व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दो" संख्यावाचक विशेषण है और समस्त पद दिन के दो पहरों के बीतने के समय (मध्याह्न) का बोध कराता है।
द्विगु समास
Dvigu Samas (Numeral Aggregative Compound)
Second element dominant with first element being a numeral adjective denoting aggregate
परिभाषा एवं स्वरूप (Definition & Concept)
जिस समास का पहला पद (पूर्व पद) संख्यावाचक विशेषण हो तथा समस्त पद किसी समूह (समाहार) का बोध कराता हो, उसे द्विगु समास कहते हैं।
A compound where the first element is a numeral adjective and the entire compound denotes a collection, group, or aggregate (samahar) of items.
द्विगु समास के प्रमुख उपभेद व नियम
1. समाहार द्विगु समास
विग्रह में "... का समूह" या "... का समाहार"Aggregate Dvigu
जब संख्यावाचक शब्द मिलकर किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान के निश्चित समूह का बोध कराते हैं।
पहचान की अचूक ट्रिक (Instant Shortcut Method)
पहला पद हमेशा कोई निश्चित संख्या (द्वि, त्रि, चतुर्/चौ, पंच, षट्, सप्त, अष्ट, नव, शत आदि) बताएगा और विग्रह के अंत में अनिवार्य रूप से "का समूह" या "का समाहार" आएगा।
The first word is unequivocally a numeral (dvi, tri, chatur/chau, pancha, sapta, ashta, nava, shat, etc.) and the expansion always concludes with "kaa samooh" or "kaa samahar" (a collection of).
सामान्य भ्रम एवं सावधानियाँ (Common Pitfalls & Exam Traps)
- द्विगु और बहुव्रीहि में भ्रम: संख्यावाचक पद होने पर भी यदि समस्त पद किसी तीसरे विशेष अर्थ (रूढ़ अर्थ) का बोध कराए, तो वह बहुव्रीहि होगा (जैसे- "दशानन" = दस आननों वाला अर्थात रावण; "त्रिनेत्र" = तीन नेत्र हैं जिसके अर्थात शिव)। सामान्य समूह होने पर ही द्विगु होता है (जैसे- चौराहा, दोपहर)।
- द्विगु और द्वंद्व में भ्रम: "इकतीस" (एक और तीस) द्वंद्व समास है, द्विगु नहीं; क्योंकि इसमें दो संख्याओं का योग है, समूह नहीं।
परीक्षा विशेष टिप्स (Board & Competitive Exam Notes)
प्रतियोगी परीक्षाओं में द्विगु बनाम बहुव्रीहि (जैसे चतुर्भुज, दशानन, त्रिनेत्र, पंचानन) का अंतर बार-बार परखा जाता है। सामान्य समूहवाची अर्थ में ही द्विगु मान्य होता है।
द्विगु समास के प्रमुख सामासिक पद व विग्रह (102)
दोराहा
Doraha (Do raahon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दो" संख्यावाचक है और समस्त पद दो अलग-अलग दिशाओं में फूटने वाले मार्गों के संगम का बोध कराता है।
दुपट्टा
Dupatta (Do paaton ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दु" (दो) संख्यावाचक है और उत्तर पद "पट्टा" (वस्त्र का पाट) है, जिससे दो पाटों के वस्त्र का बोध होता है।
दुनाली
Dunaali (Do naalon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दु" (दो) संख्यावाचक है और यह दो नालों के समाहार का बोध कराता है।
दुमंजिला
Dumanzila (Do manzilon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दु" संख्यावाचक विशेषण है जो दो मंजिलों के समूह/भवन का बोध कराता है।
द्विपद
Dvipad (Do padon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "द्वि" (दो) संख्यावाचक है तथा समस्त पद दो पदों के समूह का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" (तीन) संख्यावाचक है और उत्तर पद "फल" है; यह तीन औषधीय फलों (आंवला, हरड़, बहेड़ा) के समाहार का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" (तीन) संख्यावाचक विशेषण है और समस्त पद तीन रेखाखंडों/भुजाओं से घिरी आकृति का बोध कराता है।
त्रिलोक
Trilok (Teen lokon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक है तथा समस्त पद तीनों लोकों के समाहार का बोध कराता है।
त्रिकाल
Trikaal (Teen kaalon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक है और समस्त पद तीनों कालों के समूह का बोध कराता है।
त्रिवेणी
Triveni (Teen veniyon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक है और उत्तर पद "वेणी" (जलधारा) है; यह गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक है तथा समस्त पद तीन अमूल्य सिद्धांतों/रत्नों के समूह का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक विशेषण है और समस्त पद तीन कोणों के समाहार को व्यक्त करता है।
