व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नील" विशेषण (गुणवाचक) है तथा उत्तर पद "कमल" विशेष्य (संज्ञा) है। दोनों में विशेषण-विशेष्य का संबंध है।
कर्मधारय समास
Karmadharaya Samas (Descriptive / Appositional Compound)
Second element dominant with Adjective-Noun or Simile-Metaphor apposition
परिभाषा एवं स्वरूप (Definition & Concept)
जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है तथा पूर्व पद व उत्तर पद में "विशेषण-विशेष्य" (गुण और गुणी) अथवा "उपमान-उपमेय" (तुलना) का संबंध होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
A compound in which the second element is the head, and the relation between the elements is either that of an adjective to a noun, or an object to a standard of comparison.
कर्मधारय समास के प्रमुख उपभेद व नियम
1. विशेषण-विशेष्य कर्मधारय
विग्रह में "जो / है जो" का प्रयोगAdjective-Noun Karmadharaya
पहला पद दूसरे पद की विशेषता (रंग, आकार, गुण आदि) बताता है।
2. उपमान-उपमेय कर्मधारय (सादृश्य / रूपक)
विग्रह में "के समान / रूपी" का प्रयोगMetaphorical / Simile Karmadharaya
एक पद की तुलना दूसरे प्रसिद्ध पदार्थ से की जाती है अथवा दोनों में अभेद रूपक होता है।
पहचान की अचूक ट्रिक (Instant Shortcut Method)
विग्रह करते समय दोनों पदों के बीच "है जो", "के समान" अथवा "रूपी" शब्द आते हैं। उत्तर पद से "कैसा / कैसी?" प्रश्न पूछने पर पूर्व पद उसका उत्तर देता है (जैसे- कमल कैसा है? नीला = नीलकमल)।
Ask "What kind of?" to the second word; the first word provides the answer. During expansion, connectives like "hai jo" (which is), "ke saman" (like), or "roopi" (embodied as) naturally emerge.
सामान्य भ्रम एवं सावधानियाँ (Common Pitfalls & Exam Traps)
- कर्मधारय और बहुव्रीहि में भ्रम: जैसे "पीतांबर" का विग्रह यदि "पीला है जो वस्त्र" किया जाए तो कर्मधारय होगा, लेकिन यदि "पीले हैं वस्त्र जिसके अर्थात श्रीकृष्ण" किया जाए तो बहुव्रीहि होगा। परीक्षा में विग्रह के अनुसार उत्तर दें।
- कर्मधारय और तत्पुरुष में भ्रम: तत्पुरुष में कारक विभक्ति (का, के लिए आदि) होती है, जबकि कर्मधारय में विशेषण-विशेष्य या तुलना होती है।
परीक्षा विशेष टिप्स (Board & Competitive Exam Notes)
"चरणकमल", "नीलकमल", "महात्मा" और "मुखचंद्र" बोर्ड परीक्षाओं के सबसे प्रिय प्रश्न हैं। विग्रह की शैली ही निर्धारित करती है कि समास कर्मधारय है या बहुव्रीहि।
कर्मधारय समास के प्रमुख सामासिक पद व विग्रह (99)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा (महान)" विशेषण है और उत्तर पद "आत्मा" विशेष्य है। दोनों मिलकर एक श्रेष्ठ आत्मा का बोध कराते हैं।
पीतांबर
Peetambar (Peela hai jo ambar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पीत" (पीला रंग) विशेषण है और उत्तर पद "अंबर" (वस्त्र) विशेष्य है। विशेषण-विशेष्य संबंध होने से यह कर्मधारय समास है।
श्वेतांबर
Shwetambar (Shwet hai jo ambar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "श्वेत" रंगवाचक विशेषण है और उत्तर पद "अंबर" विशेष्य है, जिससे श्वेत वस्त्र का बोध होता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नील" गुणवाचक विशेषण है तथा उत्तर पद "गगन" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नील" रंगसूचक विशेषण है और उत्तर पद "गाय" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा" गुणवाचक विशेषण है तथा उत्तर पद "पुरुष" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा" विशेषण है तथा उत्तर पद "देव" विशेष्य है। दोनों मिलकर महान देव का बोध कराते हैं।