Neetigya ↔ अनीतिज्ञ
नीतिज्ञ मंत्री ने राजा को युद्ध के संकट से बचाकर शांति का मार्ग सुझाया।
अनीतिज्ञ सलाहकारों की संगति में रहकर राजा ने विनाशकारी निर्णय ले लिए।
अक्षर 'अ' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 201–250 / कुल: 457):
Neetigya ↔ अनीतिज्ञ
नीतिज्ञ मंत्री ने राजा को युद्ध के संकट से बचाकर शांति का मार्ग सुझाया।
अनीतिज्ञ सलाहकारों की संगति में रहकर राजा ने विनाशकारी निर्णय ले लिए।
Aadarshvaadi ↔ अवसरवादी
आदर्शवादी नेता ने अपने सिद्धांतों की रक्षा के लिए सत्ता का मोह त्याग दिया।
अवसरवादी राजनीतिज्ञ निजी लाभ देखकर पल भर में अपना पाला बदल लेते हैं।
Karmathata ↔ अकर्मण्यता
किसान की कर्मठता के कारण ही बंजर धरती पर भी लहलहाती फसलें तैयार हो गईं।
अकर्मण्यता और आलस्य के कारण वह समृद्ध विरासत को भी सहेज नहीं सका।
Karmnishth ↔ अकर्मण्य
कर्मनिष्ठ कार्यकर्ता ने बिना किसी शिकायत के दिन-रात समाजसेवा का कार्य किया।
अकर्मण्य व्यक्ति केवल भाग्य को कोसता रहता है और स्वयं कोई प्रयास नहीं करता।
Praamaanikata ↔ अप्रामाणिकता
इतिहासकार ने प्राचीन शिलालेखों के आधार पर घटना की प्रामाणिकता सिद्ध की।
दस्तावेजों में अप्रामाणिकता पाए जाने पर पुलिस ने फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया।
Dharmaacharan ↔ अधर्माचरण
दैनिक जीवन में धर्माचरण का पालन करने से मनुष्य का आत्मबल और तेज बढ़ता है।
अधर्माचरण और छल-प्रपंच से अर्जित धन कभी सुख और शांति नहीं दे सकता।
Saadhuta ↔ असाधुता
उनकी वाणी और व्यवहार में झलकती साधुता ने क्रूर डाकू का भी हृदय परिवर्तन कर दिया।
शत्रु की असाधुता और विश्वासघात के कारण शांति वार्ता बीच में ही टूट गई।
Hinsak ↔ अहिंसक
जंगल में हिंसक भेड़ियों का झुंड देख कर यात्री भयभीत हो गए।
खरगोश अत्यंत अहिंसक और सीधा प्राणी है जो किसी को कष्ट नहीं पहुँचाता।
Andaj ↔ जरायुज
पक्षी, सर्प और छिपकली अंडज प्राणी हैं जिनकी संतानों का जन्म अंडों से होता है।
मनुष्य, गाय और हिरण जरायुज प्राणी हैं जो सीधे बच्चों को जन्म देते हैं।
Paalya ↔ अपाल्य
भेड़ और बकरी स्वभाव से पाल्य पशु हैं जिन्हें मनुष्य सरलता से पाल लेता है।
तेंदुआ और लकड़बग्घा अपाल्य जीव हैं जिनका स्वभाव स्वतंत्र और हिंसक रहता है।
Danshtree ↔ अदंष्ट्री
चीता और सूअर दंष्ट्री प्राणी हैं जिनके नुकीले दांत शिकार को चीर डालते हैं।
कछुआ और पक्षी अदंष्ट्री जीव हैं जिनके मुख में दांतों के बजाय चोंच या जबड़ा होता है।
Sapaksh ↔ अपक्ष
सपक्ष पक्षी आकाश की ऊंचाइयों में बिना किसी सहारे के तैरते हैं।
सांप और केंचुआ अपक्ष जीव हैं जो जमीन पर रेंगकर आगे बढ़ते हैं।
Ashwa ↔ घोड़ी
तेज रफ्तार अश्व युद्धभूमि में अपने सवार को सुरक्षित निकाल लाया।
घोड़ी अपने नन्हें बछेड़े की देखभाल में लगी हुई थी।
Pakwa ↔ अपक्व
पक्व फल पेड़ से अपने आप टूटकर नीचे गिर जाते हैं।
अपक्व भोजन का सेवन करने से पाचन क्रिया बिगड़ सकती है।
Namkeen ↔ अलौना
शाम की चाय के साथ कुरकुरा नमकीन नाश्ता सबको बहुत पसंद आया।