त्रिमूर्ति
Trimurti (Teen murtiyon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक है और उत्तर पद "मूर्ति" है; यह तीन देवस्वरूपों के सामूहिक समाहार का बोध कराता है।
तिराहा
Tiraha (Teen raahon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "ति" (तीन) संख्यावाचक है और समस्त पद तीन मार्गों के मिलन स्थल का बोध कराता है।
त्रिपिटक
Tripitak (Teen pitakon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक है और यह बौद्ध धर्म के तीन प्रमुख धर्मग्रंथों (सुत्त, विनय, अभिधम्म) के समाहार को व्यक्त करता है।
त्रिशूल
Trishool (Teen shoolon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक है तथा उत्तर पद "शूल" है; यह तीन नोक वाले अस्त्र के समाहार का बोध कराता है।
चौराहा
Chauraha (Chaar raahon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चौ" (चार) संख्यावाचक विशेषण है और समस्त पद चार रास्तों के एक समूह/समाहार का बोध कराता है।
चौमासा
Chaumaasa (Chaar maason ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चौ" (चार) संख्यावाचक है और यह वर्षा ऋतु के चार महीनों के समाहार का बोध कराता है।
चौपाई
Chaupai (Chaar padon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चौ" संख्यावाचक है तथा समस्त पद चार चरणों वाले मात्रिक छंद के समाहार का बोध कराता है।
चौपड़
Chaupad (Chaar padon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चौ" संख्यावाचक है और यह चार पट्टों वाले प्राचीन भारतीय पासे के खेल का बोध कराता है।
चौकोर
Chakor (Chaar koron ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चौ" संख्यावाचक विशेषण है और समस्त पद चार कोनों वाली आकृति का समाहार दर्शाता है।
चतुर्दिक
Chaturdik (Charon dishaon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चतुर्" (चार) संख्यावाचक है तथा उत्तर पद "दिक्" (दिशा) है; यह चारों दिशाओं के समाहार को व्यक्त करता है।
चतुर्युग
Chaturyug (Chaar yugon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चतुर्" संख्यावाचक है और यह कालचक्र के चार युगों के समाहार का बोध कराता है।
चतुर्वेद
Chaturved (Chaar vedon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चतुर्" संख्यावाचक है तथा समस्त पद भारत के चारों मूल वेदों के समाहार का बोध कराता है।
चतुष्कोण
Chatushkon (Chaar konon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चतुष्" (चार) संख्यावाचक विशेषण है और समस्त पद चार कोणों के समाहार को दर्शाता है।
पंचवटी
Panchavati (Paanch vaton ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" (पाँच) संख्यावाचक है और उत्तर पद "वट" (बरगद) है; यह पाँच वट-वृक्षों के समूह का बोध कराता है।
पंचतंत्र
Panchatantra (Paanch tantron ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक है तथा समस्त पद पंडित विष्णु शर्मा द्वारा रचित नीति-कथाओं के पाँच भागों का बोध कराता है।
पंचामृत
Panchamrit (Paanch amrit-roopi dravyon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक है और समस्त पद पूजा-अनुष्ठान में प्रयुक्त होने वाले पाँच पवित्र द्रव्यों के मिश्रण का बोध कराता है।
पंचतत्व
Panchatattva (Paanch tattvon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक है तथा समस्त पद सृष्टि के निर्माणकारी पाँच मूल महाभूतों के समाहार को व्यक्त करता है।
पंचपात्र
Panchapatra (Paanch paatron ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक विशेषण है तथा समस्त पद पूजा हेतु प्रयुक्त पाँच बर्तनों के समूह का बोध कराता है।
पंचरत्न
Pancharatna (Paanch ratnon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक है और समस्त पद पाँच बहुमूल्य रत्नों के समूह का बोध कराता है।
पंचप्रयाग
Panchprayog (Paanch prayagon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक है तथा समस्त पद उत्तराखंड में अलकनंदा नदी पर स्थित पाँच पवित्र संगमों का बोध कराता है।
पंचायत
Panchayat (Paanch panchon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक है और समस्त पद पाँच प्रतिष्ठित ग्राम-प्रमुखों की सामूहिक परिषद का बोध कराता है।
पंचगव्य
