🔤वर्णिक छंदवर्णिक वृत्त🎓 Class 11-12#kavitta

Kavitta / Manharan (31-Syllable Classical Varnik Meter) — लक्षण, मात्रा गणना व उदाहरणकवित्त (मनहरण) छंद

📐Metric Formula (Matra / Varna Count) (मात्रा / वर्ण गणना सूत्र)

कुल माप
चरण संख्या४ चरण
📜शास्त्रीय लक्षण एवं संरचना नियम (Rules & Structure)

कवित्त (जिसे मनहरण कवित्त या घनाक्षरी भी कहा जाता है) एक प्रमुख वर्णिक छंद है। इसमें मात्राओं की नहीं, बल्कि वर्णों (अक्षरों) की गिनती होती है। इसके प्रत्येक चरण में 31 वर्ण (अक्षर) होते हैं। यति 16 और 15 वर्णों पर होती है। प्रत्येक चरण का अंतिम वर्ण अनिवार्यतः गुरु (दीर्घ ऽ) होता है। रीतिकाल के प्रसिद्ध वीर रस कवि भूषण, पद्माकर एवं सेनापति ने अपने अमर काव्यों में इसका सर्वाधिक प्रयोग किया है।

English Translation: Kavitta (also known as Manharan Kavitta) is a prestigious classical syllabic (Varnik) meter governed by letter-count rather than weight. Each line contains strictly 31 syllables (Varnas) with caesura after 16 syllables and 15 syllables. The terminal syllable of each quarter must be long (Guru ऽ). Famous in the martial verses of Bhushan and Padmakar.
🔍छंद-शास्त्र के प्रमुख अंग एवं विन्यास (Prosody Specifications)
Quarter / Line Structure (चरण संख्या व रचना)

४ चरण (वर्णिक वृत्त)

Caesura / Pause (Yati) (यति (विराम) नियम)

१६ और १५ वर्णों पर यति

Rhyme Scheme (Tuk) (तुक विधान)

चरणों के अंत में परस्पर तुक

गण विन्यास / लघु-गुरु क्रम:

मात्राओं की संख्या का नियम (गणों का बंधन नहीं)

✨Classic Metrical Verse (प्रामाणिक काव्य उदाहरण)
रचयिता: महाकवि भूषण (शिवराज भूषण / शिवा बावनी)

"इंद्र जिमि जंभ पर, बाडव सुअंभ पर, रावन सदंभ पर, रघुकुल राज है। पौन बारिबाह पर, संभु रतिनाह पर, ज्यों सहसबाह पर, राम द्विजराज है॥"

काव्यशास्त्रीय मात्रा संगति एवं स्पष्टीकरण (Metrical Analysis):

प्रत्येक चरण में अक्षरों (वर्णों) की संख्या ठीक ३१ है। पहली पंक्ति में १६ वर्णों (इंद्र जिमि जंभ पर, बाडव सुअंभ पर) पर यति है, और आगे १५ वर्णों (रावन सदंभ पर, रघुकुल राज है) पर चरण समाप्त होता है। अंत में "राज है" का "है" गुरु वर्ण है। यह महाकवि भूषण का अत्यंत ओजस्वी मनहरण कवित्त है।

English Analysis: Every line counts exactly 31 syllables, splitting neatly into 16 syllables and 15 syllables, terminating in a stressed long syllable (Raaj hai / Dwijraaj hai).

MORE AUTHENTIC CLASSIC VERSES

अन्य प्रामाणिक काव्य उदाहरण

उदाहरण 1कवि: महाकवि भूषण (शिवा बावनी)
"ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहन वारी, ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहाती हैं॥"

शिवाजी के भय से बेगमों की दशा का ३१ वर्णों में ऐतिहासिक मनहरण कवित्त।

Bhushan’s celebrated historical Kavitta depicting the flight of Mughal princesses in 31-syllable lines.

अन्य प्रमुख काव्य छंद (Related Poetic Meters)

सभी छंद देखें →
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#doha

दोहा

विषम (१, ३) = १३ मात्राएँ

Doha (Rhymed Couplet Meter)

दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल / पंक्तियाँ) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्राएँ होती हैं (कुल 48 मात्राएँ)। सम चरणों (2, 4) के अंत में एक लघु (।) वर्ण अनिवार्य होता है और परस्पर तुक मिलता है। विषम चरणों के आदि में जगण (।ऽ।) का होना वर्जित है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परैं, स्याम हरित दुति होइ॥"

— महाकवि बिहारी (बिहारी सतसई (मंगलाचरण))
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१३ और ११ मात्राओं पर यति)
तुक (Rhyme):सम चरणों (२ और ४) में परस्पर तुक मिलता है
💡 पहचान:पहली पंक्ति के पहले हिस्से में १३ मात्राएँ और दूसरे में ११ मात्राएँ गिनें; अंत में तुक और लघु वर्ण (।) मिले तो वह निश्चित ही दोहा है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ / दल)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदसम मात्रिकClass 9-10
#chaupai

चौपाई

प्रत्येक चरण = १६ मात्राएँ (४ चरण, कुल ६४ मात्राएँ)

Chaupai (Four-Quarter 16-Mora Meter)

चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना पूर्णतः वर्जित माना गया है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं जो अत्यंत शुभ और कर्णप्रिय माने जाते हैं। प्रथम चरण की तुक द्वितीय चरण से तथा तृतीय चरण की तुक चतुर्थ चरण से मिलती है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (हनुमान चालीसा / रामचरितमानस)
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१६ मात्राओं पर)
तुक (Rhyme):१-२ चरण में तथा ३-४ चरण में परस्पर तुक
💡 पहचान:चारों चरणों में बराबर १६-१६ मात्राएँ गिनें; अंत में जगण (।ऽ।) न हो और प्रायः दो गुरु (ऽऽ) आएँ तो वह चौपाई है।
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#sortha

सोरठा

विषम (१, ३) = ११ मात्राएँ

Sortha (Inverted Doha Meter)

सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है और यह दोहा छंद का ठीक उल्टा (विपरीत) होता है। इसमें भी 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विशेष नियम: सोरठा में तुक विषम चरणों (१ और ३) के अंत में मिलता है, जबकि दोहा में तुक सम चरणों में मिलता है। विषम चरणों के अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ।) का विधान रहता है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (मंगलाचरण))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति
तुक (Rhyme):विषम चरणों (१ और ३) के अंत में तुक मिलता है
💡 पहचान:यदि पहले चरण में ११ और दूसरे में १३ मात्राएँ हों और बीच वाले हिस्से (१ और ३ चरण) में तुक मिले तो वह दोहे का उल्टा "सोरठा" है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ)मात्रा गणना व नियम→