व्याकरण तर्क: दोनों पद ("माता" और "पिता") समान रूप से प्रधान हैं और विग्रह करने पर योजक शब्द "और" से जुड़ते हैं।
द्वंद्व समास
Dvandva Samas (Copulative / Coordinate Compound)
Both elements (Ubhay-pada) are equally dominant
परिभाषा एवं स्वरूप (Definition & Concept)
जिस समास के दोनों पद (पूर्व पद और उत्तर पद) प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर दोनों के बीच "और", "तथा", "या", "अथवा", "एवं" जैसे योजक शब्द लगते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
A coordinative compound in which both constituent words have equal grammatical weight and importance, connected in expansion by conjunctive particles such as "and" (aur) or "or" (yaa).
द्वंद्व समास के प्रमुख उपभेद व नियम
1. इतरेतर द्वंद्व समास
विग्रह में "और / तथा"Itaretara Dvandva (Conjunctive)
जिसमें दोनों पदों का अपना अलग-अलग अस्तित्व होता है और वे "और" से जुड़े होते हैं।
2. समाहार द्वंद्व समास
विग्रह में "... आदि / इत्यादि"Samahara Dvandva (Collective / Associative)
जिसमें दोनों पद अपने अर्थ के अलावा अपने वर्ग के अन्य संबंधित पदार्थों का भी बोध कराते हैं।
3. वैकल्पिक द्वंद्व समास
विग्रह में "या / अथवा"Vaikalpika Dvandva (Alternative)
जिसमें दोनों पद एक-दूसरे के विपरीतार्थक होते हैं और दोनों में से किसी एक का विकल्प होता है।
पहचान की अचूक ट्रिक (Instant Shortcut Method)
समस्त पद में प्रायः दोनों शब्दों के बीच योजक चिह्न (-) लगा होता है, अथवा दोनों शब्द एक-दूसरे के विलोम, पूरक या समान स्तर के होते हैं। विग्रह करने पर बीच में "और", "या", "एवं" आता है।
The compound often contains a hyphen (-) between two complementary or antonymous words of equal rank. During expansion, conjunctions like "aur" (and), "yaa" (or), or "aadi" (etc.) appear.
सामान्य भ्रम एवं सावधानियाँ (Common Pitfalls & Exam Traps)
- योजक चिह्न (-) देखकर हर शब्द को द्वंद्व मान लेना; यदि एक ही शब्द दो बार दोहराया गया हो (जैसे "घर-घर", "पल-पल"), तो वह अव्ययीभाव होता है, द्वंद्व नहीं!
- संख्यावाचक द्वंद्व जैसे "पच्चीस" (पाँच और बीस) को द्विगु समझना; यहाँ दो संख्याओं का योग है, अतः द्वंद्व समास है।
परीक्षा विशेष टिप्स (Board & Competitive Exam Notes)
"माता-पिता", "दाल-रोटी", "सुख-दुख" और "सीताराम" माध्यमिक बोर्ड के मानक प्रश्न हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में समाहार द्वंद्व (इत्यादि/आदि वाला विग्रह) पर गहराई से प्रश्न बनते हैं।
द्वंद्व समास के प्रमुख सामासिक पद व विग्रह (102)
व्याकरण तर्क: दोनों पद स्वतंत्र सत्ता रखते हैं तथा विग्रह में "और" योजक का प्रयोग होता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद और उत्तर पद दोनों ही समान रूप से पूज्य और प्रधान हैं; विग्रह में "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद समान महत्व के हैं और विग्रह करने पर "और" योजक से जुड़ते हैं।
गौरीशंकर
Gaurishankar (Gauri aur Shankar)
व्याकरण तर्क: दोनों पद स्वतंत्र सत्ता वाले देवस्वरूप हैं तथा विग्रह में "और" से जुड़ते हैं।
व्याकरण तर्क: जीवन के दो मूलभूत आधार "अन्न" और "जल" दोनों पद प्रधान हैं और विग्रह में "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों खाद्य पदार्थों की अपनी स्वतंत्र सत्ता है और विग्रह में "और" योजक लगता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पशु पद समान स्तर के हैं तथा विग्रह में "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद समान रूप से प्रतिष्ठित और प्रधान हैं; विग्रह में "और" लगता है।
व्याकरण तर्क: समाज के दोनों घटक समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और विग्रह में "और" योजक आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद समान प्रधानता रखते हैं तथा विग्रह में "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों संतानों की स्थिति समान प्रधान है और विग्रह में "और" लगता है।