Panchgavya (Paanch gavyon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक है तथा समस्त पद गाय से प्राप्त पाँच पवित्र द्रव्यों के समाहार को व्यक्त करता है।
षड्रस
Shatras (Chhah rason ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "षट्" (छह) संख्यावाचक है और उत्तर पद "रस" है; यह भोजन के छह स्वादों के समाहार का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "षट्" (छह) संख्यावाचक विशेषण है और समस्त पद छह कोणों से युक्त ज्यामितीय आकृति का बोध कराता है।
षडंग
Shadanga (Chhah angon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "षट्" संख्यावाचक है और यह वेदों अथवा कला के छह सहायक अंगों के समाहार को व्यक्त करता है।
षड्दर्शन
Shaddarshan (Chhah darshanon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "षट्" संख्यावाचक है तथा समस्त पद भारतीय आस्तिक विचारधारा की छह दर्शन-प्रणालियों का बोध कराता है।
छमाही
Chhamahi (Chhah maahon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "छह" संख्यावाचक है और समस्त पद छह महीनों की समयावधि का बोध कराता है।
सप्तर्षि
Saptarshi (Saat rishiyon ka samooh)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सप्त" (सात) संख्यावाचक विशेषण है और समस्त पद सात आर्ष ऋषियों अथवा उत्तरी आकाश के तारामंडल का बोध कराता है।
सप्ताह
Saptah (Saat ahnon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सप्त" (सात) संख्यावाचक है और उत्तर पद "अहन्" (दिन) है; यह सात दिनों की समय-इकाई का बोध कराता है।
सतसई
Satsai (Saat sau dohon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सत" (सात) और उत्तर पद "सई" (सौ) है; यह सात सौ नीतिपरक व श्रृंगारिक दोहों के ग्रंथ का बोध कराता है।
सप्तपदी
Saptapadi (Saat padon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सप्त" संख्यावाचक है तथा समस्त पद हिंदू विवाह संस्कार में अग्नि की साक्षी में लिए जाने वाले सात वचनों/कदमों का बोध कराता है।
सप्तसिंधु
Saptasindhu (Saat sindhuon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सप्त" संख्यावाचक है और समस्त पद ऋग्वैदिक काल के सात पावन जलप्रवाहों के क्षेत्र का बोध कराता है।
सप्तस्वर
Saptaswar (Saat swaron ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सप्त" संख्यावाचक है और समस्त पद भारतीय शास्त्रीय संगीत के सात मूल सुरों के समूह को दर्शाता है।
अष्टाध्यायी
Ashtadhyayi (Aath adhyayon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अष्ट" (आठ) संख्यावाचक विशेषण है और उत्तर पद "अध्याय" है; यह महर्षि पाणिनि के आठ अध्यायों वाले संस्कृत व्याकरण ग्रंथ का बोध कराता है।
अष्टधातु
Ashtadhatu (Aath dhaatuon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अष्ट" संख्यावाचक है तथा समस्त पद आठ पवित्र धातुओं के मिश्रित समाहार का बोध कराता है।
अठन्नी
Athanni (Aath aanon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अठ" (आठ) संख्यावाचक है और उत्तर पद "आना" है; यह भारतीय मुद्रा प्रणाली के आठ आनों के सिक्के का समाहार है।
अष्टसिद्धि
Ashtasiddhi (Aath siddhiyon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अष्ट" संख्यावाचक है तथा समस्त पद योग द्वारा प्राप्त होने वाली आठ अलौकिक सिद्धियों का बोध कराता है।
अष्टछाप
Ashtachhap (Aath kavi-bhakton ka samooh)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अष्ट" संख्यावाचक है और यह भक्तिकालीन पुष्टिमार्गीय आठ कृष्णभक्त कवियों के समूह का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नव" (नौ) संख्यावाचक विशेषण है और समस्त पद नौ श्रेष्ठ रत्नों या दरबार के नौ विद्वानों के समूह का बोध कराता है।
नवरात्रि
Navaratri (Nau raatriyon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नव" (नौ) संख्यावाचक है और उत्तर पद "रात्रि" है; यह देवी दुर्गा की उपासना की नौ रात्रियों का समाहार है।
नवग्रह
Navagraha (Nau grahon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नव" संख्यावाचक विशेषण है तथा समस्त पद ज्योतिष शास्त्र के नौ खगोलीय ग्रहों के समूह का बोध कराता है।
नवरस