उच्च रक्तचाप के मरीज को चिकित्सक ने अलौना भोजन करने का निर्देश दिया।
Paachak ↔ अपाचक
भोजन के उपरांत भुने जीरे और हींग का चूर्ण पाचक औषधि का काम करता है।
अत्यधिक शीतल पेय भोजन के पाचन रस को धीमा करके अपाचक प्रभाव छोड़ता है।
Suswaadu ↔ अस्वादु
उत्सव में बने सुस्वादु पकवानों की सभी अतिथियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
गलत अनुपात में मसाले डालने से पूरा सूप अस्वादु और पीने में अरुचिकर हो गया।
Poshak ↔ अपोषक
अंकुरित अनाज और बादाम शरीर के लिए अत्यंत पोषक आहार सिद्ध होते हैं।
मैदे से बने तले हुए स्नैक्स अपोषक होते हैं और केवल पेट भरते हैं।
Bhojya ↔ अभोज्य
गेहूं, चावल और दालें मनुष्य के मुख्य भोज्य पदार्थों में गिने जाते हैं।
फफूंद लगी हुई ब्रेड अभोज्य हो जाती है और उसे फेंक देना ही उचित है।
Khaadya ↔ अखाद्य
खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने छापे मारे।
प्लास्टिक और रासायनिक रंग अखाद्य वस्तुएं हैं जिन्हें भोजन में नहीं मिलाना चाहिए।
Peya ↔ अपेय
नारियल पानी और नीबू शिकंजी गर्मियों में स्वास्थ्यवर्धक पेय माने जाते हैं।
मदिरा और दूषित नाले का पानी मानव स्वास्थ्य के लिए सर्वथा अपेय है।
Sika ↔ अधपका
तंदूर में अच्छी तरह सिका हुआ नान खस्ता और सुगंधित था।
हड़बड़ी में निकाला गया अधपका पराठा खाने पर पेट में भारीपन हो गया।
Alpaahaar ↔ पूर्णाहार
यात्रा के दौरान उसने केवल फल और चाय का अल्पाहार लिया।
दोपहर के समय दाल-चावल, रोटी और सब्जी का पूर्णाहार ग्रहण करना चाहिए।
Alpaahaari ↔ बहुभोजी
योग साधक अल्पाहारी होते हैं ताकि उनका शरीर ध्यान के समय हल्का रहे।
पहलवान बहुभोजी होते हैं जिन्हें भारी व्यायाम के लिए अधिक कैलोरी चाहिए।
Swaadu ↔ अस्वादु
घी और मेवों से युक्त लड्डू अत्यंत स्वादु और मनभावन थे।
धूप में रखा रहने के कारण दूध फट गया और अस्वादु हो गया।
Ruchikar ↔ अरुचिकर
सजी हुई सलाद की थाली देखने में अत्यंत रुचिकर और ताजी लग रही थी।
जली हुई सब्जी की महक आने पर वह पूरी तरह अरुचिकर हो गई।
Lavan ↔ अलवण
सब्जी में उचित मात्रा में लवण मिलाने से उसका स्वाद निखरता है।
व्रत के फलाहार में अलवण भोजन ही ग्रहण किया जाता है।
Amla ↔ क्षार
सिरके और नीबू में प्राकृतिक अम्ल पाया जाता है जो खट्टापन देता है।
बेकिंग सोडा में क्षार होता है जो ढोकले को फूलाता है।
Aamleeya ↔ क्षारीय
अधिक कोला और सोड़ा पीने से पेट में अम्लीय प्रभाव बढ़ जाता है।
खीरे का रस और नारियल पानी पेट को क्षारीय आधार देकर एसिडिटी घटाते हैं।
Pakwata ↔ अपक्वता
केले में पक्वता आते ही छिलका पीला और गूदा मीठा हो जाता है।
अंगूर में अपक्वता रहने पर उसका स्वाद कसैला और खट्टा लगता है।
Khameeri ↔ अखमीरी
खमीरी नान तंदूर में फूलकर स्पंज की तरह मुलायम बन जाती है।
रोजमर्रा की रोटी अखमीरी आटे से तवे पर सेकी जाती है।
Phalaahaari ↔ अन्नाहारी
व्रत रखने वाले लोग फलाहारी भोजन के रूप में कूटू की पूरी और सिंघाड़ा लेते हैं।
