Avani ↔ अंबर
शरद पूर्णिमा की चांदनी अवनि से अंबर तक धवल चादर की तरह बिछ जाती है।
पक्षी खुले अंबर में उड़ान भरकर अवनि के मनोरम दृश्यों का अवलोकन करते हैं।
अक्षर 'अ' से प्रारंभ होने वाले विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 101–150 / कुल: 457):
Avani ↔ अंबर
शरद पूर्णिमा की चांदनी अवनि से अंबर तक धवल चादर की तरह बिछ जाती है।
पक्षी खुले अंबर में उड़ान भरकर अवनि के मनोरम दृश्यों का अवलोकन करते हैं।
Poornima ↔ अमावस्या
पूर्णिमा की रात जहां आलोकित होती है, वहीं अमावस्या की रात्रि घोर अंधकारमय रहती है।
अमावस्या के घने अंधेरे में दीवाली के दीप जलाकर प्रकाश पर्व मनाया जाता है।
Udayachal ↔ अस्ताचल
सूर्य उदयाचल पर उदित होकर दिनभर आलोक बिखेरने के पश्चात अस्ताचल की ओर प्रस्थान करता है।
अस्ताचलगामी सूर्य की रश्मियां शांत सरोवरों पर मनोहारी प्रतिबिंब रचती हैं।
Udeechi ↔ अवाची
उदीची से बहती बर्फीली बयार ने अवाची की उष्णता को शीतलता में रूपांतरित कर दिया।
शास्त्रों में उदीची और अवाची को क्रमशः उत्तर और दक्षिण दिशा का द्योतक माना गया है।
Oordhva ↔ अधः
अग्नि की लौ सदा ऊर्ध्व गति करती है, जबकि जल का प्रवाह अधः दिशा में होता है।
सदाचारी विचार मनुष्य को ऊर्ध्व लोक की ओर उठाते हैं, जबकि हीन कर्म अधः पतन कराते हैं।
Upatyaka ↔ अधित्यका
पहाड़ की तलहटी वाली भूमि को उपत्यका और शिखर पर समतल भूमि को अधित्यका कहते हैं।
अधित्यका पर ठंडी और तीव्र हवाएं चलती हैं, जबकि उपत्यका में जलवायु मृदुल रहती है।
Ativrishti ↔ अनावृष्टि
अतिवृष्टि से जहां विनाशकारी बाढ़ आती है, वहीं अनावृष्टि से फसलों का अकाल पड़ जाता है।
किसानों के लिए अनावृष्टि का संकट अतिवृष्टि से भी अधिक गंभीर सिद्ध होता है।
Alpavrishti ↔ अतिवृष्टि
अल्पवृष्टि के कारण जलाशय सूखने लगे, जबकि पड़ोस के राज्य अतिवृष्टि से जलमग्न थे।
अतिवृष्टि से जहां विनाशकारी बाढ़ आती है, वहीं अनावृष्टि से फसलों का अकाल पड़ जाता है।
Vrishti ↔ अनावृष्टि
समय पर होने वाली वृष्टि भूमि को संवारती है, जबकि अनावृष्टि हरियाली को नष्ट कर देती है।
किसानों के लिए अनावृष्टि का संकट अतिवृष्टि से भी अधिक गंभीर सिद्ध होता है।
Paarthiv ↔ अपार्थिव
मनुष्य का शरीर पार्थिव तत्वों से निर्मित है, जबकि उसकी आत्मा अपार्थिव और अमर है।
संतों के चेहरे पर अपार्थिव तेज झलकता है जो पार्थिव प्रलोभनों से परे होता है।
Bramhand ↔ अणु
प्राचीन ऋषियों के अनुसार जो कुछ विशाल ब्रह्मांड में है, वह सूक्ष्मतम अणु में भी समाया है।
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
Anu ↔ विराट
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
सूक्ष्म अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति प्रकृति का विस्मयकारी नियम है।
Aranya ↔ बस्ती
तपस्वी जन शांत अरण्य में साधना करते हैं और कोलाहलपूर्ण मानव बस्ती से दूर रहते हैं।
नदी किनारे बसी बस्ती में रौनक रहती है, जबकि नदी के पार बीहड़ अरण्य फैला है।
Sukaal ↔ अकाल
पर्याप्त मानसूनी वर्षा से देश में सुकाल का वातावरण बना और अकाल का भय समाप्त हो गया।
