Aatmanirbhar ↔ पराश्रित
देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
विदेशी सहायता पर पराश्रित अर्थव्यवस्थाएं संकट के समय असहाय हो जाती हैं।
अक्षर 'आ' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 51–85 / कुल: 85):
Aatmanirbhar ↔ पराश्रित
देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
विदेशी सहायता पर पराश्रित अर्थव्यवस्थाएं संकट के समय असहाय हो जाती हैं।
Aatmanirbharata ↔ पराश्रय
खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना राष्ट्र की पहली प्राथमिकता थी।
दूसरों के पराश्रय में जीने से व्यक्ति की अपनी मौलिक प्रतिभा कुंठित हो जाती है।
Prayaasasheel ↔ आलसी
प्रयासशील छात्र हर असफलता को नई सीख मानकर पुनः प्रयास करता है।
आलसी व्यक्ति छोटी सी बाधा आते ही सब कुछ छोड़कर बैठ जाता है।
Shramapriya ↔ आरामपसंद
श्रमप्रिय किसान अपने हाथों से कुदाल चलाकर पसीना बहाने में गर्व अनुभव करता है।
आरामपसंद व्यक्ति वातानुकूलित कमरे से बाहर निकलने में भी कतराता है।
Shramasaadhana ↔ आरामपरस्ती
श्रमसाधना से ही मनुष्य इतिहास रचता है और समाज को नई दिशा देता है।
आरामपरस्ती के कारण कई सभ्यताओं का वैभव धूल में मिल गया।
Athak-parishram ↔ आलस्य
किसानों के अथक-परिश्रम से ही बंजर धरती पर लहलहाती फसलें खड़ी हुईं।
आलस्य के कारण मनुष्य सुनहरे अवसर भी अपने हाथों से गंवा देता है।
Shramasaadhak ↔ आरामतलब
श्रमसाधक युवक ने अपनी बाहों के बल पर परिवार की तकदीर बदल दी।
आरामतलब पुत्र पैतृक संपत्ति के सहारे जीवन बिताने का सपना देखता रहा।
Shramanishtha ↔ आलस्य
सच्ची श्रमनिष्ठा ही किसी भी साधारण श्रमिक को असाधारण व्यक्तित्व बनाती है।
आलस्य में डूबा मनुष्य अपने भीतर छिपी प्रतिभा को भी कभी पहचान नहीं पाता।
Aadikaal ↔ आधुनिक-काल
हिंदी साहित्य के आदिकाल में वीरगाथाओं और रासो काव्यों की रचना हुई।
आधुनिक-काल में गद्य साहित्य और तकनीकी विधाओं का अभूतपूर्व विकास हुआ।
Madhyakaaleen ↔ आधुनिककालीन
मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन ने समाज में समरसता का संदेश दिया।
आधुनिककालीन समाज में वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल क्रांति का बोलबाला है।
Puraatanata ↔ आधुनिकता
ऐतिहासिक खंडहर अपनी पुरातनता से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को नहीं भूलना चाहिए।
Aadya ↔ अन्त्य
ऋग्वेद मानव जाति की सबसे आद्य लिखित कृति माना जाता है।
काव्य के अन्त्य चरण में कवि ने अपनी आध्यात्मिक अनुभूतियों को समेटा है।
Aagaamee ↔ विगत
आगामी चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
विगत वर्ष में देश ने खाद्यान्न उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया।
Aaj ↔ कल
आज का काम आज ही पूरा कर लेना बुद्धिमान व्यक्ति का लक्षण है।
कल क्या होगा, यह कोई नहीं जानता; अतः सत्कर्म में देर न करें।
Aashu ↔ दीर्घ
आशु कवि ने दिए गए विषय पर तुरंत ही सुंदर पंक्तियों की रचना कर दी।
दीर्घ कानूनी प्रक्रिया के कारण मुकदमे का फैसला आने में वर्षों लग गए।
Praacheenakaal ↔ आधुनिककाल
प्राचीनकाल में नालंदा विश्वविद्यालय विश्व भर के विद्वानों का प्रमुख केंद्र था।
आधुनिककाल में ऑनलाइन शिक्षा ने ज्ञान को घर-घर तक सुलभ बना दिया है।
Aatnkamukta ↔ आतंकित
संकट और विपत्ति के समय आतंकमुक्त का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आतंकित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aashnkita ↔ आश्वस्त
संकट और विपत्ति के समय आशंकित का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आश्वस्त का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Yuddharata ↔ आत्मसमर्पित
संकट और विपत्ति के समय युद्धरत का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आत्मसमर्पित का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Baagee ↔ आज्ञाकारी
संकट और विपत्ति के समय बागी का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आज्ञाकारी का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aakraamaka ↔ रक्षात्मक
संकट और विपत्ति के समय आक्रामक का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने रक्षात्मक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aakramana ↔ प्रतिरक्षा
संकट और विपत्ति के समय आक्रमण का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रतिरक्षा का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aaghaata ↔ प्रत्याघात
संकट और विपत्ति के समय आघात का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने प्रत्याघात का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Daraavanaa ↔ आकर्षक
संकट और विपत्ति के समय डरावना का परिचय देना ही वीर पुरुष का वास्तविक धर्म है।
कठिन चुनौतियों के सामने आकर्षक का भाव मन में लाकर कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
Aachaarya ↔ अंतेवासी
विद्या और बौद्धिक विकास में आचार्य का गहरा महत्व स्वीकार किया गया है।
अध्ययन और चिंतन के मार्ग में अंतेवासी की बाधा को दूर करना अनिवार्य होता है।
Aandhee-toophaana ↔ शांत-वातावरण
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-तूफान की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शांत-वातावरण का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-havaa ↔ शुष्क-पवन
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-हवा की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-पवन का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aasamaana-khulanaa ↔ बादल-छाना
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आसमान-खुलना की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में बादल-छाना का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aandhee-paanee ↔ खिला-धूप
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आंधी-पानी की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में खिला-धूप का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aakaasha-meghaachchhanna ↔ आकाश-स्वच्छ
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आकाश-मेघाच्छन्न की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में आकाश-स्वच्छ का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Bijalee-kee-kadka ↔ आकाश-की-शांति
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में बिजली-की-कड़क की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में आकाश-की-शांति का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aardra-vaayumndala ↔ शुष्क-वायुमंडल
मौसम और वायुमंडल के बदलते चक्र में आर्द्र-वायुमंडल की उपस्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतुओं के परिवर्तन के साथ वातावरण में शुष्क-वायुमंडल का प्रभाव अनुभव किया जा सकता है।
Aage ↔ पीछे
कठिन परिस्थितियों से घबराए बिना हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने का संकल्प लेना चाहिए।
असफलता के भय से अपने कदम पीछे खींच लेना प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।
Aana ↔ जाना
त्योहार के अवसर पर दूर-दराज से रिश्तेदारों का घर आना वातावरण को उल्लासपूर्ण बना देता है।
छुट्टियां समाप्त होते ही परदेस वापस जाना हर किसी के मन को भावुक कर देता है।
Aasmaan ↔ जमीन
पंछी उन्मुक्त होकर नीले आसमान की ऊंचाइयों में अपने पंख फैलाकर उड़ते हैं।
कितनी भी ऊंचाई हासिल कर लो, पैर हमेशा जमीन पर टिके रहने चाहिए।