📏मात्रिक छंदसम मात्रिक🎓 Class 9-10#chaupai

Chaupai (Four-Quarter 16-Mora Meter) — लक्षण, मात्रा गणना व उदाहरणचौपाई छंद

📐Metric Formula (Matra / Varna Count) (मात्रा / वर्ण गणना सूत्र)

कुल माप
चरण संख्या४ चरण
📜शास्त्रीय लक्षण एवं संरचना नियम (Rules & Structure)

चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना पूर्णतः वर्जित माना गया है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं जो अत्यंत शुभ और कर्णप्रिय माने जाते हैं। प्रथम चरण की तुक द्वितीय चरण से तथा तृतीय चरण की तुक चतुर्थ चरण से मिलती है।

English Translation: Chaupai is an even moraic (Sam Matrik) meter consisting of 4 quarters, each strictly containing 16 matras. The terminal foot cannot be a Jagana (।ऽ।) or a Tagana (ऽऽ।). Quarters traditionally end in two long syllables (Guru ऽऽ). Quarter 1 rhymes with Quarter 2, and Quarter 3 rhymes with Quarter 4.
🔍छंद-शास्त्र के प्रमुख अंग एवं विन्यास (Prosody Specifications)
Quarter / Line Structure (चरण संख्या व रचना)

४ चरण (सम मात्रिक)

Caesura / Pause (Yati) (यति (विराम) नियम)

प्रत्येक चरण के अंत में (१६ मात्राओं पर)

Rhyme Scheme (Tuk) (तुक विधान)

१-२ चरण में तथा ३-४ चरण में परस्पर तुक

गण विन्यास / लघु-गुरु क्रम:

मात्राओं की संख्या का नियम (गणों का बंधन नहीं)

✨Classic Metrical Verse (प्रामाणिक काव्य उदाहरण)
रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास (हनुमान चालीसा / रामचरितमानस)

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

काव्यशास्त्रीय मात्रा संगति एवं स्पष्टीकरण (Metrical Analysis):

प्रथम चरण "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर" की मात्रा गणना: ज(१)+य(१)+ह(१)+नु(१)+मा(२)+न(१)+ज्ञा(२)+न(१)+गु(१)+न(१)+सा(२)+ग(१)+र(१) = १६ मात्राएँ। इसी प्रकार चारों चरणों में १६-१६ मात्राएँ हैं। सागर-उजागर और धामा-नामा में सुंदर तुक है। अंत में दो गुरु (धामा, नामा) हैं।

English Analysis: Each of the four lines tallies precisely to 16 matras. Sagar rhymes with Ujagar, and Dhama rhymes with Nama, perfectly fulfilling every rule of classical Chaupai.

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अन्य प्रामाणिक काव्य उदाहरण

उदाहरण 1कवि: गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (बालकांड))
"बंदउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥ अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥"

प्रत्येक चरण में १६-१६ मात्राएँ। परागा-अनुरागा तथा चारू-परिवारू में अंत्यानुप्रास एवं दो गुरु (ऽऽ)।

Revered opening Chaupai of Ramcharitmanas with exact 16-matra scansion per quarter.

अन्य प्रमुख काव्य छंद (Related Poetic Meters)

सभी छंद देखें →
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#doha

दोहा

विषम (१, ३) = १३ मात्राएँ

Doha (Rhymed Couplet Meter)

दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल / पंक्तियाँ) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्राएँ होती हैं (कुल 48 मात्राएँ)। सम चरणों (2, 4) के अंत में एक लघु (।) वर्ण अनिवार्य होता है और परस्पर तुक मिलता है। विषम चरणों के आदि में जगण (।ऽ।) का होना वर्जित है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परैं, स्याम हरित दुति होइ॥"

— महाकवि बिहारी (बिहारी सतसई (मंगलाचरण))
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१३ और ११ मात्राओं पर यति)
तुक (Rhyme):सम चरणों (२ और ४) में परस्पर तुक मिलता है
💡 पहचान:पहली पंक्ति के पहले हिस्से में १३ मात्राएँ और दूसरे में ११ मात्राएँ गिनें; अंत में तुक और लघु वर्ण (।) मिले तो वह निश्चित ही दोहा है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ / दल)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#sortha

सोरठा

विषम (१, ३) = ११ मात्राएँ

Sortha (Inverted Doha Meter)

सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है और यह दोहा छंद का ठीक उल्टा (विपरीत) होता है। इसमें भी 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विशेष नियम: सोरठा में तुक विषम चरणों (१ और ३) के अंत में मिलता है, जबकि दोहा में तुक सम चरणों में मिलता है। विषम चरणों के अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ।) का विधान रहता है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (मंगलाचरण))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति
तुक (Rhyme):विषम चरणों (१ और ३) के अंत में तुक मिलता है
💡 पहचान:यदि पहले चरण में ११ और दूसरे में १३ मात्राएँ हों और बीच वाले हिस्से (१ और ३ चरण) में तुक मिले तो वह दोहे का उल्टा "सोरठा" है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदसम मात्रिकClass 9-10
#rola

रोला

प्रत्येक चरण = २४ मात्राएँ (११ और १३ मात्राओं पर यति)

Rola (24-Mora Even Meter with 11-13 Yati)

रोला सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक चरण में 11 और 13 मात्राओं पर यति (विराम) होती है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) या दो लघु (।।) वर्ण होते हैं। (दोहा और रोला में अंतर: दोहे में १३ पर यति फिर ११ पर यति होती है, जबकि रोले में पहले ११ मात्राओं पर यति फिर १३ मात्राओं पर यति होती है)।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"नील परिधान बीच सुकुमार, खुल रहा मृदुल अधखुला अंग। खिला हो ज्यों बिजली का फूल, मेघबन बीच गुलाबी रंग॥"

— जयशंकर प्रसाद (कामायनी (श्रद्धा सर्ग))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति (विराम)
तुक (Rhyme):दो-दो चरणों में परस्पर अंत्यानुप्रास (तुक)
💡 पहचान:यदि पंक्ति में कुल २४ मात्राएँ हों और पहली यति ११ पर तथा दूसरी १३ पर आए, तो वह रोला छंद है।