Navaras (Nau rason ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नव" संख्यावाचक है तथा समस्त पद भारतीय काव्यशास्त्र के नौ मूल रसों के समाहार का बोध कराता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दश" (दस) संख्यावाचक है तथा समस्त पद दस वर्षों की समयावधि के समाहार को व्यक्त करता है।
शताब्दी
Shatabdi (Sau varshon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "शत" (सौ) संख्यावाचक है और उत्तर पद "अब्द" (वर्ष) है; यह सौ वर्षों की कालावधि (शताब्दी) का समाहार है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "शत" (सौ) संख्यावाचक है तथा समस्त पद सौ की संख्या के समाहार/समूह को व्यक्त करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दु" (दो) संख्यावाचक है और संपूर्ण पद दो आनों के समूह का बोध कराता है।
चवन्नी
Chavanni (Chaar aano ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चव्" (चार) संख्यावाचक है तथा चार आनों के समाहार को सूचित करता है।
चौपाल
Chaupal (Chaar paalon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "चौ" (चार) संख्यावाची है और गांव के साझा बैठक स्थल (समूह) का बोध कराता है।
चौमुखा
Chaumukha (Chaar mukhon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चौ" (चार) संख्याबोधक है और चार मुखों के समूह को दर्शाता है।
चौखट
Chaukhat (Chaar kaathon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चौ" (चार) संख्यावाचक है तथा द्वार की चारों भुजाओं के समूह को व्यक्त करता है।
चौगुनी
Chaugunee (Chaar gune ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "चौ" संख्यावाचक विशेषण है और चार गुना मात्रा के समाहार को बताता है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "दु" (दो) संख्यावाचक है तथा दो गुने परिमाण के समाहार को प्रकट करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दु" संख्यावाची है और दिन के दो पहरों के बीतने पर बने समय-समूह को दर्शाता है।
द्विमासिक
Dwimasik (Do maason ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "द्वि" (दो) संख्यावाचक है और दो महीनों की अवधि के समाहार को सूचित करता है।
द्विवार्षिक
Dwi-varshik (Do varshon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "द्वि" संख्यावाचक है और दो वर्षों के समूह/अवधि को दर्शाता है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "द्वि" संख्याबोधक है और दो राजनीतिक दलों की व्यवस्था के समाहार को बताता है।
तिमंजिला
Timanjila (Teen manjilon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "ति" (तीन) संख्यावाचक है और तीन मंजिलों के समूह का बोध कराता है।
तिपहिया
Tipahiya (Teen pahiyon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "ति" (तीन) संख्यावाचक विशेषण है और तीन पहियों के समूह को व्यक्त करता है।
तिमाही
Timahi (Teen maahon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "ति" संख्यावाचक है और तीन महीनों की कालावधि के समाहार को दर्शाता है।
त्रयोदशी
Trayodashi (Terahvin tithi ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रयोदश्" (तेरह) संख्यावाचक है जो पंचांग के तेरहवें दिन के समाहार को प्रकट करता है।
त्रिगुण
Triguna (Teen gunon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "त्रि" (तीन) संख्यावाचक है और सत्व-रज-तम रूपी तीन गुणों के समाहार को व्यक्त करता है।
त्रिदोष
Tridosha (Teen doshon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक है और आयुर्वेद के तीन शारीरिक दोषों के समाहार को दर्शाता है।
व्याकरण तर्क: पहला पद "त्रि" संख्यावाचक है और तीन मासों की संयुक्त अवधि का बोध कराता है।
त्रिभुवन
Tribhuvana (Teen bhuvano ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक विशेषण है और तीनों लोकों (स्वर्ग, मर्त्य, पाताल) के समाहार को सूचित करता है।
त्रिसंध्या
Trisandhya (Teen sandhyaon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "त्रि" संख्यावाचक है और दिन के तीन पूजा वेलाओं के समूह को व्यक्त करता है।
त्रिसूत्री
Trisootri (Teen sootron ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "त्रि" संख्यावाची है और तीन प्रमुख सिद्धांतों/सूत्रों के समाहार को प्रकट करता है।
चतुर्मास
Chaturmasa (Chaar maason ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चतुर्" (चार) संख्यावाचक है और चार पवित्र महीनों के समूह को व्यक्त करता है।