व्याकरण तर्क: दोनों अस्त्र-शस्त्र एक-दूसरे के पूरक और स्वतंत्र सत्ता वाले हैं; विग्रह में "और" लगता है।
व्याकरण तर्क: कुएं से जल निकालने के दोनों साधन स्वतंत्र सत्ता रखते हैं और विग्रह में "और" से जुड़ते हैं।
व्याकरण तर्क: दोनों भौगोलिक पद समान प्रधान हैं और विग्रह में "और" योजक आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पावन नदियां स्वतंत्र सत्ता रखती हैं और विग्रह में "और" से जुड़ती हैं।
व्याकरण तर्क: वन्य खाद्य पदार्थों के दोनों पद समान प्रधान हैं और विग्रह में "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों जलप्रवाह पद समान प्रधान हैं तथा विग्रह में "और" से जुड़ते हैं।
व्याकरण तर्क: दोनों भ्राता समान रूप से प्रधान हैं और विग्रह करने पर "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों प्रमुख देव पद समान रूप से प्रधान हैं और विग्रह में "और" योजक आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों भ्राता पद समान प्रधान हैं तथा विग्रह में "और" से जुड़ते हैं।
व्याकरण तर्क: संख्यावाची द्वंद्व समास; इसमें दो स्वतंत्र संख्याओं का योग होकर "और" से विग्रह बनता है।
व्याकरण तर्क: संख्यावाची द्वंद्व समास; "एक" और "तीस" दोनों संख्याओं का योग होने से विग्रह में "और" आता है।
व्याकरण तर्क: "दाल" और "रोटी" केवल दो खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि समग्र दैनिक जीविका और भोजन के साधनों का समाहार व्यक्त करते हैं।
हाथ-पाँव
Haath-Paanv (Haath, Paanv aadi)
व्याकरण तर्क: हाथ और पाँव के साथ शरीर के अन्य समस्त अंगों का सामूहिक समाहार व्यक्त होता है।
कपड़ा-लत्ता
Kapda-Latta (Kapda, Latta ityadi)
व्याकरण तर्क: "कपड़ा-लत्ता" समस्त पहनने योग्य वस्त्रों और ओढ़ने के साधनों का समाहार व्यक्त करता है।
रुपया-पैसा
Rupya-Paisa (Rupya, Paisa aadi)
व्याकरण तर्क: रुपया और पैसा केवल मुद्रा नहीं, बल्कि समस्त आर्थिक धन-दौलत का समाहार दर्शाते हैं।
बाल-बच्चे
Baal-Bacche (Baal, Bacche aadi)
व्याकरण तर्क: बाल और बच्चे समस्त परिवार और आश्रित संतानों के समाहार को व्यक्त करते हैं।
व्याकरण तर्क: साग और पत्तों के साथ संपूर्ण हरी सब्जियों और शाकाहारी भोजन का समाहार व्यक्त होता है।
चाय-पानी
Chai-Pani (Chai, Pani aadi)
व्याकरण तर्क: चाय और पानी के साथ समस्त अल्पाहार, जलपान और आतिथ्य का समाहार बोध होता है।
सेठ-साहूकार
Seth-Sahukar (Seth, Sahukar aadi)
व्याकरण तर्क: समस्त व्यापारी, महाजन और धनी वर्ग के समाहार को व्यक्त करने वाला पद है।
कूड़ा-कर्कट
Kooda-Karkat (Kooda, Karkat aadi)
व्याकरण तर्क: घर और गलियों की समग्र गंदगी और अपशिष्ट पदार्थों के समाहार को व्यक्त करता है।
कीड़ा-मकोड़ा
Keeda-Makoda (Keeda, Makoda aadi)
व्याकरण तर्क: छोटे-बड़े सभी कीट-पतंगों और रेंगने वाले जीवों के समाहार का बोध कराता है।
घास-फूस
Ghaas-Phoos (Ghaas, Phoos aadi)
व्याकरण तर्क: सूखे तिनकों, पत्तों और घास के समग्र समाहार का बोध कराता है।
खेत-खलिहान
Khet-Khalihan (Khet, Khalihan aadi)
व्याकरण तर्क: खेतों और खलिहानों के साथ संपूर्ण ग्रामीण कृषि संपदा का समाहार बोध होता है।
बर्तन-भांडे
Bartan-Bhande (Bartan, Bhande aadi)
व्याकरण तर्क: रसोई और भोजन संबंधी समस्त बर्तनों के समाहार को व्यक्त करता है।
धन-दौलत
Dhan-Daulat (Dhan, Daulat aadi)
व्याकरण तर्क: धन और दौलत समस्त चल-अचल संपत्ति और समृद्धि का समाहार व्यक्त करते हैं।
जीव-जंतु
Jeev-Jantu (Jeev, Jantu aadi)
व्याकरण तर्क: छोटे-बड़े सभी सजीव प्राणियों के समाहार का बोध कराता है।
फल-फूल
Phal-Phool (Phal, Phool aadi)
व्याकरण तर्क: फल और फूलों के साथ प्रकृति के समस्त वानस्पतिक उपहारों का समाहार व्यक्त होता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद परस्पर विलोम हैं और जीवन में एक समय में एक स्थिति के विकल्प के रूप में उपस्थित होते हैं।
