🔤वर्णिक छंदवर्णिक वृत्त🎓 Class 9-10#savaiya

Savaiya (22 to 26 Syllable Classical Varnik Meter) — लक्षण, मात्रा गणना व उदाहरणसवैया छंद

📐Metric Formula (Matra / Varna Count) (मात्रा / वर्ण गणना सूत्र)

कुल माप
चरण संख्या४ चरण
📜शास्त्रीय लक्षण एवं संरचना नियम (Rules & Structure)

सवैया वर्णिक छंदों का एक अत्यंत लोकप्रिय वर्ग है। जिन वर्णिक वृत्तों के प्रत्येक चरण में 22 से लेकर 26 वर्ण (अक्षर) होते हैं, उन्हें सामूहिक रूप से "सवैया" कहा जाता है। इसमें सबसे अधिक प्रसिद्ध "मत्तगयंद सवैया" है, जिसमें 23 वर्ण होते हैं (7 भगण ऽ।। + 2 गुरु ऽऽ = २३ वर्ण)। इसके अतिरिक्त दुर्मिल (२४ वर्ण), किरीट (२४ वर्ण), मदिरा आदि इसके अनेक भेद हैं। रसखान के कृष्ण-प्रेम के सवैये हिंदी साहित्य की अमूल्य निधि हैं।

English Translation: Savaiya designates a celebrated family of classical syllabic (Varnik) meters possessing between 22 and 26 syllables per line. The most renowned subtype is the Mattagayand Savaiya, which contains 23 syllables structured as seven Bhaganas (ऽ।।) followed by two terminal Gurus (7 × 3 + 2 = 23). Immortalized in the devotional verses of Raskhan.
🔍छंद-शास्त्र के प्रमुख अंग एवं विन्यास (Prosody Specifications)
Quarter / Line Structure (चरण संख्या व रचना)

४ चरण (वर्णिक वृत्त)

Caesura / Pause (Yati) (यति (विराम) नियम)

प्रायः मध्य में या चरण के अंत में

Rhyme Scheme (Tuk) (तुक विधान)

चारों चरणों में सुंदर अंत्यानुप्रास

गण विन्यास / लघु-गुरु क्रम:

मात्राओं की संख्या का नियम (गणों का बंधन नहीं)

✨Classic Metrical Verse (प्रामाणिक काव्य उदाहरण)
रचयिता: रसखान (सुजान रसखान)

"मानुष हों तो वही रसखानि, बसौं ब्रज गोकुल गाँव के ग्वारन। जो पसु हों तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन॥ पाहन हों तो वही गिरि को, जो धर्यो कर छत्र पुरंदर धारन। जो खग हों तो बसेरो करौं, मिलि कालिंदी कूल कदंब की डारन॥"

काव्यशास्त्रीय मात्रा संगति एवं स्पष्टीकरण (Metrical Analysis):

इस सवैये के प्रत्येक चरण में ठीक २३ वर्ण हैं। प्रत्येक चरण में ७ भगण (ऽ।।) और अंत में २ गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं (जैसे: ग्वारन, मँझारन, धारन, डारन)। यह मत्तगयंद सवैया का विश्वप्रसिद्ध उदाहरण है जिसमें रसखान ने अगले जन्म में भी ब्रजभूमि में जन्म लेने की अभिलाषा व्यक्त की है।

English Analysis: Every single line counts exactly 23 syllables formed by 7 Bhagana feet (long-short-short) followed by two long syllables. Raskhan yearns to be reborn anywhere in Braj, presenting the quintessential Mattagayand Savaiya.

MORE AUTHENTIC CLASSIC VERSES

अन्य प्रामाणिक काव्य उदाहरण

उदाहरण 1कवि: रसखान (सुजान रसखान)
"धूरि भरे अति शोभित स्याम जू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी। खेलत खात फिरैं अँगना, पग पैंजनिया कटि पीरी कछौटी॥"

बालकृष्ण के सौंदर्य का २३ वर्णों वाला अनुपम मत्तगयंद सवैया।

Raskhan’s famous portrait of toddler Krishna in 23-syllable Savaiya meter.

अन्य प्रमुख काव्य छंद (Related Poetic Meters)

सभी छंद देखें →
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#doha

दोहा

विषम (१, ३) = १३ मात्राएँ

Doha (Rhymed Couplet Meter)

दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल / पंक्तियाँ) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्राएँ होती हैं (कुल 48 मात्राएँ)। सम चरणों (2, 4) के अंत में एक लघु (।) वर्ण अनिवार्य होता है और परस्पर तुक मिलता है। विषम चरणों के आदि में जगण (।ऽ।) का होना वर्जित है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परैं, स्याम हरित दुति होइ॥"

— महाकवि बिहारी (बिहारी सतसई (मंगलाचरण))
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१३ और ११ मात्राओं पर यति)
तुक (Rhyme):सम चरणों (२ और ४) में परस्पर तुक मिलता है
💡 पहचान:पहली पंक्ति के पहले हिस्से में १३ मात्राएँ और दूसरे में ११ मात्राएँ गिनें; अंत में तुक और लघु वर्ण (।) मिले तो वह निश्चित ही दोहा है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ / दल)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदसम मात्रिकClass 9-10
#chaupai

चौपाई

प्रत्येक चरण = १६ मात्राएँ (४ चरण, कुल ६४ मात्राएँ)

Chaupai (Four-Quarter 16-Mora Meter)

चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना पूर्णतः वर्जित माना गया है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं जो अत्यंत शुभ और कर्णप्रिय माने जाते हैं। प्रथम चरण की तुक द्वितीय चरण से तथा तृतीय चरण की तुक चतुर्थ चरण से मिलती है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (हनुमान चालीसा / रामचरितमानस)
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१६ मात्राओं पर)
तुक (Rhyme):१-२ चरण में तथा ३-४ चरण में परस्पर तुक
💡 पहचान:चारों चरणों में बराबर १६-१६ मात्राएँ गिनें; अंत में जगण (।ऽ।) न हो और प्रायः दो गुरु (ऽऽ) आएँ तो वह चौपाई है।
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#sortha

सोरठा

विषम (१, ३) = ११ मात्राएँ

Sortha (Inverted Doha Meter)

सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है और यह दोहा छंद का ठीक उल्टा (विपरीत) होता है। इसमें भी 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विशेष नियम: सोरठा में तुक विषम चरणों (१ और ३) के अंत में मिलता है, जबकि दोहा में तुक सम चरणों में मिलता है। विषम चरणों के अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ।) का विधान रहता है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (मंगलाचरण))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति
तुक (Rhyme):विषम चरणों (१ और ३) के अंत में तुक मिलता है
💡 पहचान:यदि पहले चरण में ११ और दूसरे में १३ मात्राएँ हों और बीच वाले हिस्से (१ और ३ चरण) में तुक मिले तो वह दोहे का उल्टा "सोरठा" है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ)मात्रा गणना व नियम→