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा" विशेषण है और उत्तर पद "ऋषि" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा" विशेषण है तथा उत्तर पद "राज (राजा)" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "परम" सर्वोच्चता सूचक विशेषण है तथा उत्तर पद "आनंद" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "परम" विशेषण है तथा उत्तर पद "ईश्वर" विशेष्य है। दोनों में विशेषण-विशेष्य का संबंध है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सत्" (श्रेष्ठ/सदाचारी) विशेषण है और उत्तर पद "जन" (व्यक्ति) विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दुर् (दुष्ट)" विशेषण है और उत्तर पद "जन" विशेष्य है।
सन्मार्ग
Sanmarg (Sat hai jo marg)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सत्" गुणवाचक विशेषण है और उत्तर पद "मार्ग" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "कु" (बुरा) विशेषण का कार्य करता है और उत्तर पद "मार्ग" विशेष्य है।
सुपुत्र
Suputra (Accha hai jo putra)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सु" (अच्छा/सद्गुणी) विशेषण है और उत्तर पद "पुत्र" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "कु" (बुरा) गुणसूचक विशेषण है और उत्तर पद "पुत्र" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सत्" विशेषण है और उत्तर पद "धर्म" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नव" अवस्थासूचक विशेषण है तथा उत्तर पद "युवक" विशेष्य है।
कापुरुष
Kapurush (Kayar hai jo purush)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "का (कुत्सित/कायर)" विशेषण है और उत्तर पद "पुरुष" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अध (आधा)" परिमाण/अवस्था विशेषण है तथा उत्तर पद "मरा" कृदंत विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "लाल" रंगवाचक विशेषण है और उत्तर पद "मणि" विशेष्य है।
अंधविश्वास
Andhvishwas (Andha hai jo vishwas)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अंध (अंधा/विवेकहीन)" विशेषण है और उत्तर पद "विश्वास" विशेष्य है।
मंदबुद्धि
Mandbuddhi (Mand hai jo buddhi)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "मंद" गुणवाचक विशेषण है और उत्तर पद "बुद्धि" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दीर्घ" परिमाण/विस्तार विशेषण है तथा उत्तर पद "आयु" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अल्प" परिमाणवाचक विशेषण है तथा उत्तर पद "आयु" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "शुभ" कल्याणकारी गुणवाचक विशेषण है तथा उत्तर पद "आगमन" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "काली" रंगवाचक विशेषण है और उत्तर पद "मिर्च" विशेष्य है।
भलामानस
Bhalamanas (Bhala hai jo manas)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "भला" गुणवाचक विशेषण है और उत्तर पद "मानस" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: "चरण" उपमेय है तथा "कमल" उपमान है। विग्रह करने पर दोनों के बीच "के समान" सादृश्यवाचक संबंध आता है।
चंद्रमुख
Chandramukh (Chandrama ke saman mukh)
व्याकरण तर्क: "मुख" उपमेय है तथा "चंद्रमा" उपमान है। दोनों में सौंदर्य की समानता दर्शाई गई है।
व्याकरण तर्क: उपमेय "मुख" पर उपमान "चंद्रमा" का अभेद आरोप होने से यह रूपक कर्मधारय है।
व्याकरण तर्क: "विद्या" उपमेय पर "धन" का आरोप किया गया है। विग्रह करने पर "रूपी" शब्द का प्रयोग होता है।
व्याकरण तर्क: "क्रोध" उपमेय को "अग्नि" उपमान का रूप देकर एकरूपता स्थापित की गई है।
व्याकरण तर्क: "कर" (हाथ) उपमेय है तथा "कमल" उपमान है। दोनों में कोमलता की तुलना है।
कमलनयन
Kamalnayan (Kamal ke saman nayan)
व्याकरण तर्क: "नयन" उपमेय की तुलना "कमल" उपमान से की गई है, जहाँ सादृश्य संबंध है।