व्याकरण तर्क: दोनों पद एक-दूसरे के विपरीतार्थक हैं तथा विग्रह में "या" योजक आता है।
व्याकरण तर्क: व्यापार के दो विपरीत परिणामों को दर्शाने वाले पद हैं; विग्रह में "या" आता है।
व्याकरण तर्क: युद्ध या खेल के दो परस्पर विरोधी परिणाम हैं; विग्रह में "या" लगता है।
व्याकरण तर्क: प्रतियोगिता के दो वैकल्पिक अंत हैं; विग्रह करने पर "या" आता है।
व्याकरण तर्क: नैतिक मूल्यांकन के दो विपरीत विकल्प हैं; विग्रह में "या" आता है।
व्याकरण तर्क: सत्य और असत्य दोनों परस्पर विरोधी हैं और विग्रह में "या" से जुड़ते हैं।
व्याकरण तर्क: धर्म और अधर्म परस्पर विरोधी कर्तव्य-विकल्प हैं; विग्रह में "या" लगता है।
व्याकरण तर्क: ख्याति और बदनामी दो वैकल्पिक स्थितियां हैं; विग्रह में "या" आता है।
व्याकरण तर्क: मात्रा के दो विपरीत विकल्प हैं; विग्रह करने पर "या" लगता है।
व्याकरण तर्क: आकार या पद के दो विपरीत विकल्प हैं; विग्रह में "या" आता है।
व्याकरण तर्क: आर्थिक आमदनी और खर्च दो विपरीत घटक हैं; विग्रह में "या" आता है।
व्याकरण तर्क: समय के दो निकटवर्ती विकल्प हैं; विग्रह में "या" आता है।
व्याकरण तर्क: रात और दिन दो विपरीत कालखंड हैं जो विग्रह में "या / और" से जुड़ते हैं।
व्याकरण तर्क: अस्तित्व के दो परम विपरीत सत्य हैं; विग्रह में "या" आता है।
व्याकरण तर्क: शीत और उष्ण दो विपरीत तापमान अवस्थाएं हैं; विग्रह में "या" लगता है।
राग-द्वेष
Raag-Dwesh (Raag ya Dwesh)
व्याकरण तर्क: मानसिक विकार के दो विपरीत रूप हैं; विग्रह में "या" आता है।
व्याकरण तर्क: विवेक के दो विपरीत निर्णय हैं; विग्रह करने पर "या" लगता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद स्वतंत्र और प्रधान हैं तथा विग्रह करने पर योजक शब्द "और" प्रयुक्त होता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद "सुर" और "असुर" समान रूप से प्रधान हैं तथा विग्रह में "और" का प्रयोग होता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद "देव" और "असुर" परस्पर स्वतंत्र व प्रधान हैं तथा दोनों के मध्य योजक "और" लुप्त है।
व्याकरण तर्क: दोनों नाम पद समान महत्त्व के हैं और विग्रह में "और" का प्रयोग होता है।
कृष्ण-बलराम
Krishna-balarama (Krishna aur Balaram)
व्याकरण तर्क: दोनों पद स्वतंत्र व्यक्तिवाचक संज्ञाएं हैं तथा विग्रह में "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद प्रधान हैं और विग्रह करने पर योजक शब्द "और" का प्रयोग होता है।
व्याकरण तर्क: पारिवारिक संबंध के दोनों पद समान रूप से प्रधान हैं तथा योजक "और" का लोप है।
व्याकरण तर्क: दाम्पत्य संबंध के दोनों पद समान प्रधानता रखते हैं तथा दोनों के मध्य "और" का लोप है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद स्वतंत्र और प्रधान हैं तथा विग्रह में योजक शब्द "और" प्रयुक्त होता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पारिवारिक पद समान स्तर के हैं और विग्रह करने पर "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद परस्पर पूरक और स्वतंत्र रूप से प्रधान हैं तथा विग्रह में "और" का प्रयोग होता है।
छात्र-छात्रा
Chhatra-chhatra (Chhatra aur chhatra)
व्याकरण तर्क: पुल्लिंग और स्त्रीलिंग के दोनों पद समान रूप से प्रधान हैं तथा योजक "और" लुप्त है।
व्याकरण तर्क: शारीरिक व मानसिक दोनों पद समान प्रधानता रखते हैं तथा दोनों के बीच "और" का लोप है।
व्याकरण तर्क: दोनों शारीरिक आवश्यकताएं समान रूप से प्रधान हैं और विग्रह में "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों प्राकृतिक अवस्थाएं समान प्रधानता रखती हैं तथा विग्रह में "और" प्रयुक्त होता है।