चतुर्भुज (ज्यामिति)
Chaturbhuja (Chaar bhujaon ka samahar)
व्याकरण तर्क: ज्यामिति के संदर्भ में पूर्व पद "चतुर्" (चार) संख्याबोधक होकर चार भुजाओं के समूह को दर्शाता है।
चतुर्वर्ण
Chaturvarna (Chaar varnon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चतुर्" संख्यावाचक है और प्राचीन सामाजिक व्यवस्था के चार वर्णों के समाहार को प्रकट करता है।
चतुष्पद
Chatushpada (Chaar padon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "चतुस्" (चार) संख्यावाची है और चार पैरों वाले प्राणियों के समूह को सूचित करता है।
चौहददी
Chauhaddee (Chaar hadon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "चौ" (चार) संख्याबोधक है और किसी भूखंड की चारों दिशाओं की सीमाओं के समूह को व्यक्त करता है।
चौमुहानी
Chaumuhanee (Chaar muhaanon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "चौ" संख्यावाचक है और जहां चार सड़कें या रास्ते मिलते हैं उस संगम समूह को दर्शाता है।
पंचशती
Panchashatee (Paanch sau ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "पंच" संख्यावाचक है और "शती" (सौ) के साथ मिलकर पाँच सौ के समाहार को प्रकट करता है।
पंचकन्या
Panchakanya (Paanch kanyaan ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक है और भारतीय पौराणिक आख्यानों की पाँच आदर्श नारियों के समूह को व्यक्त करता है।
पंचकोशी
Panchakoshee (Paanch koshon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक है और पाँच कोस लंबे धार्मिक परिक्रमा मार्ग के समाहार को दर्शाता है।
पंचपल्लव
Panchapallava (Paanch pallavon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "पंच" संख्यावाचक है और कलश स्थापना में प्रयुक्त पांच वृक्षों के पत्तों के समूह को सूचित करता है।
पंचप्राण
Panchaprana (Paanch praanon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "पंच" संख्यावाचक विशेषण है और शरीर में प्रवाहित पांच प्राण-वायुओं के समाहार को प्रकट करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "षट्" (छह) संख्यावाचक है और वर्ष भर की छह ऋतुओं के चक्र समूह को व्यक्त करता है।
षोडशी
Shodashi (Solah ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "षोडश्" (सोलह) संख्यावाचक है जो सोलह वर्ष की अवस्था या सोलह कलाओं के समाहार को दर्शाता है।
सप्ताहांत
Saptahaant (Saptah ke ant ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सप्ताह" (सात दिनों का समाहार) संख्यावाचक आधार पर बना द्विगु पद है।
सप्तद्वीप
Saptadweep (Saat dweepon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सप्त" (सात) संख्यावाचक है और पृथ्वी के पौराणिक सात द्वीपों के समाहार को व्यक्त करता है।
सप्तशती
Saptashatee (Saat sau ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "सप्त" और "शती" मिलकर सात सौ छंदों/श्लोकों के समाहार (जैसे दुर्गा सप्तशती) को प्रकट करते हैं।
अष्टांग
Ashtanga (Aath angon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "अष्ट" (आठ) संख्यावाचक है और योग के आठ अंगों के समाहार को व्यक्त करता है।
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "अष्ट" संख्यावाचक है और आठ कोणों वाली ज्यामितीय आकृति के समाहार को सूचित करता है।
अष्टदल
Ashtadala (Aath dalon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "अष्ट" संख्यावाचक है और आठ पंखुड़ियों वाले कमल दल के समाहार को दर्शाता है।
नवदुर्गा
Navadurga (Nau Durga roopon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "नव" (नौ) संख्यावाचक है और देवी दुर्गा के नौ पूज्य स्वरूपों के समाहार को प्रकट करता है।
नवपल्लव
Navapallava (Nau pallavon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "नव" संख्यावाचक है और पौधों पर फूटे नौ नूतन कोमल पत्तों के समाहार को बताता है।
दशाब्दी
Dashabdee (Das abdon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पूर्व पद "दश" (दस) संख्यावाचक है और दस वर्षों की कालावधि के समाहार (दशक) को प्रकट करता है।
सहस्राब्दी
Sahasrabdee (Sahasra abdon ka samahar)
व्याकरण तर्क: पहला पद "सहस्र" संख्यावाचक है और एक हजार वर्षों के विशाल समूह को सूचित करता है।