।
Utteerna ↔ अनुत्तीर्ण
विद्या और बौद्धिक विकास में उत्तीर्ण का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अनुत्तीर्ण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jnyaanapipaasu ↔ उदासीन
विद्या और बौद्धिक विकास में ज्ञानपिपासु का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उदासीन की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Jijnyaasaa ↔ उदासीनता
विद्या और बौद्धिक विकास में जिज्ञासा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उदासीनता की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Upaadhi ↔ उपाधि-हरण
विद्या और बौद्धिक विकास में उपाधि का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उपाधि-हरण की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Uchcha-shikshaa ↔ प्राथमिक-शिक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में उच्च-शिक्षा का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में प्राथमिक-शिक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Moolyaankana ↔ उपेक्षा
विद्या और बौद्धिक विकास में मूल्यांकन का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में उपेक्षा की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Sheetalataa ↔ उष्णता
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में शीतलता की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में उष्णता का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Ushna-mausama ↔ शीत-मौसम
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में उष्ण-मौसम की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शीत-मौसम का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।