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समास के 6 मुख्य भेद (Samas Types & Rules)

हिंदी व्याकरण में समास के 6 मुख्य भेद माने गए हैं। यहाँ प्रत्येक भेद की विस्तृत परिभाषा, पद प्रधानता, उपभेद, विग्रह के नियम, पहचान की अचूक ट्रिक और प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण नोट्स उपलब्ध हैं।

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भेद 1

अव्ययीभाव समास

Avyayibhav Samas (Adverbial Compound)

114+ उदाहरण
पद प्रधानता (Dominant Element)
पूर्व पद (पहला पद) प्रधान
First element (Purva-pada) is dominant

जिस समास का पहला पद (पूर्व पद) अव्यय या उपसर्ग हो तथा वही पद प्रधान हो, और समस्त पद मिलकर क्रिया-विशेषण अव्यय की भांति कार्य करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।

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पहचान ट्रिक: शब्द के आरंभ में यथा, प्रति, आ, अनु, भर, बे, हर, नि: उपसर्ग देखें; अथवा एक ही शब्द दो बार जुड़ा हो (जैसे रातोंरात, कानोंकान)। समस्त पद का लिंग, वचन या कारक के आधार पर रूप नहीं बदलता।

विग्रह नियम व उदाहरणविस्तृत नियम देखें →
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भेद 2

तत्पुरुष समास

Tatpurush Samas (Determinative / Case Compound)

106+ उदाहरण
पद प्रधानता (Dominant Element)
उत्तर पद (दूसरा पद) प्रधान
Second element (Uttara-pada) is dominant

जिस समास में दूसरा पद (उत्तर पद) प्रधान होता है तथा दोनों पदों के बीच कर्ता और संबोधन को छोड़कर किसी अन्य कारक की विभक्ति (कारक चिह्न) का लोप होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

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पहचान ट्रिक: समस्त पद का विग्रह करें। यदि विग्रह करने पर बीच में कोई कारक विभक्ति (को, से, के लिए, से अलग, का/के/की, में, पर) आती है, तो वह निश्चित रूप से तत्पुरुष समास है।

विग्रह नियम व उदाहरणविस्तृत नियम देखें →
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भेद 3

कर्मधारय समास

Karmadharaya Samas (Descriptive / Appositional Compound)

99+ उदाहरण
पद प्रधानता (Dominant Element)
उत्तर पद प्रधान (विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय)
Second element dominant with Adjective-Noun or Simile-Metaphor apposition

जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है तथा पूर्व पद व उत्तर पद में "विशेषण-विशेष्य" (गुण और गुणी) अथवा "उपमान-उपमेय" (तुलना) का संबंध होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।

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पहचान ट्रिक: विग्रह करते समय दोनों पदों के बीच "है जो", "के समान" अथवा "रूपी" शब्द आते हैं। उत्तर पद से "कैसा / कैसी?" प्रश्न पूछने पर पूर्व पद उसका उत्तर देता है (जैसे- कमल कैसा है? नीला = नीलकमल)।

विग्रह नियम व उदाहरणविस्तृत नियम देखें →
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भेद 4

द्विगु समास

Dvigu Samas (Numeral Aggregative Compound)

102+ उदाहरण
पद प्रधानता (Dominant Element)
उत्तर पद प्रधान (पूर्व पद संख्यावाचक विशेषण)
Second element dominant with first element being a numeral adjective denoting aggregate

जिस समास का पहला पद (पूर्व पद) संख्यावाचक विशेषण हो तथा समस्त पद किसी समूह (समाहार) का बोध कराता हो, उसे द्विगु समास कहते हैं।

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पहचान ट्रिक: पहला पद हमेशा कोई निश्चित संख्या (द्वि, त्रि, चतुर्/चौ, पंच, षट्, सप्त, अष्ट, नव, शत आदि) बताएगा और विग्रह के अंत में अनिवार्य रूप से "का समूह" या "का समाहार" आएगा।

विग्रह नियम व उदाहरणविस्तृत नियम देखें →
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भेद 5

द्वंद्व समास

Dvandva Samas (Copulative / Coordinate Compound)

102+ उदाहरण
पद प्रधानता (Dominant Element)
दोनों पद प्रधान (उभय पद प्रधान)
Both elements (Ubhay-pada) are equally dominant

जिस समास के दोनों पद (पूर्व पद और उत्तर पद) प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर दोनों के बीच "और", "तथा", "या", "अथवा", "एवं" जैसे योजक शब्द लगते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।

