📏मात्रिक छंदसम मात्रिक🎓 Class 9-10#harigeetika

Harigeetika (28-Mora Royal Melodic Meter) — लक्षण, मात्रा गणना व उदाहरणहरिगीतिका छंद

📐Metric Formula (Matra / Varna Count) (मात्रा / वर्ण गणना सूत्र)

कुल माप
चरण संख्या४ चरण
📜शास्त्रीय लक्षण एवं संरचना नियम (Rules & Structure)

हरिगीतिका सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 28-28 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक चरण में 16 और 12 मात्राओं पर यति (विराम) होती है। चरण के अंत में अनिवार्य रूप से लघु-गुरु (।ऽ) का नियम होता है। (स्मरण ट्रिक: "गीतिका" में २६ मात्राएँ होती हैं, इसमें "हरि" (२ मात्राएँ) जोड़ देने पर "हरिगीतिका" (२८ मात्राएँ) बन जाता है)। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का यह सर्वाधिक प्रिय छंद है।

English Translation: Harigeetika is a 4-line even moraic (Sam Matrik) meter with 28 matras per line. The metric caesura occurs at 16 matras followed by 12 matras. Each line must strictly terminate in a short-long syllable sequence (Laghu-Guru: ।ऽ). It was the signature meter of Rashtrakavi Maithili Sharan Gupt.
🔍छंद-शास्त्र के प्रमुख अंग एवं विन्यास (Prosody Specifications)
Quarter / Line Structure (चरण संख्या व रचना)

४ चरण (सम मात्रिक)

Caesura / Pause (Yati) (यति (विराम) नियम)

१६ और १२ मात्राओं पर यति

Rhyme Scheme (Tuk) (तुक विधान)

दो-दो चरणों में परस्पर तुक

गण विन्यास / लघु-गुरु क्रम:

मात्राओं की संख्या का नियम (गणों का बंधन नहीं)

✨Classic Metrical Verse (प्रामाणिक काव्य उदाहरण)
रचयिता: मैथिलीशरण गुप्त (जयद्रथ वध)

"कहती हुई यों उत्तरा के, नेत्र जल से भर गए। हिम के कणों से पूर्ण मानो, हो गए पंकज नए॥"

काव्यशास्त्रीय मात्रा संगति एवं स्पष्टीकरण (Metrical Analysis):

प्रथम पंक्ति "कहती हुई यों उत्तरा के" (१६ मात्राएँ) पर यति है और "नेत्र जल से भर गए" (१२ मात्राएँ) पर चरण पूर्ण होता है (१६ + १२ = २८ मात्राएँ)। अंत में "गए" में ग(१)+ए(२) = लघु-गुरु (।ऽ) है। द्वितीय पंक्ति में भी ठीक २८ मात्राएँ हैं और अंत में "नए" (।ऽ) है। यह हरिगीतिका छंद का प्रामाणिक पाठ्य-उदाहरण है।

English Analysis: Line 1 divides into 16 matras at Uttara ke and 12 matras at Bhar gaye (total 28), concluding in short-long (।ऽ). Line 2 repeats the 16+12 scansion ending in Naye (।ऽ), fulfilling Harigeetika.

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अन्य प्रामाणिक काव्य उदाहरण

उदाहरण 1
"खल दल दलन मंजन करन, दुष्टन दमन सुखकर सदा। जय जानकीपति दीनबंधु, विहंसि हरहु दुख-आपदा॥"

प्रत्येक पंक्ति में २८ मात्राएँ (१६ और १२ पर यति)। अंत में सदा/आपदा (।ऽ) की संगति।

Stately devotional hymn structured in 16+12 mora per line.

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सभी छंद देखें →
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#doha

दोहा

विषम (१, ३) = १३ मात्राएँ

Doha (Rhymed Couplet Meter)

दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल / पंक्तियाँ) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्राएँ होती हैं (कुल 48 मात्राएँ)। सम चरणों (2, 4) के अंत में एक लघु (।) वर्ण अनिवार्य होता है और परस्पर तुक मिलता है। विषम चरणों के आदि में जगण (।ऽ।) का होना वर्जित है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परैं, स्याम हरित दुति होइ॥"

— महाकवि बिहारी (बिहारी सतसई (मंगलाचरण))
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१३ और ११ मात्राओं पर यति)
तुक (Rhyme):सम चरणों (२ और ४) में परस्पर तुक मिलता है
💡 पहचान:पहली पंक्ति के पहले हिस्से में १३ मात्राएँ और दूसरे में ११ मात्राएँ गिनें; अंत में तुक और लघु वर्ण (।) मिले तो वह निश्चित ही दोहा है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ / दल)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदसम मात्रिकClass 9-10
#chaupai

चौपाई

प्रत्येक चरण = १६ मात्राएँ (४ चरण, कुल ६४ मात्राएँ)

Chaupai (Four-Quarter 16-Mora Meter)

चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना पूर्णतः वर्जित माना गया है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं जो अत्यंत शुभ और कर्णप्रिय माने जाते हैं। प्रथम चरण की तुक द्वितीय चरण से तथा तृतीय चरण की तुक चतुर्थ चरण से मिलती है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (हनुमान चालीसा / रामचरितमानस)
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१६ मात्राओं पर)
तुक (Rhyme):१-२ चरण में तथा ३-४ चरण में परस्पर तुक
💡 पहचान:चारों चरणों में बराबर १६-१६ मात्राएँ गिनें; अंत में जगण (।ऽ।) न हो और प्रायः दो गुरु (ऽऽ) आएँ तो वह चौपाई है।
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#sortha

सोरठा

विषम (१, ३) = ११ मात्राएँ

Sortha (Inverted Doha Meter)

सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है और यह दोहा छंद का ठीक उल्टा (विपरीत) होता है। इसमें भी 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विशेष नियम: सोरठा में तुक विषम चरणों (१ और ३) के अंत में मिलता है, जबकि दोहा में तुक सम चरणों में मिलता है। विषम चरणों के अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ।) का विधान रहता है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (मंगलाचरण))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति
तुक (Rhyme):विषम चरणों (१ और ३) के अंत में तुक मिलता है
💡 पहचान:यदि पहले चरण में ११ और दूसरे में १३ मात्राएँ हों और बीच वाले हिस्से (१ और ३ चरण) में तुक मिले तो वह दोहे का उल्टा "सोरठा" है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ)मात्रा गणना व नियम→