अकाल के दिनों में अन्न की भारी कमी हो गई थी, किंतु सुकाल आते ही कोठार भर गए।
Anoop ↔ जांगल
प्राचीन भूगोल में जलप्रचुर आर्द्र भूमि को अनूप और शुष्क झाड़ीदार प्रदेश को जांगल कहा जाता था।
जांगल प्रदेश में कांटेदार वनस्पतियां उगती हैं, जबकि अनूप भूमि में धान और कमल खिलते हैं।
Tateeya ↔ अंतर्देशीय
तटीय राज्यों में समकारी समुद्री जलवायु रहती है, जबकि अंतर्देशीय भागों में तापमान विषम होता है।
अंतर्देशीय क्षेत्रों में सर्दियों में भारी ठंड और गर्मियों में भीषण लू का सामना करना पड़ता है।
Bhoogarbha ↔ अंतरिक्ष
खनिज संपदा भूगर्भ में छिपी है, जबकि सौर ऊर्जा का अक्षय स्रोत अंतरिक्ष से प्राप्त होता है।
मानव ने एक ओर गहरे भूगर्भ का अध्ययन किया है तो दूसरी ओर अनंत अंतरिक्ष की थाह ली है।
Anurag ↔ विराग
मातृभूमि के प्रति सच्चा अनुराग हर नागरिक के हृदय में होना चाहिए।
साधु पुरुषों का सांसारिक सुखों के प्रति विराग स्वाभाविक होता है।
Santosh ↔ असंतोष
जीवन में सच्चा संतोष ही सबसे बड़ा धन माना गया है।
अकारण असंतोष मनुष्य को कभी सुखी नहीं रहने देता।
Dhairya ↔ अधैर्य
कठिनाइयों के बीच धैर्य रखना ही सफल मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान है।
जल्दबाजी में अधैर्य दिखाना बनते हुए काम को बिगाड़ देता है।
Shanti ↔ अशांति
ध्यान और आत्मचिंतन से मन को गहन शांति की अनुभूति होती है।
आपसी अविश्वास के कारण पूरे समाज में अशांति फैल गई थी।
Ullas ↔ अवसाद
विजय की घोषणा होते ही चारों ओर अपार उल्लास छा गया।
लगातार तनाव और असफलता व्यक्ति को गहरे अवसाद में धकेल सकती है।
Ahankar ↔ विनम्रता
रावण का मिथ्या अहंकार ही उसके समूल विनाश का कारण बना था।
विद्वान व्यक्तियों का सबसे बड़ा गुण उनकी सहज विनम्रता होती है।
Ruchi ↔ अरुचि
साहित्य और कला के प्रति उसकी स्वाभाविक रुचि सराहनीय है।
अस्वस्थ भोजन के कारण बालक को पौष्टिक आहार से अरुचि होने लगी है।
Apnapan ↔ बेगानापन
गाँव के लोगों के व्यवहार में जो अपनापन दिखता है, वह दुर्लभ है।
महानगरों की भीड़ में कभी-कभी मनुष्य बेगानापन महसूस करता है।
Shraddha ↔ अश्रद्धा
गुरुजनों के प्रति सच्ची श्रद्धा ही ज्ञान प्राप्ति का प्रथम द्वार है।
ज्ञान के प्रति अश्रद्धा रखने वाला व्यक्ति कभी शिक्षित नहीं हो सकता।
Aastha ↔ अनास्था
सत्य और धर्म पर दृढ़ आस्था रखने वाले व्यक्ति को कोई विचलित नहीं कर सकता।
संस्थानों के प्रति जनसाधारण की अनास्था लोकतंत्र के लिए घातक है।
Vishwas ↔ अविश्वास
व्यापार और साझेदारी की सफलता आपसी विश्वास पर ही टिकी होती है।
झूठ बोलने से साथियों के मन में अविश्वास पैदा हो जाता है।
Anugrah ↔ कोप
प्रभु के विशेष अनुग्रह से ही यह महान संकट टल सका।
राजा के भयानक कोप से सारा दरबार कांप उठा।
Kripa ↔ अवकृपा
गुरुजनों की कृपा से उसने परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया।
अधिकारी की अवकृपा के कारण योग्य कर्मचारी को पदोन्नति नहीं मिली।
Vardan ↔ अभिशाप
विज्ञान मानवता के लिए तब तक वरदान है जब तक उसका सदुपयोग हो।
यदि विनाशकारी अस्त्रों का प्रयोग हुआ तो विज्ञान एक अभिशाप बन जाएगा।
Mangal ↔ अमंगल
