📏मात्रिक छंदसम मात्रिक🎓 Class 9-10#rola

Rola (24-Mora Even Meter with 11-13 Yati) — लक्षण, मात्रा गणना व उदाहरणरोला छंद

📐Metric Formula (Matra / Varna Count) (मात्रा / वर्ण गणना सूत्र)

कुल माप
चरण संख्या४ चरण
📜शास्त्रीय लक्षण एवं संरचना नियम (Rules & Structure)

रोला सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक चरण में 11 और 13 मात्राओं पर यति (विराम) होती है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) या दो लघु (।।) वर्ण होते हैं। (दोहा और रोला में अंतर: दोहे में १३ पर यति फिर ११ पर यति होती है, जबकि रोले में पहले ११ मात्राओं पर यति फिर १३ मात्राओं पर यति होती है)।

English Translation: Rola is an even moraic (Sam Matrik) meter of 4 lines with 24 matras in each line. Caesura (Yati) falls after 11 matras and then after 13 matras. Lines terminate in either two long syllables (ऽऽ) or two short syllables (।।). Unlike Doha (13+11), Rola structures its pause at 11+13.
🔍छंद-शास्त्र के प्रमुख अंग एवं विन्यास (Prosody Specifications)
Quarter / Line Structure (चरण संख्या व रचना)

४ चरण (सम मात्रिक)

Caesura / Pause (Yati) (यति (विराम) नियम)

११ और १३ मात्राओं पर यति (विराम)

Rhyme Scheme (Tuk) (तुक विधान)

दो-दो चरणों में परस्पर अंत्यानुप्रास (तुक)

गण विन्यास / लघु-गुरु क्रम:

मात्राओं की संख्या का नियम (गणों का बंधन नहीं)

✨Classic Metrical Verse (प्रामाणिक काव्य उदाहरण)
रचयिता: जयशंकर प्रसाद (कामायनी (श्रद्धा सर्ग))

"नील परिधान बीच सुकुमार, खुल रहा मृदुल अधखुला अंग। खिला हो ज्यों बिजली का फूल, मेघबन बीच गुलाबी रंग॥"

काव्यशास्त्रीय मात्रा संगति एवं स्पष्टीकरण (Metrical Analysis):

प्रथम पंक्ति में "नील परिधान बीच सुकुमार" (११ मात्राएँ) पर यति है और "खुल रहा मृदुल अधखुला अंग" (१३ मात्राएँ) पर चरण पूर्ण होता है (११ + १३ = २४ मात्राएँ)। इसी प्रकार द्वितीय पंक्ति में भी २४ मात्राएँ हैं। अंग और रंग में तुक है तथा अंत में गुरु-लघु का सुंदर सामंजस्य है।

English Analysis: Line 1 pauses after 11 matras on Sukumar and finishes after 13 matras on Ang (total 24). Line 2 repeats the 11+13 rhythm rhyming at Ang and Rang, fulfilling the classical Rola meter.

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अन्य प्रामाणिक काव्य उदाहरण

उदाहरण 1
"उठो, उठो, हे वीर, आज तुम निद्रा त्यागो। सारो निज सब काम, व्यर्थ जीवन मत खोओ॥"

प्रत्येक पंक्ति में २४ मात्राएँ (११ और १३ पर यति)।

Didactic patriotic verse with exact 11 and 13 matra pause structure.

अन्य प्रमुख काव्य छंद (Related Poetic Meters)

सभी छंद देखें →
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#doha

दोहा

विषम (१, ३) = १३ मात्राएँ

Doha (Rhymed Couplet Meter)

दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल / पंक्तियाँ) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्राएँ होती हैं (कुल 48 मात्राएँ)। सम चरणों (2, 4) के अंत में एक लघु (।) वर्ण अनिवार्य होता है और परस्पर तुक मिलता है। विषम चरणों के आदि में जगण (।ऽ।) का होना वर्जित है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परैं, स्याम हरित दुति होइ॥"

— महाकवि बिहारी (बिहारी सतसई (मंगलाचरण))
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१३ और ११ मात्राओं पर यति)
तुक (Rhyme):सम चरणों (२ और ४) में परस्पर तुक मिलता है
💡 पहचान:पहली पंक्ति के पहले हिस्से में १३ मात्राएँ और दूसरे में ११ मात्राएँ गिनें; अंत में तुक और लघु वर्ण (।) मिले तो वह निश्चित ही दोहा है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ / दल)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदसम मात्रिकClass 9-10
#chaupai

चौपाई

प्रत्येक चरण = १६ मात्राएँ (४ चरण, कुल ६४ मात्राएँ)

Chaupai (Four-Quarter 16-Mora Meter)

चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना पूर्णतः वर्जित माना गया है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं जो अत्यंत शुभ और कर्णप्रिय माने जाते हैं। प्रथम चरण की तुक द्वितीय चरण से तथा तृतीय चरण की तुक चतुर्थ चरण से मिलती है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (हनुमान चालीसा / रामचरितमानस)
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१६ मात्राओं पर)
तुक (Rhyme):१-२ चरण में तथा ३-४ चरण में परस्पर तुक
💡 पहचान:चारों चरणों में बराबर १६-१६ मात्राएँ गिनें; अंत में जगण (।ऽ।) न हो और प्रायः दो गुरु (ऽऽ) आएँ तो वह चौपाई है।
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#sortha

सोरठा

विषम (१, ३) = ११ मात्राएँ

Sortha (Inverted Doha Meter)

सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है और यह दोहा छंद का ठीक उल्टा (विपरीत) होता है। इसमें भी 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विशेष नियम: सोरठा में तुक विषम चरणों (१ और ३) के अंत में मिलता है, जबकि दोहा में तुक सम चरणों में मिलता है। विषम चरणों के अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ।) का विधान रहता है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (मंगलाचरण))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति
तुक (Rhyme):विषम चरणों (१ और ३) के अंत में तुक मिलता है
💡 पहचान:यदि पहले चरण में ११ और दूसरे में १३ मात्राएँ हों और बीच वाले हिस्से (१ और ३ चरण) में तुक मिले तो वह दोहे का उल्टा "सोरठा" है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ)मात्रा गणना व नियम→