व्याकरण तर्क: दोनों कालखंड समान रूप से प्रधान हैं तथा योजक शब्द "और" का लोप हुआ है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद स्वतंत्र और विपरीतार्थक प्रधान पद हैं तथा विग्रह में "और" आता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद समान स्तर के प्रधान संज्ञा पद हैं तथा विग्रह में "और" प्रयुक्त होता है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद "जल" और "वायु" समान प्रधानता रखते हैं तथा दोनों के मध्य योजक "और" लुप्त है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद विरोधी अर्थ के हैं तथा विकल्प का बोध कराने वाले योजक "या" का लोप हुआ है।
व्याकरण तर्क: दोनों पद एक-दूसरे के विपरीत हैं और विग्रह करने पर विकल्प सूचक "या" का प्रयोग होता है।
व्याकरण तर्क: दिशावाची विरोधी पद हैं तथा विग्रह में विकल्पबोधक योजक "या" आता है।
व्याकरण तर्क: विरोधी दिशासूचक पद हैं और विग्रह में "या" का प्रयोग होता है।
व्याकरण तर्क: दोनों विरोधी पद परस्पर विकल्प प्रस्तुत करते हैं तथा "या" का लोप है।
व्याकरण तर्क: पार्श्व दिशाओं के दोनों विरोधी पद हैं और विग्रह में "या" आता है।
व्याकरण तर्क: मात्रावाची विरोधी पद हैं तथा विग्रह में विकल्पसूचक "या" का प्रयोग होता है।
व्याकरण तर्क: तापमानबोधक विरोधी पद हैं और दोनों के मध्य "या" का लोप हुआ है।
व्याकरण तर्क: विरोधी गुणवाचक पद हैं तथा विग्रह करने पर विकल्पसूचक "या" आता है।
व्याकरण तर्क: संधियुक्त दोनों विरोधी पद (लाभ + अलाभ) विकल्प को दर्शाते हैं।
व्याकरण तर्क: संख्यावाची पद विकल्प प्रस्तुत करते हैं तथा "या" का लोप हुआ है।
व्याकरण तर्क: संख्यावाची पद हैं और अनिश्चय/विकल्प के अर्थ में "या" का लोप हुआ है।
व्याकरण तर्क: संख्यावाची पद विकल्प का भाव दर्शाते हैं तथा विग्रह में "या" आता है।
चाल-चलन
Chaal-chalan (Chaal aur chalan aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर व्यक्ति के समग्र आचरण व व्यवहार के समूह (समाहार) का बोध कराते हैं।
रीति-रिवाज
Reeti-riwaaz (Reeti aur riwaaz aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर सामाजिक प्रथाओं और परंपराओं के समाहार को प्रकट करते हैं।
चमक-दमक
Chamak-damak (Chamak aur damak aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर सांसारिक शोभा, तड़क-भड़क और चकाचौंध के समाहार को व्यक्त करते हैं।
साज-बाज
Saaj-baaj (Saaj aur baaj aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर संगीत के सभी वाद्ययंत्रों व साजो-सामान के समूह को सूचित करते हैं।
नोक-झोंक
Nok-jhonk (Nok aur jhonk aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर मित्रों या परिजनों के मध्य होने वाली हल्की-फुल्की हंसी-मजाक भरी तकरार के समाहार को बताते हैं।
सीधा-सादा
Seedha-saada (Seedha aur saada aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर सरलता, निष्कपटता और सादगी के संपूर्ण समाहार को दर्शाते हैं।
कामकाज
Kaamkaaj (Kaam aur kaaj aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर व्यवसाय, आजीविका और दैनिक गतिविधियों के समग्र समाहार को व्यक्त करते हैं।
बोलचाल
Bolchaal (Bol aur chaal aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर बातचीत, संवाद और सामाजिक पारस्परिक संपर्कों के समाहार को बताते हैं।
देखरेख
Dekhrekh (Dekh aur rekh aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर किसी व्यवस्था की संपूर्ण निगरानी, सुरक्षा और सार-संभाल के समाहार को प्रकट करते हैं।
रोक-टोक
Rok-tok (Rok aur tok aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर पाबंदियों, अंकुश और रुकावटों के समुच्चय (समाहार) का बोध कराते हैं।
रोना-धोना
Rona-dhona (Rona aur dhona aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर शोक, विलाप और दुःख प्रदर्शन के समग्र समाहार को दर्शाते हैं।
मार-पीट
Maar-peet (Maar aur peet aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर शारीरिक हिंसा, हाथापाई और प्रहार के समाहार को व्यक्त करते हैं।
झाड़-फूंक
Jhad-phoonk (Jhad aur phoonk aadi)
व्याकरण तर्क: दोनों पद मिलकर अंधविश्वास आधारित टोटकों और तांत्रिक उपचारों के समाहार को प्रकट करते हैं।