📏मात्रिक छंदविषम मात्रिक🎓 Class 9-10#kundaliya

Kundaliya (Compound Doha-Rola Hexastich Meter) — लक्षण, मात्रा गणना व उदाहरणकुंडलिया छंद

📐Metric Formula (Matra / Varna Count) (मात्रा / वर्ण गणना सूत्र)

कुल माप
चरण संख्या६ चरण
📜शास्त्रीय लक्षण एवं संरचना नियम (Rules & Structure)

कुंडलिया विषम मात्रिक संयुक्त छंद है। यह 6 चरणों का छंद होता है, जो 1 दोहा (२ चरण) और 1 रोला (४ चरण) को मिलाकर बनता है (२ + ४ = ६ पंक्तियाँ)। प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती हैं। कुंडलिया के दो अनिवार्य नियम हैं: १. जिस शब्द से छंद का प्रारंभ होता है, उसी शब्द पर इसकी समाप्ति होती है। २. दोहे का चौथा चरण (द्वितीय दल का अंतिम भाग) रोले के प्रथम चरण का प्रारंभ बनता है। यह कुंडली (साँप की कुंडली) की तरह घूमकर वहीं आ जाता है, इसलिए इसे कुंडलिया कहते हैं।

English Translation: Kundaliya is a composite uneven moraic (Visham Matrik) meter consisting of 6 lines, created by joining one Doha (first 2 lines) with one Rola (remaining 4 lines). Every line contains 24 matras. Two mandatory signature rules govern it: 1. The poem must end with the exact word it began with. 2. The fourth quarter of the Doha is repeated as the opening quarter of the Rola.
🔍छंद-शास्त्र के प्रमुख अंग एवं विन्यास (Prosody Specifications)
Quarter / Line Structure (चरण संख्या व रचना)

६ चरण (विषम मात्रिक)

Caesura / Pause (Yati) (यति (विराम) नियम)

दोहे में १३-११ पर, रोले में ११-१३ पर यति

Rhyme Scheme (Tuk) (तुक विधान)

प्रारंभिक शब्द और अंतिम शब्द एक समान

गण विन्यास / लघु-गुरु क्रम:

मात्राओं की संख्या का नियम (गणों का बंधन नहीं)

✨Classic Metrical Verse (प्रामाणिक काव्य उदाहरण)
रचयिता: गिरधर कविराय (गिरधर कविराय की कुंडलियाँ)

"दौलत पाय न कीजिए, सपनेहूँ अभिमान। चंचल जल दिन चारि को, ठाउँ न रहत निदान॥ ठाउँ न रहत निदान, जियत जग में जस लीजै। मीठे बचन सुनाय, बिनय सबही की कीजै॥ कह गिरधर कबिराय, अरे यह सब घट तौलत। पाहुन निसि-दिन चारि, रहत सबही के दौलत॥"

काव्यशास्त्रीय मात्रा संगति एवं स्पष्टीकरण (Metrical Analysis):

१. छंद का प्रारंभ "दौलत" शब्द से हुआ है और अंतिम शब्द भी "दौलत" ही है। २. दोहे का चतुर्थ चरण "ठाउँ न रहत निदान" ज्यों का त्यों रोले की प्रथम पंक्ति के रूप में दोहराया गया है। ३. प्रथम दो पंक्तियाँ दोहा (२४ मात्राएँ) हैं और बाद की चार पंक्तियाँ रोला (२४ मात्राएँ) हैं। यह कुंडलिया छंद का सर्वोत्कृष्ट शास्त्रीय उदाहरण है।

English Analysis: The stanza starts with the word Daulat and concludes with Daulat. The second line of Doha terminates with Thaun na rahat nidaan, which immediately repeats as the beginning of the third line (Rola). All 6 lines have 24 matras.

MORE AUTHENTIC CLASSIC VERSES

अन्य प्रामाणिक काव्य उदाहरण

उदाहरण 1कवि: गिरधर कविराय (नीति कुंडलियाँ)
"बिना बिचारे जो करै, सो पाछे पछिताय। काम बिगारै आपनो, जग में होत हँसाय॥ जग में होत हँसाय, चित्त में चैन न पावै। खान-पान सनमान, राग-रंग मनहिं न भावै॥ कह गिरधर कबिराय, दुख कछु टरत न टारे। खटकत है जिय माहिं, कियो जो बिना बिचारे॥"

प्रारंभ "बिना बिचारे" से और अंत भी "बिना बिचारे" से। दोहे का अंत "जग में होत हँसाय" रोले के आदि में दोहराया गया है।

Begins and ends with Bina bichaare; intermediate line repeats Jag mein hot hansaay across Doha-Rola junction.

