🔤वर्णिक छंदवर्णिक वृत्त🎓 Competitive Exams#mandakranta

Mandakranta (17-Syllable Classical Varnik Meter) — लक्षण, मात्रा गणना व उदाहरणमंदाक्रांता छंद

📐Metric Formula (Matra / Varna Count) (मात्रा / वर्ण गणना सूत्र)

कुल माप
चरण संख्या४ चरण
📜शास्त्रीय लक्षण एवं संरचना नियम (Rules & Structure)

मंदाक्रांता एक गंभीर और भव्य सम वर्णिक छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 17 वर्ण (अक्षर) होते हैं। इसके गणों का शास्त्रीय क्रम है: मगण (ऽऽऽ), भगण (ऽ।।), नगण (।।।), तगण (ऽऽ।), तगण (ऽऽ।), और अंत में दो गुरु (ऽऽ) वर्ण — सूत्र: "मभनततगागा"। इसमें यति 4, 6 और 7 वर्णों पर (४ + ६ + ७ = १७) होती है। महाकवि कालिदास के "मेघदूत" तथा हरिऔध के "प्रियप्रवास" के विरह प्रसंगों में इसका अद्भुत प्रयोग हुआ है।

English Translation: Mandakranta is a stately 17-syllable classical Varnik meter. Each line contains 17 syllables arranged in the exact order: Magana (ऽऽऽ), Bhagana (ऽ।।), Nagana (।।।), two Taganas (ऽऽ।), and two final Gurus (ऽऽ). Metric pauses (Yati) divide the line at the 4th, 6th, and 7th syllables (4+6+7=17). Renowned in Kalidasa’s Meghadutam and Harioudh’s Priyapravas.
🔍छंद-शास्त्र के प्रमुख अंग एवं विन्यास (Prosody Specifications)
Quarter / Line Structure (चरण संख्या व रचना)

४ चरण (वर्णिक वृत्त)

Caesura / Pause (Yati) (यति (विराम) नियम)

४, ६ और ७ वर्णों पर यति (४ + ६ + ७ = १७)

Rhyme Scheme (Tuk) (तुक विधान)

शास्त्रीय छंद विधान

गण विन्यास / लघु-गुरु क्रम:

मात्राओं की संख्या का नियम (गणों का बंधन नहीं)

✨Classic Metrical Verse (प्रामाणिक काव्य उदाहरण)
रचयिता: अयोध्या सिंह उपाध्याय "हरिऔध" (प्रियप्रवास (पवन-दूती प्रसंग))

"बैठी खिन्ना एक दिवस वे गेह में थीं अकेली, आके आँसू दृग-युगल में थे धरा को भिगोते। आई धीरे इस सदन में पुष्प-सद्गंध ले वै, प्रातःवाली सुपवन इसी काल वातायनों से॥"

काव्यशास्त्रीय मात्रा संगति एवं स्पष्टीकरण (Metrical Analysis):

प्रत्येक पंक्ति में ठीक १७ वर्ण हैं। पहली यति ४ वर्णों पर (बैठी खिन्ना), दूसरी ६ वर्णों पर (एक दिवस वे), और तीसरी ७ वर्णों पर (गेह में थीं अकेली) लगती है। यह हरिऔध द्वारा प्रियप्रवास में राधा की विरह-व्यथा का मंदाक्रांता छंद में किया गया अमर चित्रण है।

English Analysis: Each line counts precisely 17 syllables with pauses distributed at 4, 6, and 7 syllables (4+6+7=17), starting with three long syllables (Magana). Immortalized in Radha’s lament in Priyapravas.

अन्य प्रमुख काव्य छंद (Related Poetic Meters)

सभी छंद देखें →
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#doha

दोहा

विषम (१, ३) = १३ मात्राएँ

Doha (Rhymed Couplet Meter)

दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल / पंक्तियाँ) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्राएँ होती हैं (कुल 48 मात्राएँ)। सम चरणों (2, 4) के अंत में एक लघु (।) वर्ण अनिवार्य होता है और परस्पर तुक मिलता है। विषम चरणों के आदि में जगण (।ऽ।) का होना वर्जित है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परैं, स्याम हरित दुति होइ॥"

— महाकवि बिहारी (बिहारी सतसई (मंगलाचरण))
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१३ और ११ मात्राओं पर यति)
तुक (Rhyme):सम चरणों (२ और ४) में परस्पर तुक मिलता है
💡 पहचान:पहली पंक्ति के पहले हिस्से में १३ मात्राएँ और दूसरे में ११ मात्राएँ गिनें; अंत में तुक और लघु वर्ण (।) मिले तो वह निश्चित ही दोहा है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ / दल)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदसम मात्रिकClass 9-10
#chaupai

चौपाई

प्रत्येक चरण = १६ मात्राएँ (४ चरण, कुल ६४ मात्राएँ)

Chaupai (Four-Quarter 16-Mora Meter)

चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना पूर्णतः वर्जित माना गया है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं जो अत्यंत शुभ और कर्णप्रिय माने जाते हैं। प्रथम चरण की तुक द्वितीय चरण से तथा तृतीय चरण की तुक चतुर्थ चरण से मिलती है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (हनुमान चालीसा / रामचरितमानस)
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१६ मात्राओं पर)
तुक (Rhyme):१-२ चरण में तथा ३-४ चरण में परस्पर तुक
💡 पहचान:चारों चरणों में बराबर १६-१६ मात्राएँ गिनें; अंत में जगण (।ऽ।) न हो और प्रायः दो गुरु (ऽऽ) आएँ तो वह चौपाई है।
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#sortha

सोरठा

विषम (१, ३) = ११ मात्राएँ

Sortha (Inverted Doha Meter)

सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है और यह दोहा छंद का ठीक उल्टा (विपरीत) होता है। इसमें भी 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विशेष नियम: सोरठा में तुक विषम चरणों (१ और ३) के अंत में मिलता है, जबकि दोहा में तुक सम चरणों में मिलता है। विषम चरणों के अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ।) का विधान रहता है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (मंगलाचरण))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति
तुक (Rhyme):विषम चरणों (१ और ३) के अंत में तुक मिलता है
💡 पहचान:यदि पहले चरण में ११ और दूसरे में १३ मात्राएँ हों और बीच वाले हिस्से (१ और ३ चरण) में तुक मिले तो वह दोहे का उल्टा "सोरठा" है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ)मात्रा गणना व नियम→