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पहचान ट्रिक: समस्त पद में प्रायः दोनों शब्दों के बीच योजक चिह्न (-) लगा होता है, अथवा दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम, पूरक या समान स्तर के होते हैं। विग्रह करने पर बीच में "और", "या", "एवं" आता है।

विग्रह नियम व उदाहरणविस्तृत नियम देखें →
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भेद 6

बहुव्रीहि समास

Bahuvrihi Samas (Exocentric / Attributive Compound)

100+ उदाहरण
पद प्रधानता (Dominant Element)
अन्य पद प्रधान (कोई पद प्रधान नहीं)
Neither element dominant; refers to an external third referent

जिस समास में पूर्व पद और उत्तर पद में से कोई भी पद प्रधान नहीं होता, अपितु दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अन्य संज्ञा पद (व्यक्ति, देवता या विशेष वस्तु) की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

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पहचान ट्रिक: समस्त पद किसी पौराणिक देवता, ऐतिहासिक पात्र या विशेष उपाधि का पर्यायवाची/रूढ़ शब्द होता है। विग्रह करने पर अंत में अनिवार्य रूप से "अर्थात्..." लिखकर तीसरे व्यक्ति का नाम स्पष्ट होता है।

विग्रह नियम व उदाहरणविस्तृत नियम देखें →
QUICK REVISION MATRIX

समास भेद तुलनात्मक तालिका (Quick Comparison Chart)

समास भेदपद प्रधानतामुख्य पहचान / लक्षणविग्रह उदाहरणकार्रवाई
⚡अव्ययीभाव समासपूर्व पद (पहला पद) प्रधानशब्द के आरंभ में यथा, प्रति, आ, अनु, भर, बे, हर, नि: उपसर्ग देखें; अथवा एक ही शब्द दो बार जुड़ा हो (जैसे रातोंरात, कानोंकान)। समस्त पद का लिंग, वचन या कारक के आधार पर रूप नहीं बदलता।यथाशक्ति = शक्ति के अनुसारनियम पढ़ें →
🏛️तत्पुरुष समासउत्तर पद (दूसरा पद) प्रधानसमस्त पद का विग्रह करें। यदि विग्रह करने पर बीच में कोई कारक विभक्ति (को, से, के लिए, से अलग, का/के/की, में, पर) आती है, तो वह निश्चित रूप से तत्पुरुष समास है।गगनचुंबी = गगन को चूमने वालानियम पढ़ें →
🌸कर्मधारय समासउत्तर पद प्रधान (विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय)विग्रह करते समय दोनों पदों के बीच "है जो", "के समान" अथवा "रूपी" शब्द आते हैं। उत्तर पद से "कैसा / कैसी?" प्रश्न पूछने पर पूर्व पद उसका उत्तर देता है (जैसे- कमल कैसा है? नीला = नीलकमल)।नीलकमल = नीला है जो कमलनियम पढ़ें →
🔢द्विगु समासउत्तर पद प्रधान (पूर्व पद संख्यावाचक विशेषण)पहला पद हमेशा कोई निश्चित संख्या (द्वि, त्रि, चतुर्/चौ, पंच, षट्, सप्त, अष्ट, नव, शत आदि) बताएगा और विग्रह के अंत में अनिवार्य रूप से "का समूह" या "का समाहार" आएगा।चौराहा = चार राहों (मार्गों) का समाहारनियम पढ़ें →
⚖️द्वंद्व समासदोनों पद प्रधान (उभय पद प्रधान)समस्त पद में प्रायः दोनों शब्दों के बीच योजक चिह्न (-) लगा होता है, अथवा दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम, पूरक या समान स्तर के होते हैं। विग्रह करने पर बीच में "और", "या", "एवं" आता है।माता-पिता = माता और पितानियम पढ़ें →
👑बहुव्रीहि समासअन्य पद प्रधान (कोई पद प्रधान नहीं)समस्त पद किसी पौराणिक देवता, ऐतिहासिक पात्र या विशेष उपाधि का पर्यायवाची/रूढ़ शब्द होता है। विग्रह करने पर अंत में अनिवार्य रूप से "अर्थात्..." लिखकर तीसरे व्यक्ति का नाम स्पष्ट होता है।लंबोदर = लंबा है उदर जिसका अर्थात् गणेश जीनियम पढ़ें →