अन्य प्रमुख काव्य छंद (Related Poetic Meters)

सभी छंद देखें →
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#doha

दोहा

विषम (१, ३) = १३ मात्राएँ

Doha (Rhymed Couplet Meter)

दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण (दो दल / पंक्तियाँ) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 13-13 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 11-11 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में 13 + 11 = 24 मात्राएँ होती हैं (कुल 48 मात्राएँ)। सम चरणों (2, 4) के अंत में एक लघु (।) वर्ण अनिवार्य होता है और परस्पर तुक मिलता है। विषम चरणों के आदि में जगण (।ऽ।) का होना वर्जित है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ। जा तन की झाँई परैं, स्याम हरित दुति होइ॥"

— महाकवि बिहारी (बिहारी सतसई (मंगलाचरण))
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१३ और ११ मात्राओं पर यति)
तुक (Rhyme):सम चरणों (२ और ४) में परस्पर तुक मिलता है
💡 पहचान:पहली पंक्ति के पहले हिस्से में १३ मात्राएँ और दूसरे में ११ मात्राएँ गिनें; अंत में तुक और लघु वर्ण (।) मिले तो वह निश्चित ही दोहा है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ / दल)मात्रा गणना व नियम→
मात्रिक छंदसम मात्रिकClass 9-10
#chaupai

चौपाई

प्रत्येक चरण = १६ मात्राएँ (४ चरण, कुल ६४ मात्राएँ)

Chaupai (Four-Quarter 16-Mora Meter)

चौपाई सम मात्रिक छंद है। इसमें 4 चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। चरण के अंत में जगण (।ऽ।) और तगण (ऽऽ।) का आना पूर्णतः वर्जित माना गया है। चरण के अंत में प्रायः दो गुरु (ऽऽ) वर्ण आते हैं जो अत्यंत शुभ और कर्णप्रिय माने जाते हैं। प्रथम चरण की तुक द्वितीय चरण से तथा तृतीय चरण की तुक चतुर्थ चरण से मिलती है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (हनुमान चालीसा / रामचरितमानस)
यति (Pause):प्रत्येक चरण के अंत में (१६ मात्राओं पर)
तुक (Rhyme):१-२ चरण में तथा ३-४ चरण में परस्पर तुक
💡 पहचान:चारों चरणों में बराबर १६-१६ मात्राएँ गिनें; अंत में जगण (।ऽ।) न हो और प्रायः दो गुरु (ऽऽ) आएँ तो वह चौपाई है।
मात्रिक छंदअर्धसम मात्रिकClass 9-10
#sortha

सोरठा

विषम (१, ३) = ११ मात्राएँ

Sortha (Inverted Doha Meter)

सोरठा अर्धसम मात्रिक छंद है और यह दोहा छंद का ठीक उल्टा (विपरीत) होता है। इसमें भी 4 चरण (दो दल) होते हैं। इसके विषम चरणों (प्रथम और तृतीय चरण) में 11-11 मात्राएँ तथा सम चरणों (द्वितीय और चतुर्थ चरण) में 13-13 मात्राएँ होती हैं। विशेष नियम: सोरठा में तुक विषम चरणों (१ और ३) के अंत में मिलता है, जबकि दोहा में तुक सम चरणों में मिलता है। विषम चरणों के अंत में एक गुरु और एक लघु (ऽ।) का विधान रहता है।

काव्य उदाहरण (Verse Example):

"मूक होइ बाचाल, पंगु चढ़इ गिरिवर गहन। जासु कृपाँ सो दयाल, द्रवउ सकल कलिमल दहन॥"

— गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस (मंगलाचरण))
यति (Pause):११ और १३ मात्राओं पर यति
तुक (Rhyme):विषम चरणों (१ और ३) के अंत में तुक मिलता है
💡 पहचान:यदि पहले चरण में ११ और दूसरे में १३ मात्राएँ हों और बीच वाले हिस्से (१ और ३ चरण) में तुक मिले तो वह दोहे का उल्टा "सोरठा" है।
४ चरण (२ पंक्तियाँ)मात्रा गणना व नियम→