नववर्ष के अवसर पर सभी ने एक-दूसरे के मंगल की कामना की।
समारोह के बीच अशुभ समाचार सुनकर सबने अमंगल की आशंका जताई।
Shubh ↔ अशुभ
गृह प्रवेश का यह मुहूर्त अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
अशुभ संकेत देखकर यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया।
Kalyan ↔ अकल्याण
राजा का मुख्य कर्तव्य अपनी प्रजा के सर्वांगीण कल्याण की चिंता करना है।
दुष्टों की संगति अंततः मनुष्य के अकल्याण का कारण बनती है।
Dheer ↔ अधीर
विपत्तियों के आने पर धीर पुरुष कभी अपना संतुलन नहीं खोते।
ट्रेन के आने में देरी देखकर यात्री अधीर होने लगे।
Samyami ↔ असंयमी
संयमी व्यक्ति अपनी वाणी और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
असंयमी खान-पान से व्यक्ति का स्वास्थ्य शीघ्र बिगड़ जाता है।
Sachet ↔ अचेत
सचेत नागरिक देश की सुरक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहता है।
गंभीर दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति सड़क पर अचेत पड़ा था।
Satark ↔ असावधान
सीमा पर सतर्क सैनिक शत्रु की हर हलचल पर पैनी नजर रखते हैं।
असावधान चालक के कारण सड़क पर भारी दुर्घटना घट गई।
Pramatta ↔ अमत्त
धन और सत्ता के नशे में प्रमत्त व्यक्ति किसी के अधिकार का सम्मान नहीं करता।
अमत्त और संयमी मनुष्य हर विषम परिस्थिति में संतुलित रहता है।
Namrata ↔ अकड़
नम्रता वह सद्गुण है जो कठोर हृदय को भी पिघला देता है।
मिथ्या अकड़ मनुष्य को अपनों से ही दूर कर देती है।
Vinay ↔ अविनय
विद्या ददाति विनयं—सच्ची शिक्षा मनुष्य को विनय और शील सिखाती है।
अविनय और अशिष्टता से बात करने वाला व्यक्ति कभी आदर नहीं पाता।
Sahansheelta ↔ असहिष्णुता
सहनशीलता विविधतापूर्ण समाज को एक सूत्र में पिरोए रखती है।
धार्मिक असहिष्णुता शांतिपूर्ण परिवेश में विष घोल देती है।
Sahishnu ↔ असहिष्णु
सहिष्णु व्यक्ति विपरीत विचारों का भी सम्मानपूर्वक श्रवण करता है।
असहिष्णु विचारधारा समाज को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देती है।
Adheerta ↔ धैर्य
अधीरता में लिया गया कदम अक्सर नुकसान का कारण बनता है।
गंभीर संकट में भी धैर्य बनाए रखना महापुरुषों का लक्षण है।
Vishaktata ↔ अमृतत्व
कटु वचनों की विषाक्तता आपसी प्रेम को नष्ट कर देती है।
सत्य और प्रेम के वचनों में अमृतत्व का वास होता है।
Abhay ↔ भय
ईश्वर की शरण में जाने पर साधक को अभय का वरदान मिलता है।
शत्रु के भय से कांपते हुए सैनिक पीछे हटने लगे।
Amarsha ↔ सहिष्णुता
अपमान का स्मरण होते ही उसके मन में अमर्ष की ज्वाला भड़क उठी।
बुद्धिमानी इसी में है कि व्यक्ति कटु बातों पर भी सहिष्णुता बरते।
Adheer ↔ शांत
परिणाम की प्रतीक्षा में उसका अधीर मन बार-बार घड़ी देख रहा था।
गहरे जल की तरह ज्ञानी पुरुष हर परिस्थिति में शांत रहता है।
Vyakul ↔ अविचलित
पुत्र के देर से लौटने पर माँ का मन व्याकुल होने लगा।
विशाल पर्वत के समान धीर पुरुष हर संकट में अविचलित रहता है।
Vichalit ↔ अविचलित
विपत्ति की आंधी भी सच्चे साधक को अपने संकल्प से विचलित नहीं कर सकती।
सत्यवादी हर प्रलोभन के सामने अविचलित और दृढ़ खड़ा रहता है।