📏मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिक🎓 Class 11-12#barvai

Barvai (19-Mora Eastern Hindi Folk Meter) — लक्षण, मात्रा गणना व उदाहरणबरवै छंद

📐Metric Formula (Matra / Varna Count) (मात्रा / वर्ण गणना सूत्र)

कुल माप
चरण संख्या४ चरण (२ पंक्तियाँ)
📜शास्त्रीय लक्षण एवं संरचना नियम (Rules & Structure)

बरवै अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 12-12 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 7-7 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 12 + 7 = 19 मात्राएँ होती हैं। यति 12 और 7 मात्राओं पर होती है। सम चरणों (२, ४) के अंत में जगण (।ऽ।) का होना अत्यंत कर्णप्रिय माना जाता है तथा सम चरणों में परस्पर तुक मिलता है। यह अवधी भाषा का अत्यंत सुकोमल और लोकप्रसिद्ध छंद है।

English Translation: Barvai is a delicate semi-even moraic (Ardhasam Matrik) meter native to Awadhi poetics. It consists of 4 quarters across two lines. Odd quarters have 12 matras and even quarters have 7 matras (total 19 matras per line). Caesura falls at the 12th and 7th matra. Even quarters end with a Jagana foot (।ऽ।) and rhyme together.
🔍छंद-शास्त्र के प्रमुख अंग एवं विन्यास (Prosody Specifications)
Quarter / Line Structure (चरण संख्या व रचना)

४ चरण (२ पंक्तियाँ) (अर्धसम मात्रिक)

Caesura / Pause (Yati) (यति (विराम) नियम)

१२ और ७ मात्राओं पर यति

Rhyme Scheme (Tuk) (तुक विधान)

सम चरणों (२ और ४) के अंत में तुक

गण विन्यास / लघु-गुरु क्रम:

मात्राओं की संख्या का नियम (गणों का बंधन नहीं)

✨Classic Metrical Verse (प्रामाणिक काव्य उदाहरण)
रचयिता: अब्दुर्रहीम खानखाना (बरवै नायिका भेद)

"चम्पक हरवा अंग मिलि, अधिक सुहाय। जानि परै सिय हियरे, जब कुभिलाय॥"

काव्यशास्त्रीय मात्रा संगति एवं स्पष्टीकरण (Metrical Analysis):

प्रथम चरण "चम्पक हरवा अंग मिलि" में १२ मात्राएँ हैं और द्वितीय चरण "अधिक सुहाय" में अ(१)+धि(१)+क(१)+सु(१)+हा(२)+य(१) = ७ मात्राएँ हैं (१२ + ७ = १९ मात्राएँ)। द्वितीय पंक्ति में भी १२ और ७ मात्राएँ हैं। सुहाय और कुभिलाय में तुक है।

English Analysis: Line 1 contains 12 matras in the first segment and 7 matras in the second (total 19). Line 2 follows the exact 12+7 structure with rhyme between Suhaay and Kubhilaay.

MORE AUTHENTIC CLASSIC VERSES

अन्य प्रामाणिक काव्य उदाहरण

उदाहरण 1कवि: गोस्वामी तुलसीदास (बरवै रामायण)
"तुलसी आरति राम की, हरति कुपीर। सिय-समेत हिय राखहिं, धनुष-सधीर॥"

विषम में १२ मात्राएँ, सम में ७ मात्राएँ। तुलसीदास जी ने रहीम के आग्रह पर बरवै रामायण की रचना की थी।

Tulsidas composed the entire Barvai Ramayana in this 12+7 meter upon Rahim’s inspiration.

अन्य प्रमुख काव्य छंद (Related Poetic Meters)

सभी छंद देखें →
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#doha

दोहा

विषम (१, ३) = १३ मात्राएँ

Doha (Rhymed Couplet Meter)

दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल / पंक्तियाँ) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्राएँ होती हैं (कुल 48 मात्राएँ)। सम चरणों (2, 4) के अंत में एक लघु (।) वर्ण अनिवार्य होता है और परस्पर तुक मिलता है। विषम चरणों के आदि में जगण (।ऽ।) का होना वर्जित है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परैं, स्याम हरित दुति होइ॥"

— महाकवि बिहारी (बिहारी सतसई (मंगलाचरण))
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१३ और ११ मात्राओं पर यति)
तुक (Rhyme):सम चरणों (२ और ४) में परस्पर तुक मिलता है
💡 पहचान:पहली पंक्ति के पहले हिस्से में १३ मात्राएँ और दूसरे में ११ मात्राएँ गिनें; अंत में तुक और लघु वर्ण (।) मिले तो वह निश्चित ही दोहा है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ / दल)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदसम मात्रिकClass 9-10
#chaupai

चौपाई

प्रत्येक चरण = १६ मात्राएँ (४ चरण, कुल ६४ मात्राएँ)

Chaupai (Four-Quarter 16-Mora Meter)

चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना पूर्णतः वर्जित माना गया है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं जो अत्यंत शुभ और कर्णप्रिय माने जाते हैं। प्रथम चरण की तुक द्वितीय चरण से तथा तृतीय चरण की तुक चतुर्थ चरण से मिलती है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (हनुमान चालीसा / रामचरितमानस)
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१६ मात्राओं पर)
तुक (Rhyme):१-२ चरण में तथा ३-४ चरण में परस्पर तुक
💡 पहचान:चारों चरणों में बराबर १६-१६ मात्राएँ गिनें; अंत में जगण (।ऽ।) न हो और प्रायः दो गुरु (ऽऽ) आएँ तो वह चौपाई है।
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#sortha

सोरठा

विषम (१, ३) = ११ मात्राएँ

Sortha (Inverted Doha Meter)

सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है और यह दोहा छंद का ठीक उल्टा (विपरीत) होता है। इसमें भी 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विशेष नियम: सोरठा में तुक विषम चरणों (१ और ३) के अंत में मिलता है, जबकि दोहा में तुक सम चरणों में मिलता है। विषम चरणों के अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ।) का विधान रहता है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (मंगलाचरण))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति
तुक (Rhyme):विषम चरणों (१ और ३) के अंत में तुक मिलता है
💡 पहचान:यदि पहले चरण में ११ और दूसरे में १३ मात्राएँ हों और बीच वाले हिस्से (१ और ३ चरण) में तुक मिले तो वह दोहे का उल्टा "सोरठा" है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ)मात्रा गणना व नियम→