Q1.छंद किसे कहते हैं और काव्य में इसका क्या महत्व है? (What is Chhand in Hindi Prosody?)▼
अक्षरों की संख्या एवं क्रम, मात्रा गणना, यति (विराम), गति (लय), तथा तुक के सुव्यवस्थित नियमों से आबद्ध काव्य-रचना को 'छंद' (Chhand / Poetic Meter) कहते हैं। छंद शब्द संस्कृत की 'छद्' (प्रसन्न करना या आच्छादित करना) धातु से बना है। पिंगल ऋषि द्वारा प्रणीत 'छंदशास्त्र' (पिंगल शास्त्र) इसका मूल ग्रंथ है। छंद काव्य को गेयता, लयबद्धता, अनुशासन और चिरस्थायी सौंदर्य प्रदान करता है।
Q2.मात्रिक छंद और वर्णिक छंद में क्या मूलभूत अंतर है? (Difference between Matrik and Varnik Chhand)▼
मात्रिक छंद में केवल स्वरों के उच्चारण काल (मात्राओं) की संख्या का नियम होता है, वर्णों (अक्षरों) के लघु-गुरु क्रम का बंधन नहीं होता (जैसे दोहा, चौपाई, रोला, सोरठा आदि)। इसके विपरीत, वर्णिक छंद में केवल वर्णों (अक्षरों) की निश्चित संख्या तथा लघु-गुरु के विशिष्ट क्रम (गणों जैसे यगण, मगण आदि) का कड़ाई से पालन किया जाता है (जैसे सवैया, कवित्त, द्रुतविलंबित, मंदाक्रांता आदि)।
Q3.मात्रा की गणना (लघु और गुरु) कैसे की जाती है? (How are Matras Counted?)▼
छंदशास्त्र में मात्रा के दो भेद होते हैं:
1. लघु (ह्रस्व) — संकेत चिह्न '।' (खड़ी पाई), मान = 1 मात्रा। इसमें अ, इ, उ, ऋ तथा चन्द्रबिन्दु (ँ) वाले अक्षर आते हैं।
2. गुरु (दीर्घ) — संकेत चिह्न 'ऽ' (अवग्रह चिह्न), मान = 2 मात्राएँ। इसमें आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, अनुस्वार (ं), विसर्ग (ः) तथा संयुक्ताक्षर से ठीक पूर्व आने वाले लघु वर्ण (जैसे 'भक्त' में 'भ') गुरु हो जाते हैं।
Q4.दोहा और सोरठा में क्या परस्पर संबंध और अंतर है? (Relationship between Doha and Soratha)▼
सोरठा छंद को दोहा का 'उल्टा' माना जाता है। दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है जिसके विषम (प्रथम व तृतीय) चरणों में 13-13 मात्राएँ तथा सम (द्वितीय व चतुर्थ) चरणों में 11-11 मात्राएँ होती हैं, और तुक सम चरणों में मिलती है। जबकि सोरठा में विषम चरणों में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों में 13-13 मात्राएँ होती हैं, और तुक विषम चरणों के अंत में मिलती है।
Q5.कुंडलिया छंद की संरचना क्या है और इसे पहचानने की क्या ट्रिक है? (Structure of Kundaliya Chhand)▼
कुंडलिया एक संयुक्त/विषम मात्रिक छंद है जो 'दोहा' और 'रोला' के सम्मिश्रण से बनता है। इसमें कुल 6 चरण (2 चरण दोहा के + 4 चरण रोला के) और 24-24 मात्राएँ होती हैं। इसकी सबसे बड़ी पहचान ट्रिक यह है कि जिस शब्द से यह छंद शुरू होता है, उसी शब्द पर समाप्त होता है; तथा दोहे का चौथा चरण रोले के प्रथम चरण के रूप में दोहराया जाता है।
Q6.वर्णिक छंदों में 'गण' क्या होते हैं और इन्हें याद रखने का सूत्र क्या है? (What are Ganas in Varnik Chhand?)▼
वर्णिक छंदों में तीन-तीन वर्णों के समूह को 'गण' कहा जाता है। गणों की कुल संख्या 8 होती है (यगण, मगण, तगण, रगण, जगण, भगण, नगण, सगण)। इन्हें याद रखने का अमर सूत्र है: 'यमाता राजभानसलगा'। इसके अनुसार यगण = ।ऽऽ, मगण = ऽऽऽ, तगण = ऽऽ।, रगण = ऽ।ऽ, जगण = ।ऽ।, भगण = ऽ।।, नगण = ।।।, सगण = ।।ऽ, ल = लघु (।), गा = गुरु (ऽ)।