साधारण दिनों में लोग अन्नाहारी होकर गेहूं और चावल पर निर्भर रहते हैं।
Chhana ↔ अछना
छलनी से छना हुआ मैदा एकदम चिकना और गांठ-रहित होता है।
अछना आटा चोकर सहित होने के कारण पाचन के लिए अधिक स्वास्थ्यवर्धक है।
Ruchya ↔ अरुच्य
अदरक और नीबू का अचार भोजन को अत्यंत रुच्य बना देता है।
बासी तेल की दुर्गंध से पूरी सब्जी अरुच्य हो गई और किसी ने नहीं खाई।
Atibhojan ↔ उपवास
दावत में अतिभोजन करने के कारण उसे रात भर पेट दर्द से जूझना पड़ा।
हफ्ते में एक दिन का उपवास पाचन तंत्र को विश्राम और ताजगी देता है।
Bhaksha ↔ अभक्ष
गेहूं और फल मानव के लिए सर्वमान्य भक्ष पदार्थ हैं।
सड़े-गले विषैले फल धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से अभक्ष हैं।
Bhakshya ↔ अभक्ष्य
ताजा पका हुआ भोजन ही शरीर के लिए भक्ष्य और लाभकारी होता है।
कीड़े लगी हुई दाल और सड़े फल स्वास्थ्य के लिए अभक्ष्य हैं।
Ajeerna ↔ सुजीर्ण
बिना भूख के अधिक खा लेने से पेट में अजीर्ण और खट्टी डकारें होने लगीं।
हल्का आहार लेने से भोजन का सुजीर्ण होकर शरीर को शक्ति मिलती है।
Paachakata ↔ अपाचकता
हींग और अजवाइन मिलाने से दाल की पाचकता कई गुना बढ़ जाती है।
कच्चे मैदे की अपाचकता आंतों में रुकावट पैदा कर सकती है।
Annapoorn ↔ अन्नहीन
नई फसल कटने के बाद किसान का भंडार अन्नपूर्ण हो गया।
अकाल के समय सूखा पड़ने से गाँव के गरीब परिवार अन्नहीन हो गए।
Namkeenpan ↔ अलौनापन
समुद्री नमकीनपन के कारण समुद्री शैवाल का स्वाद अनोखा होता है।
सब्जी में नमक न डालने से उसका अलौनापन गले से नहीं उतर रहा था।
Adhpaka ↔ सुरांधा
जल्दबाजी में तवे से उतारी गई अधपकी रोटी पेट में दर्द कर सकती है।
धीमी आंच पर पकी सुरांधा खीर का स्वाद बेमिसाल था।
Pishta ↔ अपिष्ट
चक्की में पिष्ट गेहूं के आटे से कोमल रोटियाँ बनती हैं।
अपिष्ट साबुत गेहूं को उबालकर दलिया बनाया जाता है।
Supakwa ↔ अपक्व
सुपक्व आम की महक से पूरा कमरा भर गया था।
अपक्व फल खाने से पेट में मरोड़ हो सकती है।
Madya ↔ अमृत
मद्य पान करने वाले मनुष्य की समाज में प्रतिष्ठा समाप्त हो जाती है।
संतों की वाणी कानों के लिए अमृत तुल्य मधुर होती है।
Annadaata ↔ भिखारी
खेतों में पसीना बहाने वाला किसान ही देश का सच्चा अन्नदाता है।
द्वार पर आए भूखे भिखारी को अन्न और जल देना मानवीय कर्तव्य है।
Rasoiya ↔ अतिथि
दक्ष रसोइया स्वादिष्ट और स्वच्छ भोजन तैयार करने में निपुण था।
घर आए अतिथि का सत्कार प्रेमपूर्वक भोजन कराकर किया गया।
Amritmay ↔ विषैला
भूखे यात्री के लिए कुएं का मीठा पानी अमृतमय प्रतीत हुआ।
सड़े हुए मशरूम से बना सूप विषैला और जानलेवा साबित हो सकता है।
Adhikaari ↔ अधीनस्थ
जिले के वरिष्ठ अधिकारी ने कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई।
अधीनस्थ कर्मचारियों ने निष्ठापूर्वक दिए गए निर्देशों का पालन किया।
Neta ↔ अनुयायी
सच्चा नेता संकट की स्थिति में आगे रहकर दल का मार्गदर्शन करता है।
अनुयायी अपने मार्गदर्शक के आदर्शों पर चलकर समाज में बदलाव लाते हैं।