व्याकरण तर्क: "नयन" उपमेय है तथा "मृग" उपमान है। हिरण की चंचल आँखों जैसी उपमा दी गई है।
व्याकरण तर्क: "लता" उपमेय की तुलना स्वर्ण "कनक" से की गई है।
लौहपुरुष
Lauhpurush (Lohe ke saman dridh purush)
व्याकरण तर्क: "पुरुष" उपमेय की तुलना "लोहा" (दृढ़ता) उपमान से की गई है।
व्याकरण तर्क: "नर" उपमेय की तुलना "सिंह" उपमान के पराक्रम और शौर्य से की गई है।
व्याकरण तर्क: "देह" (शरीर) उपमेय पर "लता" उपमान का अभेद आरोप होने से रूपक कर्मधारय है।
प्राणप्रिय
Praanpriya (Praanon ke saman priya)
व्याकरण तर्क: "प्रिय" उपमेय की तुलना "प्राण" उपमान से की गई है (जीवन के समान मूल्यवान)।
व्याकरण तर्क: "वचन" उपमेय पर "अमृत" उपमान का रूपक आरोप किया गया है।
व्याकरण तर्क: "ज्ञान" उपमेय को "दीपक" उपमान का रूप दिया गया है जो अज्ञान मिटाता है।
व्याकरण तर्क: "शोक" उपमेय पर "अग्नि" का आरोप है, जिससे रूपक संबंध प्रकट होता है।
व्याकरण तर्क: "भव" (संसार) उपमेय पर "सागर" उपमान का अभेद रूपक आरोपित है।
भुजदंड
Bhujdand (Dand ke saman bhuja)
व्याकरण तर्क: "भुजा" उपमेय की तुलना सुदृढ़ "दंड" उपमान से की गई है।
कुसुमकोमल
Kusumkomal (Kusum ke saman komal)
व्याकरण तर्क: "कोमल" गुण की तुलना "कुसुम" (पुष्प) उपमान से की गई है।
घनश्याम
Ghanshyam (Ghan ke saman shyam)
व्याकरण तर्क: "श्याम" (सांवला वर्ण) की तुलना सजल "घन" (बादल) से की गई है; जब रंग सादृश्य हो तो कर्मधारय समास होता है।
वज्रदेह
Vajradeh (Vajra ke saman kathor deh)
व्याकरण तर्क: "देह" उपमेय की तुलना "वज्र" उपमान की असीम कठोरता और अभेद्यता से की गई है।
पाषाणहृदय
Pashanhriday (Pashan ke saman kathor hriday)
व्याकरण तर्क: "हृदय" उपमेय की तुलना "पाषाण" उपमान की कठोरता और संवेदनहीनता से की गई है।
मीनाक्षी
Meenakshi (Meen ke saman akshiyon wali)
व्याकरण तर्क: "अक्षी" (नेत्र) उपमेय की तुलना "मीन" (मछली) उपमान के आकार और सुंदरता से की गई है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "लाल" गुणवाचक विशेषण है और उत्तर पद "मिर्च" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नील" रंगबोधक विशेषण है और उत्तर पद "उत्पल" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा" (महान) विशेषण है और "जन" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा" विशेषण है तथा उत्तर पद "रानी" विशेष्य है।
सुदर्शन
Sudarshan (Sundar hai jo darshan)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सु" (सुंदर) विशेषण है और "दर्शन" विशेष्य है।
कुमति
Kumati (Kutsit hai jo mati)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "कु" (बुरी) निंदासूचक विशेषण है और "मति" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सु" प्रशंसासूचक विशेषण है तथा "मति" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अध" (आधा) परिमाण/अवस्थावाचक विशेषण है और "पका" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "बद" (बुरी) विशेषण है और "बू" (गंध) विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "खुश" (सुंदर/अच्छी) विशेषण है और उत्तर पद "बू" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नव" विशेषण है और "जीवन" विशेष्य है।
श्वेताश्व
Shwetashwa (Shweta hai jo ashwa)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "श्वेत" रंगवाचक विशेषण है और "अश्व" विशेष्य है।
कृष्णसर्प
Krishnasarpa (Krishna hai jo sarpa)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "कृष्ण" गुणवाचक विशेषण है और "सर्प" विशेष्य है।
पीतवस्त्र
