📏मात्रिक छंदविषम मात्रिक🎓 Class 11-12#chhappay

Chhappay (Compound Rola-Ullala Hexastich Meter) — लक्षण, मात्रा गणना व उदाहरणछप्पय छंद

📐Metric Formula (Matra / Varna Count) (मात्रा / वर्ण गणना सूत्र)

कुल माप
चरण संख्या६ चरण
📜शास्त्रीय लक्षण एवं संरचना नियम (Rules & Structure)

छप्पय विषम मात्रिक संयुक्त छंद है। इसमें 6 चरण (पंक्तियाँ) होते हैं। इसके प्रथम 4 चरण रोला छंद के होते हैं तथा अंतिम 2 चरण उल्लाला छंद के होते हैं (४ रोला + २ उल्लाला = ६ चरण)। प्रथम चार चरणों (रोला) में 24-24 मात्राएँ होती हैं (११ और १३ पर यति)। अंतिम दो चरणों (उल्लाला) में 28-28 मात्राएँ होती हैं (१५ और १३ पर यति)। वीर रस और स्तुति-काव्य के लिए यह अत्यंत ओजस्वी छंद माना जाता है।

English Translation: Chhappay is a 6-line composite moraic meter formed by combining four lines of Rola (24 matras each with 11+13 yati) with two concluding lines of Ullala (28 matras each with 15+13 yati). It is renowned for high oratorical vigor, heroic panegyrics, and patriotic anthems.
🔍छंद-शास्त्र के प्रमुख अंग एवं विन्यास (Prosody Specifications)
Quarter / Line Structure (चरण संख्या व रचना)

६ चरण (विषम मात्रिक)

Caesura / Pause (Yati) (यति (विराम) नियम)

रोला में ११-१३ पर; उल्लाला में १५-१३ पर यति

Rhyme Scheme (Tuk) (तुक विधान)

रोला के चरणों में तथा उल्लाला के दो चरणों में परस्पर तुक

गण विन्यास / लघु-गुरु क्रम:

मात्राओं की संख्या का नियम (गणों का बंधन नहीं)

✨Classic Metrical Verse (प्रामाणिक काव्य उदाहरण)
रचयिता: मैथिलीशरण गुप्त (मातृभूमि (भारत-भारती))

"जिसकी रज में लोट-पोट कर बड़े हुए हैं। घुटनों के बल सरक-सरक कर खड़े हुए हैं॥ परमहंस सम बाल्यकाल में सब सुख पाए। जिसके कारण "धूलि-भरे हीरे" कहलाए॥ हम खेले-कूदे हर्षयुत, जिसकी प्यारी गोद में। हे मातृभूमि! तुझको निरख, मग्न क्यों न हों मोद में॥"

काव्यशास्त्रीय मात्रा संगति एवं स्पष्टीकरण (Metrical Analysis):

प्रथम ४ पंक्तियाँ रोला छंद की हैं, जिनमें ११ और १३ मात्राओं पर यति के साथ २४-२४ मात्राएँ हैं। अंतिम २ पंक्तियाँ उल्लाला छंद की हैं जिनमें १५ और १३ की यति से २८-२८ मात्राएँ हैं (गोद में / मोद में)। यह राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की अमर देशभक्ति कविता है जो छप्पय छंद का आदर्श रूप है।

English Analysis: The first 4 lines follow Rola meter (24 matras each). The final 2 lines transition to Ullala meter (28 matras each, rhyming at God mein / Mod mein). This patriotic classic by Maithili Sharan Gupt demonstrates the masterly Chhappay structure.

अन्य प्रमुख काव्य छंद (Related Poetic Meters)

सभी छंद देखें →
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#doha

दोहा

विषम (१, ३) = १३ मात्राएँ

Doha (Rhymed Couplet Meter)

दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल / पंक्तियाँ) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्राएँ होती हैं (कुल 48 मात्राएँ)। सम चरणों (2, 4) के अंत में एक लघु (।) वर्ण अनिवार्य होता है और परस्पर तुक मिलता है। विषम चरणों के आदि में जगण (।ऽ।) का होना वर्जित है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परैं, स्याम हरित दुति होइ॥"

— महाकवि बिहारी (बिहारी सतसई (मंगलाचरण))
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१३ और ११ मात्राओं पर यति)
तुक (Rhyme):सम चरणों (२ और ४) में परस्पर तुक मिलता है
💡 पहचान:पहली पंक्ति के पहले हिस्से में १३ मात्राएँ और दूसरे में ११ मात्राएँ गिनें; अंत में तुक और लघु वर्ण (।) मिले तो वह निश्चित ही दोहा है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ / दल)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदसम मात्रिकClass 9-10
#chaupai

चौपाई

प्रत्येक चरण = १६ मात्राएँ (४ चरण, कुल ६४ मात्राएँ)

Chaupai (Four-Quarter 16-Mora Meter)

चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना पूर्णतः वर्जित माना गया है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं जो अत्यंत शुभ और कर्णप्रिय माने जाते हैं। प्रथम चरण की तुक द्वितीय चरण से तथा तृतीय चरण की तुक चतुर्थ चरण से मिलती है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (हनुमान चालीसा / रामचरितमानस)
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१६ मात्राओं पर)
तुक (Rhyme):१-२ चरण में तथा ३-४ चरण में परस्पर तुक
💡 पहचान:चारों चरणों में बराबर १६-१६ मात्राएँ गिनें; अंत में जगण (।ऽ।) न हो और प्रायः दो गुरु (ऽऽ) आएँ तो वह चौपाई है।
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#sortha

सोरठा

विषम (१, ३) = ११ मात्राएँ

Sortha (Inverted Doha Meter)

सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है और यह दोहा छंद का ठीक उल्टा (विपरीत) होता है। इसमें भी 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विशेष नियम: सोरठा में तुक विषम चरणों (१ और ३) के अंत में मिलता है, जबकि दोहा में तुक सम चरणों में मिलता है। विषम चरणों के अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ।) का विधान रहता है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (मंगलाचरण))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति
तुक (Rhyme):विषम चरणों (१ और ३) के अंत में तुक मिलता है
💡 पहचान:यदि पहले चरण में ११ और दूसरे में १३ मात्राएँ हों और बीच वाले हिस्से (१ और ३ चरण) में तुक मिले तो वह दोहे का उल्टा "सोरठा" है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ)मात्रा गणना व नियम→