Peetavastra (Peet hai jo vastra)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पीत" विशेषण है और "वस्त्र" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "रक्त" रंगबोधक विशेषण है और "कमल" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा" विशेषण है और "काव्य" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा" आकारबोधक विशेषण है और "सागर" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "महा" विशेषण है और उत्तर पद "दान" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "परम" विशेषण है और "सुख" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दुस्/दुष्" (बुरा) विशेषण है और "कर्म" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सत्" (सच्चा/अच्छा) विशेषण है और "कर्म" विशेष्य है।
कुरीति
Kureeti (Kutsit hai jo reeti)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "कु" विशेषण है और उत्तर पद "रीति" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सु" विशेषण है तथा उत्तर पद "रीति" विशेष्य है।
सदुपदेश
Sadupadesha (Sat hai jo upadesha)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सत्" विशेषण है और "उपदेश" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दुर्" (बुरी/दुष्ट) विशेषण है और उत्तर पद "आत्मा" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "शुद्ध" विशेषण है और उत्तर पद "आत्मा" विशेष्य है।
एकाग्रचित्त
Ekagrachitta (Ekagra hai jo chitta)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "एकाग्र" विशेषण है और "चित्त" विशेष्य है।
प्रियप्रवास
Priyapravasa (Priya hai jo pravasa)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "प्रिय" विशेषण है और उत्तर पद "प्रवास" विशेष्य है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नील" रंगबोधक विशेषण है और उत्तर पद "शिखर" विशेष्य है।
राजीवलोचन
Rajivalochana (Rajiv ke saman lochana)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "राजीव" उपमान है और उत्तर पद "लोचन" उपमेय है, दोनों में सादृश्य संबंध है।
मुखारविंद
Mukharavinda (Arvind ke saman mukh)
व्याकरण तर्क: उत्तर पद "अरविंद" उपमान है तथा पूर्व पद "मुख" उपमेय है।
व्याकरण तर्क: उत्तर पद "रत्न" उपमान रूप में प्रयुक्त होकर ग्रंथ की अनमोल महत्ता दर्शाता है।
गुरुदेव
Gurudeva (Dev roopi guru)
व्याकरण तर्क: गुरु को देव के समान मानकर उपमान-उपमेय संबंध व्यक्त हुआ है।
व्याकरण तर्क: विद्या को रत्न के समान अनमोल बताकर रूपक कर्मधारय बनाया गया है।
व्याकरण तर्क: कीर्ति को बढ़ती हुई लता के रूप में उपमित किया गया है।
व्याकरण तर्क: चरणों के जल को अमृत के समान मानकर रूपक संबंध दर्शाया गया है।
पदपंकज
Padapankaja (Pankaja ke saman pada)
व्याकरण तर्क: चरणों की कोमलता की तुलना कमल (पंकज) से की गई है।
व्याकरण तर्क: अधर को अमृत के सदृश मानकर रूपक कर्मधारय समास निष्पन्न हुआ है।
विद्यासुधा
Vidyasudha (Sudha roopi vidya)
व्याकरण तर्क: विद्या को अमृत (सुधा) के समान तृप्तिदायक और अमर करने वाली बताया गया है।
कायाकल्प
Kayakalpa (Kalpa ke saman kaya)
व्याकरण तर्क: काया के रूपांतरण की तुलना नूतन कल्प से करके उपमान-उपमेय संबंध व्यक्त हुआ है।
दंतपंक्ति
Dantapankti (Pankti roopi danta)
व्याकरण तर्क: दांतों की एकरूपता को मोतियों की कतार रूपी मानकर रूपक संबंध है।
व्याकरण तर्क: संसार को विशाल व अगाध सागर का रूप देकर रूपक कर्मधारय समास बना है।
व्याकरण तर्क: आशा को पल्लवित होने वाली लता के सदृश मानकर रूपक संबंध दर्शाया गया है।
चंद्रबदन
Chandrabadan (Chandrama ke saman badan)
व्याकरण तर्क: मुख/बदन की सुंदरता की तुलना चंद्रमा से की गई है।
कुसुम-हृदय
Kusuma-hridaya (Kusum ke saman hridaya)
व्याकरण तर्क: हृदय की कोमलता और संवेदनशीलता की तुलना फूल (कुसुम) से की गई है।
चंद्रबिंब
Chandrabimba (Chandrama roopi bimba)
व्याकरण तर्क: चंद्रमा को बिंब के रूप में ग्रहण कर उपमान-उपमेय संबंध व्यक्त हुआ है।